Thursday, June 18, 2026
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Retail Inflation: मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंची

नई दिल्ली। शुक्रवार को जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के आधिकारिक आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आम आदमी की जेब पर चौतरफा बोझ बढ़ रहा है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह चांदी और सोने के गहनों के साथ टमाटर एवं अदरक की कीमतों में तेल उछाल है। अगर खाद्य महंगाई के आंकड़े देखें, तो यह और भी डरावना है। खाद्य महंगाई बीते माह बढ़कर 4.78 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 4.20 फीसदी थी।

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह
महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ खाने-पीने की चीजों और व्यक्तिगत रखरखाव के खर्च का है। आंकड़ों के मुताबिक, व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई में सालाना आधार पर 18.46 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट-होटल जैसी सेवाएं 5.75 फीसदी और पान-तंबाकू 4.83 फीसदी महंगे हुए हैं, जिसने आम आदमी का खर्च बढ़ा दिया है।

इन चीजों ने बढ़ाया संकट

  • चांदी के गहने : यहां महंगाई का विस्फोट हुआ है और कीमतें एक साल पहले की तुलना में 155.23 फीसदी महंगी हो चुकी हैं।
  • टमाटर : रसोई के राजा टमाटर के दाम 48.43 फीसदी चढ़ चुके हैं।
  • सोने, हीरे और प्लेटिनम के आभूषण : इनकी महंगाई दर भी 40.93 फीसदी पहुंच गई है।
  • अदरक : चाय का स्वाद कड़वा करते हुए यह 32.49 फीसदी महंगा।
  • किशमिश-मुनक्का : सूखे मेवे भी 21.97 फीसदी महंगे बिक रहे हैं।

यहां राहत
बढ़ती महंगाई के बीच आलू (-23.71%), हरी मटर (-11.47), मोटर कार एवं जीप (-7.19%), जीरा (-4.59%) और मोटर साइकिल-स्कूटर (-3.56%) की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट आई है।

इन राज्यों में सर्वाधिक महंगाई दर

राज्य महंगाई दर 
तेलंगाना6.15%
तमिलनाडु5.11%
आंध्र प्रदेश4.90%
कर्नाटक4.59%
ओडिशा4.54%
उत्तर प्रदेश3.97%
पंजाब3.34%
हरियाणा3.09%
हिमाचल प्रदेश3.05%
दिल्ली2.50%

शहरों से ज्यादा गांवों में बढ़ी महंगाई
बीते माह ग्रामीण महंगाई 4.25 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि शहरों में यह 3.53 फीसदी दर्ज की गई। खाद्य महंगाई के मामले में भी गांवों का आंकड़ा 4.85 फीसदी है, जबकि शहरों में 4.66 फीसदी। ग्रामीण महंगाई बढ़ने से कपड़े, जूते, बाइक, मोबाइल और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी कम हेागी, जिससे कंपनियों की बिक्री-मुनाफे पर चोट पहुंचेगी।

Jeera: इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक

नई दिल्ली। Jeera Production in China: वर्तमान में जीरे के भाव न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। इन भावों पर हाल-फिलहाल अधिक मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में बाजार 3/5 रुपए मन्दा-तेजी के बीच बने रहेंगे। हालांकि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक सीमित रह गई है। मगर लोकल एवं निर्यात व्यापार कम होने के कारण भाव दबे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि मिडिल ईस्ट देशों में युद्ध के चलते विगत कुछ समय से जीरे का निर्यात प्रभावित हो रहा है। अभी हाल-फिलहाल निर्यात मांग बढ़ने की कोई संभावना भी नहीं है। क्योंकि चालू माह के अंत तक चीन में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी और इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 5/10 प्रतिशत अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं। जबकि जुलाई माह में टर्की एवं सीरिया में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी। जिस कारण से भारतीय जीरे का निर्यात कम ही रहेगा।

चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा। हालांकि राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा लेकिन गुजरात में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम होने के समाचार मिल रहे है।

गत वर्ष गुजरात में जीरे का उत्पादन 44/45 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष घटकर 32/34 लाख बोरी का रह गया। जबकि राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 57/58 लाख बोरी होने के व्यापारिक अनुमान लगाए गए हैं गत वर्ष राजस्थान में उत्पादन 51/52 लाख बोरी का माना गया है।

आवक : वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक समान्य स्तर पर आ गई है। गुजरात की प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 10/11 हजार बोरी की हो रही है जबकि राजकोट एवं गोंडल में आवक 800/1000 बोरी की चल रही है।

राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2500/3000 बोरी एवं नागौर में 1500/2000 बोरी की चल रही है। जोधपुर में आवक 1200/1500 बोरी की रह गई है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में कुल उत्पादन का लगभग 75/80 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान में 50/60 प्रतिशत माल मंडियों में आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में अभी तक लगभग 28/30 लाख बोरी जीरे की आवक हो चुकी है। जबकि राजस्थान की मंडियों में 20/22 लाख बोरी जीरा आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

तेजी-मंदी:  जीरे की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है क्योंकि एक ओर जहां मंडियों में आवक घट गई है। वही दूसरी तरफ आगामी दिनों में लोकल मांग में सुधार होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। छिटपुट मात्रा में निर्यात भी जारी रहेगा। वर्तमान में उत्पादन केन्द्रों की मंडियों पर जीरे के भाव 175/200 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में अभी 3/5 रुपए प्रति किलो का मन्दा-तेजी चलता रहेगा। लेकिन अगस्त-सितम्बर माह में भाव बढ़ने की संभावना है।

निर्यात : वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान एक ओर जहां मात्रात्मक रूप में जीरे का निर्यात 14 प्रतिशत घटा है वहीं निर्यात भाव कम मिलने के कारण निर्यात से प्राप्त आय में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरा का निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।

मई में वनस्पति तेलों का आयात 8 प्रतिशत बढ़कर 13.70 लाख टन के पार पहुंचा

मुम्बई। Vegetable oil imports: सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि मई 2026 में देश के अंदर वनस्पति तेलों का कुल आयात बढ़कर 13.70 लाख टन के करीब पहुंचा जो मई 2025 के आयात 12.70 लाख टन से 8 प्रतिशत अधिक रहा।

इसके तहत खाद्य तेलों का आयात 12.50 लाख टन से बढ़कर 13.40 लाख टन तथा अखाद्य तेल का आयात 20 हजार टन से बढ़कर 30 हजार टन पर पहुंच गया।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात 5,05,744 टन से सुधरकर 5,46,456 टन, क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल का आयात 3,98,585 टन से बढ़कर 4,93,854 टन तथा क्रूड सूरजमुखी तेल का आयात 1,83,555 टन से उछलकर 2,95,726 टन पर पहुंचा।

उपलब्ध आंकड़ों से ज्ञात होता है कि मई में खाद्य तेल का आयात अप्रैल से भी 2.4 प्रतिशत अधिक हुआ। इसमें क्रूड डीगम सोयाबीन तेल का विशेष योगदान रहा। पाम तेल एवं सोयाबीन तेल के बीच मूल्यान्तर में कमी आने से सोया तेल का आयात तेजी से बढ़ा। नवम्बर 2025 से मई 2026 के दौरान सीपीओ का आयात बढ़कर 45 लाख टन पर पहुंच गया।

फूड पैकेजिंग में स्टेपल पिन के इस्तेमाल पर रोक, नहीं माने तो होगी कार्रवाई

नई दिल्ली Food Packaging New Rules: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ग्राहकों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी और अन्य फूड बिजनेस ऑपरेटरों (FBOs) के लिए खाने-पीने की चीजों की पैकिंग में स्टेपल पिन या मेटल के तारों का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। एफएसएसएआई ने यह कदम ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर उठाया है।

खाद्य नियामक ने कहा कि यह बात सामने आई है कि सजावटी केक के साथ-साथ खाने के पैकेट, केक बॉक्स, मिठाई के डिब्बे, स्नैक पाउच, टेकअवे फूड पार्सल और खाने के दूसरे पैकेजों को पैक करने के लिए भी मेटल की पिन और तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाले काफी होटल या रेस्टोरेंट पैकिंग के लिए इन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

एफएसएसएआई ने कहा है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें केक और खाने के पैकेट में मेटल के टुकड़े या स्टेपल पिन मिले हैं। ऐसे मामलों से खाने की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा होता है, क्योंकि ग्राहक अनजाने में इन धातु की चीजों को खा सकते हैं, जिससे उन्हें चोट लग सकती है या सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

नियामक ने सभी होटल, रेस्टोरेंट आदि को निर्देश दिया कि वे किसी भी खाने की चीज, बेकरी प्रोडक्ट, टेकअवे मील, स्नैक पैकेट या फूड पार्सल को सील करने, जोड़ने, सुरक्षित करने या पैक करने के लिए तुरंत मेटल की पिन, तार या ऐसी ही किसी अन्य चीज का इस्तेमाल बंद कर दें।

नहीं माने तो सख्त कार्रवाई: एफएसएसएआई ने कहा कि जो भी खाद्य व्यापार संचालक इस निर्देश का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी के अनुसार, अगर इस निर्देश का पालन नहीं किया जाता है, तो ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ और इसके तहत बने नियमों के प्रावधानों के अनुसार उचित दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इस कदम का मकसद खाद्य सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना और फूड पैकेजिंग व हैंडलिंग में मेटल के फास्टनिंग मटीरियल के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को होने वाले अनावश्यक जोखिमों को रोकना है।

Forex Reserve: विदेशी मुद्रा भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट, गोल्ड रिजर्व बढ़ा

मुंबई। Forex Reserve: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर गिरावट दिखी है। पिछले सप्ताह इसमें $711 मिलियन की गिरावट हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $938 million की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि इस सप्ताह सोने के भंडार में करीब दो अरब डॉलर की बढ़ोतरी दिखी है। लेकिन एफसीए भंडार में काफी गिरावट आने की वजह से ओवरऑल विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 05 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $711 million की कमी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $938 million की बढ़ोतरी हुई थी। अब अपना विदेशी मुद्रा भंडार घट कर $681.610 billion का रह गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को अपना भंडार $728.494 billion के ऑल टाइम हाई पर था।

FCA भंडार में उल्लेखनीय गिरावट
रिजर्व बैंक की तरफ से जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 05 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियों (Foreign Currency Asset) में $2.704 billion की कमी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $3.116 billion की बढ़ोतरी हुई थी। अब अपना एफसीए भंडार घट कर $543.444 billion का रह गया है। उल्लेखनीय है कि देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां या फॉरेन करेंसी असेट (FCA) एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। डॉलर में अभिव्यक्त किये जाने वाले विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसे गैर अमेरिकी मुद्राओं में आई घट-बढ़ के प्रभावों को भी शामिल किया जाता है।

गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी

  1. आलोच्य सप्ताह के दौरान सोने के मूल्य में बढ़ोतरी हुई है।
  2. इससे रिजर्व बैंक के सोने के भंडार की वैल्यू में $1.975 billion की बढ़ोतरी हुई है।
  3. इससे एक सप्ताह पहले इसमें $2.186 billion की कमी आई थी।
  4. अब अपने सोने के भंडार की वैल्यू बढ़ कर $114.575 billion का हो गया है।
  5. उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 के अंत में आरबीआई के पास सोने का भंडार 880.52 टन का हो गया है।
  6. यह देश के कुल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का करीब 16.7% बैठता है।

एसडीआर में मामूली बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) मामूली 18 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें कोई घट-बढ़ नहीं हुई थी। इसी सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे हुए देश के रिजर्व मुद्रा भंडार में कोई कमी-बेशी नहीं हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें मामूली $8 million की गिरावट आई थी। इस समय अपना आईएमएफ रिजर्व $4.826 billion का है।

श्रीमद भागवत कथा: सुदामा चरित्र और भक्ति की महिमा में डूबे श्रद्धालु

कोटा। श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान एवं समस्त धाकड़ समाज, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में विनोबाभावे नगर स्थित खड़े गणेश जी रोड पर श्री धरणीधर गार्डन में आयोजित भव्य ‘श्रीमद भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव’ के छठे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

कथा के षष्ठम् दिवस पर बनेठ वाले गुरुदेव ने व्यासपीठ से ज्ञान की गंगा बहाते हुए कहा कि प्रत्येक भक्त के संग में सदा भगवान चलते हैं, बस शर्त इतनी है कि भक्त की भावना सच्ची होनी चाहिए। जहाँ भक्त की विशेष श्रद्धा होती है, वहाँ फिर भक्त नहीं बल्कि साक्षात भगवान ही निवास करते हैं।

बनेठ वाले गुरुदेव ने सुदामा जी के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक उदाहरण करते हुए श्रद्धा को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि सुदामा जी के घर में पत्नी और बच्चे भूखे थे, भोजन का एक दाना नहीं था, इसके बावजूद वे सदैव प्रसन्न रहकर मन से हरि भजन में लीन रहते थे।

सुदामा जी का मानना था कि ‘परस्थिति’ का अर्थ पराई स्थिति है, वह हमारी वास्तविक स्थिति नहीं हो सकती। गुरुदेव ने कहा कि जो सुख आने पर भगवान को भूल जाए और जो अत्यधिक दुख आने पर भी भगवान को बिसरा दे, वे सच्चे भक्त नहीं हैं।

यदि जीवन में सुख या दुख बढ़े, तो उसके साथ भजन की मात्रा भी बढ़ानी चाहिए। जब भजन बढ़ेगा तो भगवान अंग-संग हो जाएंगे। फिर जहाँ हम जाएंगे वहाँ हम परछाई बनकर और भगवान हमारी छाया बनकर साथ चलेंगे।

उन्होंने जीवन दर्शन समझाते हुए कहा कि जिस रथ में भगवान बैठे, उसकी महाभारत में जीत हो गई; ठीक इसी तरह जिस हृदय में भगवान बैठेंगे, उसकी भवसागर में जीत सुनिश्चित है। मरना और डूबना तो तय है, अब निर्णय मनुष्य को करना है कि वह भवसागर में डूबना चाहता है या गिरधर नागर की भक्ति में।

​कलयुग के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुदेव ने कहा कि आज कलयुग ने मनुष्य की मति का हरण कर लिया है। जिस ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम पर भजन बजते हैं। उसी पर गाना बजने पर लोग भजन छोड़ गानों पर नाचने लगते हैं, यही मति हरण है।

भगवान ने मनुष्य को सबसे ऊँचा बनाया, पर आज उसकी अकल ओछी हो गई है। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि सुंदरता होने पर भी संस्कृति को अपनाया जा सकता है। सभी लोग अपना काम-धंधा और नौकरी करें, लेकिन अपने संस्कार, संस्कृति, सनातन और सांवरिया को कभी न भूलें।

रुक्मिणी हरण के प्रसंग पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि रुक्मिणी जी भागी नहीं थीं, बल्कि वे भगवान की भक्ति में जागी थीं। इस दौरान उन्होंने “हे नाथ, हे मेरे नाथ! चढ़ाए तो तेरे मंदिर की पेड़ी चढ़ाना और गिराए तो तेरे चरणों में गिराना” और “श्याम सलोने तेरी शरणं में आया…” जैसे भजनों से पाण्डाल को भक्तिमय कर दिया।

​दिव्य रासलीला में कलाकारों ने किया मंत्रमुग्ध
​कथा के साथ ही महोत्सव में रासलीला का भी भव्य आयोजन हुआ। वृंदावन के ख्यातिप्राप्त कलाकार हरिवल्लभ शर्मा ‘छोटे ठाकुर’ महाराज के कुशल निर्देशन में कलाकारों द्वारा अद्भुत और मनोहारी मंचन किया गया। छठे दिन के प्रसंगों में कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोपियों संग महारास, उद्धव-गोपी संवाद और विशेष रूप से रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का अत्यंत जीवंत और भावपूर्ण मंचन कर उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ​

सरस डेयरी के प्रयास से सब्सिडी पर कुट्टी मशीनें पाकर खिले किसानों के चेहरे: राठौड़

सरस डेयरी की पहल से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: राजेश बिरला

कोटा। कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (सरस डेयरी) द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों एवं पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शुक्रवार को 250 कुट्टी मशीनों का वितरण किया गया।

सरस डेयरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़, रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला तथा विधायक संदीप शर्मा, मार्केटिंग सोसायटी अध्यक्ष निहाल सिंह राठौड़, प्रबंध संचालक दिलखुश मीणा ने पशुपालकों को रियायती दर पर सब्सिडी युक्त कुट्टी मशीनें वितरित कीं।

अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने बताया कि किसानों को 150 विद्युत संचालित एवं 100 स्वचालित कुट्टी मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। मशीनें प्राप्त करने के बाद किसानों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि सरस डेयरी द्वारा चरणबद्ध तरीके से निशुल्क बीज वितरण कार्यक्रम भी संचालित है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों पशुपालकों को लाभ मिल रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने सरस डेयरी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसानों और पशुपालकों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होंगे।

विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि चैन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में सरस डेयरी ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि जो डेयरी कभी लगभग 85 लाख रुपये के घाटे में थी, वह आज करीब 1.85 करोड़ रुपये के लाभ की स्थिति में पहुंच गई है। यह बेहतर प्रबंधन और किसानों के हित में किए गए कार्यों का परिणाम है।

राठौड़ ने बताया कि विद्युत संचालित कुट्टी मशीन पर 15 हजार रुपये तथा स्वचालित मशीन पर 5 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कुट्टी मशीनों के उपयोग से पशुओं के लिए चारे की कटाई आसान होगी, समय और श्रम की बचत होगी तथा पशुओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

राठौड़ ने कहा कि सरस डेयरी केवल दुग्ध संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के समग्र विकास के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य भी कर रही है। उन्होंने पशुपालकों से नई तकनीकों को अपनाने तथा डेयरी की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने सरस डेयरी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कुट्टी मशीनों के उपयोग से पशुपालन कार्य अधिक सुगम होगा, चारे की बर्बादी कम होगी तथा उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।

किसानों ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली उपयोगी और दूरदर्शी योजना बताया। इस अवसर पर सरस डेयरी के प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा सहित बड़ी संख्या में कृषक, पशुपालक एवं डेयरी से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।

US Iran Deal:अमेरिका-ईरान समझौता: जानिए किन मुद्दों पर बनी सहमति

तेहरान। Iran US Deal: ईरान और अमेरिका के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह अंतरिम डील इसी हफ्ते के आखिर में हो सकती है।

इसमें युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के साथ-साथ ईरान के परमाणु बम ना बनाने पर बातचीत होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ डील फाइनल होने का ऐलान किया है। हालांकि कुछ मुद्दों पर बातचीत जिनेवा डील के बाद होगी।

सीएनएन ने एक राजनयिक के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दोनों पक्ष ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (समझौता ज्ञापन) के टेक्स्ट पर सहमत हो गए हैं। हालांकि अभी इसे अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। राजनयिक के अनुसार, समझौते की कुल छह मुख्य बातें इस तरह से हैं, जिन पर जिनेवा बैठक के लिए सहमति बनी है।

किन बातों पर होगा समझौता

  1. समझौते पर हस्ताक्षर होते ही लेबनान सहित सभी मोर्चों पर 60 दिन का सीजफायर शुरू हो जाएगा।
  2. होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस नहीं लेगा।
  3. समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिन बाद होर्मुज जलमार्ग से यातायात युद्ध-पूर्व के स्तर पर लौट आएगा।
  4. ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी हटा ली जाएगी और तेहरान को प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी।
  5. डील में ईरान भविष्य में परमाणु हथियार ना हासिल करने का वादा करेगा और इसकी गारंटी देगा।
  6. अमेरिका-ईरान की इस डील को इस्लामाबाद समझौता कहा जाएगा क्योंकि पाकिस्तान मध्यस्थ है।

राजनयिक ने यह नहीं बताया है कि डील में ईरान के फ्रीज अरबों डॉलर के फंड को जारी करना शामिल है या नहीं। समझौते के लिए यह ईरान की एक मुख्य मांग रही है। राजनयिक ने कहा कि बातचीत के अंतिम दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति जैसे विषयों पर चर्चा हुई है।

जिनेवा में समझौता
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं। शुक्रवार को तीन सूत्रों ने CNN को बताया कि ईरान के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने की सबसे अधिक संभावना है। यह हस्ताक्षर रविवार को हो सकते हैं।

बातचीत की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने कहा कि हस्ताक्षर समारोह जिनेवा में होगा, जो उस जगह से दूर नहीं है जहां ट्रंप अगले सप्ताह फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका को मान्यता देते हुए इसे इस्लामाबाद घोषणा कहा जाएगा। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने अभी किसी समझौते पर पहुंचने की पुष्टि नहीं की है।

कॉलेज में सहायक प्रोफेसर बनने की राह खुली, SET-2026 की अधिसूचना जारी

राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा के लिए 14 जून से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन

कोटा। राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (SET-2026) के आयोजन की जिम्मेदारी इस वर्ष कोटा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। वर्ष 2023 के बाद तीन वर्ष के अंतराल पर आयोजित होने जा रही यह परीक्षा राज्य के राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्रता निर्धारण का आधार बनेगी। इसकी अधिसूचना आज जारी कर दी गई है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय समिति की बैठक में परीक्षा के सफल संचालन, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था तथा परीक्षा प्रणाली की विस्तृत रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 जून से प्रारंभ होकर 15 जुलाई 2026 तक चलेगी। परीक्षा का संभावित आयोजन 6 सितम्बर 2026 को प्रस्तावित है। इस अवसर रजिस्ट्रार राजपाल सिंह, प्रो.एन एल हेडा,प्रो.ओ पी ऋषि,प्रो.भवानी सिंह,नोडल अधिकारी एचएस शक्तावत,भगवान कर्मचांदी मौजूद रहे।

कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (SET-2026) के सफल संचालन हेतु सभी आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी तैयारियां की जा रही हैं, ताकि अभ्यर्थियों को एक विश्वसनीय एवं सुगम परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

पात्रता: उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में स्नातकोत्तर उपाधि होना आवश्यक है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत तथा ओबीसी (नॉन क्रीमीलेयर), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग एवं थर्ड जेंडर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।

स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के विद्यार्थी एवं परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थी भी प्रोविजनल आधार पर आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

आवेदन प्रक्रिया: परीक्षा के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। अभ्यर्थी कोटा विश्वविद्यालय की वेबसाइट एवं एसएसओ पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन शुल्क: सामान्य एवं ओबीसी क्रीमीलेयर वर्ग के लिए 1500 रुपये, ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 1200 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांग वर्ग के लिए 750 रुपये निर्धारित किया गया है।

प्रश्न पत्र: सेट-2026 का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप ऑफलाइन (ओएमआर आधारित) पद्धति से किया जाएगा। परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे, जिनमें कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रथम प्रश्नपत्र में शिक्षण एवं शोध अभिक्षमता, तार्किक क्षमता तथा सामान्य बौद्धिक दक्षता से संबंधित 50 प्रश्न होंगे, जबकि द्वितीय प्रश्नपत्र में अभ्यर्थी द्वारा चयनित विषय से संबंधित 100 प्रश्न शामिल होंगे।

अंक निर्धारण: दोनों प्रश्नपत्रों के लिए कुल 300 अंक निर्धारित किए गए हैं तथा परीक्षा अवधि तीन घंटे होगी। परीक्षा में किसी प्रकार का नकारात्मक अंकन नहीं किया जाएगा और प्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक प्रदान किए जाएंगे।

परीक्षा 35 विषयों में: विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस बार परीक्षा 35 विषयों में आयोजित की जाएगी।

संभागीय मुख्यालयों पर परीक्षा केंद्र: परीक्षा केंद्र राजस्थान के विभिन्न संभागीय मुख्यालयों पर स्थापित किए जाएंगे। परीक्षा की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, जैमर, उड़नदस्तों की तैनाती तथा ओएमआर शीट की त्रि-स्तरीय सुरक्षा कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी।

चयन प्रक्रिया : यूजीसी के निर्धारित मानकों के चयन प्रक्रिया अनुसार होगी, जिसके तहत परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों में से श्रेणीवार शीर्ष छह प्रतिशत अभ्यर्थियों को सहायक प्रोफेसर पात्रता प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए केवल विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट का ही अवलोकन करें तथा किसी भी भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें।

राज्य पात्रता परीक्षा (SET) 2026 की तैयारियों के मध्य नजर ऑनलाइन आवेदन (Form Filling) फॉर्म भरवाने और डेटा मैनेजमेंट का पूरा काम सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DOIT&C)/राजकंप इंफो सर्विसेज लिमिटेड (RISL) द्वारा संभाला जा रहा है।

उम्मीदवारों की सहूलियत और तकनीकी गड़बड़ियों से बचने के लिए राजस्थान सरकार के आधिकारिक ‘रिक्रूटमेंट पोर्टल’ (Recruitment Portal) का उपयोग किया जाएगा। अभ्यर्थी अपनी SSO ID के माध्यम से सीधे इस पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

अभ्यर्थियों को अलग से किसी अन्य निजी वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। सिंगल साइन-ऑन (SSO) के माध्यम से ‘रिक्रूटमेंट पोर्टल’ पर फॉर्म लाइव किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने OTR (One Time Registration) को पहले से ही अपडेट रखें ताकि फॉर्म भरते समय कोई परेशानी न हो।

Kota Mandi: ऊंचे भाव पर मांग घटने से कोटा मंडी में सरसों 100 रुपये लुढ़की

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शुक्रवार को ऊंचे भाव पर मांग घटने से सरसों 100 रुपये लुढ़क गई। गेहूं 20 रुपये मंदा बिका। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब 50 हजार कट्टे और लहसुन की 11000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं नया मिल लस्टर 2300 से 2375, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2400 से 2475, बेस्ट टुकड़ी 2500 से 2575, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1700 से 1900, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ 2100 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3201, धान (1509) 3400 से 4200, धान (1847) 3200 से 4001, धान (1718-1885) 3800 से 4400, धान (पूसा-1) 3000 से 4100, धान (1401-1886) 3600 से 4150, धान दागी 1500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 6000 से 7000, सोयाबीन बेस्ट क्वालिटी 6850 से 7251, सरसो 7200 से 7800, अलसी 8000 से 9050, तिल्ली 7000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 5000 से 7800, उड़द 4500 से 6800, चना 5200 से 5530, चना मौसमी नया 5100 से 5550, चना पेप्सी 5100 से 5701, चना डंकी पुराना 4000 से 4600, चना काबुली 5500 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल।

लहसुन 4400 से 15500, ऊटी लहसुन 15000 से 16500, मैथी 5800 से 6400, धनिया बादामी 11000 से 11500, धनिया ईगल 11500 से 12200, धनिया रंगदार 13000 से 14500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोमवती अमावस्या को बंद रहेगी मंडी

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में 15 जून को सोमवती अमावस्या का अवकाश रहेगा। यह जानकारी कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के महामंत्री महेश खंडेलवाल ने दी। उन्होंने किसानों से अवकाश के दिन मंडी में अनाज नहीं लाने की अपील की है।