अश्लील कंटेंट पर नकेल, सरकार ने 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स किए ब्लॉक

0
8

नई दिल्ली। 50 OTT Platform Block: सरकार ने पिछले दो सालों में अश्लील कंटेंट दिखाने वाले 50 OTT प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया है ताकि यूजर्स उन प्लेटफॉर्म को एक्सेस ना कर पाएं। इन प्लेटफॉर्म पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट और देश के अन्य कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप था।

सरकार ऑनलाइन सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठा रही है। लोकसभा में अपने जबाव में इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीतियों का मकसद बच्चों सहित सभी यूजर्स के लिए एक खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट देना है।

मंत्रालय ने बताया कि नए IT नियमों (2021) के मुताबिक, अगर कोर्ट या सरकार किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने का आदेश देती है, तो सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स को उस कंटेंट को 3 घंटे के अंदर हटाना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी किए गए एक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत की गई। मंत्रालय का कहना है कि सरकार के डिजिटल नियमों का मकसद एक ऐसा इंटरनेट बनाना है जो सुरक्षित, ट्रांसपेरेंट और भरोसेमंद हो। जहां बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया है।यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

MeitY ने एक बयान में कहा कि सरकार ने पिछले दो सालों में IT एक्ट की धारा 67 और 67A, BNS की धारा 294 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत अश्लील कंटेंट से जुड़े उल्लंघनों के कारण 50 OTT प्लेटफॉर्म को पब्लिक एक्सेस के लिए ब्लॉक कर दिया है। (REF.)

डिजिटल लत से निपटने की दिशा में जरूरी कदम
इसमें ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023’ पर भी जोर दिया गया, जो बच्चों के पर्सनल डेटा को प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की मंजूरी को जरूरी बनाता है और बच्चों की ट्रैकिंग, उनके व्यवहार की निगरानी और उन्हें टारगेट करके विज्ञापन दिखाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाता है। सरकार ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और उसे रेगुलेट करने वाला एक्ट, 2025 युवाओं में डिजिटल लत और आर्थिक नुकसान की समस्या से निपटने की दिशा में एक और कदम है।