Saturday, June 13, 2026
Home Blog Page 8

विवाह पूर्व सहमति से शारीरिक संबंध बनाना चरित्र पर दाग नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में कहा है कि अगर दो अविवाहित वयस्क आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं तो वह उन दोनों में से किसी के भी चरित्र पर काला धब्बा बताने का आधार नहीं हो सकता है।

कोर्ट ने दो टूक कहा कि उनके आपसी रिश्ते किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में गलत राय बनाने का कारण और आधार नहीं हो सकते हैं। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह भी कहा कि हर रिश्ता शादी में नहीं बदलता और सिर्फ़ इसलिए कि कोई रिश्ता शादी में नहीं बदला, यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है।

पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल पद पर चयन एक असफल प्रेम संबंध से जुड़े आपराधिक मामले में संलिप्तता के कारण रद्द कर दिया गया था।

पीठ ने कहा, ”दो अविवाहित वयस्कों के बीच सहमति से बने शारीरिक संबंध उस संबंध में शामिल लोगों के चरित्र के बारे में प्रतिकूल धारणा बनाने का आधार नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो अविवाहित वयस्कों को सहमति से अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो।”

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि शादी के वादे पर रेप के मामले में लोक अदालत के सामने समझौता करने का मतलब अपराध कबूल करना नहीं है। साथ ही, अगर रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि पीड़िता पर समझौता करने के लिए दबाव डाला गया था, तो नियोक्ता (employer) ऐसे समझौते से कोई गलत नतीजा नहीं निकाल सकता।

शीर्ष अदालत ने मामले में पीड़ित उम्मीदवार द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें ‘स्टाइपेंडरी कैडेट ट्रेनी पुलिस कांस्टेबल’ के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था।

तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि 2014 में उनके खिलाफ शादी का झांसा देकर बलात्कार करने का जो मामला दर्ज किया गया था, वह नैतिक पतन को दर्शाता है।

क्या है मामला
यह मामला पड़ोसी के साथ संबंध से जुड़ा है और दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा हो गया था। आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था। मामले का जिक्र करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता और पीड़िता पड़ोसी थे और लगभग चार साल तक उनके बीच संबंध थे। पीठ ने कहा, ”हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता। इसलिए, सिर्फ इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है।”

पीठ ने यह भी कहा, ”यदि यह समझौता करने के लिए बल प्रयोग या धमकी का मामला होता, तो प्रतिवादी अनुशासित बल में नियुक्ति के लिए अपीलकर्ता की उपयुक्तता पर निर्णय लेने में न्यायसंगत होता।

हालांकि, यहां ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि पीड़िता पर समझौता थोपा गया था।” शीर्ष अदालत ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र में, जब तक किसी अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक निर्दोष होने की धारणा बनी रहती है।

कमजोर उत्पादन एवं निर्यातकों की मांग नहीं होने से ईसबगोल का भाव मंदा

नई दिल्ली। भारतीय किसानों द्वारा 2025-26 के रबी सीजन में ईसबगोल की खेती अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में की गई और मौसम की स्थिति पूरी तरह अनुकूल नहीं होने से इसकी उपज दर में भी कमी आ गई। भारतीय ऑर्गनिक क्षेत्र के लिए नए नियमों- शर्तों के कारण वैश्विक बाजार में ईसबगोल (साईलियम) का निर्यात प्रभावित हो रहा है।

हैरानी की बात है कि उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद ईसबगोल का भाव नरम पड़ गया है। हालांकि प्रतिकूल मौसम तथा छोटे बिजाई क्षेत्र के कारण वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान ईसबगोल एवं इसकी भूसी के दाम में कुछ तेजी आई थी। भारी बेमौसमी वर्षा एवं आंधी-तूफान के कारण इसके उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान है लेकिन पिछला बकाया स्टॉक ऊंचा होने के कारण बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है।

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार मूंदड़ा बंदरगाह पर जून 2025 में ईसबगोल भूसी (99 प्रतिशत) का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य औसतन 8720 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा था जो दिसम्बर 2025 तक आते-आते घटकर 7750 डॉलर प्रति टन के करीब रह गया। ध्यान देने की बात है कि जून 2024 में ईसबगोल भूसी (99%) का निर्यात ऑफर मूल्य उछलकर 10,200 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया था और दिसम्बर 2024 में भी यह 9400 डॉलर प्रति टन के ऊंचे स्तर पर कायम था।

मार्च 2026 में ईसबगोल के घरेलू उत्पादन में 20 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया गया था लेकिन उसके बाद मौसम खराब होने से उत्पादन में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी आने की संभावना व्यक्त की जाने लगी। इससे ईसबगोल भूसी का निर्यात ऑफर मूल्य मार्च में बढ़कर 8150 डॉलर प्रति टन पर पहुंचा मगर मांग मजबूत नहीं होने के कारण मई 2026 में यह घटकर 7850 डॉलर प्रति टन पर आ गया।

वर्तमान समय में फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य ईसबगोल भूसी 99 प्रतिशत का 7850 डॉलर प्रति टन, 98 प्रतिशत का 6000 डॉलर तथा 95 प्रतिशत का 5090 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है। इसी तरह ईसबगोल भूसी पाउडर का निर्यात ऑफर मूल्य 99 प्रतिशत क्वालिटी का 6520 डॉलर, 98 प्रतिशत का 5550 डॉलर प्रति टन और 95 प्रतिशत का 4410 डॉलर प्रति टन चल रहा है।

सरकारी एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लिए एक नया नियम लागू किया गया है जिससे इसकी डिलीवरी में देर हो सकती है और ऑर्गेनिक ईसबगोल भूसी का अभाव पैदा हो सकता है।

पूर्व प्रचलित नियम के विपरीत अब केवल उत्पादक समूह को ही नहीं बल्कि छोटे-बड़े सभी किसानों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। इस रजिस्ट्रेशन की समय सीमा तो बढ़ा दी गई है मगर इस नियम से छोटे-छोटे उत्पादक काफी परेशान हैं और वे सही ढंग से माल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

Market: सेंसेक्स 719 अंक टूटकर 73600 के नीचे बंद, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। Stock Market Closed : पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से आज एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा। बीएसई सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 अंक की गिरावट के साथ 73,524.26 अंक पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 243.70 अंक 10.4 फीसदी टूटकर 23,123 अंक पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों को करीब 5 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

सेंसेक्स की आज 30 में से 24 कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व के शेयरों में 2-2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। बिकवाली के इस माहौल में पावरग्रिड, भारती एयरटेल, बीईएल, टेक महिंद्रा, एसबीआई के शेयरों का दाम आज बढ़ा है।

बड़े इंडेक्स के साथ-साथ व्यापक बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.66 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम आकार के शेयरों में भी भारी बिकवाली रही।

सेक्टोरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट
सेक्टोरल फ्रंट पर लगभग सभी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी रियल्टी, मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया, जहां 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एकमात्र सेक्टर जिसने मजबूती दिखाई वह निफ्टी हेल्थकेयर रहा, जो पूरे बाजार के विपरीत हरे निशान में बंद हुआ।

टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मांगी मान्यता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधायक दल में बिखराव के बाद टीएमसी संसदीय दल में टूट कन्फर्म हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है।

सांसदों ने अपने पत्र में बताया है कि वह एनडीए में शामिल होना चाहते हैं। हस्ताक्षर करने वालों में अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी राॅय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल, सुवेंदु शेखर रॉय समेत 20 सांसद बताए जा रहे हैं। बागी गुट की नेता के तौर काकोली घोष दस्तीदार को मान्यता देने की मांग की गई है।

टीएमसी के लोकसभा में सदस्य की सूची में अभिषेक बनर्जी, शताब्दी रॉय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, देव अधिकारी, सजदा अहमद, रचना बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, महुआ माेइत्रा, जगदीश बसुनिया, सायोनी घोष, माला रॉय, सुदीप बंधोपाध्याय, बापी हल्दर, प्रो. सौगत राय, अरूप चक्रवर्ती, जून मालियाह, कल्पित दा, सरेन खेरवाल, मिताली बेग, कल्याण बनर्जी, पार्थ भौमिक, असित कुमार मल, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद, डॉ. शर्मिला सरकार, यूसुफ पठान, अबु तहेर खान एवं खर्लीलुर रहमान के नाम शामिल हैं।

सांसदों ने मीटिंग के बाद बनाया गुट
लोकसभा अध्यक्ष को अलग गुट की मान्यता देने की चिट्ठी लिखने से पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बागियों की मीटिंग हुई। मीटिंग में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे। बाद में सुखेंदु शेखर रॉय ने सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और टीएमसी छोड़ने की घोषणा की।

उन्होंने बताया कि मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। विधानसभा में विधायक दल में टूट पर हो रहे दावों पर सुखेंदु रॉय ने कहा कि क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?

ममता बनर्जी की घट गई ताकत
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल में बगावत उस समय हुई है, जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इंडिया गठबंधन की मीटिंग में बीजेपी के खिलाफ एकजुटता दिखा रहे थे। टीएमसी सांसदों में संभावित बगावत को रोकने के लिए पहले अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंचे थे। उसके बाद शनिवार शाम को ममता बनर्जी दिल्ली पहुंची थी, लेकिन टीएमसी सांसदों की टूट को नेतृत्व नहीं रोक पाया। विधायकाें के बाद सांसदों के अलग गुट बना लेने से ममता बनर्जी की टीएमसी को तगड़ा झटका लगा है। वे महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे वाली स्थिति में आ गई हैं।

पश्चिम एशिया में फिर जंग; भारतीय नागरिक ईरान से जल्दी निकलें बाहर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में एक बार फिर जंग भड़क उठी है। सोमवार को ईरान और इजरायल ने एक दूसरे पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं। इसके बाद अब भारत ने क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को सतर्क कर दिया है।

भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है और भारतीयों को जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने की सलाह दी है। सरकार ने भारतीयों से ईरान की यात्रा न करने की भी अपील की है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी में सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने को कहा गया है। दूतावास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, “क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों और बिगड़ते हालातों को देखते हुए, दूतावास सभी भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने की सलाह को दोहराता है। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में हैं, उन्हें भी सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह तुरंत देश से बाहर निकलें।”

इससे पहले पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर कोई अच्छी खबर आने से पहले ही ईरान ने रविवार देर रात इजरायल पर हमला कर दिया। ईरान के मुताबिक उसने लेबनान पर इजरायली हमलों के जवाब में यह हमला किया है। वहीं ईरान की ओर से मिसाइल दागे जाने के बाद जवाबी कार्रवाई में इजराइल ने भी सोमवार तड़के तेहरान सहित कई अन्य जगहों पर हवाई हमले किए।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने खबर में बताया कि इस्फहान, करज, तबरीज और तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। तेहरान में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि राजधानी के पश्चिमी हिस्से में कम से कम एक बड़े धमाके की आवाज सुनाई दी।

इजराइली हमलों के बाद ईरान ने तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है। ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने यह भी कहा है कि इजराइल ने सोमवार सुबह के हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।

Samsung Galaxy S26 FE फोन के लॉन्च से पहले फीचर्स और कीमत लीक

नई दिल्ली। Samsung Galaxy S26 FE फ़ोन से जुड़ी कई डिटेल लॉन्च से पहले ऑनलाइन लीक हुए हैं। इसके डिजाइन और स्पेसिफिकेशंस की पहली झलक देखने को मिली है। खास बात यह है कि इस बार Samsung अपने किफायती फ्लैगशिप फोन को प्रीमियम Galaxy S26 सीरीज जैसा लुक देने की तैयारी में है।

लीक्स के अनुसार Galaxy S26 FE में नया डिजाइन, दमदार Exynos 2500 प्रोसेसर, 120Hz AMOLED डिस्प्ले, ट्रिपल रियर कैमरा और फास्ट चार्जिंग जैसी कई शानदार खूबियां देखने को मिल सकती हैं। फोन Android 17 और One UI 9 के साथ आ सकता है, जिससे यूजर्स को नए AI फीचर्स और बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव मिलेगा।

अगर ये जानकारियां सही साबित होती हैं, तो Galaxy S26 FE उन लोगों के लिए एक शानदार ऑप्शन बन सकता है जो फ्लैगशिप जैसा अनुभव चाहते हैं लेकिन Ultra मॉडल पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते।

फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस
Samsung Galaxy S26 FE इस बार डिजाइन और हार्डवेयर दोनों मामलों में बड़ा अपग्रेड लेकर आ सकता है। फोन का लुक Galaxy S26 सीरीज और Galaxy Z Fold 7 जैसा है। इसके रियर पैनल पर नया कैमरा आइलैंड डिजाइन देखने को मिल सकता है, जहां कैमरे ऊपर बाईं तरफ एक उभरे हुए मॉड्यूल में दिए जाएंगे।

फोन में प्रीमियम एल्युमिनियम फ्रेम और Gorilla Glass प्रोटेक्शन मिलने की उम्मीद है, जिससे इसकी मजबूती और लुक दोनों बेहतर हो सकते हैं।

डिस्प्ले की बात करें तो Galaxy S26 FE में 6.7 इंच का Dynamic AMOLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करेगा। स्क्रीन को Gorilla Glass की सुरक्षा भी मिल सकती है, जिससे यह स्क्रैच और हल्के झटकों से सुरक्षित रहेगी। परफॉर्मेंस के लिए Samsung का नया Exynos 2500 प्रोसेसर मिलने की चर्चा है। Geekbench लिस्टिंग के अनुसार फोन 8GB RAM के साथ आ सकता है और Android 17 आधारित One UI 9 पर रन करेगा।

कैमरा सेक्शन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की संभावना है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर, 12MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और 8MP का 3x टेलीफोटो लेंस शामिल हो सकता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 12MP का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है।

बैटरी की बात करें तो फोन में 4,900mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है, जो 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी। इसके अलावा Qi 2.2.1 वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट भी मिल सकता है।

Samsung Galaxy S26 FE की कीमत
कीमत की बात करें तो रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Galaxy S26 FE की शुरुआती कीमत लगभग 650 डॉलर यानी करीब 64,999 रुपए हो सकती है। हालांकि बढ़ती कंपोनेंट लागत की वजह से पिछले मॉडल के मुकाबले हल्की कीमत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। लॉन्च टाइमलाइन की बात करें तो फोन के अगस्त 2026 के आसपास लॉन्च होने की उम्मीद है, लेकिन Samsung की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान

नई दिल्ली। भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में घटकर 6.5 फीसदी रहने की आशंका है जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित 7.7 फीसदी से काफी कम है।

यह अनुमान 10 अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मॉनसून के सामान्य से कम रहने की आशंका का आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की बात कही गई है।

सर्वेक्षण में शामिल एजेंसियों में क्वांटइको रिसर्च का नजरिया सबसे अधिक निराशावादी है और उसने 6.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को अर्थव्यवस्था के 6.8 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

फरवरी के आखिर में शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उत्पादन पर सीमित प्रभाव पड़ा था और वृद्धि दर 7.8 फीसदी पर अनुमान से बेहतर रही। मगर अर्थशात्रियों ने आगाह किया है कि इस उथल-पुथल का पूरा असर दिखना अभी बाकी है।

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, ‘आगामी तिमाहियों में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल में उबाल और मूल्य दबाव के दूसरे दौर के पूर्ण प्रभाव दिखने की उम्मीद है।’ केयरएज रेटिंग्स का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि 6.7 फीसदी रहेगी बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार रहे। मगर उसने आगाह किया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहीं तो जीडीपी वृद्धि गिरकर 6.5 फीसदी तक जा सकती है।

इक्रा ने कच्चे तेल की कीमत औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए अनुमान जाहिर किया है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी के दायरे में रहेगी। उसका कहना है कि ईंधन की ऊंची कीमतें कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव डालेंगी।

इससे निवेश की धारणा कमजोर होगी और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति घट जाएगी। उसने एक शोध पत्र में कहा है, ‘इसके अलावा अल नीनो की आशंका और 2026 के लिए कमजोर मॉनसून के पूर्वानुमान से कृषि परिदृश्य कमजोर हुआ है।

साथ ही इसने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही के लिए ग्रामीण मांग की संभावनाओं को भी धूमिल कर दिया है।’ गौरतलब है कि इक्रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 12 फीसदी से अधिक हो जाएगी जो वित्त वर्ष 2026 में 8.9 फीसदी थी। इसकी मुख्य वजह थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी से हुई बढ़ोतरी होगी।

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ‘बाजार संभवतः पिछली अवधि के आंकड़ों से आगे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में संभावित स्पिलओवर जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।’ डीबीएस बैंक ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है। राव ने कहा कि अगर मुद्रास्फीति का रुझान उनकी तिमाही अनुमानों के अनुरूप रही तो नीति निर्माता ब्याज दरों में वृद्धि कर सकते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 5 जून को समाप्त हुई अपनी समीक्षा बैठक में वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को गिरावट के जोखिम के साथ 6.6 फीसदी रखा। मगर उसने मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने शुक्रवार को जारी जीडीपी अनुमानों के बाद अपने पूर्वानुमान को 6.5–6.8 फीसदी से घटाकर 6.4–6.6 फीसदी कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘यह पूर्वानुमान आरबीआई के अनुमानों पर भी आधारित है। साथ ही हमने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा है कि कृषि उपज प्रभावित होगी।’

सबनवीस ने आर्थिक वृद्धि की राह में तीन बाधाओं का उल्लेख किया: कृषि उपज में कमी, सरकार के व्यय में संभावित कमी और बैंक ऋण वृद्धि में नरमी की आशंका। उनका कहना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान है जिससे कृषि वृद्धि के अनुमान को 2.5-3 फीसदी से घटाकर 2-2.5 फीसदी कर दिया गया है।

आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और युद्ध संबंधी अनिश्चितता के कारण निवेश और खपत दोनों के प्रभावित होने से बैंकों के ऋण वितरण में नरमी आएगी। सबनवीस ने जोर देकर कहा, ‘कृषि अभी भी प्रमुख कारक बनी हुई है।’

राजस्थान सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद 12 जून तक बढ़ाई

कोटा। भारतीय किसान संघ की मांग पर सभी पंजीकृत किसानों से खरीद करने हेतु लक्ष्य बढ़ाकर खरीद अवधि 12 जून तक बढ़ाई गई है। 3 जून को ज्ञापन भेजने, 4 जून को शासन सचिव से प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात व 7 जून को सुबह प्रमुख शासन सचिव से हुए संवाद के दौरान संगठन की ओर से किसानों की इसी मांग को दोहराया था।

इस दौरान विभागीय अधिकारियों की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिया था। आज संगठन की मांग अनुसार जिलेवार वंचित किसानों के अनुसार आवश्यक लक्ष्य आवंटन कर खरीद अवधि बढ़ाई है जिससे पंजीकृत सभी वंचित किसानों से खरीद होने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया में तनाव से सेंसेक्स 925 अंक गिरा, निवेशकों को 5 लाख करोड़ की चपत

नई दिल्ली। Stock market crash: ईरान और अमेरिका-इजराइल की जंग एक बार फिर से शुरू हो गई है। इस तनाव भरे माहौल से भारत समेत दुनियाभर के निवेशक सहमे हुए हैं। इसका असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। सभी सेक्टर्स में गिरावट से निवेशकों को 5 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 925 अंक तक टूट गया। यह गिरावट मार्केट ओपन होने के 30 मिनट के भीतर देखी गई। इस दौरान सेंसेक्स 73,350 अंक के नीचे भी आ गया। निफ्टी की बात करें तो करीब 300 अंक टूटकर 23,100 अंक के नीचे आ गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी50 इंडेक्स भी 250 अंक से ज्यादा फिसल गया। सुबह 9.20 बजे 784.77 अंक यानी 1.06% गिरावट के साथ 73,458.57 अंक पर आ गया। निफ्टी 234.80 अंक यानी 1% टूटकर 23,131.90 अंक पर आ गया।

सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर गिरावट के साथ खुले। इंडिगो में सबसे ज्यादा 1.98 फीसदी गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटरनल, एनटीपीसी, टीसीएस, बीईएल और लार्सन एंड टुब्रो में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। केवल टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयर तेजी के साथ खुले।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • गिफ्ट निफ्टी
    गिफ्ट निफ्टी 23,096 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले निफ्टी फ्यूचर्स बंद स्तर से करीब 356 अंक नीचे है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार सोमवार को तेज गिरावट के साथ खुल सकते हैं।
  • एशियाई बाजार
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 करीब 3.7% टूटा और टॉपिक्स इंडेक्स 2.4% गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8.4% और कोस्डैक में 7% से ज्यादा की गिरावट आई। वहीं, हांगकांग बाजार में भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले।
  • वॉल स्ट्रीट
    अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को जोरदार गिरावट के साथ बंद हुए। टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के चलते नैस्डैक अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज करने में रहा। डॉऊ जोंस 695 अंक टूटा और एसएंडपी 500 में 2.64% की गिरावट रही। नैस्डैक भी 4.18% फिसल गया।
  • बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। एनवीडिया में 6.2% और AMD में 10.9% की गिरावट दर्ज की गई। टेस्ला 6.6% लुढ़का और मेटा 5.5% कमजोर रहा। अमेजन में 3% और माइक्रोसॉफ्ट 2.7% नीचे रहा।

MCX पर सोना 2000 रुपये और चांदी 6200 रुपये गिरी, जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। Gold Silver Price Today : सोने-चांदी के भाव में आज सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज 10 ग्राम गोल्ड का रेट 153596 रुपये पर आ गया। इसमें 2004 रुपये की गिरावट है। जबकि, चांदी के रेट 6200 से अधिक गिरकर 2.41 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं।

सुबह साढ़े नौ बजे के करीब सोने का वायदा भाव 0.90 प्रतिशत नीचे 154200 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का वायदा भाव 1.70 प्रतिशत नीचे 2.44 लाख रुपये प्रति किलो चल रहा था।

वैश्विक बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की बढ़ती आशंकाओं के कारण निवेशकों का रुझान सोने से दूर होता दिख रहा है।

स्पॉट गोल्ड 0.2 प्रतिशत गिरकर 4,321.49 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले शुक्रवार को सोने में करीब 3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई थी और कीमतें 24 मार्च के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।

गोल्ड फ्यूचर्स भी फिसले: अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखने को मिली। यह 0.5 प्रतिशत गिरकर 4,345.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़े आने के बाद यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या आगे और सख्ती कर सकता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।