30 साल कोर्ट में चक्कर काटे, अतिक्रमियों से फिर भी नहीं छुड़ा पाए पुश्तैनी कृषि भूमि

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एसडीएम कोर्ट ने अतिक्रमियों को ही मालिक बना दिया, 30 साल से चल रहा था केस

कोटा। उम्र के 71वें पड़ाव पर पहुंचे गोविंद लाल आज भी अपनी पैतृक जमीन के अधिकार के लिए प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं। कनवास तहसील के ग्राम कनवास में करीब 11 बीघा कृषि भूमि को लेकर चल रहा विवाद उनके लिए वर्षों से परेशानी का कारण बना हुआ है।

उन्होंने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनकी पैतृक भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है तथा लंबे समय से विवाद के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल पाई है।

प्रार्थना-पत्र के अनुसार, विवादित भूमि का पुराना खसरा नंबर 1420/2338 तथा वर्तमान खसरा नंबर 1112, 1122 और 1123 बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में उनके परिवार के नाम दर्ज रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि पर अपने अधिकार के लिए प्रयास करने पर उन्हें कथित रूप से गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा।

शिकायत में वर्ष 1994 में खेत में बोई गई फसल को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में कनवास थाने में 19 सितंबर 1994 को एफआईआर संख्या 157 दर्ज कराने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, भूमि की पैमाइश और सीमांकन कराने के प्रयासों के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका।

प्रार्थना-पत्र में वर्ष 2005 और 2014 से संबंधित राजस्व वादों का उल्लेख करते हुए 28 जुलाई 2026 को पारित आदेश पर भी आपत्ति जताई गई है। शिकायतकर्ता ने मामले में निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित जमाबंदी, नक्शों और राजस्व अभिलेखों का सत्यापन कराने तथा जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड में किसी भी अनियमित बदलाव को रोकने की मांग की है।

गोविंद लाल ने प्रशासन से भूमि पर कथित अवैध कब्जे की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने, लंबे समय से हुए नुकसान के संबंध में उचित राहत दिलाने और स्वयं व परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।