नामी कोचिंग को टॉपर्स की सफलता का श्रेय लेना पड़ा महंगा, लगा सात लाख का जुर्माना

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नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की आईएएस जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल उन कोचिंग संस्थानों की ओर देखते हैं, जो अपने विज्ञापनों में टॉपर्स और सफल उम्मीदवारों के नाम दिखाकर बेहतर नतीजों का दावा करते हैं।

ऐसे दावों की सच्चाई पर सरकारी जांच ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देश के चर्चित IAS कोचिंग संस्थानों में से एक वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

आरोप है कि संस्थान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को लेकर ऐसे विज्ञापन प्रकाशित किए जिनमें महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई।

CCPA के अनुसार, संस्थान ने अपनी वेबसाइट और प्रचार सामग्री में दावा किया था कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में टॉप 10 रैंक धारकों में से 8 उम्मीदवार वाजीराम एंड रवि से जुड़े थे। इसके अलावा टॉप 50 में 37 उम्मीदवारों को भी संस्थान से जुड़ा बताया गया था।

कोचिंग संस्थान यह भी दावा करता रहा कि हर साल UPSC के जरिए चुने जाने वाले अधिकारियों में 30 प्रतिशत से अधिक उसके छात्र होते हैं। इन दावों ने स्वाभाविक रूप से उन छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया जो UPSC की तैयारी के लिए सही संस्थान की तलाश कर रहे थे।

CCPA की जांच में पाया गया कि जिन उम्मीदवारों को संस्थान अपनी सफलता के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहा था, उनमें से अधिकांश ने संस्थान का पूरा कोचिंग कोर्स नहीं किया था। जांच के मुताबिक टॉप 10 में शामिल 8 उम्मीदवारों में से 7 केवल संस्थान के इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) का हिस्सा थे।

इसी तरह टॉप 50 में शामिल 37 उम्मीदवारों में से 29 ने भी सिर्फ यही कार्यक्रम लिया था। यानी ये उम्मीदवार पहले ही UPSC की प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा अपने दम पर पास कर चुके थे और अंतिम चरण यानी इंटरव्यू की तैयारी के लिए संस्थान से जुड़े थे।

इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम UPSC चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण के लिए चलाया जाता है। इसमें केवल वे उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं जो प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर चुके हों।

ऐसे में यह कार्यक्रम पूरी तैयारी कराने वाले कोर्स से अलग माना जाता है। CCPA का कहना है कि जब किसी उम्मीदवार ने केवल इंटरव्यू गाइडेंस लिया हो, तब उसे पूर्ण कोचिंग कार्यक्रम की सफलता के रूप में प्रचारित करना भ्रामक तस्वीर पेश कर सकता है।

जांच के दौरान पिछले वर्षों के आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया। इनमें पाया गया कि संस्थान से जुड़े सफल उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल हुआ था।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 86.36 प्रतिशत, वर्ष 2022 में 78.31 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 97.56 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 71.69 प्रतिशत सफल उम्मीदवार सिर्फ IGP से जुड़े थे। इन आंकड़ों के आधार पर प्राधिकरण ने माना कि विज्ञापनों में उम्मीदवारों के वास्तविक जुड़ाव की प्रकृति स्पष्ट नहीं की गई, जिससे छात्रों के बीच गलत धारणा बन सकती थी।