Tuesday, July 14, 2026
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पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बूंदी , हिंडौली बंद

बूंदी। बूंदी में जैतसागर झील किनारे टाइगर हिल पर स्थित मानधाता छतरी पर आयोजन को लेकर सोमवार को हुई पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में लोगों ने मंगलवार को बूंदी कर दिया। समर्थकों पर लाठीचार्ज किए जाने के बाद से ही यहां आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
 
हिंदू महासभा ने सत्याग्रह मार्च निकालने से रोकने, संतों व कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई व पूजा की अनुमति देने की मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकाल तक बूंदी बंद रखने का आह्वान किया है।

इधर, हिंडौली कस्बा और कृषि मंडी भी अनिश्चितकाल तक बंद रखने का आह्वान किया है। हिंदू महासभा ने बैठक के बाद यह घोषणा की। गौरतलब है कि छतरी पर आयोजन के लिए सुबह से ही लोग शहर के अलग-अलग स्थानों पर जुटना शुरू हो गए थे। पुलिस ने कुछ जगहों से लोगों को खदेड़ा भी, लेकिन भीड़ बढ़ती गई।

सभी मालनमासी बालाजी परिसर में एकत्र हो गए। संत रामलखन दास भी समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। उनके साथ लोग जाने लगे तो पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई। मीरागेट के पास पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने गलियों और घरों में घुसे लोगों को निकाल-निकाल कर मारा। इससे नौ जनों को गंभीर चोटें आई।

जिन्हें बूंदी जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। बाद में पुलिस ने सभी मार्गों से लोगों को खदेड़ दिया। लाठीचार्ज की सूचना मिलने पर आईजी विशाल बंसल भी बूंदी पहुंच गए। एसपी आदर्श सिधु, एडीएम नरेश मालव व ममता तिवाड़ी भी हालात पर निगरानी रखे हैं।

इस मामले में एक दर्जन नामजद सहित 500 से 700 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है व 41 जनों को हिरासत में लिया। आईजी विशाल बंसल ने कहा कि बूंदी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के पूर प्रयास किए जा रहे हैं। किसी ने बदमाशी की तो छोड़ा नहीं जाएगा। कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती की जाएगी।

सुनिधि चौहान बनी मां, यहां जानिए बेटा हुआ या बेटी

मुंबई ।  हिंदी फिल्म जगत में जाना-पहचाना नाम है गायिका सुनिधि चौहान का। नए साल के पहले ही दिन सुनिधि को सबसे बड़ी खुशी मिली। एक जनवरी को उन्होंने बेटे को जन्म दिया।  बेटे की जन्म सोमवार को शाम 5 बजे के करीब हुआ। मां और बेटा दोनों की स्वस्थ हैं। सुनिधि के पति हितेश पूरे वक्त इस दौरान उनके साथ रहे।

सुनिधि की उम्र अब 35 के करीब है। अपने करियर में केवल हिंदी ही नहीं बल्कि मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, बंगाली, असमिया और गुजराती फिल्मों में भी गाने गाए हैं। और तो और इन गानों की संख्या दो हजार से ज्यादा है।

सुनिधि चौहान ने बतौर गायिका शुरुआत महज चार साल की उम्र से कर दी थी। मगर सुनिधि को पहचान टीवी शो ‘मेरी आवाज सुनो’ से मिली। इसके बाद सुनिधि ने प्लेबैक सिंगिंग शुरू की थी। फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘मस्त’ में सुनिधि चौहान का गाया हुआ गीत ‘रुकी रुकी सी है जिंदगी’ बेहद चर्चित हुआ था।

बॉलीवुड में शायद ही ऐसा कोई सिंगर होगा जिसके साथ सुनिधि चौहान ने गाना नहीं गाया हो। इसके साथ ही सुनिधि सिंगिंग बेस्ड रिअलिटी शो में बतौर जज भी नजर आ चुकी हैं। इनमें इंडियन आइडल और वाइस ऑफ इंडिया जैसे शो शुमार हैं। 

जहां तक सवाल पुरस्कारों का है तो सुनिधि चौहान को चौदह बार फिल्मफेयर पुरस्कारों में नामांकन मिला है। इनमें से तीन बार सुनिधि पुरस्कार जीतने में कामयाब रही है। इसके अलावा सुनिधि चौहान ने अपने करियर में दो स्टार स्क्रीन पुरस्कार, दो आइफा और एक जी सिने पुरस्कार जीता है।

ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में कल पेश होगा

नई दिल्ली। एक बार में तीन तलाक को अपराध करार देने वाला बिल अब बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। इस बात की पुष्टि पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी से बातचीत में की। इस बिल को पहले मंगलवार को पेश किया जाना था।

लोकसभा इसे पिछले हफ्ते ही पास कर चुकी है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सदन में पेश करेंगे। लोकसभा में आसानी से यह बिल पास करवाने वाले सत्ता पक्ष को बहुमत नहीं होने के चलते राज्यसभा में मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ, यूनियन मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ट्रिपल तलाक बिल पर कन्फ्यूज है।

सरकार ने क्या कहा?
– न्यूज एजेंसी से बातचीत में पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्टर अनंत कुमार ने कहा- हम ट्रिपल तलाक बिल पर कांग्रेस और बाकी दूसरी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं। उम्मीद करते हैं कि राज्यसभा में इसे पास कराने में दिक्कत नहीं होगी। इसे कल राज्यसभा में पेश कर सकते हैं।

सीपीआई और डीएमके का रुख एक जैसा- सीपीआई सांसद डी. राजा ने कहा- यह आज के लिए लिस्टेड था। जहां तक लेफ्ट पार्टियों का संबंध है, हमारी मांग है कि इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा- इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए।

– शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने भी बिल को राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। पार्टी सांसद माजिद मेमन ने यह मांग रखी।
कांग्रेस ने नहीं लिया फैसला

-न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कांग्रेस ट्रिपल तलाक बिल पर अब तक फैसला नहीं ले पाई है। वो दूसरी पार्टियों से बात कर रही है। गुलाम नबी आजाद ने कुछ विपक्षी नेताओं से चर्चा की है। माना जा रहा है कि कांग्रेस इसमें हर्जाने के प्रावधान समेत और बदलावों की मांग कर सकती है।

कांग्रेस कन्फ्यूज है: नकवी
– यूनियन मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्रिपल तलाक बिल के मसले पर कहा कि कांग्रेस इसे लेकर कन्फ्यूज है। नकवी ने कहा- मुस्लिम महिलाएं इस बिल को लेकर खुश हैं तो फिर कांग्रेस दुखी क्यों है? कांग्रेस एक कदम आगे जाती और फिर 10 कदम पीछे हट जाती है।

राज्यसभा में सरकार क्यों मजबूर?
– फिलहाल, राज्यसभा में एनडीए और कांग्रेस दोनों के ही पास 57-57 सीटें हैं। सरकार के सामने दिक्कत ये है कि बीजू जनता दल और एआईएडीएमके जैसी पार्टियां इस सदन में मोदी सरकार की मदद करती रही हैं लेकिन ट्रिपल तलाक बिल का विरोध कर रही हैं।

– ऐसे में अगर यह बिल स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है तो इसक मतलब यह हुआ कि सरकार इसे विंटर सेशन में पारित नहीं करवा पाएगी। यह सेशन इस हफ्ते के आखिर में खत्म हो जाएगा। यह बिल कानून बने, इसके लिए दोनों सदनों से इसका पास होना जरूरी है।

राज्यसभा में कांग्रेस बीजेपी से आगे
– इंडिपेंडेंट और नॉमिनेटेड मेंबर्स को छोड़ दें तो राज्यसभा में 28 पार्टियों के मेंबर्स हैं। तृणमूल कांग्रेस के 12, समाजवादी पार्टी के 18, तमिलनाडु की एआईएडीएमके के पास 13, सीपीएम के 7, सीपीआईए के 1, डीएमके के 4, एनसीपी के 5, पीडीपी के 2, हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल के 1, शिवसेना के 3, तेलगुदेशम के 6, टीआरएस के 3, वाएसआर के 1, अकाली दल के 3, आरजेडी के 3, आरपीआई के 1, जनता दल (एस) के 1, केरल कांग्रेस के 1, नगा पीपुल्स फ्रंट के 1 और एसडीएफ का 1 सांसद हैं।

– इनके अलावा 8 नॉमिनेटेड और 6 इंडिपेंडेंट मेंबर भी राज्यसभा में हैं।
– बीजेपी के मिलाकर एनडीए के कुल 88 सांसद हो रहे हैं। यह बिल पास कराने के आंकड़े से 35 कम है।- बीजेपी के मिलाकर एनडीए के कुल 88 सांसद हो रहे हैं। यह बिल पास कराने के आंकड़े से 35 कम है।

अमेरिका ने पाक को 255 मिलियन डॉलर की मदद रोकी 

न्यूयॉर्क । अमेरिका ने पाकिस्तान पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान को लेकर किए गए ट्वीट के बाद अब अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सैन्य मदद पर रोक लगा दी है।

खबरों के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की आर्थिक सैन्य मदद पर रोक लगाई है। इसकी पुष्टि व्हाइट हाउस द्वारा कर दी गई है।

व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह की मदद का भविष्य इस्लामाबाद द्वारा अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों पर की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि अमेरिका पाकिस्तान को दी जानी वाली 255 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद देने का इच्छुक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप साफ कर दिया है कि अमेरिका पाकिस्तान से चाहता है कि वो अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। पाकिस्तान के दक्षिण एशिया रणनीति के लिए किए गए एक्शन से हमारे रिश्तों की दिशा तय होगी जिसमें भविष्य में मिलने वाली सुरक्षा निधि भी शामिल है।

झूठा और कपटी है पाकिस्तान: ट्रंप
बता दें कि नए साल के पहले ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को झूठा और कपटी करार दिया था। ट्रंप ने लिखा में लिखा, ‘पाकिस्तान को 15 साल में 33 अरब डॉलर (दो लाख दस हजार करोड़ रुपए) की भारी-भरकम सहायता दी गई। बदले में उसने हमें कुछ नहीं दिया। केवल झूठ बोला और धोखा दिया। उसने हमारे नेताओं को बेवकूफ बनाया।’

यह पाकिस्तान को किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सबसे कड़ी फटकार है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिकी अखबार “न्यूयॉर्क टाइम्स” ने खबर दी थी कि अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली 1436 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोकने पर विचार कर रहा है।

कब-कब पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया अमेरिका
पाकिस्तान के गठन के बाद से ही अमेरिका उसकी मदद करता आया है, लेकिन वर्ष 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के बाद उसने पाकिस्तान के लिए मदद का भंडार खोल दिया। अमेरिका के एक रिसर्च थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट (CGD) की रिपोर्ट के मुताबिक 1951-2011 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद की है।

– बराक ओबामा के कार्यकाल में वर्ष 2009 में पाकिस्तान की मदद के लिए कैरी गुलर विधेयक पास हुआ
– 2010-14 में साढ़े सात अरब अमेरिकी डालर की असैनिक मदद वाले कैरी लुगर विधेयक को व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान के लिए व्यापक समर्थन की ठोस अभिव्यक्ति बताया

– अमेरिका ने बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य मदद के तौर पर पाकिस्तान को दिया
– शिक्षा और दूसरे मदों में एक चौथाई फंड दिया गया
– CGD के अनुसार 2002-2009 के बीच आर्थिक मुद्दों पर 30 फीसद फंड दिया गया
– 70 फीसद मदद सैन्य क्षेत्र में दी गई
– 2010-2014 के बीच सैन्य मदद में थोड़ी कमी आई
– आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में कुल मदद का करीब 41 फीसद दिया गया

अमेरिका के फैसले का क्या होगा असर
अमेरिका द्वारा आर्थिक मदद रोक देने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। आर्थिक मदद के रूक जाने से पाकिस्तान को खासा नुकसान झेलना होगा। पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद खराब है, पूरा देश उधारी और कर्जे पर चल रहा है।

गरीबी, बेरोजगारी से तो पाकिस्तान जूझ रहा है, लेकिन आतंकवाद भी पाकिस्तान की जड़ों को खोखला बना रहा है।
ऐसे में अमेरिका की मदद कहीं न कहीं पाकिस्तान के लिए तिनके का सहारा थी और अब वो भी खत्म हो गई। अब जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पालना बंद नहीं करता, ये पॉलिसी दोबारा बहाल होती नजर नहीं आ रही है।

ऐंटि-प्रॉफिटियरिंग कानून की चपेट में मैकडॉनल्ड्स समेत 5 बड़े संस्थान

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नई दिल्ली। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के अधीन ऐंटि-प्रॉफिटियरिंग लॉ के तहत पहली बार कुछ संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है। इसकी पहली चपेट में पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स की फ्रेंचाइजी हार्डकासल रेस्ट्रॉन्ट्स, लाइफस्टाइल इंटरनैशल का एक रिटेलर आउटलेट और एक होंडा डीलर जैसे संस्थान आए हैं। इन व्यावसायिक संस्थानों पर जीएसटी में घटे दाम का फायदा ग्राहकों को नहीं देने का आरोप है।

डीजी सेफगार्ड्स ने कम-से-कम पांच ऐसे संस्थानों को नोटिस जारी किए। इनमें गुड़गांव की रियल एस्टेट कंपनी पिरामिड इन्फ्राटेक और जयपुर के एक संस्थान शर्मा ट्रेडिंग के नाम शामिल हैं। शर्मा ट्रेडिंग पर आरोप है कि उसने 15 नवंबर को जीएसटी रेट घटाकर 18% किए जाने के बाद भी वैसलीन पर 28% टैक्स वसूला।

लेकिन हार्डकासल रेस्ट्रॉन्ट्स के खिलाफ जारी नोटिस पूरे सेक्टर में खलबली मचा सकता है। दरअसल, शिकायत में कहा गया है कि जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत होने के बाद भी कॉफी के दाम नहीं घटाए गए और एक कप कॉफी के लिए 142 रुपये लिए गए। कुछ रेस्ट्रॉन्ट्स ने मेन्यु प्राइस बढ़ा दी थी जिससे जीएसटी रेट घटने से हुए फायदे का बेहद छोटा हिस्सा ही ग्राहकों तक पहुंच पाया। इस मुद्दे पर सरकार के प्रयास सफल नहीं हो सके।

एक ओर डीजी सेफगार्ड्स ने 29 दिसंबर को नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी है, तो दूसरी ओर हार्डकासल रेस्ट्रॉन्ट्स का कहना है उसे कोई नोटिस नहीं मिला है। उसने कहा, ‘हमें इस तरह की कोई सूचना नहीं मिली है। कानून का पालन करनेवाले कॉर्पोरेट के तौर पर हम लागू नियमों को मानते हैं और पूछताछ किए जाने पर हम जवाब देंगे।’

लाइफस्टाइल इंटरनैशनल के खिलाफ शिकायत गाजियाबाद स्थित मॉल में उसके एक रिटेलर आउटलेट से संबंधित है। आरोप है कि इसने 22 नवंबर को उसने 28% जीएसटी लिया जबकि एक सप्ताह पहले 15 नवंबर को ही जीएसटी दर घटाकर 18% कर दी गई थी। लाइफस्टाइल इंटरनैशनल ने मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

इसी तरह, पीरामिड इन्फ्राटेक ने कहा कि 36 बायर्स ने इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं देने का आरोप लगाया जबकि हरियाणा अफोर्डेबल हाउजिंग स्कीम के तहत बुक किए गए फ्लैट्स पर ज्यादा छूट दी गई थी। इनके अलावा, उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित एक कार डीलर के खिलाफ शिकायत में कहा गया है कि अप्रैल में बुक की गई होंडा कार की डिलिवरी जुलाई में दी गई जब जीएसटी लागू हो चुका था।

इन सभी मामलों में ऐंटि-प्रॉफिटियरिंग पर बनी स्टैंडिंग कमिटी ने संज्ञान लिया है। ऐसे मामलों में कानून के तहत जुर्माने का प्रावधान है ताकि जीएसटी की वजह से हुए फायदे को ग्राहकों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जा सके। बहरहाल, सभी संस्थानों को दस्तावेजों के साथ जवाब दिए जाने को कहा गया है।

ई-कॉमर्स फर्मों को उत्पादों पर लिखना होगा एमआरपी व एक्सपायरी डेट

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नई दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनियों पर अक्सर फर्जी डिस्काउंट देने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, 1 जनवरी से पैकेज्ड प्रॉडक्ट्स पर एमआरपी और एक्सपायरी डीटेल्स को दिखाने के नियमों के लागू होने के बाद इस पर रोक लग सकती है।

कन्ज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के लीगल मेट्रोलॉजी के हेड बी एन दीक्षित ने कहा कि ईकॉमर्स कंपनियों को अब एमआरपी और यूज-बाय डेट जैसी डीटेल्स अपनी वेबसाइट्स पर देनी होंगी। दीक्षित ने कहा, ‘इससे कंपनियों के एमआरपी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और इस पर डिस्काउंट देने या एक्सपायरी तारीख के करीब प्रॉडक्ट्स बेचने पर रोक लग सकती है।’

कुछ इंडस्ट्री मेंबर्स के मुताबिक, ईकॉमर्स कंपनियां प्रॉडक्ट डिस्प्ले के साथ वेबसाइट्स पर ये डीटेल्स भी डाल सकती हैं।नाम न छापने की शर्त पर कन्ज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के एक प्रतिनिधि ने कहा कि ईकॉमर्स कंपनियां आमतौर पर सामान की कीमत एमआरपी से ज्यादा दिखाती हैं और इसके बाद इस पर भारी डिस्काउंट देती हैं।

कन्ज्यूमर्स को यह बात प्रॉडक्ट मिलने के बाद पता चलती है। लोकल सर्किल्स के एक हालिया सर्वे से पता चला कि 10,000 पार्टिसिपेंट्स में से 42 पर्सेंट ने प्रॉडक्ट्स को एमआरपी से महंगे पर लिस्टेड पाया और इसके बाद इस ऊंची कीमत पर डिस्काउंट ऑफर किया गया।

7,776 रिस्पॉन्डेंट्स में से 98 पर्सेंट ने कहा कि एक्सपायरी डेट का खुलासा अनिवार्य होना चाहिए। लोकलसर्किल्स के चीफ स्ट्रैटिजी ऑफिसर, यतीश राजावत ने कहा, ‘नए नियमों से रियलिस्टिक प्राइस डिसक्लोजर में मदद मिलेगी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से फर्जी डिस्काउंट्स का भी खेल खत्म होगा।’

जून 2017 में मिनिस्ट्री ऑफ कन्ज्यूमर अफेयर्स ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन किया है। इनमें कहा गया है, ‘ईकॉमर्स इकाई को अनिवार्य खुलासे करने होंगे। इन्हें डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर प्रदर्शित करना होगा।’

ईकॉमर्स कंपनियों का कहना है कि वे नए रूल्स का पालन करने के लिए सेलर्स के साथ काम कर रही हैं। एमेजॉन के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने सेलर्स को लीगल मेट्रोलॉजी रेगुलेशंस में बदलाव के बारे में सूचित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हम सेलर्स के साथ काम कर रहे हैं ताकि लीगल मेट्रोलॉजी रेगुलेशंस में हुए बदलावों का पालन सुनिश्चित हो सके।’

स्नैपडील ने गुजरे हफ्ते अपने सेलर्स को सतर्क किया है कि अगर वे नई गाइडलाइंस का पालन नहीं कर पाते हैं तो उन्हें लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स का इस्तेमाल करने की इजाजत से वंचित किया जा सकता है। फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम अपने सेलर्स को संशोधनों पर शिक्षित कर रहे हैं और उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं ताकि वे नए रेगुलेशंस का पालन कर सकें।’

स्मार्ट सिटी में मगरमच्छों का मरना घातक प्रदूषण का संकेत

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कोटा। स्मार्ट सिटी की कवायद कर रहे कोटा शहर में चम्बल की डाउन स्ट्रीम में मगरमच्छों का प्रदूषण के कारण मरना  गंभीर संकेत है, कि चम्बल की डाउन स्ट्रीम में प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक हो चुका है। अप स्ट्रीम में भी गंदे नालों ने चम्बल की दशा बिगाड़ रखी है।

जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय एवं महासचिव तपेश्वर सिंह,  शेर संस्था के समन्वयक डॉ. कृष्णेंद्र सिंह ने कहा कि स्मार्ट शहर में नदी भी स्मार्ट होनी चाहिए। चम्बल नदी में जलीय जुतुओं की मौत होना नई बात नहीं है। ऑक्सीजन की कमी से नदी में हजारों मछलियां प्रतिदिन मरी हुई देखी जा सकतीं है।

2015 में भी नयापुरा में छोटी पुलिया के निकट एम मगर मच्छ मृत पाया गया था। चम्बल में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो गया है। मगर मच्छ ऐसा प्राणी है, जिसकी प्रतिरोधक क्षमता काफी विपरीत हालातों में भी बचने की है। डायनासोर के बाद पृथ्वी पर यही जीव परिस्थितिकी को सहन कर सकता है।

दुर्भाग्य से चम्बल इतनी अधिक प्रदूषित हो गई कि इस प्राणी को भी मरना पड़ रहा है। सोमवार को मृत मगरमच्छ के पोस्टमार्टम के दौरान वहां मौजूद वन्यजीव विशेषज्ञों में शोधार्थी हरि मीणा ने भी दम घुटने से मौत होने को कारण माना है। जिनसे पुष्टि होती है कि प्रदूषण ही मूल कारण है।

विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री को चम्बल प्रदूषण की गंभीरता को समझ कर रूकी हुई योजनाओं को शीघ्र लागू कराने के निर्देश स्थानीय प्रशासन को देना चाहिए। इस बारे में मुख्यमंत्री को शीघ्र ही ज्ञापन भेजा जाएगा।

अडानी, अंबानी का कर्जा माफ हो सकता है, तो किसानों का क्यों नहीं

कोटा।   उद्योगपतियों का पैसा माफ करने से सरकार देश विकास और किसानों का कर्जा माफ को देश को कंगाल होना मानती है। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी। केंद्र ने बड़ी कंपनियों का 8 लाख करोड़ माफ कर दिए। अडानी, अंबानी, टाटा बिरला के 3 लाख करोड़ रुपया माफ कर दिया।  बैंक कंगाल नहीं हो जाएगा

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने मीडिया से कहा संपूर्ण कर्जा माफी उपज का डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य पीएम नरेंद्र मोदी का चुनावी वादा था। जो उन्होंने 300 सभाओं में किया था। किसान आत्महत्या नहीं करेंगे। लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों के साथ दोहरी नीति अपनाई। अपना वादा भूल गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली कहते है कर्जा माफी राज्य सरकारें करें।

सरकार और अखिल भारतीय किसान सभा के बीच तीन महीने पहले समझौता हुआ था। 50 हजार तक का किसानों का कर्ज माफ होगा, 60 साल की उम्र वाले किसान और खेत मजदूर को पेंशन दी जाएगी। क्योंकि विधायक को उम्रभर पेंशन मिल सकती है तो देश के अन्नदाता को क्यों पेंशन नहीं।

जिस पर सरकार ने सहमति जताई थी। लेकिन कमेटी बनाकर एक माह में रिपोर्ट देने वाला वादा राज्य सरकार तीन माह बाद भी पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में प्रदेश का किसान सरकार से नाराज है। वह आंदोलित है।  सरकार को समझौते के वादा खिलाफी का किसान सबक सिखाएंगे।

फरवरी माह में बजट सत्र के दौरान जयपुर कूच करते हुए विधानसभा का घेराव किया जाएगा। सोमवार को यह बात कोटा प्रवास पर आए किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने पत्रकारों से कही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा खिलाफी किसानों के साथ ही नहीं हर वर्ग के साथ की है।

अमराराम ने कहा सरकार संघर्ष की भाषा समझती है। 13 दिन के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद सरकार को किसानों ने मजबूर किया था। एक हाई पावर कमेटी बनाकर कर्जा माफी लागू की जाए। यूपी की तरह किसानों के साथ मजाक नहीं हो। चार मंत्रियों की कमेटी बनाकर एक माह में रिपोर्ट देने की बात हुई थी। समझौते पर मंत्रियों के हस्ताक्षर है। 

तीन माह में कुछ नहीं हुआ। सीएम को किसानों के लिए वक्त नहीं। प्रदेश की 9893 ग्राम पंचायतों में दो माह में मूवमेंट छेड़ा जाएगा। गांवों में किसान संसद होगी। फरवरी में बजट सत्र होगा। चारों ओर से राजस्थान का किसान जयपुर कूच करेगा। शहीद किसानों के नाम से चार पैदल जत्थे पर जयपुर पहुंचेंगे।

डेंगू कर रहा गंजा, डॉक्टर बोले-प्रोटीन लें, तेजी से उगेंगे बाल

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कोटा। इस साल डेंगू के तांडव ने अब एक और नई समस्या के साथ दस्तक दी है। जिन मरीजों को डेंगू हुआ था, अब उनके तेजी से बाल झड़ रहे हैं। कई लोग पूरी तरह गंजे होने की स्थिति में आ गए। पिछले करीब एक माह में ही शहर के प्रमुख त्वचा रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे 1 हजार से ज्यादा केस चुके हैं।

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इस स्थिति से ज्यादा पेनिक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह काफी कॉमन दिक्कत है। बाल एक बार पूरी झड़ेंगे और नए सिरे से उग आएंगे। यह एक साइकिल है, जो स्वतः पूरी होगी।

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के स्किन आउटडोर में ही रोजाना 10 से 20 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं। बालों के गुच्छे उतरते देख जब डॉक्टर मरीज से हिस्ट्री लेते हैं तो जवाब मिलता है कि डेंगू हुआ था, उसकी वजह से कुछ दिन अस्पताल में भी भर्ती रहे और ठीक हो गए।

गौरतलब है कि इस बार अगस्त से अक्टूबर तक डेंगू ने जमकर तांडव मचाया था। हजारों लोग डेंगू का शिकार हुए थे और संभाग में डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।

घबराएं नहीं, खुद उगेंगे नए बाल
डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी में घबराने की कोई जरूरत नहीं है। साथ ही बेवजह किसी तरह के तेल या शैंपू लगाने की भी आवश्यकता नहीं है। सिर्फ इतना ध्यान रखें कि प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लें। हाई प्रोटीन डाइट में जैसे-चना, सोयाबीन, मूंग, दालें, ड्राइ फ्रूट, पनीर या अंडा आदि लें। इस तरह की डाइट से तेजी के साथ फिर से बाल उगेंगे।

मेडिकल साइंस में इस बीमारी को टीलोयन इफ्लुएम कहते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, जब भी शरीर किसी गंभीर बीमारी से लड़ता है तो पूरा न्यूट्रीशियन उस तरफ डायवर्ट हो जाता है। डेंगू में ऐसा ही हुआ। 

ऐसी स्थिति में बाल, नाखून दांतों को पोषण मिलना कम हो गया। बाल पूरी तरह प्रोटीन पर निर्भर होते हैं। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से यह झड़ना शुरू हो जाते हैं। सामान्यतः ऐसा डेंगू के 2 से 3 माह बाद होता है। अभी जो केस रहे हैं, ये डेंगू सीजन के शुरुआती केस हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ेगी।

हाई प्रोटीन डाइट लें 
पिछले करीब एक माह में 50-60 पेशेंट तो मैं खुद देख चुका। कुछ लड़कियां तो गंजी होने जैसी स्थिति में थी और बालों के गुच्छे लेकर मेरे पास गई। सभी को समझने की जरूरत है कि इसमें घबराएं नहीं और हाई प्रोटीन डाइट लें।
-डॉ. अक्षय जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्किन डिपार्टमेंट, मेडिकल कॉलेज

नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में आज देशभर में डॉक्टर्स की हड़ताल

नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन(NMC) बिल के विरोध में देशभर के सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के डॉक्टर मंगलवार को आज हड़ताल पर हैं । इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सोमवार को यह एलान किया।

बता दें कि सरकार ने यह बिल शुक्रवार को संसद में पेश किया था। सदन में मंगलवार को इस पर चर्चा हो सकती है। सरकार इस बिल के जरिए मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया (MCI) की जगह नई बॉडी नेशनल मेडिकल कमीशन बनाना चाहती है।

मेडिकल सेवाओं पर कब तक रहेगा असर?
इस हड़ताल से मंगलवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स में मेडिकल सर्विसेस ठप रहेंगी। हालांकि, एमसीआई का दावा है कि इससे इमरजेंसी सर्विसेज पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बिल से और क्या बदलाव होगा?
इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रप्रोजल है। इसे करने के बाद वे मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे।

बिल का विरोध क्यों कर रहा आईएमए?
– आईएमए के पूर्व प्रेसिडेंट केके अग्रवाल के मुताबिक, “इस बिल में ऐसे प्रोविजन्स हैं, जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जाएगी। जबकि, इसके लिए कम-से-कम एमबीबीएस क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इससे नीम-हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।”

– डॉक्टर अग्रवाल का दावा है कि इस बिल में प्राइवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की छूट दी गई है।
क्या है मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया?

– इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देशभर के मेडिकल प्रोफेशनल्स की रिप्रेंजेटेटिव बॉडी है। देश का कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर इसका चुनाव लड़ सकता है और अपना लीडर चुनने के लिए वोट कर सकता है।
क्या नेशनल मेडिकल कमीशन में भी इलेक्शन का ऑप्शन है?

– नहीं। इसमें गवर्नमेंट द्वारा चुने गए चेयरमैन और मेंबर्स रखे जाएंगे। इसके अलावा बोर्ड मेंबर्स को कैबिनेट सेक्रेटरी के अंडर में काम करने वाली सर्च कमेटी चुनेगी। मेडिकल सेवाओं पर कब तक रहेगा असर?

-इस हड़ताल से मंगलवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स में मेडिकल सर्विसेस ठप रहेंगी। हालांकि, एमसीआई का दावा है कि इससे इमरजेंसी सर्विसेज पर कोई असर नहीं पड़ेगा।