कोटा-बूंदी में जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम होगा शुरू, क्रिटिकल कॉरिडोर चिन्हित

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‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ ने प्रस्तुत की रिसर्च रिपोर्ट, सड़क दुर्घटना में प्रति वर्ष 400 मौतें

नई दिल्ली/ कोटा। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को संसद भवन स्थित कार्यालय में संसदीय क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक ली।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के प्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक का उद्देश्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में “जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम” को प्रभावी ढंग से लागू कर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर तक लाना तथा दीर्घकालिक रूप से शून्य मृत्यु दर (जीरो फेटेलिटी) सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना था।

बैठक के दौरान बिरला ने कहा कि सड़क हादसों में सबसे अधिक जानें युवाओं की जाती हैं, जो न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि राष्ट्र की उत्पादक शक्ति का भी नुकसान है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है और इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है।

बिरला ने कहा कि हमारा लक्ष्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र को एक आदर्श “जीरो फेटेलिटी मॉडल” के रूप में विकसित करना है। बैठक में ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत रिसर्च रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की गई।

फाउंडेशन ने बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है। अध्ययन में ऐसे 21 अति गंभीर सड़क कॉरिडोर (Critical Corridors) चिन्हित किए गए हैं, जहां लगभग 50 प्रतिशत सड़क दुर्घटना जनित मौतें होती हैं।

इसके अतिरिक्त, 19 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां बार-बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के कारण लगभग 25 प्रतिशत मौतें होती हैं। वहीं 12 अत्यंत संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है, जहां लगभग 20 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतें दर्ज की गई हैं।

फाउंडेशन ने यह भी बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र के लगभग 60 पुलिस थाना क्षेत्रों में से 25 थाना क्षेत्र ऐसे हैं जहां कुल सड़क दुर्घटना मृत्यु का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है।

अध्ययन के अनुसार तेज गति और खतरनाक ओवरटेकिंग जैसी लापरवाह ड्राइविंग लगभग 24 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतों का प्रमुख कारण है। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में कोटा-बूंदी क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), शहरी स्थानीय निकायों, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

इसमें दुर्घटना संभावित स्थलों पर इंजीनियरिंग सुधार, सड़क सुरक्षा ऑडिट, ऑन-साइट निरीक्षण, ट्रैफिक प्रबंधन, संकेतक व्यवस्था, ब्लैक स्पॉट सुधार, पैदल यात्रियों की सुरक्षा तथा स्थानीय स्तर पर संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। राजमार्गों के किनारे स्थित स्कूलों के बच्चों को भी सड़क दुर्घटनाओं से बचाने पर चर्चा हुई।

दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में चर्चा की गई कि दुर्घटना के बाद पीड़ित को अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाले समय को कैसे कम किया जाए, एम्बुलेंस सेवाओं को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाए तथा ट्रॉमा केयर प्रणाली को किस प्रकार मजबूत किया जाए।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा में पहले से स्थापित कमांड एवं कंट्रोल सेंटरों का अधिकतम उपयोग कर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील स्थलों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस बैठक में सेव लाइफ फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ लोक सभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश गोयल भी उपस्थित रहे।