नई दिल्ली। India-US Trade Deal: अमेरिका–ईरान शांति समझौते के बाद अब भारत के लिए भी अच्छी खबर है। कई महीनों की बातचीत के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों देशाें के बीच होने वाला यह समझौता अंतिम चरण में है और जल्द ही इसके पूरा होने की उम्मीद है।
इससे द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई रफ्तार मिल सकती है। भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसे वियतनाम समेत आसियान देशों, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है।
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस समझौते को दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमिसन ग्रीर भारत दौरे पर हैं और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं। इसी दिन अमेरिका द्वारा सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया अस्थायी 10 फीसदी आयात शुल्क समाप्त होने वाला है।
मंगलवार को फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) द्वारा कैपिटल हिल में आयोजित एक कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश विभाग की डेप्युटी असिस्टेंट सेक्रेटरी बेथनी पॉलस मॉरिसन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परिणाम आधारित संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना था कि दोनों देशों का फोकस केवल बैठकों पर नहीं, बल्कि ठोस नतीजे हासिल करने पर है।
भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी 2025 को औपचारिक रूप से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू की थी। शुरुआत में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव दिया था।
इनमें पशु आहार, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, विमान पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की इच्छा भी जताई है।
हालांकि अमेरिकी शुल्क नीति में बदलाव के बाद दोनों देशों को समझौते के कई प्रावधानों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। अमेरिका ने फरवरी में सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 फीसदी अस्थायी शुल्क लगाया था, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त होगी। भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसे वियतनाम समेत आसियान देशों, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है।
अमेरिका भारत का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार
वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। उच्च आयात शुल्क के बावजूद पिछले वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात 0.92 फीसदी बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं अमेरिका से आयात 15.95 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, इस दौरान भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) घट गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 40.89 अरब डॉलर से घटकर 2025-26 में 34.4 अरब डॉलर रह गया।
ऊर्जा क्षेत्र में दोनों की साझेदारी मजबूत
मॉरिसन ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है। दोनों देश तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों के व्यापार को बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। 2025 के बाद से भारत-अमेरिका हाइड्रोकार्बन व्यापार बढ़कर 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं।
मॉरिसन ने यह भी बताया कि वर्तमान में 3.3 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिका के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। इन छात्रों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 14 अरब डॉलर से अधिक का योगदान है और उनकी मौजूदगी से 50,000 से ज्यादा नौकरियों को समर्थन मिल रहा है।

