Tuesday, July 14, 2026
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कोटा के अविनाश को टफ मैन का खिताब

कोटा। कोटा के अविनाश बेदी ने 30 डिग्री के तापमान में दौड़कर टफ मैन चैलेंज का खिताब जीता। जैसलमेर में आयोजित टफ मैन चैलेंज स्पर्धा में 12.40 घंटे में 80 किलोमीटर दौड़कर फुल टफ मैन की दौड़ पूरी की। बेदी 80 किलोमीटर दौड़ने वाले कोटा के पहले एथलीट बने।

रेस पूरी करने के पांच दिन पहले ही बेदी के पिता का निधन हो गया था। इसके बावजूद परिवार और दोस्तों ने उन्हें दौड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कोटा लौटे अविनाश बेदी ने बताया कि यह दौड़ सबसे मुश्किल दौड़ में से एक थी। रास्ते में रेत भी थी। सुबह से लेकर शाम तक दौड़ना था।

यूं रेस पूरी करके बने टफ मैन
16 किलोमीटर के 5 लैप पूरे करने थे। मात्र 4 किलोमीटर सड़क ही दौड़ के लिए सही थी। इसके अलावा 12 किलोमीटर में हल्की रेत थी। इस पर दौड़ना चुनौतीपूर्ण था। साढ़े 9 घंटे में 61 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर लेने के बाद मेरी स्मार्ट वॉच बंद हो गई। कटऑफ टाइम 13 घंटे था।

इसके बाद समय और दूरी का अंदाजा लगाकर दौड़ना पड़ा। सुबह 5.30 बजे दौड़ शुरू की तब तापमान करीब 4 डिग्री था, जो एक बजे तक बढ़कर 30 डिग्री पहुंच गया। 80 किलोमीटर की स्पर्धा में सिर्फ 5 प्रतिभागी थे। इसमें वह तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने यह रेस 12घंटे 40 मिनट में पूरी की। 

ये हैं टफ मैन इंडिया : टफमैन इंडिया द्वारा गेट-सेट-रन (जीएसआर) के नाम से यह स्पर्धा आयोजित की गई। यह दौड़ हर वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में होती है, जहां भौगोलिक रूप से अलग-अलग चुनौतियां होती हैं। इस बार जैसलमेर में हुई, जहां रेतीले क्षेत्रों में दौड़ना पड़ा। अल्ट्रा टफ मेन के लिए 220 किलोमीटर की दौड़ थी। फुल टफ मेन के लिए 80 किलोमीटर और हाफ टफ मेन के लिए 50 किलोमीटर की दौड़ थी।

बैंक डिपॉजिट को मिलेगी ज्यादा सुरक्षा, इन्श्योरेंस कैप बढ़ाने पर विचार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार इन्श्योरेंस कैप बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने मंगलवार को राज्यसभा में जानकारी दी। यहां ये बता दें कि वर्तमान में डिपोजिट इंश्योरेंस लिमिट 1 लाख रुपए है। जेटली ने इसके साथ ही यह भी कहा कि बैंक डिपॉजिट को पहले से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।  
 
फाइनेंस मिनिस्ट्री का एफआरडीआई बिल पर स्पष्टीकरण
वहीं फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एफआरडीआई बिल 2017 को लेकर मीडिया में चल रही गलतफहमियों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। मिनिस्ट्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में जमाकर्ता को दी जाने वाली हालिया सुरक्षा को पूरी तरह से बदला नहीं गया है।

मंत्रालय ने कहा कि वित्तीय निपटान और जमा बीमा विधेयक (FRDI) में किसी भी तरह प्रतिकूल तरीके से जमाकर्ताओं को मिलने वाले मौजूदा संरक्षणों में किसी भी प्रकार का प्रतिकूल संशोधन नहीं किया गया है।

– मंत्रालय ने बयान में कहा कि एफआरडीआई विधेयक में जमाकर्ताओं को अधिक पारदर्शी तरीके से अतिरिक्त संरक्षण दिए गए हैं।
– मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मीडिया विशेषरूप से सोशल मीडिया में एफआरडीआई विधेयक में जमाकर्ताओं के संरक्षण के मामले में बेल-इन प्रावधान को लेकर कुछ संदेह जताया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है।
– मंत्रालय ने कहा कि एफआरडीआई विधेयक में बेल-इन कई रेजॉलूशन टुल्स में से एक माध्यम है। 
– मंत्रालय ने कहा, किसी विशेष प्रकार के रेजॉलूशन केस में बेल-इन प्रावधान के इस्तेमाल की जरूरत नहीं होगी।
– निश्चित रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मामले में इसकी जरूरत नहीं होगी क्योंकि इस तरह की आकस्मिक स्थिति आने की गुंजाइश नहीं है। फिलहाल बैंकों में जमा एक लाख रुपये तक की राशि का बीमा होता है।
– इसी तरह का संरक्षण एफआरडीआई विधेयक में भी जारी रहेगा। 
 
– वित्त मंत्रालय को निपटान निगम को जमा बीमा राशि में बढ़ोतरी का अधिकार होगा। यह स्पष्ट किया है कि 1 लाख रुपये से अधिक के गैर-बीमित जमा को मौजूदा कानून के तहत गैर-संरक्षित कर्जदाता के रूप में लिया जाएगा और परिसमापन की स्थिति में उन्हें तरजीह बकाया, सरकार बकाया आदि की अदाएगी के बाद भुगतान किया जाएगा। 

नए साल पर हजारों पर्यटकों को भाया कोटा

कोटा। फिल्म “बद्रीनाथ की दुल्हनिया” की शूटिंग के बाद से देशी – विदेशी पर्यटकों को कोटा बहुत रास आ रहा है।  नए साल की पूर्व संध्या और पहली जनवरी को कोटा घूमने आए पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।  

पर्यटन विभाग के एक अनुमान की माने तो इस वर्ष नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रमों में शहरी लोगों को छोड़ दें तो करीब 19 से 20 हजार के करीब पर्यटक आए।

पर्यटन विभाग के अधिकारी संदीप श्रीवास्तव मानते हैं कि देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन देश के विभिन्न स्थानों से कोटा घूमने आने वाले पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानियों की भी खासी संख्या रही।
 
कोटा की एक टूरिज्म एजेंसी के संचालक नीरज भटनागर के अनुसार नए साल की पूर्व संध्या पर यहां सैलानियों के कई ग्रुप आए। वहीं शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों जानकारी ली। कोटा में आधुनिक व प्राचीनता का समावेश है। चम्बल की खूबसूरती, मुकुन्दरा हिल्स रिजर्व, धार्मिक, स्थल मौजूद है इसके चलते पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
 
रास आया सेवन वडंर : नए साल की पूर्व संध्या पर सेवन वंडर को देखने के लिए 3500 से 3800 के करीब पर्यटक पहुंचे। इस दौरान दो दिनों में 6 से 7 हजार लोगों ने सेवन वंडर देखा। टिकट सम्बन्धित कार्य देखने वाले राहुल न्याती बताते हैं कि एक जनवरी को 3300 के करीब लोग सेवन वंडर को देखने देखने आए। 

2000 तक की टोटल सेल पर ही मिलेगी MDR सब्सिडी

नई दिल्ली। नए साल से कैशलेस ट्रांजैक्शन के नए नियम सरकार ने लागू कर दिए है। जिसके तहत गैजेट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। नोटिफिकेशन के अनुसार कैशलेस ट्रांजैक्शन पर किस तरह एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) पर सब्सिडी दी जाएगी उसे क्लीयर किया है।

सरकार के अनुसार 2000 रुपए तक की टोटल सेल पर ही एमडीआर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा कारोबारी उठा सकेंगे। इसी तरह सरकार ने क्लीयर किया है कि बैंक और बिजनेसमैन डेबिट-क्रेडिट के कांबो ऑफर बनाकर सब्सिडी का फायदा नहीं ले सकेंगे।

 क्या है नियम
 केंद्र सरकार ने एक जनवरी 2018 से कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए एमडीआर पर सब्सिडी  देने का फैसला किया है। जिसके तहत कोई भी खरीदार अगर 2000 रुपए तक का कैशलेस ट्रांजैक्शन करता है, तो बिजनेसमैन को ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर चार्ज पर सरकार सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी दो साल तक सरकार देगी। जिसके जरिए उस पर करीब 2500 करोड़ रुपए का बोझ आएगा।
 
 टोटल सेल पर ही सब्सिडी
 मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार एमडीआर पर सब्सिडी केवल टोटल सेल के आधार पर तय होगी। यानी अगर कोई व्यक्ति किसी दुकान से कैशलेस ट्रांजैक्शन करता है, तो सब्सिडी का फायदा दुकानदार को मिलेगा या नहीं ये कस्टमर की खरीदारी पर तय होगा।

यानी अगर एक कस्टमर 3000 रुपए की खरीदारी करता है, तो उस समय पर दुकानदार को सब्सिडी छूट नहीं मिलेगी। ऐसी नहीं है, कि दुकानदार 3000 रुपए की सेल में से 2000 रुपए पर सब्सिडी ले सकेगा। ऐसे समय में उसे पूरा एमडीआर चार्ज बैंक को देना होगा।
 
क्रेडिट कार्ड या कांबो स्कीम पर नहीं मिलेगा फायदा
इसी तरह सरकार ने नोटिफिकेशन में क्लीयर किया है कि कोई भी बैंक और दुकानदार कांबो या बंडल्ड ऑफर लाकर सब्सिडी का फायदा नहीं ले सकेगा। यानी क्रेडिट और डेबिट कार्ड दोनों बंडल्ड ऑफर पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।

एमडीआर पर सब्सिडी केवल डेबिट कार्ड, भीम ऐप, यूपीआई और आधार आधारित पेमेंट सिस्टम के जरिए 2000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर मिलेगी।
 
क्या है MDR 
जब कोई कस्टमर डेबिट-क्रेडिट या दूसरे तरीकों से कैशलेस ट्रांजैक्शन पीओएस मशीन के जरिए करता है तो उस पर बैंक और नेटवर्क देने वाली कंपनी एक चार्ज लेती हैं। जिसे एमडीआर कहा जाता है। जिसे दुकानदार को देना पड़ता है। इसकी वजह से कैश की तुलना में कैशलेस ट्रांजैक्शन महंगा हो जाता है।

जिसका इन डायरेक्ट असर कस्टमर पर पड़ता है।इसी गैप को खत्म करने के लिए सरकार ने एक जनवरी 2018 से 2000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर सब्सिडी देने का फैसला किया है। जिससे कि कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिल सके।

रुपया 2.5 साल के टॉप पर, 63.50 के स्तर पर पहुंचा

नई दिल्ली। नए साल में रुपए में मजबूती जारी है। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 63.50 के स्तर पर आ गया जो रुपए के लिहाज से पिछले ढाई साल का हाई है। इसके पहले रुपया जून 2015 में इस स्तर पर था।  ग्लोबल मार्केट में बैंकर्स और एक्सपोर्टर्स द्वारा अमेरिकल करंसी की बिकवाली से रुपए में डॉलर के मुकाबले मजबूती आई है। 

डॉलर इंडेक्स में लगातार कमजोरी
रुपए में साल 2017 की शुरूआतत से ही मजबूती जारी है और पिछले एक साल के दौरान रुपया 7 फीसदी तक मजूबत हो चुका है। वहीं, इस दौरान डॉलर इंडेक्स लगातार कमजोर हुआ है। डालर इंडेक्स 92 के स्तर पर आ गया है, जो 2017 की शुरूआत में 102 के ऊपर था। 
 
साल के पहले दिन ही 18 पैसे मजबूत
1 जनवरी यानी सोमवार को रुपया, डॉलर के मुकाबले 63.68 के भाव पर आ गया था जो 5 अगस्त 2017 के बाद सबसे ज्यादा था। एक दिन में रुपए में 18 पैसे की मजबूती देखी गई।वहीं, आज के कारोबार में रुपए में फिर 20 पैसे से ज्यादा की मजबूती देखी गई।
 
इन वजहों से मजबूत हुआ रुपया
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एफआईआई का डेट सिक्युरिटीज में बढ़ता निवेश, स्टॉक मार्केट में तेजी और सरकार के द्वारा जारी रिफॉर्म से रुपए को लगातार सपोर्ट मिला है। डॉलर में नरमी से भी रुपए को सहारा मिला है।

जिसकी वजह से रुपया मजबूत हुआ है। बता दें कि इस साल की शुरूआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 68.06 के स्तर पर था, जो अब करीब 7 फीसदी मजबूत होकर 63.50 के स्तर पर पहुंच गया है।

तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा सोना, जानिए क्या रहे दाम

नई दिल्ली/कोटा । सोने ने साल 2018 की शुरुआत मजबूती के साथ की है। मंगलवार को सोने के दाम बीते तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। बीते हफ्ते ही इसने 1,300 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार कर दिया था।

आज दिन के कारोबार में सोना 1305 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया जो कि 26 सितंबर के बाद का उच्चतम स्तर था। दोपहर दो बजे सोना करीब 1311.10 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

मंगलवार को बुलियन मार्केट का हाल: बुधवार के कारोबार में सोना दोपहर दो बजे 70 रुपए की तेजी के साथ 29,193 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

साल के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार में औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से मांग बढ़ने से चांदी 120 रुपये मजबूत होकर 40 हजार 100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। हालांकि सोना सपाट बंद हुआ।

सोमवार को यह कीमती धातु 30 हजार 400 रुपये प्रति 10 ग्राम के पिछले स्तर पर बनी रही। पिछले सत्र में इसमें 175 रुपये की तेजी आई थी।

सराफा बाजार में जहां हाजिर चांदी में तेजी रही लेकिन साप्ताहिक डिलीवरी वाली चांदी 50 रुपये के नुकसान में 39 हजार 170 रुपये प्रति किलो पर बोली गई।

दिल्ली में सोना आभूषण के भाव 30 हजार 250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहे। आठ ग्राम वाली गिन्नी 24 हजार 700 रुपये के पूर्वस्तर पर यथावत रही।

कोटा सर्राफा
चांदी  39600 रुपये प्रति किलोग्राम।
केटबरी  30400 रुपए प्रति दस ग्राम,  सोना 35460 रुपये प्रति तोला।
शुद्ध  30550 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35630 रुपये प्रति तोला।

चुनावी चंदा देने के लिए अब SBI में मिलेंगे बॉन्ड, देनी होगी KYC डिटेल

नई दिल्‍ली।  राजनीतिक दलों को अब बॉन्ड के जरिए चंदा दिया जाएगा। मंगलवार को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इसका एलान कर दिया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि राजनीतिक दलों को डोनेशन देने के लिए SBI की चुनिंदा ब्रांचेस से इंटरेस्‍ट फ्री बॉन्‍ड्स खरीदे जा सकेंगे। हालांकि, इसके लिए डोनर को एसबीआई में केवायसी डिटेल्‍स देनी होंगी।

 कब और कितने बॉन्‍ड खरीदे जा सकेंगे?
– ये बॉन्‍ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्‍टूबर के 10 दिनों में बिक्री के लिए मुहैया होंगे। 
– जेटली ने यह भी कहा कि आम चुनाव वाले साल के दौरान बैंक में बॉन्‍ड्स 30 दिन के लिए मुहैया होंगे। इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड 1000, 10000, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपए के गुणांक में होंगे।
 
बॉन्ड में नहीं होगा डोनर्स का नाम
– वित्‍त मंत्री ने आगे कहा कि इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड्स में डोनेशन देने वाले का नाम नहीं होगा। साथ ही इन बॉन्‍ड्स को राजनीतिक दल को दिए जाने के 15 दिनों के अंदर सिर्फ एक डेजिग्‍नेटेड बैंक अकाउंट के जरिए ही भुनाया जा सकेगा।

2017 के बजट में किया था एलान
– बता दें कि वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल के बजट में राजनीतिक दलों के लिए होने वाली फंडिंग के नियमों में बदलाव करने का एलान किया था। 

– सरकार का कहना था कि वह इसके लिए RBI एक्‍ट में बदलाव करेगी। इसके तहत पॉलिटिकल पार्टीज किसी एक शख्स से सिर्फ 2000 रुपए कैश डोनेशन ले सकेंगी। 

– यह भी कहा गया था कि इससे ज्‍यादा पेमेंट के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लाए जाएंगे, जिन्‍हें डोनर्स ऑथराइज्ड बैंकों से खरीद सकेंगे। – इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टीज के ऑथराइज्ड अकाउंट में डोनेशन दी जा सकेगी।
 
चेक या ड्राफ्ट से चंदे पर रोक नहीं
सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि चेक या ड्रॉफ्ट के जरिए राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।

डॉक्टर्स हड़ताल ख़त्म, पार्लियामेंट्री कमेटी के फैसले का इंतजार करेंगे- IMA

नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी को भेजे जाने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। उसका कहना है कि वह कमेटी का फैसला आने तक हड़ताल नहीं करेगी। हालांकि, इससे पहले एसोसिएशन की अगुआई में देशभर के सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर्स मंगलवार को दोपहर बाद तक हड़ताल पर रहे।

क्या है मामला?
– नेशनल मेडिकल कमीशन बिल शुक्रवार को संसद में पेश किया था। केंद्र सरकार इसके जरिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बनाना चाहती है। आईएमए इसका विरोध कर रही है।

बिल से और क्या बदलाव होगा?
इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रप्रोजल है। इसे करने के बाद वे मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे।

बिल का विरोध क्यों कर रहा आईएमए?
– आईएमए के पूर्व प्रेसिडेंट केके अग्रवाल के मुताबिक, “इस बिल में ऐसे प्रोविजन्स हैं, जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जाएगी। जबकि इसके लिए कम से कम एमबीबीएस क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। इससे नीम-हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।”

– डॉक्टर अग्रवाल का दावा है कि इस बिल में प्राइवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की छूट दी गई है।
क्या है मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया?

– इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देशभर के मेडिकल प्रोफेशनल्स की रिप्रेंजेटेटिव बॉडी है। देश का कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर इसका चुनाव लड़ सकता है और अपना लीडर चुनने के लिए वोट कर सकता है।
क्या नेशनल मेडिकल कमीशन में भी इलेक्शन का ऑप्शन है?

– नहीं, इसमें गवर्नमेंट द्वारा चुने गए चेयरमैन और मेंबर्स रखे जाएंगे। इसके अलावा बोर्ड मेंबर्स को कैबिनेट सेक्रेटरी के अंडर में काम करने वाली सर्च कमेटी चुनेगी।

H-1B वीजा : 75K भारतीयों को छोड़ना होगा US!

नई दिल्ली । ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ की नीति के अनुरूप ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिससे बड़ी संख्या में भारतीयों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी (डीएचएस) के साथ मेमो के रूप में साझा किया गया यह प्रस्ताव उन विदेशी वर्करों को अपना H-1B वीजा रखने से रोक सकता है जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित पड़े हों।

अमेरिकी सरकार के इस कदम से अमेरिका में हजारों इंडियन एंप्लॉयीज का H-1B एक्सटेंड नहीं किया जाएगा क्योंकि अमेरिका में स्थायी निवास की अनुमति देनेवाला उनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है। इस नए कानून से प्रभावित होनेवाले भारतीयों में बड़ी तादाद आईटी सेक्टर में काम करनेवाले एंप्लॉयीज की है।

मौजूदा नियम में ग्रीन कार्ड आवेदनों के लंबित रहने के मद्देनजर अभी 2-3 साल के लिए H-1B की मान्यता बढ़ाने की अनुमित मिली हुई है। अगर नया नियम लागू हो जाता है तो H-1B धारक 50,000 से 75,000 भारतीयों को अमेरिका छोड़कर देश वापस आना पड़ सकता है।

खबर है कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम वीजा संबंधी मुद्दों को लेकर अमेरिकी सांसदों और प्रशासन के सामने अपनी चिंता प्रकट कर चुका है और अगले कुछ हफ्तों में प्रस्तावित कानून पर भी बातचीत कर सकता है।

दरअसल, अमेरिकी प्रशासन का यह कदम उसके प्रस्तावित ‘Protect and Grow American Jobs (अमेरिकी नौकरियों का संरक्षण और वृद्धि)’ बिल के फलस्वरूप उठाया है।

इस बिल में H-1B वीजा के दुरुपयोग रोकने के लिए नए प्रतिबंध प्रस्तावित हैं। इसके तहत, न्यूनतम वेतन और टैलंट के मूवमेंट को लेकर नई पाबंदियां लगाए जाने की बात कही गई है।

न्यूनतम वेतन में बड़ी वृद्धि के साथ नए वीजा नियम में क्लायंट्स को यह बताने को बाध्य किया जा रहा है कि वो नई नियुक्ति से मौजूदा वर्कर के अगले 5 से 6 साल तक की नौकरी पर खतरा नहीं होने की गारंटी दें।

अमेरिका हर साल 85,000 नॉन-इमिग्रंट H-1B वीजा जबकि 65,000 विदेशियों को विदेशों में नियुक्ति और अमेरिकी स्कूल-कॉलेजों के अडवांस डिग्री कोर्सेज में दाखिले के लिए 20,000 लोगों को वीजा प्रदान करता है। इन कोटे का 70 प्रतिशत वीजा भारतीयों के हाथ ही लगता है। इनमें ज्यादातर को आईटी कंपनियां नियुक्त करती हैं।

बूंदी में बंद समर्थकों ने पुलिस पर किया पथराव, माहौल गर्माया

बूंदी। बूंदी में जैतसागर झील किनारे टाइगर हिल पर स्थित मानधाता छतरी पर आयोजन को लेकर सोमवार को हुई पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में लोगों ने मंगलवार को बूंदी बंद कर दिया। सुबह से ही बंद समर्थक बड़ी संख्या में कोतवाली थाना पहुंचे और घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

हिंदू महासभा ने सत्याग्रह मार्च निकालने से रोकने, संतों व कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई व पूजा की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इससे लंकागेट पर माहौल बिगड़ गया। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है।
 
हिंदू महासभा ने लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार से अनिश्चितकाल तक बूंदी बंद रखने का आह्वान किया है। इधर, हिंडौली कस्बा और कृषि मंडी भी बंद रखने का आह्वान किया। हिंदू महासभा ने बैठक के बाद यह घोषणा की। गौरतलब है कि छतरी पर आयोजन के लिए सुबह से ही लोग शहर के अलग-अलग स्थानों पर जुटना शुरू हो गए थे।

पुलिस ने कुछ जगहों से लोगों को खदेड़ा भी, लेकिन भीड़ बढ़ती गई। सभी मालनमासी बालाजी परिसर में एकत्र हो गए। संत रामलखन दास भी समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। उनके साथ लोग जाने लगे तो पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई। मीरागेट के पास पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

पुलिस ने गलियों और घरों में घुसे लोगों को निकाल-निकाल कर मारा। इससे नौ जनों को गंभीर चोटें आई। जिन्हें बूंदी जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। बाद में पुलिस ने सभी मार्गों से लोगों को खदेड़ दिया। लाठीचार्ज की सूचना मिलने पर आईजी विशाल बंसल भी बूंदी पहुंच गए।

एसपी आदर्श सिधु, एडीएम नरेश मालव व ममता तिवाड़ी भी हालात पर निगरानी रखे हैं। इस मामले में एक दर्जन नामजद सहित 500 से 700 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है व 41 जनों को हिरासत में लिया।आईजी विशाल बंसल ने कहा कि बूंदी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के पूर प्रयास किए जा रहे हैं।