नई दिल्ली। Crude Oil Tension: कच्चे तेल की कीमतों में उबाल बरकरार है। क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर सप्लाई पर देखने को मिल रहा। हॉर्मुज और गल्फ में जहाजों पर हो रहे लगातार हमलों से सप्लाई की टेंशन बढ़ गई है। नतीजनत, कच्चे तेल की कीमतें महंगी बनी हुई है। फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है।
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में सुबह 1-1 फीसदी से ज्यादा की मजबूत दर्ज की जा रही है। ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 1.3 फीसदी की बढ़त के साथ 101.50 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा। अमेरिकी क्रूड यानी WTI क्रूड फीसदी करीब 1.3 फीसदी की तेजी के साथ 89.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई को लेकर दिक्कतें बढ़ा दी हैं। बीते हफ्ते हॉर्मुज से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमले यूएस-ईरान युद्द के बाद किसी एक हफ्ते में सबसे ज्यादा हमले हुए। यह ऐसे समय में हुआ है जब गल्फ देशों ने एक्सपोर्ट बढ़ाया है।
यूएस और इजरायल के साथ ईरान का युद्द 8वें महीने में पहुंच चुका है। लगातार तनाव के चलते टैंकरों पर हमले तेज हो रहे। जबकि युद्ध से पहले इस रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और ईंधन की ढुलाई होती थी।
रॉयटर्स के मुताबिक ब्रिटेन की समुद्री व्यापार निगरानी एजेंसी ने बुधवार को बताया कि कतर के उत्तर में एक टैंकर पर कई प्रोजेक्टाइल लगे। इस हमले में लोग हताहत भी हुए।
बीते सेशन में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली थी। क्योंकि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने मार्च में शुरू की गई योजना के तहत आपात भंडार से तेल जारी करने की रफ्तार बढ़ाने और डीजल की सप्लाई को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई थी। दरअसल, सरकारें ईरान युद्ध से पैदा हुई सप्लाई दिक्कतों और फ्यूल की रिकॉर्ड कीमतों से राहत देने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि, एएनजेड बैंक के सीनियर कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट डेनियल हाइन्स के मुताबिक, जारी होने वाला तेल संभवतः पहले घोषित 40 करोड़ बैरल की योजना का ही हिस्सा होगा। इसलिए इसे आपात भंडार से अतिरिक्त तेल निकालने का फैसला नहीं माना जा सकता।
हाइन्स ने कहा कि ऐसे हमलों से पहले खाड़ी से तेल की ढुलाई घटती रही है। लेकिन इस बार उत्पादक देश जहाजों को नुकसान होने का जोखिम उठाने के लिए तैयार दिख रहे हैं, क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने का दूसरा रास्ता नहीं है। उनके मुताबिक, आपात भंडार से तेल जारी करने से कुछ समय के लिए आपूर्ति बढ़ सकती है, लेकिन नई उत्पादन क्षमता नहीं बनती।

