नई दिल्ली। Retail Inflation Rate: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार जून में भारत की खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी से बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई। नई श्रृंखला के तहत जनवरी 2025 के बाद पहली बार खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य को पार कर गई है। इसे मुख्य तौर पर ईंधन कीमतों में तेजी के कारण परिवहन, खाद्य और रेस्तरां सेवाओं की लागत बढ़ने से रफ्तार मिली।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की 5 अगस्त को होने वाली बैठक में ब्याज दरों में वृद्धि की गुंजाइश नहीं दिख रही है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें इस साल अप्रैल के स्तर से कम हुई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल थी जो घटकर जुलाई में करीब 71 डॉलर रह गई।
जून का महंगाई आंकड़ा 2024 की नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला के तहत छठा आंकड़ा है। पिछली श्रृंखला के आंकड़ों के मुकाबले यह 18 महीने का उच्चतम स्तर होने का अनुमान है। इससे पहले दिसंबर 2024 में यह जून के स्तर से अधिक यानी 5.22 फीसदी रहा था।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने उम्मीद जताई कि एमपीसी अगस्त 2026 में अपनी बैठक में नीतिगत दर पर अपरिवर्तित रखेगी। उन्होंने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से दर वृद्धि की संभावना कम हो गई है लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव के फिर से बढ़ने से कुछ सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इसके आवा मॉनसून के नतीजों पर अधिक स्पष्टता की दरकार है जो सीजन के आखिर में ही उपलब्ध होगा। ऐसे में दर में वृद्धि की संभावना नहीं है।’

