Ethanol Fuel: देश का पहला E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट दिल्ली में शुरू

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नई दिल्ली। Ethanol Fuel: भारत में ग्रीन मोबिलिटी और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को अपनाने पर तेजी से काम कर रही है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पैदा हुए तेल संकट ने भी सरकार का ध्यान इथेनॉल पर फोकस किया है। अब सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने देश में E85 पेट्रोल (80 से 85% इथेनॉल मिश्रित ईंधन) को बेचना करना शुरू कर दिया है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर इसकी शुरुआत की है। पहले चरण में यह ईंधन दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर के लगभग 50 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया जाएगा। अगर आप दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल के पंप से गुजरेंगे, तो आपको देश का पहला सार्वजनिक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट दिखाई देगा।

कीमत में कितना अंतर
सामान्य पेट्रोल और इथेनॉल की कीमत में बड़ा अंतर है। पश्चिम एशिया संकट के कारण पेट्रोल के दाम में तेजी आई है। अभी दिल्ली में सामान्य पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है। वहीं दिल्ली में E85 पेट्रोल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। यानी E85 पेट्रोल सामान्य पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर 20 रुपये सस्ता है।

क्या सभी गाड़ियों में इस्तेमाल हो सकता है इथेनॉल
E85 पेट्रोल सामान्य कारों या दोपहिया वाहनों के लिए नहीं है। देश में फिलहाल बिकने वाला E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रण) सामान्य गाड़ियों के अनुकूल है। लेकिन E85 पेट्रोल विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए तैयार किया गया है।

ये गाड़ियां इस तरह से डिजाइन की जाती हैं कि वे 100% पेट्रोल से लेकर 85% तक के उच्च इथेनॉल मिश्रण पर आसानी से चल सकें। मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों ने देश में फ्लेक्स-फ्यूल से चलने वाले एंट्री-लेवल मॉडल पेश करना शुरू कर दिया है।

इथेनॉल पर सरकार का जोर क्यों
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इस पर सालाना 120 अरब डॉलर से अधिक का खर्च आता है। इसका एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के रास्ते आता है, जो मौजूदा युद्ध और तनाव के कारण लगातार प्रभावित हो रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 10.92 लाख करोड़ रुपये था। इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से इस भारी-भरकम खर्च और विदेशी निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी। पिछले 10 वर्षों में इथेनॉल मिश्रण के कारण भारत ने 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है।