नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कर बकाया की वसूली के लिए निर्धारित प्रक्रिया से गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधानों को हटा दिया है। साथ ही नए आयकर अधिनियम, 2025 में वैल्युअर्स और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर्स को अपना पंजीकरण पूरा करने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है।
सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी एक अधिसूचना में आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है, जो कर बकाया की वसूली से संबंधित है। इस संशोधन में गिरफ्तारी की शक्ति का उल्लेख करने वाले प्रावधान को हटा दिया गया है और दूसरे प्रावधान से ‘गिरफ्तारी और हिरासत को छोड़कर’ शब्दों को हटा दिया गया है। इसमें नियम 225 के कई अन्य उप-नियमों को भी हटा दिया गया है। नियम 2 से 4, जिसमें नियम 225 भी शामिल है, में संशोधन 1 अप्रैल, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किए गए हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर ऋचा साहनी ने कहा, ‘कर वसूली नियमों से गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधानों को हटाना एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है। व्यावहारिक रूप से इन नियमों के तहत व्यक्तिगत गिरफ्तारी निर्धारित वसूली प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होगी, जबकि संपत्तियों की कुर्की और बिक्री और अन्य वसूली तंत्र के माध्यम से कर वसूली जारी रहेगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह संशोधन वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा पेश किए गए बदलावों के मुताबित है। इससे संपत्ति पर आधारित वसूली के तरीकों में बदलाव का पता चलता है।’
इसके अलावा सीबीडीटी ने वैल्युअर्स और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर्स के पंजीकरण के लिए नियम 246 और 256 के तहत समय सीमा को 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। 30 सितंबर, 2026 की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च, 2027 कर दिया गया है।
अधिसूचना में आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 514 के तहत एक वैल्युअर के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन पत्र में बदलाव किया गया है। संशोधित फॉर्म में आवेदकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जिस संपत्ति वर्ग के लिए पंजीकरण मांगा जा रहा है, शैक्षणिक योग्यता, पूर्व रोजगार और पेशेवर अनुभव का विवरण देना आवश्यक है। वैल्युअर्स को पिछले तीन वर्षों के दौरान मूल्यांकित संपत्तियों या किए गए कार्यों का विवरण भी देना होगा।
इस फॉर्म में संपत्ति के 11 वर्ग हैं, जिसमें अचल संपत्ति, कृषि भूमि, बागान, वन, खदानें और क्वेरी, सिक्योरिटीज, मशीनरी और संयंत्र, आभूषण और कलाकृतियां शामिल हैं। प्रत्येक संपत्ति वर्ग के लिए एक अलग आवेदन आवश्यक है। आवेदन के लिए 10,000 रुपये का शुल्क है, हालांकि धन-कर अधिनियम, 1957 के तहत पहले से पंजीकृत वैल्युअर्स को शुल्क से छूट दी गई है।
सीबीडीटी ने एक अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन पत्र का फॉर्म 171 भी बदला है। संशोधित फॉर्म में शैक्षणिक योग्यता और आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मौजूदा पंजीकरण जैसे विवरण मांगे गए हैं। आवेदकों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे कम से कम एक वर्ष से आयकर अधिकारियों के समक्ष प्रैक्टिश कर रहे हैं।
अधिसूचना में नियम 176 में भी संशोधन किया गया है ताकि कुछ संचारों को ‘डिजिटल हस्ताक्षर के साथ’ तामील करने की आवश्यकता को ‘इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से’ तामील करने की आवश्यकता से बदला जा सके। ये बदलाव आयकर (चौथा संशोधन) नियम, 2026 के हिस्से के रूप में अधिसूचित किए गए हैं।

