कोटा। अनुसुइया गोस्वामी किसकी महापौर कोटा नगर निगम की या बिरला की, कौन चलाएगा निगम? अब यह सवाल भी शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।कोटा नगर निगम में अनुसुईया गोस्वामी भले ही महापौर बन गई हो, लेकिन महापौर की पावर बिरला परिवार के पास ही रहेगी।
यह बात उस समय साबित हो गई जब चुनाव जीतें के बाद वह सीधे ओम बिरला के आवास ‘बैकुंठ’ के बाहर ढोक लगाने पहुंच गई। इसका वीडियो वायरल होने के बाद उठे सियासी विवाद के बीच मेयर ने देर रात अपना पक्ष सोशल मीडिया के जरिए लोगों के सामने रखा।
अगर मान भी लें कि अनुसुइया ने महापौर बनने के बाद बैकुंठ धाम यानि ओम बिरला की आवास पर जो भगवान हैं उनको ढोक लगाई है, तो भाई भगवान को ही ढोकना था तो किसी मंदिर में ढोक लगा लेती।
वहां बिरला की दहलीज पर ढोक लगाना तो साफ नजर आता है कि अनुसुइया ने किसको ढोक लगाई। इसके लिए सफाई देने से सच तो नहीं बदल जायेगा। इतना ही नहीं भले ही वह महापौर बन गई हो, लेकिन महापौर की पावर तो बिरला परिवार के हाथों में ही रहेगी। वह कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पायेगी।
अनुसुईया गोस्वामी ने अपनी सफाई में ‘बैकुंठ’ आवास के ऊपरी हिस्से में स्थापित भगवान शिव-पार्वती और प्रभु श्रीराम की प्रतिमाओं की तस्वीरें साझा कीं। उनके पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्होंने आवास पर किसी राजनीतिक व्यक्ति या सत्ता के केंद्र को प्रणाम नहीं किया, बल्कि वहां स्थापित देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया था।
मेयर ने साझा की तस्वीरें
मेयर की ओर से तस्वीरें साझा किए जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। भाजपा समर्थकों का कहना है कि धार्मिक स्थल या घर में स्थापित देवी-देवताओं के सामने माथा टेकना सामान्य आस्था की परंपरा है। उनके मुताबिक, वायरल वीडियो को केवल राजनीतिक नजरिए से देखना पूरे घटनाक्रम का एक पक्ष ही सामने रखना है।
डोटासरा की पोस्ट के बाद गरमाई सियासत
दरअसल, विवाद की शुरुआत उस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई, जिसमें मेयर अनुसुईया गोस्वामी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के शक्ति नगर स्थित ‘बैकुंठ’ आवास की चौखट पर माथा टेकती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। डोटासरा ने सवाल उठाया- ‘मेयर जनता की हैं या सत्ता की चौखट की?’ उनकी पोस्ट के बाद कोटा की स्थानीय राजनीति में इस वीडियो को लेकर बहस तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे जनप्रतिनिधि और सत्ता के संबंधों से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि भाजपा समर्थकों ने इसे धार्मिक आस्था का विषय बताया।
मेयर चुनाव के बाद पहला बड़ा सियासी विवाद
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बना है। 25 सितंबर को हुए मेयर चुनाव में अनुसुईया गोस्वामी को 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। चुनाव के दौरान कांग्रेस के कुछ पार्षदों की क्रॉस वोटिंग की चर्चा भी सियासी गलियारों में रही।
अब मेयर के ‘ढोक’ (माथा टेकना) वाले वीडियो ने चुनावी राजनीति के बाद कोटा में एक नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस इसे सत्ता और जनादेश के सवाल से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे धार्मिक आस्था का विषय बता रही है। मेयर की सफाई और देवी-देवताओं की तस्वीरें सामने आने के बावजूद इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस जारी है।

