कोटा। राज्य सरकार द्वारा चाय पत्ती पर लगाए गए 0.50 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क को लेकर मंगलवार को व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी के नेतृत्व में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इस शुल्क को तुरंत हटाने की मांग की।
चाय व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन हिसारिया एवं महामंत्री महेंद्र कांकरिया ने लोकसभा अध्यक्ष को बताया कि राज्य सरकार द्वारा चाय पत्ती पर 0.50 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लगाया गया है। इसके तहत कृषि उपज मंडी समिति द्वारा व्यापारियों को लाखों रुपये की डिमांड के नोटिस भेजे जा रहे हैं तथा शुल्क की वसूली का तकाजा किया जा रहा है।
पवन हिसारिया ने बताया कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां चाय पत्ती पर इस प्रकार का स्थानीय शुल्क लगाया गया है। यहां तक कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों तथा राजस्थान के पड़ोसी राज्यों में भी चाय पर इस प्रकार का कोई स्थानीय शुल्क नहीं है।
चाय की पत्ती बागानों से सीधे कारखानों में जाती है, जहां उसका प्रसंस्करण कर तैयार चाय बनाई जाती है। चाय पर पहले से ही 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है। ऐसे में पहले से जीएसटी के दायरे में आने वाली वस्तु पर राज्य स्तर पर अतिरिक्त उपकर लगाना उचित नहीं है।
कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि इस प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगाने से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। चाय व्यापारियों का कृषि उपज मंडी से कोई लेना-देना नहीं है, इसके बावजूद मंडी विभाग की अनावश्यक दखलंदाजी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण शुल्क का उद्देश्य कृषि उपजों के माध्यम से प्राप्त राशि से स्थानीय किसानों के विकास एवं कल्याण के कार्य करना है, लेकिन राजस्थान में चाय की पैदावार ही नहीं होती। ऐसे में चाय पर इस प्रकार का शुल्क लगाया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि चाय का कारोबार एवं क्रय-विक्रय कृषि उपज मंडी परिसर में भी नहीं होता है। राजस्थान में चाय का उत्पादन नहीं होने के बावजूद चाय व्यापारियों पर कृषक कल्याण शुल्क लगाया जाना व्यापार की दृष्टि से भी अनुचित है। राज्य सरकार को इस शुल्क को तत्काल प्रभाव से हटाकर व्यापारियों एवं आमजन को राहत प्रदान करनी चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि व्यापारियों के पक्ष को राज्य सरकार के समक्ष सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों पर किसी भी प्रकार का ऐसा अनावश्यक कर नहीं लगाया जाना चाहिए, जिसकी आवश्यकता न हो।
हाड़ोती के पर्यटन विकास के लिए कोटा में ट्रेवल मार्ट जरूरी
होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी, मुख्य सलाहकार अनिल मूंदड़ा एवं सचिव कौशल बंसल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर हाड़ोती में पर्यटन विकास को गति देने के लिए कोटा में ट्रैवल मार्ट को जरूरी बताया।
अशोक माहेश्वरी ने कहा कि जनवरी 2026 में आयोजित कोटा हाड़ौती ट्रेवल मार्ट के बाद लगातार हाड़ौती क्षेत्र में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इस गतिशीलता को निरंतर बनाए रखने के लिए जनवरी 2027 में कोटा हाड़ौती ट्रेवल मार्ट का आयोजन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इस बार ट्रेवल मार्ट में अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों, दक्षिण भारत के डोमेस्टिक टूर ऑपरेटरों के साथ-साथ डेस्टिनेशन वेडिंग प्लानर्स को भी आमंत्रित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।इससे हाड़ौती में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी तथा कोटा को देश-विदेश के पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने में मदद मिलेगी।
चंबल सफारी की ऑनलाइन बुकिंग की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुकुंदरा में दो मादा बाघों की जोड़ी लाने तथा चंबल सफारी के शुल्क में संशोधन करने और दोनों पर्यटन स्थलों की बुकिंग ऑनलाइन किए जाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा पिछले माह जिस तरह कोटा में पर्यटकों के आवागमन में बढ़ोतरी हुई है, उसमें और अधिक गति आएगी।

