Saturday, July 11, 2026
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अब जान सकेंगे भर्तियों में सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक

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राजस्थान सूचना आयोग का बड़ा फैसला, भर्ती में असफल अभ्यर्थियों को यह जानने का हक है कि अपने प्रतिस्पर्धियों से वे कहां पिछड़े

जयपुर। राजस्थान सूचना आयोग ने प्रदेश में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किए है। इसमें कहा गया है कि सूचना का अधिकार के तहत भर्ती परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की सूचना तृतीय पक्षकारों की सूचना बता कर देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने कहा कि इससे चयनित अभ्यर्थियों की निजता भंग नहीं होगी, बल्कि भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता रखने के लिए अंतिम चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक स्वैच्छिक रूप से सार्वजनिक करने चाहिए।

आयोग ने राजस्थान लोक सेवा आयोग को निर्देश दिए हैं कि अभी प्रक्रियाधीन एवं भविष्य में आयोजित सभी परीक्षाओं में अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की सूची राज्य सरकार को भेजने के साथ ही इन अभ्यर्थियों के लिखित एवं साक्षात्कार के अन्तिम प्राप्तांक आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक करें।

राज्य सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने गत दिनों जयपुर के अरूण जोशी की द्वितीय अपील पर यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जोशी ने फरवरी 2016 में सहायक अभियन्ता भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों के लिखित व साक्षात्कार के प्राप्तांकों की सूचना चाही थी।

आरपीएससी ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया कि यह सूचना तृतीय पक्षकारों की व्यक्तिगत सूचना है जिसे दिए जाने से अन्य अभ्यर्थियों की निजता भंग होगी। आयोग ने अपने फैसले में आरपीएससी के इस तर्क को नहीं माना।

आयोग ने कहा कि भर्ती में असफल अभ्यर्थियों को यह जानने का हक है कि अपने प्रतिस्पर्धियों से वे कहां पिछड़े। सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक होने से उनकी निजता भंग नहीं होगी बल्कि यह सार्वजनिक विषय है न कि व्यक्तिगत।

आयोग ने निर्देश दिए कि सरकारी भर्ती में नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की सूचना पारदर्शिता व व्यापक जनहित में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 (2) के तहत सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब आएगी पारदर्शिता
गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने और अनेक न्यायिक विवादों के बावजूद आरपीएससी अब तक भर्ती परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की सूचना व्यक्तिगत बता कर अन्य अभ्यर्थियों को नहीं देती थी। अभ्यर्थी स्वयं के प्राप्ताकों की सूचना प्राप्त कर सकता था।

राजस्थान सूचना आयोग के ताजा निर्णय से आरपीएससी को सभी सफल अभ्यर्थियों के लिखित व साक्षात्कार के प्राप्तांकों की सूचना सार्वजनिक करनी होगी जिससे कोई भी व्यक्ति देख कर विश्लेषण कर सकेगा। इससे भर्तियों में पारदर्शिता आएगी।

बड़ी संख्या में आरटीआई, होगा असर
भर्ती परीक्षाओं में असफल हुए हजारों अभ्यर्थियों में से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आरटीआई के तहत आवेदन कर आरपीएससी से प्राप्तांकों की सूचनाएं मांगते हैं जो उन्हें नहीं मिल पाती। सूचना आयोग के ताजा आदेश से इन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।

लिंस्टैनटाइन के गुप्त खातों पर भरना पड़ेगा टैक्स: ट्राइब्यूनल

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मुंबई। तीन साल पहले अप्रैल 2014 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 18 नाम बताए थे जिनपर लिंस्टैनटाइन के एलजीटी बैंक में ब्लैक मनी जमा करने का आरोप था। लंबे समय से चल रहे इस केस में 4 आरोपियों के खिलाफ मामला अब अंतिम चरण में है।

एलजीटी बैंक में जिस मारनीचि ट्रस्ट का खाता था उसके लाभार्थी हसमुख आई गांधी, जिन्होंने स्वर्गीय नीरव गांधी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, मधू एच गांधी और चिंतन एच गांधी थे।

अपने हालिया फैसले में इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल (ITAT) की मुंबई शाखा ने एलजीटी बैंक ने इन खातों की जमा राशि को अघोषित आय मानते हुए अपीलों को खारिज कर दिया है।

आईटीएटी ने अपने फैसले में कई वित्त वर्षों को शामिल किया था, इसमें 2001-02 भी शामिल था जब मारनीची ट्रस्ट को लाभार्थियों के खाते में जोड़ा गया था। लाभार्थियों द्वारा दायर की गई अपीलें एक जैसी थीं, उनका पक्ष सुना गया और बाद में उन्हें खारिज कर दिया गया।

टैक्स विभाग को मिली जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2001 तक बैंक स्टेटमेंट में खाते का ओपनिंग बैलेंस 3,09,154 डॉलर (1.95 करोड़ रुपये) था। लाभार्थियों ने इस आय पर टैक्स रिटर्न में इस आय की जानकारी नहीं दी थी। आईटीएटी ने ऐसे खातों को टैक्स भरने को कहा है।

अभी के लिए आईटीएटी के इस आदेश से आयकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि आईटीएटी के फैसले के खिलाफ मारनीचि ट्रस्ट के लाभार्थी अपील फाइल करेंगे। ऐसा ही एक मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित है।

इस केस की शुरुआत 2008 में हुई थी जब एलजीटी बैंक के एक एंप्लॉयी ने बैंक के गुप्त खातों की जानकारी जर्मनी के टैक्स विभाग को बेच दी थीं। जर्मनी ने यह जानकारी कई देशों के टैक्स विभाग के साथ साझा की थी, जिसमें भारत भी शामिल था।

लाभार्थियों का आईटीएटी में पक्ष रखने वाले ने कहा कि जिस जानकारी के लीक होने से यह मामला शुरू हुआ वह चोरी का था न की विस्ल ब्लोअर का।

अब अगस्त और सितंबर के जीएसटीआर-3बी में आप कर सकेंगे बदलाव

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नई दिल्ली । व्यापारियों की सुविधा के लिए जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) एक नई सुविधा शुरू करेगा। इसके तहत सभी कारोबारी अपने अगस्त और सितंबर के जीएसटीआर-3बी रिटर्न फॉर्म में 20 नवंबर से बदलाव कर सकेंगे।

शनिवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने यह जानकारी दी। वह जीएसटीएन की तकनीकी खामियों को दुरुस्त करने से जुड़े मंत्रिसमूह (जीओएम) के प्रमुख हैं। मोदी यहां इस जीओएम की चौथी बैठक में हिस्सा लेने आए थे।

उन्होंने इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि से भी मुलाकात की। इस आइटी कंपनी के पास ही जीएसटीएन के विकास व रखरखाव का ठेका है।1सुशील मोदी के मुताबिक नीलेकणि ने उन्हें आश्वस्त किया है कि जीएसटीएन के कामकाज में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

इन्फोसिस ने इस प्रोजेक्ट में अपने 100 और इंजीनियर लगा दिए हैं। इस तरह वस्तु एवं सेवा कर के लिए आइटी ढांचा मुहैया कराने वाली कंपनी जीएसटीएन में काम कर रहे उसके इंजीनियरों की संख्या 621 हो गई है।

इसके अलावा इन्फोसिस ने देश भर में राज्यों के कमिश्नरेट व जीएसटीएन के बीच बेहतर तालमेल के लिए 30 रेजिडेंट इंजीनियर तैनात किए हैं।

मोदी की अगुआई वाले जीओएम ने नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के आइटी ढांचे को संभालने वाली कंपनी जीएसटीएन को करदाताओं के अनुकूल सुविधाएं तैयार करने कहा है। ये सुविधाएं स्वभाव से ही इंटरैक्टिव होनी चाहिए।

हर यूटिलिटी में पूर्वावलोकन, संपादन, सत्यापन, पॉप-अप, विशिष्ट त्रुटि संदेशों और प्रिंट करने का विकल्प होना चाहिए। इन्फोसिस के साथ मिलकर जीएसटीएन इन विकल्पों को विकसित करेगी।

वस्तु एवं सेवाकर प्रणाली में व्यापारियों की ओर से शुरुआती बिक्री रिटर्न को जीएसटीआर-3बी फॉर्म में दाखिल किया जाता है। हालांकि करदाताओं को जुलाई के जीएसटीआर-3बी में बदलाव की अनुमति थी, मगर आगे के महीनों के लिए यह सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं थी।

इसके उपलब्ध नहीं होने से दो लाख से ज्यादा रिटर्न फाइल करने वाले फंसे हुए थे। मोदी के मुताबिक 20 नवंबर तक व्यापारियों को अगस्त और सितंबर के लिए जीएसटीआर-3बी रिटर्न में संपादन करने की सुविधा सुलभ कराने का फैसला किया गया है।

गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक के बाद टैक्स दरों से संबंधित करीब 80 फीसद मामलों का समाधान हो गया है। अब प्रक्रियाओं और तौर-तरीकों को सरल बनाने का काम बाकी रह गया है। इसे भी जीएसटीएन जल्द ही इन्फोसिस के सहयोग से अंजाम देने जा रही है।

जीएसटीएन दुरुस्त करने से जुड़े जीओएम के प्रमुख हैं मोदी
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तौर पर अक्टूबर में 95,131 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया गया है। इससे राज्यों की औसत राजस्व हानि घटकर 7,560 करोड़ रुपये यानी 17.6 फीसद पर आ गई है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इससे पहले सितंबर में राज्यों की राजस्व हानि का आंकड़ा 28.4 फीसद था।

उस महीने जीएसटी से 93,141 करोड़ रुपये का राजस्व आया था। सुशील के मुताबिक यह अच्छा संकेत है। इससे साफ पता चलता है कि यह अप्रत्यक्ष कर प्रणाली धीरे-धीरे स्थिर हो रही है। अगस्त में राज्यों को 12,208 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई थी।

जटिल जीएसटी ई-कॉमर्स बनी स्टार्टअप के जी का जंजाल
ई-कॉमर्स स्टार्टअप के लिए ऑटो कंपोनेट की ऑनलाइन बिक्री के मामले में जटिल जीएसटी प्रक्रिया उनके जी का जंजाल बनी हुई है। ऐसे खिलाड़ियों पर इसकी मार इसलिए भी पड़ रही है, क्योंकि ई-कॉमर्स बिजनेस को कंपोजिट स्कीम से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा ऑटो कंपोनेंट और उनके लॉजिस्टिक्स पर 28 फीसद की दर से जीएसटी ने भी मुश्किल खड़ी कर रखी है। ऑनलाइन मार्केटप्लेस बूडमो के सह-संस्थापक ओलेक्सांद्र डैनिलेंको ने अपने बयान में यह जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि हमारे नए उद्यम (सनराइज बिजनेस) को जीएसटी के जटिल ढांचे और दुरूह मॉडल ने बुरी तरह प्रभावित किया है। ई-कॉमर्स खास तौर पर इसका शिकार बना है।

जीएसटी के तहत 16 बिंदुओं वाली इनवॉयस मार्केटप्लेस की जरूरतों के हिसाब से कतई उपयुक्त नहीं है। इस तरह से तो बूडमो जैसे कारोबार न तो अपने उत्पादों की बिक्री कर सकते हैं और न ही खरीद कर सकते हैं, क्योंकि वे अपने सप्लायरों पर बहुत ज्यादा निर्भर होते हैं।

कोटा व्यापार महासंघ की अनूठी पहल, बनी मिसाल, देखिए वीडियो

-दिनेश माहेश्वरी
कोटा। जब पूरा शहर डेंगू जैसी महामारी से जूझ रहा था, चिकित्सा विभाग और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे मौत का तांडव देख रहा था, तब शहर में कोटा व्यापार महासंघ ने एक अनूठी पहल कर नगर निगम के सहयोग से स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया।

शहर के विभिन्न बाजारों में इस तरह का अभियान चलाकार व्यापारियों को जागरूक किया। कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने व्यापारियों को शहर को स्वच्छ रखने की शपथ दिलाई। इसका परिणाम यह हुआ कि शहर के व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर डस्ट बिन रखने लगे। जो व्यापारी प्रतिष्ठान खोलते ही सड़क पर कचरा दाल देते थे वह अब डस्ट बिन में कचरा रखने लगे हैं।

महासंघ की इस पहल का पूरा शहर सराहना करने लगा है। महासंघ के इस प्रयास को नगर निगम के महापौर महेश विजय,  उप महापौर सुनीता व्यास और व्यापारियों का खुले दिल से समर्थन मिल रहा है। अध्यक्ष क्रांति जैन ने हमारे चैनल LEN-DEN NEWS को बताया की शहर साफ होगा तभी शहर स्वस्थ होगा। उन्होंने “स्वच्छ कोटा, स्वस्थ कोटा” का  नारा दिया है ।

फिल्म “पद्मावती” के समर्थन में आया बूंदी का पूर्व राजघराना

  • राजपूत युवा अफवाहों पर ध्यान देने की बजाय सकारात्मक कार्यों में खर्च करें ऊर्जा : बलभद्रसिंह

  • दावा -फिल्म में पद्मावती साहस, चातुर्य की मिसाल, विरोध करने वाले पहले फिल्म देखें फिर फैसला करें

बूंदी।  राजस्थान के बाकी राजघराने और संगठन फिल्म पद्मावती को रिलीज करने के खिलाफ मैदान में हैं तो उसके उलट बूंदी राजघराने के सदस्य खुलकर फिल्म के समर्थन में गए हैं। पूर्व राजपरिवार के सदस्य बलभद्रसिंह और वंशवर्द्धनसिंह का रुख उनसे जुदा है।

वे फिल्म का समर्थन करते हुए इसके रिलीज के पक्ष में हैं। पूर्व राजघरानों और विरोध कर रहे करणी सैनिकों, हिंदू संगठनों को लॉजिक पर बात करने की सलाह देते हुए उनका कहना है कि फिल्म देखे बिना विरोध, सिनेमाहॉल में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं दुखद हैं।

राजपूत युवा ऊर्जा अफवाहों पर ध्यान देने की बजाए सकारात्मक कार्यों में करें। पहले सच्चाई परखें, फिर लगे कि फिल्म राजपूत संस्कृति-परम्पराओं और महारानी की मर्यादा-गरिमा के खिलाफ है तो विरोध करें। बूंदी राजघराना भी साथ है। संजय लीला भंसाली राजपूत प्रतिनिधियों को फिल्म दिखाने के लिए तैयार हैं।

फिल्म राजपूतों के गौरव और शौर्य की प्रतीक
फिल्म देख चुके लोग कह रहे हैं कि यह फिल्म राजपूतों के गौरव और शौर्य की प्रतीक है। फिल्म में रानी पद्मावती को साहस और चातुर्य की मिशाल बताया गया है। महाराजा रतनसिंह के शौर्य और सेनापति गौरा-बादल के पराक्रम को कहीं कम नहीं दिखाया गया है।

अलाउद्दीनको कहीं हीरो नहीं बनाया गया है। बलभद्रसिंह और वंशवर्द्धनसिंह का कहना है कि फिल्म का विरोध करने वाले अपनी राजनीति चमका रहे हैं। इस बारे में बलभद्र सिंह का कहना है कि फिल्म पदमावती को लेकर विरोध, तोड़फोड़ राजपूत गरिमा के खिलाफ और कायराना हरकत है।

उनके पास फिल्म का विरोध करने के पीछे कोई लॉजिक नहीं, वे अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। दूसरी ओर, फिल् पद्मावती को लेकर पूरे प्रदेश में शनिवार को भी तमाम संगठनों ने प्रदर्शन किया। चित्तौड़गढ़ में किले के पाडनपोल पर दिया जा रहा धरना जारी रहा।

कोटा से जयपुर की फ्लाइट सुबह भी जाएगी, कंपनी ने दिया रिवाइज्ड शेड्यूल

कोटा। अब जयपुर से कोटा के लिए सुबह भी फ्लाइट मिल सकेगी। नए शेड्यूल में कोटा से जयपुर के बीच एक फ्लाइट और बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। 

हालांकि, यह तभी संभव होगा, जब इंट्रा स्टेट एयर सर्विस के तहत कोटा से फ्लाइट संचालित कर रही कंपनी सुप्रीम एविएशन की ओर से दिए गए रिवाइज्ड शेड्यूल को राज्य सरकार मंजूर कर देगी।

प्रस्तावित नए शेड्यूल के तहत सुबह 8 बजे फ्लाइट जयपुर से रवाना होकर 8:45 बजे कोटा पहुंचेगी। यहां से 9 बजे रवाना होकर 9:45 बजे जयपुर पहुंचेगी।

दूसरी फ्लाइट दोपहर 3:30 बजे जयपुर से रवाना होकर 4:15 बजे कोटा पहुंचेगी और 4:30 बजे कोटा से रवाना होकर 5:15 बजे जयपुर पहुंच जाएगी। अभी कोटा से एक ही फ्लाइट है।

सुप्रीम एविएशन के सीईओ अमित के अग्रवाल ने बताया कि सर्दी के मद्देनजर नया शेड्यूल दिया गया है। यदि सिविल एविएशन विभाग से स्वीकृति मिले तो हम अहमदाबाद, इंदौर, जयपुर भोपाल के लिए फ्लाइट बढ़ा सकते हैं।

दिल्ली की फ्लाइट का अब तक कोई पता नहीं
इसीसाल अगस्त में कोटा से जयपुर के बीच फ्लाइट शुरू की गई थी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कोटा आकर फ्लाइट को हरी झंडी दिखाई थी। उसी वक्त उन्होंने यह घोषणा भी की थी कि कोटा से दिल्ली के लिए भी जल्दी ही फ्लाइट शुरू कर दी जाएगी।

इसके बाद सीएम सांसद ओम बिरला ने दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा से अलग-अलग मुलाकात भी की थी और दावा किया था कि दिल्ली के लिए फ्लाइट में रही रुकावटें दूर कर दी जाएगी। लेकिन, तीन माह बाद भी दिल्ली की फ्लाइट का कोई पता नहीं है।

भारत की मानुषी छिल्लर बनीं मिस वर्ल्ड

बीजिंग। भारत की मानुषी छिल्लर ने शनिवार को मिस वर्ल्ड, 2017 जीत लिया। चीन में हुए कॉम्पिटिशन में मानुषी 118 कॉन्टेस्टेंट्स में से मिस वर्ल्ड चुनी गईं।

हरियाणा में जन्मी 20 साल की मानुषी दिल्ली में रहती हैं। वे सोनीपत के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सेकंड ईयर की स्टूडेंट हैं।

बता दें कि 17 साल बाद भारत के पास मिस वर्ल्ड का खिताब आया है। मानुषी से पहले 2000 में प्रियंका चोपड़ा ने यह कॉन्टेस्ट जीता था।

कौन हैं मानुषी?

  • मानुषी का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के एक गांव में हुआ। उनके पिता मित्रवासु और मां नीलम छिल्लर दोनों डॉक्टर हैं। फिलहाल, फैमिली दिल्ली में रहती है।
  •  उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल से हुई। फिलहाल, सोनीपत के बीपीएस मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सेकंड ईयर की स्टूडेंट हैं। उन्हें फैशन, डांस, ग्लैमर में इंटरेस्ट है।
  • मिस वर्ल्ड (2017), फेमिना मिस इंडिया (2017) के अलावा मानुषी ने मिस फोटोजेनिक का अवॉर्ड भी जीता है। वे मिस हरियाणा भी रह चुकी हैं।

 

मानुषी ने कैसे जीता मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट?

  •  ग्रैंड फिनाले के टॉप 5 कंटेस्टेंट में जगह बनाने के बाद मानुषी से सवाल पूछा गया कि आपको कौन सा प्रोफेशन ऐसा लगता है, जिसके लिए सबसे ज्यादा सैलरी दी जानी चाहिए और क्यों?
  •  मानुषी ने जवाब दिया, “मुझे लगता है कि एक मां को सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाना चाहिए। मैं पैसे के बारे में नहीं सोचती। ऐसा इसलिए होना चाहिए, क्योंकि मां किसी को प्यार और सम्मान देती है। मेरी मां मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्हें सबसे ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए।”

इंटरव्यू के दौरान मानुषी ने क्या कहा था?
कॉन्टेस्ट से पहले दिए गए इंटरव्यू में मानुषी ने कहा था, “मुझे ये विश्वास है कि जिंदगी में अगर कुछ निश्चित है तो वो है… अनिश्चितता। यही चीज इस कॉन्टेस्ट को अमेजिंग बनाती है। मुझे पूरा भरोसा है कि मैं ये खिताब जीतूंगी।”

भारत ने 6 बार जीता मिस वर्ल्ड का खिताब
 सबसे पहले 1966 में रीता फारिया मिस वर्ल्ड बनी थीं। इसके बाद 1994 में ऐश्वर्या राय, 1997 में डायना हेडन, 1999 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा ने ये खिताब जीता था।

 

बिना बदलाव के पद्मावती की रिलीज ना हो: स्मृति से वसुंधरा की अपील

जयपुर। पद्मावती की रिलीज को लेकर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने शनिवार रात ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर स्मृति ईरानी को एक खत लिखा। खत में वसुंधरा ने लिखा, “इस बात को निश्चित करेें कि फिल्म जरूरी बदलावों के बिना रिलीज ना की जाए।”

पद्मावती पर जारी विवाद के बीच राजस्थान सरकार की ओर से ये पहला ऑफिशियल कम्युनिकेशन है। बता दें कि फिल्म सेंसर बोर्ड ने भी मेकर्स को टेक्निकल वजहों से पद्मावती लौटा दी है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि सर्टिफिकेशन के लिए एप्लीकेशन अधूरी थी। फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज की जानी है।

पद्मावती की रिलीज पर और क्या लिखा वसुंधरा राजे ने?
– राजस्थान की सीएम ने लिखा, “पद्मावती फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले सेंसर बोर्ड सभी संभावित नतीजों पर विचार कर ले।”
– “इतिहासकारों, फिल्म एक्सपर्ट और राजपूत कम्युनिटी के मेंबर्स की कमेटी बनाई जानी चाहिए, ताकि फिल्म के सब्जेक्ट को देखा जा सके और जरूरी बदलाव किए जा सकें ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत ना हों।”

डेलिगेशन ने की वसुंधरा से मुलाकात
– “फिल्ममेकर को अपनी समझ के हिसाब से फिल्म बनाने का अधिकार है। लेकिन, संविधान में ये भी लिखा है कि लोगों की भावनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इन अधिकारों को कंट्रोल किया जाए। फिल्म की रिलीज पर दोबारा किया जाना चाहिए।”
– इससे पहले मेवाड़ रीजन के डेलिगेशन ने वसुंधरा से मुलाकात की। इसमें अर्बन डेवलपमेंट मििनस्टर श्रीचंद कृपलानी, चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान भी शामिल थे।

पद्मावती की प्राइवेट स्क्रीनिंग पर सेंसर बोर्ड खफा
– सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने न्यूज एजेंसी से कहा, “सेंसर बोर्ड ने अभी तक न तो फिल्म देखी और न ही इसे सर्टिफिकेट दिया। लेकिन इसके मेकर्स की ओर से प्राइवेट स्क्रीनिंग करना और नेशनल चैनल्स पर फिल्म का रिव्यू करना बेहद अफसोसजनक है।”
– उन्होंने कहा, “एक तरफ फिल्म रिलीज की प्रॉसेस में तेजी लाने के लिए सेंसर बोर्ड पर दबाव डाला जा रहा है, दूसरी तरफ बोर्ड की प्रॉसेस को ही खत्म करने की कोशिश की जा रही है।”

फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?
– राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। लिहाजा, फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए।

कहां से शुरू हुआ विवाद?
– राजस्थान में फिल्म शूटिंग के दौरान इसके विरोध की शुरुआत हुई थी। शूटिंग के वक्त राजपूत करणी सेना ने कई जगह प्रदर्शन किया था और पुतले फूंके थे। जयपुर में शूटिंग के दौरान कुछ लोगों ने संजय लीला भंसाली से बदसलूकी की थी, जिसके बाद कोल्हापुर में फिल्म का सेट लगाया तो यहां भी इसे जला दिया गया।

अब तक क्या हुआ?
– विरोध मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक तक पहुंच गया है।
– राजस्थान की राजपूत करणी सेना के अलावा राजघराने भी फिल्म के खिलाफ हैं। इनकी मांग है कि इसे रिलीज करने के पहले उन्हें दिखाई जाए।
– राजनाथ सिंह, उमा भारती, लालू प्रसाद यादव, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने बयान दिए कि लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
– गुरुवार को राजपूतों ने चितौड़गढ़ का किला बंद रखकर प्रदर्शन किया था।
– करणी सेना के महिपाल मकराना ने कहा, “राजपूत कभी महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते, लेकिन जरूरत पड़ी तो हम दीपिका पादुकोण का वही हाल करेंगे, जो लक्ष्मण ने सूर्पणखा का किया था।”
– संभल में प्रोटेस्टर्स ने पोस्टर लगाए गए। इनमें लिखा था कि संजय लीला भंसाली का सिर काटने वाले को 50 लाख इनाम।

कल्याणपुरा में 2 लाख वर्गफीट में बनाया पांडाल, पं.नागरजी की कथा सोमवार से

ज्ञान गंगा महोत्सव : कोटा से 70 किमी दूर कोटा-चित्तौड़गढ़ फोरलेन मार्ग पर कल्याणपुरा में उमड़ेगा गौभक्तों का सैलाब। कथा स्थल पर 70 हजार श्रोताओं के लिए बना विशाल पांडाल

कोटा। दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमल किशोर नागरजी 20 नवंबर से कोटा से 70 किमी दूर कल्याणपुरा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में ओजस्वी प्रचवन देंगे।

आयोजक मांगीलाल धाकड़ ने बताया कि कोटा-चित्तौड़गढ़ फोरलेन राजमार्ग-27 पर बिजौलिया व सलावटिया के बीच कल्याणपुरा की चारागाह भूमि पर 2 लाख वर्ग फीट के भव्य पांडाल, पार्किंग स्थल, पेयजल, भोजनशाला एवं अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया।

रोजाना 12 से 3 बजे तक नागरजी के ओजस्वी प्रवचन सुनने के लिए आसपास के जिलों के अतिरिक्त मध्यप्रदेश व गुजरात से हजारों गौसेवक ट्रेन, बस व निजी वाहनों से पहुंचेंगे। पांडाल में महिलाओं एवं पुरूषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है।

उन्होंने अपील की कि जनसैलाब को देखते हुए आधा घंटा पूर्व आकर पांडाल में स्थान ग्रहण कर लें। आयोजन समिति के प्रमुख सलावटिया के पन्नालाल एवं छीतरलाल लुहार ने बताया कि मांडलगढ़ तहसील के छोटे से कल्याणपुरा गांव में पं.नागरजी की पहली कथा होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है।

कथा की व्यवस्थाओं में बिजौलिया, छोटी बिजौलिया, तड़ोदा, लक्ष्मी निवास, ढावदा, बेरीसाल, सुखपुरा, खड़ीपुर सहित उपरमाल क्षेत्र से बड़ी संख्या में गौसेवक अंतिम तैयारियां करने में जुटे हैं।

समिति के विनोद धाकड ने बताया कि सोमवार को सुबह 8 बजे मंदिर से कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों ग्रामीण महिलाए शामिल होंगी। समिति के सदस्य गणेश राठौर एवं मुकेश धाकड़ ने बताया कि मांडलगढ़ रेलवे स्टेशन से 30 किमी दूर कथा स्थल तक पहुंचने के लिए बसों की सुविधा रहेगी।

कथा में कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, मालवा क्षेत्र, नीमच, रतनगढ़ निम्बाहेडा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गौभक्त रोजाना प्रवचन सुनने पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि कथा स्थल से 10 किमी की परिधि में तिलिस्वां महादेव, जोगनिया माता मंदिर, बीजासन माता मंदिर एवं श्री सांवलिया सेठ मंदिर नजदीक होने से यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमडे़गी।

पं.कमल किशोर नागरजी की कथा के लिए बनाया गया पांडाल ।

 

गौ, गांव एवं गरीब को प्राथमिकता
सरस्वती के वरदपुत्र एवं मालवा के दिव्य गौसेवक संत पं.नागरजी पिछले कुछ वर्षों से हाड़ौती में कोटा, मोड़क, बारां, छीपाबड़ौद, रामगंजमंडी, गोपालपुरा, रायपुर, डूंगरगांव आदि स्थानों पर उन्होंने विराट श्रीमद् भागवत कथाओं में प्रवचन देते हुए शहरी वर्ग में गौसेवा एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा की।

प्रारंभ से ही वे कथाओं में गौ, गांव और गरीब को प्राथमिकता देते हैं। कथा स्थल पर एक कुटिया में वे 7 दिन आवास करेंगे। कथा से एकत्र गौग्रास राशि आसपास की गौशालाओं में दी जाएगी। उनकी प्रेरणा से मप्र व राजस्थान में लगभग 199 गौशालाओं में हजारों निःशक्त गायों की सेवा हो रही है।

मुख्यमंत्री ने मार्बल, ग्रेनाइट व लाइमस्टोन पर रॉयल्टी की दरें घटाई

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मार्बल, ग्रेनाइट एवं लाइमस्टोन पर रॉयल्टी की दरों में की गई 30 प्रतिशत तक की वृद्धि को घटाकर 10 प्रतिशत तक करने की घोषणा 

जयपुर/कोटा। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने प्रदेश के मार्बल, ग्रेनाइट एवं कोटा स्टोन एसोसिएशनों की मांग पर खनिज मार्बल, ग्रेनाइट एवं लाइमस्टोन पर रॉयल्टी की दरों में की गई 30 प्रतिशत तक की वृद्धि को घटाकर 10 प्रतिशत तक करने की घोषणा की है।

जीएसटी की दरों में कमी के लिए शनिवार को मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने मुख्यमंत्री निवास पर आए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मार्बल, ग्रेनाइट एवं कोटा स्टोन्स एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने राजे से मार्बल के बढ़ते आयात, फ्लोरिंग में विट्रीफाइड टाइल्स के बढ़ते उपयोग तथा पड़ोसी राज्यों की दरों को ध्यान में रखते हुए रॉयल्टी की बढ़ी दरों को कम करने की मांग की थी।

इस पर मुख्यमंत्री ने खनिज मार्बल (स्लेब्स, टाइल्स एवं अनियमित आकार के ब्लॉक), ग्रेनाइट एवं लाइमस्टोन (डाइमेंशनल-कोटा एवं झालावाड़) पर रॉयल्टी की दरों में की गई 30 प्रतिशत तक की वृद्धि को घटाकर 10 प्रतिशत तक करने की घोषणा की।

नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी तथा उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के नेतृत्व में खनन व्यवसायियों ने मार्बल, ग्रेनाइट सहित विभिन्न वस्तुओं की जीएसटी दरों में की गई कमी के लिए राजे का आभार व्यक्त किया।

खनन व्यवसायियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के सतत प्रयासों और प्रभावी पैरवी के कारण जीएसटी काउन्सिल ने मार्बल एवं ग्रेनाइट स्लेब एवं इससे बनी वस्तुओं, सिरेमिक टाइल्स आदि की जीएसटी दर में कटौती कर प्रदेश के खनन उद्योग को संजीवनी दी है। इस उद्योग से जुड़े प्रदेश के लाखों कारोबारियों, कारीगरों, श्रमिकों को इससे बड़ी राहत मिली है।

खनन व्यवसायियों ने कहा कि राजे ने उनकी पीड़ा को समझा और प्रदेश के खनन उद्योग जगत के हित में लगातार प्रयास किए। जीएसटी दर कम होने से आमजन के लिए भी मकान बनाना भी आसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी के बाद अब रॉयल्टी की बढ़ी दरों में कमी होने से माइनिंग उद्योग को सरकार का प्रोत्साहन मिला है। मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील निर्णय से निश्चय ही पूरे मार्बल, ग्रेनाइट और कोटा स्टोन उद्योग में खुशी की लहर है।

इस अवसर पर संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम, किशनगढ़ विधायक भागीरथ चौधरी, मकराना विधायक श्रीराम भींचर, रामगंजमंडी विधायक चन्द्रकान्ता मेघवाल, चित्तौड़गढ़ विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या सहित निम्बाहेड़ा, मकराना, बोरावड़, बिदियाद, राजसमंद, किशनगढ़, चित्तौडगढ़, रामगंजमंडी, सावर सहित अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए माइनिंग एसोसिएशनों के पदाधिकारी मौजूद थे।

रॉयल्टी में रहत देने पर कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी, हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष छुट्टन लाल शर्मा, महासचिव मुकेश त्यागी , पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र जैन , संस्थापक अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने मुख़्यमंत्री वसुंधरा राजे का आभार व्यक्त किया है