Tuesday, July 14, 2026
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ट्रिपल आईटी क्लास इसी सत्र से कोटा में शुरू करने की कोशिश : माहेश्वरी

कोटा। कोटा में ट्रिपल आईटी की क्लास शुरू करने के लिए मल्टीपरपज स्कूल के प्रस्ताव को उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने खारिज कर दिया है। अब इसके लिए दूसरे विकल्पों की तलाश की जा रही है। स्कूल को देखे बिना उन्होंने पहले इसके लिए स्वीकृति दे दी थी, लेकिन जब रविवार को मौका देखा तो स्कूल की स्थिति और वहां पढ़ रहे 1045 छात्रों के भविष्य को देखते हुए प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।

इसके बाद आरटीयू के इंजीनियरिंग कॉलेज के बारे में भी बात हुई, लेकिन इसके वीसी के कोटा से बाहर होने के कारण वे भवन नहीं देख पाईं। उन्होंने कहा कि शहर में अब दूसरी इमारतों को देखा जा रहा है। कोटा की ट्रिपल आईटी पिछले 5 साल से जयपुर में चल रही है।

इसे कोटा में शुरू करने के लिए पिछले दिनों जयपुर में चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें बंद हो चुकी आईएल  कॉलोनी को इसके लिए उपयोग करने पर सहमति बनी थी। इसके लिए कलेक्टर रोहित गुप्ता को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन इसकी जमीन को लेकर चीफ सेक्रेटरी के यहां चल रहे विवाद के कारण इसका भी फैसला नहीं हो पाया।

इसलिए उसका फैसला पहले ही निरस्त कर दिया था। मंत्री ने कहा कि कोटा की ट्रिपल आईटी यहां शुरू होना चाहिए। वे चाहती हैं कि अगले सत्र की क्लास कोटा में ही लगे। इसके लिए भवन देखा जा रहा है। आरटीयू के इंजीनियरिंग कॉलेज पर भी विचार चल रहा है। अन्य भवन भी देख रहे हैं, इसके लिए दिल्ली की टीम आकर भवन को फाइनल करेगी।

दिल्ली की टीम करेगी फाइनल
मंत्री ने कहा कि कोटा की ट्रिपल आईटी यहां शुरू होना चाहिए। वे चाहती हैं कि अगले सत्र की क्लास कोटा में ही लगे। इसके लिए भवन देखा जा रहा है। आरटीयू के इंजीनियरिंग कॉलेज पर भी विचार चल रहा है। अन्य भवन भी देख रहे हैं, इसके लिए दिल्ली की टीम आकर भवन को फाइनल करेगी।

मंत्री माहेश्वरी के अनुसार उनसे मल्टीपरपज स्कूल में ट्रिपल आईटी शुरू करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आग्रह किया था। हम भी चाहते हैं कि कोटा में यह चालू हो जाए, इसके लिए इसे स्वीकृति दे दी गई है। रविवार को सुबह भाजपा अध्यक्ष हेमंत विजय के साथ हुई बात में भी उन्होंने मान लिया था कि ट्रिपल आईटी को यहां शुरू कर दिया जाए, लेकिन जब वे मल्टीपरपज स्कूल पहुंची तो यहां की हालत देखकर दंग रह गई। यहां के कमरों की हालत दयनीय है। 

इक्विटी म्‍युचुअल फंड में आया रिकॉर्ड 1.3 लाख करोड़ का निवेश

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नई दिल्‍ली। कैलेंडर वर्ष 2017 में निवेशकों ने इक्विटी म्‍युचुअल फंड में रिकॉर्ड 1.3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। जानकारों के मुताबिक इसका कारण घटती ब्‍याज दरें और गोल्‍ड और रियल स्‍टेट का अच्‍छा प्रदर्शन न करना भी रहा। वर्ष 2017 में इक्विटी म्‍युचुअल फंड का आकार 7.7 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह आकार 4.7 लाख करोड़ रुपए था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड इन इंडिया (एम्‍फी) के आंकड़ों में सामने आई है।
 
 SIP से निवेश बढ़ा
वर्ष 2017 में सिस्‍टेमैटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लान (सिप) के माध्‍यम से निवेश बढ़ा है। एम्‍फी ने लगातार म्‍युचुअल फंड के प्रति पॉजिटिव माहौल भी बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। बजाज कैपिटल के सीईओ राहुल पारिख के अनुसार इक्विटी म्‍युचुअल फंड का लगातार अच्‍छा प्रदर्शन और कंपनियों की अर्निंग में सुधार की उम्‍मीद से निवेश बढ़ा है। इनके अनुसार नोटबंदी के बाद से बैंकों की घटती ब्‍याज दरों ने भी लोगों को म्‍युचुअल फंड में निवेश के लिए आकर्षित किया।

इक्विटी म्‍युचुअल फंड में रिकॉर्ड निवेश
एम्‍फी के डाटा के अनुसार वर्ष 2017 में टैक्‍स सेविंग म्‍युुचुअल फंड सहित इक्विटी म्‍युचुअल फंड में रिकॉर्ड 1.33 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ। यह निवेश एक साल पहले करीब 51 हजार करोड़ रुपए का था। इस निवेश में सिप के माध्‍यम से काफी बड़ा हिस्‍सा आया है।

रिकॉर्ड निवेश में सिप की‍ हिस्‍सेदारी 53 हजार करोड़ रुपए की रही। वर्ष 2017 में रह माह औसतन 9 लाख नई सिप शुरू हुई। पिछले साल सिप से औसतन हर माह करीब 3973 करोड़ रुपए का निवेश आया वहीं 2017 में यह निवेश औसतन 5893 करोड़ रुपए प्रति माह का रहा।
 
लोगाें में बढ़ी वित्‍तीय मामलों की समझ
फ्रैंकलिन टेम्‍पल्‍टन इन्‍वेस्‍टमेंट इंडिया के प्रेसीडेंट संजय सप्रे के अनुसार लोगों में वित्‍तीय मामलों की समझ बढ़ रही है, इसके अलावा लम्‍बे समय में वैल्‍थ क्रियेट करने की योजनाओं का अभाव है जिसके कारण म्‍युचुअल फंड में निवेश बढ़ा है।

उन्‍होंने कहा कि तकनीक का तेजी से विस्‍तार हो रहा है, जिससे अागे तेज ग्रोथ की संभावना है। उनके अनुसार जनधन, आधार और मोबाइल के एक प्‍लेटफार्म पर आने के बाद KYC की समस्‍या खत्‍म हो जाएगी। इससे डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की लागत में काफी कमी आएगी।

शानदार मर्सिडीज कार 15 जनवरी को होगी लांच

नई दिल्ली।  मर्सिडीज-बेंज इन दिनों नई जी-क्लास पर काम कर रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि इसे डेट्रॉयट मोटर शो-2018 के पहले दिन यानी 15 जनवरी को दुनिया के सामने पेश किया जाएगा। भारत में इसकी लॉन्चिंग साल के आखिर तक हो सकती है।

नई जी-क्लास में मौजूदा मॉडल वाले डिजायन को बरकरार रखा गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे रफ बॉडी-ऑन-फ्रेम पर तैयार किया जाएगा। वजन को कम रखने के लिए इस में एल्यूमिनियम का इस्तेमाल किया जाएगा।

नई जी-क्लास का केबिन नया और पहले से ज्यादा जगहदार होगा। केबिन की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए इसके डैशबोर्ड पर बटनों की संख्या कम की गई है। इस में ई-क्लास और एस-क्लास से प्रेरित 12.3 इंच डिस्प्ले आएगी, जो सभी का ध्यान खींचेगी।

केबिन को प्रीमियम बनाने के लिए मैटालिक फिनिशिंग वाले सर्कुलर एसी वेंट दिए गए हैं। इंजन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है, कयास लगाए जा रहे हैं कि इस में एस-क्लास फेसलिफ्ट वाले इंजन दिए जा सकते हैं।

फिएट ने दिखाई क्रोनोस सेडान के केबिन की झलक

नई दिल्ली। फिएट ने क्रोनोस सेडान के केबिन की झलक दिखाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे महीने के आखिर तक दक्षिण अमेरिका में लॉन्च किया जाएगा। फिएट कारों की रेंज में यह लिनिया की जगह लेगी।

 फिएट क्रोनोस, एग्रो हैचबैक का सेडान अवतार है। इसका केबिन एर्गो हैचबैक के केबिन से मिलता-जुलता है। हालांकि यहां पर मामूली बदलाव देखे जा सकते हैं। शुरूआत करते हैं इनके डैशबोर्ड से… दोनों कारों के डैशबोर्ड का लेआउट एक जैसा है।

क्रोनोस सेडान का डैशबोर्ड पर डार्क मैटालिक फिनिशिंग दी गई है, जो इसे प्रीमियम बनाते हैं। वहीं एर्गो हैचबैक के डैशबोर्ड पर रेड और सिल्वर फिनिशिंग दी गई है, जो इस में स्पोर्टी कार वाला अहसास लाते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इनकी फीचर लिस्ट भी करीब-करीब एक जैसी होगी।

भारत में फिएट क्रोनोस को उतारा जाएगा या नहीं, इसके बारे में कंपनी ने अभी कोई जानकारी नहीं दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले कुछ सालों में कंपनी इसे भारतीय बाजार में उतार सकती है।

सलमान के घर से बेआबरू होकर लौटी अर्शी खान, गार्ड्स ने नहीं दी एंट्री

मुंबई। टीवी शो ‘बिग बॉस 11’ से बाहर होने के बाद अर्शी खान एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, इस बार जिस वजह से वह सुर्खियों में हैं, उसकी वजह हैरान कर देने वाली है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अर्शी हाल ही में सलमान से मिलने के लिए उनके बांद्रा स्थित गैलक्सी अपार्टमेंट में पहुंची थीं लेकिन यहां सलमान के गार्ड्स ने उन्हें घर में घुसने नहीं दिया।

बताया जा रहा है कि अर्शी के साथ एक और महिला भी मौजूद थीं जिनके हाथ में बुके देखा गया। इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्शी बिना अपॉइंटमेंट लिए ही सलमान के घर पहुंच गईं थीं।

जब गार्ड्स ने पूछा तो अर्शी ने कहा कि सलमान से मिलने के लिए उनके मैनेजर ने अपॉइंटमेंट लेने की कोशिश की थी लेकिन मिल नहीं सका।

इसके बाद वहां मौजूद गार्ड्स ने अर्शी को अंदर जाने से रोक दिया। अर्शी ने यहां तक कहा कि अगर सलमान नहीं मिलना चाहते तो उनके पिता सलीम खान से ही मिलने दिया जाए ताकि वह उन्हें बुके दे सकें लेकिन गार्ड ने उनकी एक न सुनी।

अब ब्रिटेन नहीं, चीन बन रहा भारतीय छात्रों की पसंद

मुंबई। अब विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों की पहली पसंद ब्रिटेन नहीं रह गया है। ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि छात्र ब्रिटेन के मुकाबले चीन को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। वैसे तो 2010-11 से ही मेडिसिन की पढ़ाई करने के लिए छात्र चीन जाते रहे हैं लेकिन भारत में हाल ही में लागू NEET के बाद इस संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।

मेडिकल एंट्रेंस का नया सिस्टम कठिन है और छात्रों को क्लियर करने में काफी दिक्कत हो रही है। कुछ छात्र वहां से इंजिनियरिंग करने को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। देश अध्ययन की एक्सपर्ट प्रतिभा जैन बताती हैं, ‘यहां कोर्स पर कम खर्च आता है और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया यहां की मेडिकल डिग्री को मान्यता भी देती है।

कुछ छात्र पहले रूस जाते थे लेकिन वहां भाषा की बाधा सामने आती है। चीन में ऐसा नहीं है। वहां कोर्स इंग्लिश में है इसलिए छात्रों को आसानी होती है।’ चीन की मेडिकल यूनिवर्सिटीज में औसत ट्युइशन फीस 2,000 से 3,000 डॉलर यानी करीब 1.5 से 2 लाख रु. है। इसके अलावा 1000 डॉलर करीब 66 रु. लिविंग एक्सपेंस के तौर पर लिए जाते हैं।

वास्तव में चीन अब यूएस और यूके के बाद तीसरा सबसे पसंदीदा स्थान हो गया है। 2015 में चीन जाने वाले छात्रों की संख्या 13,500 से ज्यादा थी। भारत उन टॉप 10 देशों में शामिल हैं जहां के छात्र बड़ी संख्या में अध्ययन के लिए चीनी यूनिवर्सिटियों में जा रहे हैं।

अब 25 जनवरी को रिलीज होगी ‘पद्मावत, पद्मावती नहीं

मुंबई। संजयलीला भंसाली की फिल्म पद्मावत (पहले- पद्मावती) की आखिरकार रिलीज डेट तय हो गई है। लंबे विवाद के बाद अब यह फिल्म 25 जनवरी को पर्दे पर आएगी। इससे पहले फिल्म को 1 दिसंबर को रिलीज किया जाना था, लेकिन बढ़ते विवाद के कारण इसे टाल दिया गया था। इसके बाद सेंसर बोर्ड ने फिल्म दिखाने के लिए एक पैनल बनाया जिसमें इतिहासकार भी मौजूद थे। इस स्क्रीनिंग के बाद फिल्म को 5 संशोधन के बाद U/A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की मंजूरी मिल गई।

यह हैं फिल्म में किए गए 5 बदला
इससे पहले फिल्म को 12 जनवरी को रिलीज करने की भी बात सामने आई थी, लेकिन अब यह 25 जनवरी को रिलीज होगी। बता दें, U/A सर्टिफिकेट के लिए फिल्म में ये 5 बदलाव करने की बात की गई थी-

  • फिल्म में एक डिस्क्लेमर लगाया जाएगा जिसमें यह बताया जाएगा कि फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता का दावा नहीं करती है।
  • फिल्म का नाम ‘पद्मावती’ से बदलकर ‘पद्मावत’ किया जाएगा।
  • फिल्म के फेमस गाने ‘घूमर’ गाने में भी बदलाव किया जाएगा।
  • फिल्म में दिखाए गए गलत और भ्रमित करने वाले ऐतिहासिक स्थलों में बदलाव किया जाएगा।
  • पांचवें बदलाव के तौर पर फिल्म में एक डिस्क्लेमर देने को कहा गया था कि यह किसी भी तरह से सती प्रथा का समर्थन या उसे महिमामंडित नहीं करती है।

टल गई ‘अय्यारी’ की रिलीज
फिल्म मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक अब यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज होगी और अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन के साथ पर्दे पर टकराएगी। खबर यह भी है कि नीरज पांडे द्वारा निर्देशित फिल्म अय्यारी की रिलीज को 26 जनवरी से 9 फरवरी के बीच के लिए टाल दिया गया है। यह फिल्म भी 26 जनवरी को रिलीज होने वाली थी।

‘टाइगर जिंदा है’ का जलवा बरकरार, कमाई 470 करोड़

मुंबई। सलमान-कटरीना स्टारर ‘टाइगर जिंदा है’ का जलवा सिनेमाघरों में अब भी बरकरार है। इसी जलवे के साथ ही फिल्म कमाई के मामले में 300 करोड़ क्लब में शामिल हो गई है। सूत्रों के मुताबिक फिल्म ने 15 दिनों में ही दुनिया भर में अच्छा-खासा बिजनस कर लिया है और इसकी कमाई 500 करोड़ पहुंचने के करीब है। अब तक फिल्म दुनिया भर में लगभग 487 करोड़ रुपये कमा चुकी है। इसमें 374 करोड़ का कलेक्शन भारत से है और 113 करोड़ अन्य देशों से।

इसके साथ ही यह फिल्म 500 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली 2017 की दूसरी फिल्म बन जाएगी। इससे पहले अप्रैल में आई फिल्म ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने लगभग 800 करोड़ रुपये कमाए थे। यह ऐक्शन पैक्ड फिल्म 22 दिसंबर को रिलीज हुई थी और अब इसकी गिनती सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में होने लगी है।

इससे पहले भी सलमान की फिल्में ‘सुल्तान’ और ‘बजरंगी भाईजान’ 300 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले हफ्ते फिल्म ‘धूम’ 3 को कमाई में पछाड़ सकती है। बता दें, कि टाइगर जिंदा है ने पहले 3 दिनों में ही 100 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया था।

1.35 लाख कंपनियों ने नहीं जमा कराया पीएफ का पैसा

नई दिल्‍ली। देश भर में 1.35 लाख कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा सरकार के पास जमा नहीं कराया है। ऐसा कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन के अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से हो रहा है। कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन ने यह बात खुद स्‍वीकार की है कि कंपनियों के निरीक्षण के लिए जाने वाले अधिकारी निरीक्षण के नाम पर महज खानपूर्ति कर रहे हैं।

इसकी वजह से कंपनियों में डिफॉल्‍ट के मामले बढ़ रहे हैं। ईपीएफओ ने अधिकारियों को चेताया है कि कंपनियों का निरीक्षण तय मानकों के साथ और लगातार किया जाना चाहिए जिससे कंपनियों में बढ़ते डिफाल्‍ट के मामलों पर अंकुश लगाया जा सके। 

दिसंबर में डिफॉल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या बढ़ी 
ईपीएफओ की ओर से जारी किए गए ताजा डाटा के अनुसार दिसंबर माह में अपने कर्मचारियों का पीएफ न जमा कराने वाली कंपनियों की संख्‍या बढ़ कर 1,35,017 हो गई है जबकि नवंबर माह में डिफाल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या 1,30,684 थी।

ईपीएफओ ने अपने सभी एडिशनल सेंट्रल पीएफ कमिश्‍नरों (जोन) और रीजनल सेंट्रल पीएफ कमिश्‍नरों से पता लगाने को कहा है कि डिफाल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या क्‍यों बढ़ रह है। इसके अलावा ईपीएफओ ने ऐसे ऑफिस के बारे में भी रिपोर्ट मांगी है जिनका प्रदर्शन निरीक्षण के मोर्चे पर खराब है। 
 
23 फीसदी कंपनियों ने किया है डिफॉल्‍ट 
 दिसंबर 2017 में ईपीएफओ के पास कंट्रीब्‍यूट करने वाले कंपनियों की कुल संख्‍या 4, 46, 193 थी। इसमें से 1,35,017 कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के नवंबर माह का पीएफ सरकार के पास जमा नहीं कराया है।

इस तरह से ईपीएफओ के पास अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने वाली कुल कंपनियों में से 23 फीसदी कंपनियों ने दिसंबर माह में अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं कराया है। 

निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति करते हैं अधिकारी
ईपीएफओ ने अपनी जांच में पाया है कि कई मामलों में अधिकारियों ने कंपनियों में निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति की है। अधिकारियों ने कंपनियों की न तो अकाउंट बुक चेक की और न ही कंपनियों के रिकॉर्ड चेक किए। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान ईपीएफओ द्वारा तय किए गए मानकों का पालन भी नहीं किया गया।

एनफोर्समेंट ऑफिसर्स ने बहुत कम कंपनियों का निरीक्षण किया है। निरीक्षण की संख्‍या उनके लिए तय मानकों से बहुत कम है। साथ ही अधिकारियों निरीक्षण की जो रिपोर्ट अपलोट की है वह अभी अधूरी है। 

गुदड़ी के लाल कवि “हलधर”- देखिये वीडियो

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दिनेश माहेश्वरी, कोटा। रामनारायण मीणा हलधर की हाल ही में गजल संग्रह “अभी उम्मीद बाकी है, प्रकाशित हुई है। उनकी लेखन कला को लेकर हमारे चैनल LD NEWS ने उनसे साक्षात्कार किया। हालाँकि हलधर कोटा आकाशवाणी में सीनियर अनाउंसर हैं. परन्तु उनकी काव्य रचनाओं के कारण उन्हें कवि के रूप में एक नई पहचान मिली है।

हलधर छीपाबड़ौद के पास छोटे से गांव तूमड़ा में किसान परिवार में जन्में हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी हलधर की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। जिनमें से एक “शिखरों के हक़दार” दोहा संग्रह और दूसरी “अभी उम्मीद बाकी है”, गजल संग्रह जिसका विमोचन कुछ ही दिन पहले प्रकाशित हुआ है। 

वे सार्वजानिक मंच पर भी काव्य पाठ करते रहे हैं। एक तरह से उन्हें गुदड़ी के लाल भी कह सकते हैं। उनकी अधिकांश रचनाओं में ग्रामीण संस्कृति की झलक और किसानों का दर्द झलकता है। साक्षात्कार में हमने उनके अनकहे और अनछुए पहलुओं को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है। तो आइये देखिये वीडियो –