कोटा। तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महापर्व का शुभारंभ बुधवार को ध्वजारोहण एवं मांगलिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक हुआ। कार्यक्रम मुनि निरोग सागर महाराज, मुनि निर्मोह सागर महाराज, मुनि निरामय सागर महाराज तथा मुनि निर्भीक सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है।
श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर समिति के महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि महापर्व के अंतर्गत 3 दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत क्रम से प्रथम दिन आचार्य छत्तीसी विधान, भक्तामर विधान, श्रुत स्कंध विधान का आयोजन किया जाएगा । निरोग सागर ने बताया कि आचार्य पद के 36 गुणों की आराधना एवं स्मरण हेतु ‘आचार्य छत्तीस महामंडल विधान’ का आयोजन किया जाता है।
विधान में आचार्य भगवान के गुणों का स्तवन, पूजन एवं अर्घ्य समर्पण कर उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी जाती है। साथ ही मुनि श्री ने आचार्य परमेष्ठि के 36 मूलगुणों में त्रिगुप्ति, पंचाचार, षट् आवश्यक, 12 तप एवं 10 धर्मों का विशेष महत्व बताया गया। कार्यक्रम के दौरान ध्वजारोहण का सौभाग्य वंदना बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ।
सौधर्म इंद्र के रूप में अजय जैन एवं उपेंद्र जैन (सीए) परिवार तथा द्रव्य पुण्यार्जक के रूप में सुरेश हरसौरा, निर्मल हरसौरा, निहाल, राहुल एवं रोहित परिवार ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।
मुनि निरोग सागर महाराज ने आचार्य छत्तीसी विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्यत्व के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश भी दिया। वहीं मुनि निरामय सागर महाराज ने अभिषेक एवं शांतिधारा की विधियों का विस्तार से वर्णन करते हुए सही प्रक्रिया से अनुष्ठान संपन्न करने के लाभ और अतिशय बताए तथा श्रद्धालुओं को व्यवहारिक रूप से इसकी जानकारी प्रदान की।
विधान की समस्त मांगलिक क्रियाएं भैयाजी, आदि कुमार जी एवं अनिल डाबी के निर्देशन में संपन्न हुईं। आयोजन में सकल जैन समाज के जे.के. जैन, मनोज जैसवाल, पारस सोगानी, मंदिर समिति के राजकुमार लुहाड़िया, मनोज पाटनी, शुभम लुहाड़िया, पिंकेश सांवला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

