कर्तव्य के अनुरूप आचरण ही धर्म का वास्तविक स्वरूप: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने सोमवार को अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा कि मनुष्य जिस भी अवस्था या दायित्व में हो, उसे उसी के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गृहस्थ, भाई, पुत्र अथवा मुनि बनने के साथ जीवन की क्रियाएं और जिम्मेदारियां बदलती हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने वर्तमान पद और धर्म के अनुरूप आचरण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए केवल बाहरी आडंबर पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि भावों की पवित्रता और अहिंसा का पालन सबसे महत्वपूर्ण है। व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे किसी भी जीव को कष्ट या हानि पहुंचे।

मुनिश्री ने पूजन-पद्धति में विवेक अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि धार्मिक मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वेदी पर केवल निर्धारित धार्मिक क्रियाएं ही करनी चाहिए तथा शास्त्रोक्त मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। अन्यथा अनजाने में भी जीवों की बाधा का कारण बनकर कर्मों का बंध हो सकता है।

मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व महामंत्री पंकज खटोड कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़लातथा चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल के सदस्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।