नई दिल्ली। EPF Pension Scheme 2026: श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नई योजना पुरानी कर्मचारी पेंशन योजना 1971 और कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) की जगह लेगी। यह बदलाव सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 का हिस्सा है और 29 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।
राहत की बात यह है कि नई पेंशन स्कीम में पेंशन निकालने का फॉर्म्युला, कर्मचारी और कंपनी का योगदान और कम से कम मिलने वाली पेंशन (मिनिमम पेंशन) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
हालांकि, पेंशन की प्रोसेसिंग, पेंशन फंड के निवेश के तरीके और देरी होने पर मिलने वाले हर्जाने को लेकर कुछ नए नियम जोड़े गए हैं। अब अगर EPFO बिना किसी ठोस वजह के पेंशन क्लेम में देरी करता है, तो उसे 12% ब्याज देना होगा।
कौन शामिल हो सकता है
नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो भी व्यक्ति 29 जून 2026 को या उसके बाद ईपीएफ योजना 2026 का सदस्य बनता है और जिसकी सैलरी सरकारी सीमा के अंदर है, वह इस नई पेंशन स्कीम का हिस्सा बनेगा। इसके अलावा, जो लोग पहले से EPS-95 या EPS-1971 के सदस्य थे, वे भी इस नई स्कीम में शामिल होने के हकदार हैं। जिन लोगों को पुरानी योजनाओं (1971 या 1995) के तहत पहले से पेंशन मिल रही है, उनकी पेंशन बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
योगदान के नियम
कंपनियां कर्मचारी की सैलरी का 8.33% हिस्सा पेंशन फंड में जमा करेंगी। सरकार भी सैलरी का 1.16% योगदान देगी। जिन कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ‘हायर पेंशन’ (ज्यादा पेंशन) का विकल्प चुना है, उनके मामले में कंपनी का योगदान बढ़कर 9.49% हो जाएगा (15,000 से ऊपर की सैलरी पर)।

