रिलायंस का मुनाफा 22.3 फीसदी घटकर 20946 करोड़ पर, रेवेन्यू 25% उछली

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मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर शुद्ध लाभ दर्ज किया। मुनाफे को मुख्य तौर पर तेल रिफाइनिंग एवं पेट्रोकेमिकल (ओ2सी) कारोबार और डिजिटल सेवाओं अथवा दूरसंचार कारोबार से प्राप्त अधिक राजस्व एवं मार्जिन से बल मिला।

तिमाही के दौरान कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 20,946 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले की समान तिमाही में दर्ज 26,994 करोड़ रुपये के मुकाबले 22.4 फीसदी कम है। मगर अन्य आय को छोड़कर कर पूर्व समेकित मुनाफा एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 9.3 फीसदी बढ़कर 24,080 करोड़ रुपये हो गया।

तिमाही के दौरान कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ में एक तिमाही पहले के मुकाबले 5.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में कंपनी की आय को 8,924 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों की बिक्री से एकमुश्त मुनाफे से बल मिला था। ब्रोकरेज फर्मों ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आरआईएल का शुद्ध लाभ 18,570 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जाहिर किया था।

कंपनी की कुल बिक्री वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर करीब 3.09 लाख करोड़ रुपये रही। पिछले साल की इसी तिमाही में यह 2.44 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि पिछली तिमाही में 2.94 लाख करोड़ रुपये रही थी।

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का एबिटा यानी परिचालन मुनाफा सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत घटकर 54,067 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 58,024 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 11.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 48,588 करोड़ रुपये था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुख्य एबिटा सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत बढ़कर 47,517 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 42,905 करोड़ रुपये था, जबकि पिछली तिमाही में 44,141 करोड़ रुपये रहा था।

इन आंकड़ों से साफ है कि बढ़ते खर्च की वजह से कंपनी के मुख्य परिचालन मुनाफे का मार्जिन घटा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बुनियादी एबिटा मार्जिन घटकर 15.25 प्रतिशत रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 17.61 प्रतिशत था। हालांकि, पिछली तिमाही के 15.01 प्रतिशत के मुकाबले इसमें हल्का सुधार देखने को मिला।

इस दौरान कंपनी के कुल परिचालन खर्च में सालाना आधार पर 30.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसकी बड़ी वजह कच्चे माल और तैयार माल की खरीद पर बढ़ा खर्च रहा। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल और अन्य औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (ओ2सी) और रिटेल कारोबार की लागत बढ़ी है, जिसका असर कंपनी के मुनाफे पर भी पड़ा।

कंपनी की कुल कमाई पर अधिक ब्याज खर्च और रिलायंस जियो के 5जी नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों पर बढ़े हुए मूल्यह्रास का नकारात्मक असर पड़ा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का ब्याज खर्च 18.5 फीसदी बढ़कर 8,337 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 7,036 करोड़ रुपये था।

इसी तरह, मूल्यह्रास का खर्च 9.1 फीसदी बढ़कर 15,100 करोड़ रुपये हो गया जबकि एक साल पहले यह 13,842 करोड़ रुपये था। कंपनी के ओ2सी कारोबार का परिचालन मुनाफा (ब्याज और कर से पहले की कमाई) वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 13.17 फीसदी बढ़कर सालाना 14,170 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 12,521 करोड़ रुपये था।

वहीं, तेल एवं गैस कारोबार का परिचालन मुनाफा सालाना आधार पर 9.64 फीसदी बढ़कर 3,888 करोड़ रुपये हो गया जबकि पिछले वर्ष यह 3,546 करोड़ रुपये था। इस कारोबार की कुल आय भी सालाना 3.2 फीसदी बढ़कर 6,298 करोड़ रुपये हो गई जो एक साल पहले 6,103 करोड़ रुपये थी। रिलायंस की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में आईपीओ लाने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा किए हैं।