Saturday, July 11, 2026
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भारतनेट परियोजना का दूसरा चरण शुरू, मिलेगी तेज इंटरनेट की सुविधा

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नई दिल्ली। देश की सभी ग्राम पंचायतों को भी हाई स्पीड इंटरनेट ब्रॉडबैंड की सुविधा मिल सके, इसके लिए सोमवार को भारतनेट परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत की गई।

इसके दूसरे चरण के अंतर्गत वर्ष 2019 तक देश की सभी पंचायतों को हाई स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर और वोडाफोन इंडिया समेत दूरसंचार क्षेत्र की अन्य कंपनियों ने हिस्सा लिया है।

केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ मिलकर भारतनेट के महात्वाकांक्षी दूसरे चरण की घोषणा की।

इस अवसर पर सिन्हा ने कहा कि सरकार ने भारतनेट परियोजना के लिए बैंडविथ की कीमत 75 फीसदी घटा दी है जिससे दूरसंचार ऑपरेटरों को सस्ती दरों पर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

Jio ने दिया 13 करोड़ का चेक
भारतनेट में शामिल होने के लिए रिलायंस जियो ने 30,000 ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए सबसे अधिक 13 करोड़ रुपये के अग्रिम का चेक दिया।

रिलायंस जियो के निदेशक महेंद्र नहाटा ने चेक सौंपने के बाद बताया कि कंपनी ने प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए सरकार से बैंडविद्थ खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ यह चेक दिया क्योंकि कंपनी अपनी परियोजना का विस्तार करना चाहती है।

सरकार बिछाएगी ऑप्टिकल फाइबर
भारतनेट के दूसरे चरण में सरकार डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाएगी। इस परियोजना में शामिल होने के लिए भारती एयरटेल ने 30,500 ग्राम पंचायतों को कवर करने हेतु बैडविद्थ के लिए पांच करोड़ रुपये दिए, वहीं वोडाफोन ने 11 लाख रुपये और आइडिया सेल्युलर ने पांच लाख रुपये दिए।

भारत-22 ETF आज खुलेगा, 8000 करोड़ जुटाने की योजना

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नई दिल्ली। भारत-22 ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) निवेशकों के लिए मंगलवार से खुल रहा है। यह 17 नवंबर को बंद होगा। इस ईटीएफ के जरिये सरकार का इरादा 8,000 करोड़ रुपये जुटाने का है।

यह ईटीएफ 22 ब्लूचिप कंपनियों का एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो होगा। यह सरकार के समग्र विनिवेश कार्यक्रम का एक हिस्सा है।

भारत 22 ईटीएफ में किसको क्या मिलेगा: इसमें हर कैटेगरी के निवेशक को 3 फीसदी तक का अपफ्रंट डिस्काउंट मिलेगा। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए 14 नवंबर को एनएफओ खुलेगा वहीं रिटेल निवेशकों के लिए ये 15 नवंबर से 17 नवंबर तक खुलेगा।

भारत 22 में कौन कौन कंपनियां शामिल: भारत-22 ईटीएफ में सीपीएसई, पीएसयू बैंक और एसयूयूटीआई की कंपनियां शामिल होंगी।

अगर सीपीईसी की बात करें तो इसमें कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, आईओसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, पीएफसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी, गेल, एनर्जी इंडिया लिमिटेड, रुरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हैं।

वहीं भारत-22 ईटीएफ में 6 सेक्टर भी शामिल होंगे। ये आधारभूत सामग्री, ऊर्जा, वित्त, एफएमसीजी, औद्योगिक और उपभोक्ता सेवा से जुड़ी कंपनियां हैं।

भारत-22 ईटीएफ में सेक्टोरल शेयर लिमिट 20 फीसदी तय की गई है, जबकि ईटीएफ में कंपनी विनिवेश पर लिमिट 15 फीसदी तय की गई है। इसमें तीन बैंक एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक शामिल हैं।

निवेश के बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट: एस्कॉर्ट सिक्योरिटी के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल ने बताया कि जिस तरह से सरकार बैंकों की हालत सुधारने के लिए राहत पैकेज देने को तैयार हुई है और उनके पुर्नगठन और पुनर्पूंजीकरण के लिए प्रयास कर रही है वो एक बेहतर संकेत है।

उन्होंने कहा कि अगर आप पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) में निवेश करना चाहते हैं तो भारत-22 ईटीएफ एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि सारे पीएसयू में निवेश करना हर किसी के बस में नहीं होता है। भारत-22 ईटीएफ के जरिए छोटे निवेशक भी पीएसयू में निवेश के अपने सपने को पूरा कर सकते हैं।

आसिफ ने बताया कि अगर केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे सुधारों से पीएसयू की स्थिति में सुधार या बेहतरी दिखती है तो भारत-22 ईटीएफ में निवेश फायदे का सौदा साबित हो सकता है, लेकिन अगर इसके उलट तमाम सुधारों के बावजूद सरकारी बैंकों की खराब हालत जस की तस बनी रहती है तो इसमें निवेश से आपको कोई फायदा नहीं होगा।

ई-पेमेंट से खरीद पर जीएसटी में दो फीसद छूट का विचार

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नई दिल्ली । डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के इरादे से सरकार जीएसटी में छूट देने पर विचार कर रही है। इसके तहत किसी भी वस्तु या सेवा की खरीद पर डिजिटल पेमेंट किया जाता है तो लोगों को दो फीसद की रियायत मिलेगी।

वित्त मंत्रालय का मानना है कि छूट से सालाना 10 से 25 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने डिजिटल पेमेंट पर जीएसटी में दो फीसद छूट (सीजीएसटी और एसजीएसटी में एक-एक फीसद) का प्रस्ताव जीएसटी काउंसिल को भेजा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में काउंसिल की 10 नवंबर को गुवाहाटी में हुई बैठक के एजेंडा में यह प्रस्ताव शामिल किया गया था। हालांकि समय का अभाव होने के चलते इस पर चर्चा नहीं हो पायी थी।

इससे पहले काउंसिल की फिटमेंट कमेटी ने भी 30 अक्टूबर को इस पर विचार किया था लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई। वैसे केंद्र के इस प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की राय भी जुदा है।

उनकी चिंता इस प्रस्ताव के चलते होने वाली राजस्व हानि को लेकर है। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि डिजिटल भुगतान पर अगर जीएसटी में दो प्रतिशत की छूट दी जाती है तो इससे सरकार के खजाने को 10,800 करोड़ों रुपए से लेकर के करीब 26,000 करोड रुपए तक राजस्व हानि हो सकती है। 

आइटी मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2016-17 में कुल 1076 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए थे और प्रत्येक ट्रांजैक्शन का औसत मूल्य 1833 रुपये है।

ऐसे में मंत्रालय का मानना है कि अगर वर्ष 2017-18 में कुल ट्रांजैक्शनों की संख्या बढ़कर 1800 करोड़ हो जाए और ट्रांजैक्शन की औसत राशि 1500 से 1800 रुपये हो तो इससे खजाने पर 10,800 रुपये से लेकर 26,000 करोड़ का प्रभाव पड़ेगा।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने कार्ड, वॉलेट और ऑनलाइन भुगतान करने पर जीएसटी में दो प्रतिशत छूट का प्रस्ताव किया है।

प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर अधिकतम छूट सिर्फ 100 रुपये की होगी। हालांकि यह सुविधा कंपोजीशन स्कीम के तहत पंजीकृत व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं होगी।

इसके पीछे सरकार की सोच दरअसल यह है कि अगर कोई ग्राहक कैश में भुगतान करता है तो उसे पूरा जीएसटी देना होगा और यदि वह डिजिटल भुगतान करता है तो उसे दो फीसदी कम जीएसटी देना पड़ेगा।

दाऊद इब्राहिम की 6 संपत्तियां की नीलामी हुई शुरू

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मुंबई। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की मुंबई में मौजूद संपत्ति की नीलामी मंगलवार को शुरू हो गई है। सभी संपत्तियों की नीलामी की आधार कीमत 5.5 करोड़ रुपये रखी गई है। इस नीलामी की निविदा प्रक्रिया 10 नवंबर को समाप्त हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक नीलामी के लिए देश भर के करीब 10 निवेशकों ने आवेदन किया है, जिसमें सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट (एसबीयूटी) ने तीन संपत्तियों के लिए आवेदन किया है। यह नीलामी चर्चगेट स्थित आईएमसी बिल्डिंग में सुबह 10 बजे शुरू होगी। नीलामी का आयोजन स्मगलर ऐंड फॉरेन ऐक्सचेंज मैनीपुलेटर्स (फॉरफीचर ऑफ प्रॉपर्टी) ऐक्ट ‘साफीमा’ के तहत होगा।

मुंबई में दाऊद इब्राहिम की 6 संपत्तियां हैं, जिनकी नीलामी हो रही है। इसमें अफरोज होटल, डांबर बिल्डिंग और शबनम गेस्ट हाउस सहित कुछ 6 संपत्तियां शामिल हैं। एसबीयूटी मुंबई के भिंडी बाजार में पुनर्वसन परियोजना पर काम कर रहा है। एसबीयूटी ने अफरोज होटल, शबनम गेस्ट हाउस और डांबर बिल्डिंग के लिए टेंडर भरा है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग ने विज्ञापन के जरिए नीलामी की जानकारी दी है। राजस्व विभाग ने 14 नवंबर को होने वाली इस नीलामी के लिए बंद लिफाफे में निविदाएं मांगी थीं। इनमें से हर संपत्ति की आरक्षित कीमत एक से डेढ़ करोड़ रुपये के बीच है।

इस तरह इनका कुल आधार मूल्य करीब 5 से साढ़े करोड़ रुपये है। नीलामी में शामिल होने वालों को 10 नवंबर तक अपना ब्योरा एसएएफईएमए या एनडीपीएसए विभाग को देना था।

पहले भी हुई होटल की नीलामी
होटल रौनक अफरोज की नीलामी साल 2015 में भी हुई थी, तब पूर्व पत्रकार बालाकृष्णन ने 30 लाख डिपॉजिट भरने के बाद ऊंची बोली लगाकर नीलामी अपने नाम की थी। लेकिन, 3.98 करोड़ की बकाया रकम नहीं भर पाने की वजह से नीलामी रद्द हो गई थी।

इतना रखा आधार मूल्य

  • भिंडी बाजार में बनी डबल स्टोरी बिल्डिंग का आधार मूल्य 1 करोड़ 21 लाख रुपये है।
  • भिंडी बाजार में ही बने होटल रौनक अफरोज के लिए 1 करोड़ 18 लाख रुपये का आधार मूल्य रखा है।
  • मुंबई के पर्ल हार्बर में बने एक फ्लैट का आधार मूल्य 92 लाख 69 रुपये हजार है।
  • मुंबई की याकूब स्ट्रीट में बने फ्लैट्स का आधार मूल्य 1 करोड़ 55 लाख रुपये है।

सेंसेक्स 33,019 और निफ्टी 10,222 अंकों पर खुले

नई दिल्ली। मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ खुलने के बाद शेयर बाजार थोड़ी देर के कारोबार में ही गेन करने लगा। 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 14.55 कमजोर होकर 33,019.01 पर खुला जबकि 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी सूचकांक 3 पॉइंट गिरकर 10,222 पर खुला।

आज के शुरुआती कारोबार में कोल इंडिया, वेदांता, बीपीसीएल, एलऐंडटी और भारती इन्फ्राटेल जैसे शेयरों पर दबाव दिखा। इधर, सन फार्मा, एचसीएल टेक्नॉलजीज, भारती एयरटेल, एमऐंडएम, ल्युपिन, यस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और आइशर मोटर्स जैसे शेयरों में मजबूती देखी गई। सोमवार को जबर्दस्त तेजी हासिल करनेवाले जस्ट डायल के शेयर आज डेढ़ पर्सेंट तक कमजोर हुए।

कमजोर नतीजों के कारण मंगलवार के शुरुआती कारोबार में पीटीसी इंडिया फाइनैंशल, धनलक्ष्मी बैंक, यूनाइटेड बैंक, जिंदल पॉली और टीएनपीएल के शेयर 1 से 8 प्रतिशत तक गिर गए। रेपको होम, सैटिन क्रेडिटकेयर, केईआई इंडस्ट्रीज और एनएमडीसी के शेयरों पर भी दबाव देखा जा रहा है।

इधर वैकरैंगी, फ्यूचर रिटेल और अपोलो हॉस्पिटल 2 से 4 प्रतिशत मजबूत हुए। 9:39 बजे तक बाटा के शेयर 2.06 प्रतिशत चढ़ चुके थे। वहीं, सेंसेक्स फिर से 0.91 पर्सेंट कमजोर होकर 33,032 और निफ्टी 7.25 अंक गिरकर 10,217 पर ट्रेड कर रहा था।

वित्त मंत्री ने दिए GST रेट में और बदलाव के संकेत

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अगले राउंड में 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत वाले स्लैब पर फोकस होगा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी रेट्स में और फेरबदल का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार के राजस्व को देखते हुए ऐसा किया जाएगा। इसके साथ उन्होंने शुक्रवार को करीब 200 आइटम्स के टैक्स रेट में कमी को गुजरात चुनाव से जोड़ने वालों की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि ये लोग ‘बचकानी सियासत’ कर रहे हैं। चुनिंदा मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में जेटली ने कहा, ‘जीएसटी रेट्स में कमी की गुंजाइश थी। हमने चार महीने में 28 पर्सेंट वाले स्लैब में बदलाव किए हैं।’

जीएसटी को इस साल 1 जुलाई से लागू किया गया था। इसके बाद से इसकी खामियों को दूर करने के लिए जीएसटी काउंसिल की हर महीने मीटिंग हो रही है।

जेटली ने कहा, ‘भविष्य में टैक्स दरों में बदलाव सरकार के राजस्व को देखकर किया जाएगा। प्रक्रिया संबंधी बदलाव भी होंगे।’ अगले राउंड में 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत वाले स्लैब पर फोकस होगा। इनमें से हर एक में 250 आइटम्स हैं। 

उन्होंने कहा, ‘हम मार्केट की हकीकत को देखकर फैसले कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि काउंसिल का मानना है कि दरों में जो भी बदलाव हुए हैं, उनका फायदा ग्राहकों को मिलेगा।

काउंसिल ने शुक्रवार की मीटिंग में 28 प्रतिशत वाले स्लैब में 178 आइटम्स को हटाकर कुल आइटम्स की संख्या 50 कर दी थी। उन्होंने कहा कि जो लोग सिंगल जीएसटी रेट की बात कह रहे हैं, उन्हें टैरिफ स्ट्रक्चर की समझ नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘खाने के सामान पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए और ऐसा ही किया गया। वहीं, आम आदमी के इस्तेमाल वाली चीजों पर सबसे कम 5 प्रतिशत का टैक्स लगाया गया है।

जेटली ने कहा, लग्जरी और सिन प्रॉडक्ट्स, पर्यावरण और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों पर आम आदमी के इस्तेमाल वाली चीजों के बराबर टैक्स नहीं लगाया जा सकता था।’  

इसलिए जो लोग आज सिंगल रेट की बात कह रहे हैं, उन्हें जीएसटी की बुनियादी समझ नहीं है।’ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अधिकतम जीएसटी रेट 18 प्रतिशत करने की मांग की थी।

जीएसटी : रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों पर सरकार की नजर

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सीबीईसी ने फील्ड अधिकारियों को दिए रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों के पास जाने के निर्देश

नई दिल्ली। वैट एवं सर्विस टैक्स रिटर्न भरने वाले जिन व्यवसायियों ने अभी तक गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) व्यवस्था के तहत रिटर्न दाखिल नहीं की है, उनसे अब टैक्स विभाग के फील्ड अधिकारी संपर्क करेंगे। अधिकारी ऐसे व्यवसायियों की टैक्स रिटर्न भरने में होने वाली परेशानियों को दूर करेंगे तथा रिटर्न भरने के लिए कहेंगे।

जीएसटी व्यवस्था के तहत करीब एक करोड़ व्यवसायियों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन बड़ी तादाद में व्यवसायियों ने टैक्स रिटर्न फाइल नहीं की है। हालांकि इन व्यवसायियों की टैक्स देनदारी शून्य है और शायद इस वजह से व्यवसायी यह समझ रहे होंगे कि इनके लिए रिटर्न भरना जरूरी नहीं होगा। फील्ड अधिकारी इनसे मिलकर रिटर्न भरने को कहेंगे।

टैक्स विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल बोर्ड एंड एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी) ने क्षेत्रीय आयुक्तों के साथ जीएसटी व्यवस्था के तहत व्यवसायियों के जोन आधारित आंकड़े साझा किए हैं, ताकि उन व्यवसायियों तक पहुंचा जा सके, जिनको नई टैक्स व्यवस्था में रिटर्न फाइल करने में परेशानी हो रही है।

सीबीईसी के मुताबिक वैट सर्विस टैक्स व्यवस्था के तहत पंजीकृत करीब 72 लाख व्यवसायियों ने जीएसटी के तहत माइग्रेट किया है। अधिकारी ने बताया कि हमने फील्ड अधिकारियों से प्रारंभिक जीएसटीआर-3बी रिटर्न डेटा साझा किए है, ताकि यह पता लगाया जा सके कौन से व्यवसायी टैक्स का भुगतान करने के योग्य है ।

अधिकारी ने बताया कि व्यवसायियों के प्रति हमारा रवैया नरम रहेगा, क्योंकि देश में नई टैक्स व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन जिन व्यवसायियों ने जीएसटी व्यवस्था के तहत पंजीकरण तो कराया है, लेकिन रिटर्न नहीं भरी, फील्ड अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे। इसका मकसद व्यवसायियों की रिटर्न भरने में होने वाली परेशानी दूर करना है।

15 लाख व्यवसायियों ने ली कंपोजीशन स्कीम
जीएसटी व्यवस्था के तहत पंजीकृत होने वाले करीब एक करोड़ व्यवसायियों में से 15 लाख ने कंपोजीशन स्कीम ली है। ऐसे व्यवसायियों को तिमाही रिटर्न दाखिल करनी है।

बाकी बचे व्यवसायियों में से 55.87 लाख ने जुलाई की जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल कर दी है। वहीं, 51.37 लाख ने अगस्त तथा 42 लाख ने सितंबर की रिटर्न दाखिल कर दी।

20 लाख तक कारोबार करने वालों को छूट
जीएसटी व्यवस्था के तहत बीस लाख रुपए सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन से छूट दी गई है। यह सीमा वैट तथा सर्विस टैक्स के तहत सीमा से ज्यादा है।

कप्पा ने रंगारंग कार्यक्रम के साथ मनाया 19वां स्थापना दिवस

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कोटा। राजस्थान की प्रथम ब्रॉडबेन्ड प्रदाता कंपनी कप्पा इन्टरनेट सर्विसेज़ प्रायवेट लिमिटेड का 19वां स्थापना दिवस शनिवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ इंद्रप्रस्थ इन्डस्ट्रियल एरिया रोड न. 1 पर स्थित सिओना रेस्टोरेंट पर मनाया। जिसमें कम्पनी के सदस्यों सहित कोटा के गणमान्य लोंगो ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक कृष्ण कान्त अग्रवाल ने बताया कि 1999 से कार्यरत कप्पा डायलअप इन्टरनेट के युग से शुरू कर आज स्मार्ट होम व इन्टरनेट ऑफ थिंग्स के युग में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है और तकनीकी रूप से पूर्णतया सक्षम है।  आज डाटा युग है जिसमें उपभोक्ता को निर्बाध व तेज स्पीड इन्टरनेट के साथ साथ स्मार्ट होम भी चाहिए।

अग्रवाल ने बताया कि कप्पा आज मल्टीस्टोरी, टाउनशिप्स इत्यादि में अत्याधुनिक जिपोन तकनीक के द्वारा एक ही वायर पर ट्रिपल प्ले यानी की डाटा, वॉयस व टीवी कन्वर्जेन्स सोल्यूशन्स दे रहा है, जिससे कि बिल्डिंग्स में मल्टी केबल्स, मल्टी डिश, वायर्स इत्यादि हट जाती है और सभी सुविधाएं एक ही ओएफसी पर उच्च तकनीक से दी जाती हैं।

इसे एफटीटीएच यानी फायबर टू दी होम तकनीक से भी जाना जाता है। इस तकनीक से उपभोक्ता को आधुनिक तकनीक के साथ साथ सुविधाएं भी मिलती है, मेन्टीनेन्स भी कम हो जाता है, अप टाइम भी ज्यादा मिलता है।

अग्रवाल ने बताया कि भारत के 7 राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गोवा, छत्तीसगढ़ व आन्ध्रप्रदेश में सेवाएं दे रही कप्पा इन्टरनेट सर्विसेज प्रा. लि. आज इन्टरनेट सर्विसेज में एक जाना पहचाना नाम है। 

कम्पनी के वाइस प्रेसीडेन्ट एसपी गुप्ता ने बताया की कप्पा सदैव ही समय की मांग के अनुसार अपनी सेवाएं व मूल्य निर्धारित करता है। कप्पा प्रधान मंत्री की डिजीटल इंडिया के सपने को पूर्ण करने के लिए सभी संभव सेवाएं दे रहा है।

कम्पनी ब्रॉडबेन्ड सर्विसेज के अतिरिक्त इन्टरनेट लीज लाइन, वेबसाइट डिजाइन, वी पी एन एवं वी ओ आई पी सॉल्यूशन्स, लेन व वेन सिस्टम इन्टीग्रेशन, आर एफ नेटवर्किंग, आई पी सर्विलिएंस, वाई फाई हॉट स्पॉट सॉल्यूशन्स, क्लाउड टेलीफोनी, बल्क एस एम एस व इन्टरनेट ऑफ थिंग्स आदि क्षेत्रों में विशिष्ट व प्रोफेशनल सेवाएं देती है।

कप्पा के फ्रेन्चाइजी प्रबन्धक रवीन्द्र ने बताया की कप्पा अभी 7 राज्यों के 160 से अधिक शहरों में फ्रेन्चाइजी नेटवर्क के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहा है। कम्पनी ग्राहक संतुष्टि व सेवा के सिद्वान्त पर कार्य करते हुए अपना फ्रेन्चाइजी नेटवर्क लगातार बढ़ाती जा रही है।

इस अवसर पर कम्पनी स्टाफ सदस्यों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। अन्त में कम्पनी के अध्यक्ष कैलाश चन्द अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

सूचना नहीं देने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना

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भोपाल। म.प्र.राज्य सूचना आयोग ने आदेश का पालन न करने और अपीलार्थी को जानकारी नहीं देने पर  नगर परिषद, ब्यावरा (राजगढ़) के सीएमओे इकरार अहमद को 25 हजार रुपए. के जुर्माने से दंडित किया।

साथ ही चेतावनी दी कि अब भी जानकारी नहीं देने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही सहित अन्य दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए जाएंगे। 

राज्य सूचना आयुक्त  आत्मदीप ने राजगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राशिद जमील खान की अपील मंजूर करते हुए लोक सूचना अधिकारी व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अहमद द्वारा आईटीआई एक्ट के प्रावधानों का निरंतर उल्लंघन करने पर सख्त नाराजगी जताई।  उन्होने फैसले में कहा है कि अहमद ने अपीलार्थी को नियत समय में कोई जानकारी न देकर धारा-7 का उल्लंघन किया ।

एमपी सूचना आयुक्त आत्मदीप

अधिकारी ने अलग-अलग तिथियां बताकर भ्रमित किया कि अपीलार्थी को वांछित जानकारी दे दी गई है। वे आयोग की अधिकांश सुनवाई में हाजिर नहीं हुए। 

आयोग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। साथ ही जानकारी देकर पालन प्रतिवेदन पेश करने के आयोग के आदेश का भी उल्लंघन किया।

चूंकि सीएमओ ने आईटीआई एक्ट का लगातार उल्लंघन कर विधि विरूध्द आचरण किया, इसलिए उन्हें दंडित करना लोकहित व न्यायहित में आवश्यक है। 

सूचना आयुक्त ने फैसले में कहा है कि सीएमओ द्वारा जुर्माने की राशि एक माह में आयोग में जमा न कराए जाने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर जुर्माने की रकम उनके वेतन से काटने की कार्यवाही की जाएगी। जरूरी होने पर उनके विरूध्द आयोग को प्राप्त सिविल कोर्ट की शक्तियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा । 

यह है मामला 

राशिद जमील खान ने सीएमओ से उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन किए गए कार्यों की, उन कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निर्माण सामग्री की टेस्ट रिपोर्ट, टेस्ट रिपोर्ट देने वाली प्रयोगशाला के नाम व उसे किए गए भुगतान की जानकारी मांगी थी जो नहीं दी गई।

अपीलीय अधिकारी के आदेश तथा आयोग के आदेशों के बाद भी वांछित जानकारी मुहैया नहीं कराई गई। आयोग ने उन्हें निर्देश दिए कि अपीलार्थी को चाही गई जानकारी 7 दिन में निःशुल्क देकर पालन प्रतिवेदन पेश करें। 

69 दिनों में ऑनलाइन डिलिवर हुए 10 लाख कॉन्डम्स

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बेंगलुरु। ऐसे देश में जहां कॉन्डम अभी भी टैबू बना हुआ है और मेडिकल स्टोर में कॉन्डम खरीदने से पहले लोग अपने आसपास निगाह डालते हैं वहां 69 दिनों में 10 लाख कॉन्डम्स ऑनलाइन ऑर्डर हो जाना बड़ी बात है।

28 अप्रैल को लॉन्च हुए फ्री कॉन्डम स्टोर ने 69 दिनों में 9.56 लाख कॉन्डम्स डिलिवर किए। इस स्टोर को AIDS हेल्थकेयर सोसायटी ने लॉन्च किया था। इस स्टोर से सबसे अधिक डिलिवरी दिल्ली और कर्नाटक में हुई।

केयर सोसायटी ने सरकार द्वारा संचालित हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड के साथ मिल स्पेशल ब्रैंड के कॉन्डम्स बनाए थे। ऑनलाइन स्टोर के डेटा के मुताबिक, 5.14 लाख कॉन्डम्स समुदायों और एनजीओ के मांगने पर उन्हें डिलिवर किए गए।

वहीं 4.41 लाख कॉन्डम्स व्यक्तिगत रूप से ऑर्डर किए गए थे। फाउंडेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर वी सैम प्रसाद ने बताया कि वह इस कार्यक्रम को मिली प्रतिक्रिया से आश्चर्यचकित हैं।

उन्होंने कहा, ‘हमें लगा कि 10 लाख कॉन्डम्स का स्टॉक दिसंबर तक के लिए काफी होगा लेकिन हम जुलाई के पहले हफ्ते में ही आउट ऑफ स्टॉक हो गए।

हमने 20 लाख और कॉन्डम्स का ऑर्डर दिया है जो नवंबर के आखिरी हफ्ते तक मिल जाएंगे और जनवरी के लिए 50 लाख कॉन्डम्स का ऑर्डर दिया जा चुका है।’

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑनलाइन कॉन्डम को ऐसा रिस्पॉन्स मिलने का एक कारण यह है कि भारत में लोग अभी भी स्टोर से कॉन्डम लेने जाने में शर्म महसूस करते हैं और सेक्स से जुड़ी कोई भी चीज अकेले में खरीदना ही पसंद करते हैं।

एक जानकार ने कहा, ‘कॉन्डम घर पर डिलिवर करने वाला व्यक्ति यह नहीं जानता है कि पैकेज में क्या है और ऑनलाइन ऑर्डर करने पर पहचान की शर्म भी नहीं रहती।’

नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक परिवार नियोजन के लिए 5.6 प्रतिशत लोग ही कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं। कोलकाता में 19 प्रतिशत, दिल्ली में 10 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3.6 प्रतिशत लोग कॉन्डम यूज करते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर 54 प्रतिशत महिलाएं और 77 प्रतिशत पुरुष कॉन्डम का प्रयोग करते हैं। भारत में कॉन्डम्स की सालाना सेल 200 से 220 करोड़ के बीच है।