ऊर्जा मंत्री ने किया भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्वच्छता सेवा के लिए एकजुटता का आह्वान
कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर शनिवार को बपावर क्षेत्र के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास कार्यों का जायजा लिया और आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
ऊर्जा मंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत दिल्ली पुरा ग्राम पंचायत से की। इसके बाद उन्होंने कमोलर, खड़िया, लबानिया, लटूरी और बपावर कलां सहित विभिन्न गांवों का दौरा कर स्थानीय स्थिति और स्वच्छता कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया।
दौरे के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने विभिन्न स्थानों पर जनसुनवाई का आयोजन किया। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने अपने अभाव-अभियोग मंत्री नागर के समक्ष रखे। जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए ऊर्जा मंत्री ने कई समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया।
उन्होंने उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि आमजन की समस्याओं को पेंडिंग न रखा जाए और समय रहते उनका मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।
दौरे के समापन पर ऊर्जा मंत्री नागर ने अधिकारियों, कर्मचारियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मिलकर काम करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा उपहार हैं।
उन्होंने सभी से राजनीति और मतभेदों से ऊपर उठकर स्वच्छता अभियान को एक जनआंदोलन बनाने और इसे तीव्र गति देने की अपील की, ताकि बपावर क्षेत्र पूरे प्रदेश में एक आदर्श मिसाल बनकर उभर सके।
कचरा प्रबंधन के लिए हर परिवार को मिलेंगे दो डस्टबिन
गांवों को कचरा मुक्त और सुंदर बनाने के संकल्प को दोहराते हुए ऊर्जा मंत्री ने स्वच्छता अभियान की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि क्षेत्र के हर परिवार को प्रशासन की ओर से दो-दो डस्टबिन (कूड़ेदान) वितरित किए जाएंगे। इन डस्टबिनों का उपयोग ग्रामीण सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने के लिए कर सकेंगे। मंत्री नागर ने कहा कि कचरे का सही वर्गीकरण ही स्वच्छ गांव की नींव है और इसमें हर नागरिक की भागीदारी अनिवार्य है।
जल संरक्षण और पर्यावरण पर जोर
पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निपटने के लिए ऊर्जा मंत्री ने दूरदर्शी निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर गांव में अनिवार्य रूप से ‘सोखता गड्ढा’ (सोक पिट) का निर्माण किया जाए। इससे घरों से निकलने वाले गंदे पानी का सही प्रबंधन होगा। भूजल स्तर में सुधार आएगा और गांवों में कीचड़ व गंदगी की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिलेगी।

