शिक्षा संबल में एलन कोटा में निशुल्क पढ़ाई के साथ मिली थी भोजन व आवास की सुविधा
कोटा। शिक्षा का उजियारा नए भारत को रोशन कर रहा है। अब सिर्फ डाॅक्टर का बेटा ही डाॅक्टर नहीं बन रहा, गांव-कस्बों के अभावग्रस्त परिवार की प्रतिभाएं भी आगे आ रही हैं। एक ही एक शिक्षा से संबल तक की कहानी सामने आई है, कोटा के निकट बूंदी जिले के कापरेन कस्बे से। यहां के निवासी सूरज ने नीट क्रेक की है और अब गवर्नमेंट मेडिकल काॅलेज में एडमिशन लेने जा रहा है। सूरज ने नीट में 583 अंक प्राप्त किए हैं, ओबीसी कैटेगरी रैंक 7800 तथा जनरल रैंक 16569 और स्कोर 99.1593559 पर्सेन्टाइल रहा है।
बड़ी बात यह कि अभावग्रस्त परिवार का सूरज सुमन घर चलाने में मां का साथ देने के लिए गांव-कस्बों में दूसरे घरों की पुताई करता है। सूरज को एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट और एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के संयुक्त तत्वावधान में संचालित शिक्षा संबल कार्यक्रम के तहत एलन में नीट की निशुल्क तैयारी के साथ निशुल्क भोजन व आवास की सुविधा दी गई।
इस संबंध में सूरज का कहना है कि शिक्षा संबल से मेरे जीवन को वास्तविक संबल मिला है। ये कार्यक्रम नहीं होता तो शायद मैं इतने अच्छी सुविधाओं के साथ एलन कोटा में नीट की तैयारी करने की नहीं सोच सकता था। यह मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा जहां मेरा सपना पूरा होने जा रहा है। मुझे सालभर से भी बेहतर सुविधाएं यहां मिली और हर जरूरत का ध्यान रखा गया। आर्थिक हालात विकट होने के कारण बहन की पढ़ाई छूटी, अब फिर से उसकी पढ़ाई शुरू करवाऊंगा।
सूरज की कामयाबी पर एलन के निदेशक व एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी नवीन माहेश्वरी ने कहा कि बच्चों का कॅरियर निर्माण ही हमारा मूल ध्येय है। इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हिन्दी माध्यम के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी सुविधाओं के अभाव में पिछड़ जाते हैं, उनके लिए यह कार्यक्रम तीन वर्ष पहले शुरू किया था। अच्छा लग रहा है कि सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
गरीबी, अभाव और संघर्ष के बीच पले-बढ़े सूरज सैनी की सफलता पूरे परिवार के त्याग, संघर्ष और उम्मीदों की जीत है। जिस उम्र में विद्यार्थी सिर्फ किताबों के बीच अपना भविष्य संवारते हैं, उस उम्र में सूरज ने किताबों के साथ-साथ हाथों में पुताई का ब्रश थामा। छुट्टियों और खाली समय में वह पुताई का काम कर परिवार की आर्थिक मदद करता था। दूसरी ओर उसकी मां घीसी बाई और छोटी बहन गरिमा खेतों में मजदूरी कर घर की जिम्मेदारियां निभाती रहीं।
आर्थिक तंगी के बीच मिला शिक्षा का संबल
उसने 10वीं कक्षा में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बायोलॉजी पसंदीदा विषय था और वह बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखता था लेकिन, आर्थिक हालात उसके रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती थे। परिवार के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में मेडिकल कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था। इसी दौरान सूरज एलन कोटा में कोचिंग की जानकारी लेने पहुंचा। वहीं उसे एलएन परमार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षा संबल योजना के बारे में पता चला। चयन परीक्षा में उसका चयन हो गया। इसके बाद एलन करियर इंस्टीट्यूट में उसे नीट की निःशुल्क कोचिंग मिली, जबकि एलएन परमार्थ ट्रस्ट ने रहने और खाने की व्यवस्था भी पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई।
हालातों से समझौता नहीं, सामना किया
सूरज की सफलता के पीछे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि संघर्ष की लंबी कहानी भी है। उसने हालातों से समझौता करने के बजाय उनका सामना करना चुना। परिवार की मदद के लिए उसने पुताई का काम सीखा और छुट्टियों में मजदूरी कर घर की जिम्मेदारियां संभाली। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि उसकी छोटी बहन गरिमा को गांव में आगे की पढ़ाई की सुविधा नहीं मिलने और आर्थिक तंगी के कारण 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। गरिमा भी अपनी मां के साथ खेतों में मजदूरी करने के लिए जाने लगी। अब एक साल के अंतराल के बाद वह दूसरे स्कूल में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करेगी।

