नई दिल्ली। CJP नेताओं को जेल पहुंचाने वाले मजिस्ट्रेट को धमकी का मामला तूल पकड़ रहा है। अब खबर है कि इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। SEM यानी विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने आशुतोष रांका और सौरभ दास से जुड़े जमानत मामले में धमकी मिलने के आरोप लगाए थे।
उन्होंने अब प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जा चुके जंतर मंतर पर नारेबाजी और झंडा फहराने के बाद दोनों नेताओं को 5 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज कर ली है।
इससे पहले पुलिस ने NCR यानी गैर संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की थी। आमतौर पर गैर संज्ञेय अपराधों के मामलों में एनसीआर दर्ज की जाती है। ऐसे अपराधों में कानून के तहत पुलिस आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकती और न ही मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच कर सकती है।
CJP में कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने रविवार को कहा, ‘SEM ने बताया कि किसी ने उन्हें धमकी भरा संदेश भेजा है… हमारे वकीलों ने कहा कि अगर किसी ने आपको धमकी दी है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कीजिए। आदेश में उसका नंबर दर्ज कीजिए और हमें उसका नाम बताइए।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे वकीलों ने उनकी दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आपको धमकी भरा संदेश भेजने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आप इस मामले की सुनवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?’
सिंह ने आरोप लगाए थे कि सुनवाई दोपहर 12 बजे होनी थी, लेकिन इसमें काफी देर हुई। उन्होंने आरोप लगाए थे कि एसईएम और सरकारी अभियोजक शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं की रिहाई पर विचार करने के बजाय कार्यवाही को मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ दिया गया।
सिंह ने कहा, ‘लगातार चार दिन तक पेश नहीं होने वाले सरकारी अभियोजक अचानक आज पहुंचे और उन्होंने कार्यवाही को कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ने की कोशिश की।’ सिंह ने कहा, ‘उन्हें रिहा नहीं करने की जो साजिश रची गई थी, वह आज पूरी तरह साफ दिखाई दी।
हम सभी ने इसे देखा। आज मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई। मामले पर कोई बहस नहीं हुई।’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह अवैध गिरफ्तारी है। यह राज्य की साजिश है। दिल्ली पुलिस की साजिश है कि वे सौरभ और आशुतोष को जेल में रखना चाहते हैं।’
पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने लिखा, ‘प्रशासन आशु और सौरभ की अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींचने और उनकी रिहाई रोकने के लिए अदालत की कार्यवाही में देरी करने की हर तरह की अनुचित कोशिश कर रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें जेल में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, इसलिए उन्हें हिरासत में बनाए रखने के लिए देरी करने के तरीके अपनाए जा रहे हैं।’
बॉन्ड किया था साइन
10 अक्टूबर को सीजेपी ने प्रदर्शन बुलाया था, जिसकी शुरुआत में दीपके, रांका और दास को हिरासत में ले लिया गया था। बाद में 11 अक्टूबर को सिंह ने बताया था कि उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक ‘शांति भंग’ नहीं करेंगे। पुलिस ने कहा था, ‘एक साल की अवधि के लिए शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50,000 रुपये का बॉन्ड भरवाया गया, जिसके बाद एसईएम अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया।’
5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे सीजेपी नेता
पीटीआई भाषा के अनुसार, पुलिस ने बताया कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने निवारक पुलिस रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार कानून का उल्लंघन किए जाने और जमानत पर रिहा होने पर फिर से कानून तोड़ने तथा अन्य लोगों को उकसाने की गंभीर आशंका को ध्यान में रखते हुए दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में 14 अक्टूबर को भेज दिया गया था।

