आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से, रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) 5 से 7 अक्टूबर को बैठक में नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का निर्णय कर सकती है। इसके साथ ही ब्याज दरों में वृद्धि का नया दौर शुरू हो सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 9 प्रतिभागियों ने रीपो दर बढ़ने का अनुमान जताया है। आरबीआई 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति के फैसले की घोषणा करेगा।

फरवरी 2023 के बाद रीपो दर में यह पहली वृद्धि हो सकती है। उस समय रीपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 6.5 फीसदी किया गया था। बार्कलेज में अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी और अमृता घारे ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हमें लगता कि एमपीसी 7 अक्टूबर को रीपो दर बढ़ा सकती है। वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि से घरेलू महंगाई बढ़ने का जोखिम है जबकि आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है।’

आरबीआई ने 2025 में कुल 125 आधार अंक की कटौती करने के बाद पिछली चार मौद्रिक नीति समीक्षाओं में रीपो दर को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत घरेलू और बाहरी, दोनों कारकों से पैदा हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 5.2 फीसदी रहने की उम्मीद है जो आरबीआई के अनुमान से थोड़ा अधिक है।’

उन्होंने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद से अधिक समय तक ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे महंगाई का दबाव व्यापक होने का जोखिम बढ़ गया है।’ खुदरा महंगाई जुलाई में 4.45 फीसदी थी जो अगस्त में बढ़कर 4.8 फीसदी हो गई। पिछले कुछ सप्ताह से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 8 से 9 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इससे महंगाई का दबाव और व्यापक हो सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस सर्वेक्षण में शामिल एकमात्र प्रतिभागी थे, जिन्होंने बताया कि एमपीसी ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखेगी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना था कि त्योहारों के मौसम से ठीक पहले दर बढ़ाने से जमा दरों तक मौद्रिक नीति का असर पहुंचाने में खास मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि आरबीआई दर बढ़ाने से पहले एक और मौद्रिक नीति समीक्षा तक इंतजार कर सकता है।

सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों को यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान मौजूदा 6.7 फीसदी से बढ़ा सकता है। इसकी वजह अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 7.8 फीसदी वृद्धि है, जो आरबीआई के अनुमान से 80 आधार अंक अधिक है। सेनगुप्ता ने कहा, ‘उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक बताते हैं कि दूसरी तिमाही में भी वृद्धि मजबूत बनी हुई है।’

बाजार की नजर आरबीआई की लिक्विडिटी या तरलता प्रबंधन रणनीति पर भी रहेगी। बैंकिंग प्रणाली में 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त लिक्विडिटी है। इस अतिरिक्त लिक्विडिटी के कारण वेटेड एवरेज कॉल रेट नीतिगत दायरे की निचली सीमा के आसपास बनी हुई है। सितंबर में खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत बॉन्ड की बिक्री के बाद वेटेड एवरेज कॉल रेट कुछ समय के लिए रीपो दर के अनुरूप हो गई थी।

बार्कलेज की रिपोर्ट में कहा गया, ‘बैंकिंग प्रणाली में शुद्ध मांग एवं मियादी देनदारियों के लगभग 1.8 फीसदी के बराबर अतिरिक्त लिक्विडिटी है और 28 सितंबर तक वेटेड एवरेज कॉल रेट 5.1 फीसदी थी जो रीपो दर से नीचे है। हमें उम्मीद है कि आरबीआई लिक्विडिटी सोखने के उपाय जारी रखेगा।

इसके लिए वह ओवरनाइट वीआरआरआर, टर्म वीआरआरआर, ओएमओ के तहत बॉन्ड बिक्री और स्वैप जैसे उपाय अपना सकता है।’ सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों को लगता है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई के अनुमान को मौजूदा 5 फीसदी से 10 से 20 आधार अंक बढ़ा सकता है।