Wednesday, July 15, 2026
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दो दिन की रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार धड़ाम

नई दिल्ली। दो दिन की रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार बुधवार को बाजार धड़ाम से गिर गया। हालांकि इस दौरान एक समय ऐसा भी आया जब निफ्टी ने 10600 के स्तर पर पहुंचकर और सेंसेक्स ने 34,500 के स्तर पहुंचकर नया रेकॉर्ड बनाया। इसके बाद सेंसेक्स 40 पॉइंट गिरकर 34,404 पर और निफ्टी 11.50 पॉइंट गिरकर 10,625 पर बंद हुआ।

बुधवार को बाजार में दबाव बनाने का काम बैंक निफ्टी और मिडकैप शेयरों ने किया। लेकिन वहीं 100 फीसदी एफडीआई की खबर से सिंगल ब्रांड रिटेल से जुड़े शेयर दौड़े।

निफ्टी 10,655.5 तक पहुंचने में कामयाब हुआ जबकि सेंसेक्स ने 34,566 का नया रिकॉर्ड ऊपरी स्तर छुआ। अंत में सेंसेक्स और निफ्टी सपाट होकर बंद हुए हैं। आज मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्का दबाव नजर आया।

बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.3 फीसदी गिरकर बंद हुआ है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.15 फीसदी की कमजोरी आई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.1 फीसदी तक लुढ़ककर बंद हुआ है।

बजट में फसल बीमा योजना को 13,000 करोड़ मिलने की उम्मीद

नयी दिल्ली। आगामी वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आवंटन बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये हो सकता है। चालू विा वर्ष के बजट में यह राशि 10,701 करोड़ रुपये है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
वित्त वर्ष 2018-19 का आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा।

वर्ष 2016 की शुरुआत में पेश उन्नत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को बहुत मामूली प्रीमियम भुगतान पर अपनी पूरी फसल के लिए बीमा संरक्षण मिलता है। फसल का नुकसान होने पर वह बीमा का दावा कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार अगले वित्त वर्ष के बजट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 13,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जा सकती है। इससे बीमित राशि में 10% वृद्धि होने की उम्मीद है।

कृषि मंत्रालय ने इस योजना के लिए 11,000 करोड़ रुपये राशि की मांग की थी लेकिन उसे भरोसा है कि इस योजना के महत्व को देखते हुए वित्त मंत्रालय उसे अधिक कोष आवंटित कर सकता है।

सूत्र ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने इस योजना के लिए 9,000.75 करोड़ रुपये की आरंभिक राशि आवंटित की थी। हालांकि पूरक मांग के आधार पर बाद में 1701 करोड़ रुपये की राशि और दी गई और योजना के लिए कुल 10,701 करोड़ रुपये जारी किए गए।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार फसल वर्ष 2016-17 जुलाई-जून में 15,500 करोड़ रुपये के कुल बीमा दावे किए जाने का अनुमान है। इसमें से 13,661 करोड़ रुपये के दावे किए जा चुके हैं और 12,313 करोड़ रुपये के दावों का निपटान हो चुका है। फसल वर्ष 2016-17 में इस योजना के तहत 5.70 करोड़ किसानों ने बीमा पॉलिसी की खरीद की।

अब आधार सेफ, 1 जून से 16 अंकों की वर्चुअल ID से वेरिफिकेशन

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नई दिल्ली।आधार डेटा की सुरक्षा के लिहाज से यूनिक आइडेंटि‍फि‍केशन अथॉरि‍टी ऑफ इंडि‍या (UIDAI) ने बुधवार को वर्चुअल आईडी के नए सिस्टम का एलान किया। इसे कोई भी आधार होल्डर यूआईडीएआई की वेबसाइट से जनरेट कर सकता है।

16 डिजिट की इस वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल सिम वेरिफिकेशन समेत कई स्कीम में केवाईसी के तौर पर होगा। यानी कि अब लोगों को वेरिफिकेशन के लिए 12 अंक का आधार नंबर नहीं बताना होगा। सभी एजेंसियां 1 जून से इसी आईडी के जरिए यूजर्स का वेरिफिकेशन करेंगी।

वेरिफिकेशन प्रॉसेस में क्या बदलाव होगा?
यूआईडीएआई की नई व्यवस्था शुरू होने के बाद यूजर्स को वेरिफिकेशन के लिए अपना आधार नंबर सर्विस प्रोवाइडर से शेयर नहीं करना पड़ेगा। इसकी जगह वर्चुअल आईडी से ही काम चल जाएगा।
कैसे जनरेट होगी वर्चुअल आईडी?

16 डिजिट की वर्चुअल आईडी आधार से मैच होगी। इसे यूआईडीएआई की वेबसाइट से जनरेट किया जा सकेगा। जरूरत के मुताबिक, आधार होल्डर इसे कई बार जनरेट कर सकते हैं। नई वर्चुअल आईडी जनरेट होने पर पुरानी अपने आप कैंसल हो जाएगी।

गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर शिक्षा मंत्री से सहमत इतिहासकार

जयपुर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को कहा था कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत अइजक न्यूटन ने नहीं बल्कि भारतीय गणितज्ञ और खगोल विज्ञानी ब्रह्मगुप्त ने दिया था। भले ही बहुत से लोग उनकी बात से सहमत न हो, कई इतिहासकारों का भी मानना है कि उस समय के सिक्कों, हस्तलिपियों और किताबों से मालूम पड़ता है कि देवनानी का दावा खोखला नहीं है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट केजी शर्मा ने ब्रह्मगुप्त की किताब ब्रह्मस्फुटसिद्धांत एक श्लोक का जिक्र करते हुए बताया है- ‘कोई चीज धरती की ओर गिरती है क्योंकि यह धरती की प्रकृति है कि वह चीजों को आकर्षित करती है, जैसे पानी की प्रकृति है बहना।’ इससे पता चलता है ब्रह्मगुप्त की गुरुत्वाकर्षण की समझ के बारे में पता चलता है। बाद में इसे विस्तार से भास्कर (2) ने अपनी किताब सूर्य सिद्धांत में बताया है।

शर्मा ने बताया कि अरब में खगोलशास्त्र काफी हद तक ब्रह्मगुप्त की किताबों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक खलीफ-अल-मंसूर ने ब्रह्मगुप्त की किताबों का अनुवाद किया था। विश्वविद्यालय के ही संग्रहालय और पुरात्तव विभाग के सुपरिंटेंडेंट जफरुल्लाह खान ने कहा है कि कई हस्तलिपियों से भी यह पता चलता है कि ब्रह्मगुप्त ने इस क्षेत्र में शोध किया था।

उधर, देवनानी ने भी उनके दावे पर प्रतिक्रिया देने से पहले लोगों से ब्रह्मगुप्त की किताबें पढ़ने की अपील की है। उन्होंने कहा, ‘(लोगों को) ऐसा लग रहा है कि मैंने मनगढ़ंत बयान दिया है। मैं अपने बयान के बारे में कुछ नहीं कहूंगा बल्कि उस पर हैरान होने वाले और अविश्वास जताने वाले लोगों से अपील करूंगा कि पहले ब्रह्मगुप्त की किताबें पढ़ें या उन पर आज के वैज्ञानिकों द्वारा उन पर किए गए शोध पढ़ें।’

लंदन गए पत्रकारों ने चुराईं चम्मचें, भरा जुर्माना, शेम -शेम

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कोलकाता। पत्रकारिता को वैसे तो हिम्मत और ईमानदारी का पेशा माना जाता है, जिसका काम लोगों तक सच्चाई पहुंचाना होता है। लेकिन भारत के कुछ पत्रकारों ने सात समंदर पार ऐसी हरकत कर दी जिससे इस पेशे के साथ ही देश भी शर्मसार हो गया।

आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ आधिकारिक टूर पर लंदन गए कुछ पत्रकारों ने होटल में डिनर के दौरान चांदी की चम्मचें चुरा लीं। पत्रकारों की यह हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पत्रकारों को इस अपराध के लिए 50 पौंड का जुर्माना भरना पड़ा।

इस घटना के बाद होटल के सिक्यॉरिटी स्टाफ ने जब पत्रकारों की इस कारगुजारी का खुलासा किया तो एक को छोड़कर सभी ने चुराई हुईं चम्मचें लौटा दीं, लेकिन एक पत्रकार अपनी गलती नहीं मानने पर अड़ गए। हालांकि कैमरे में वह स्पष्ट तौर पर चम्मच चोरी करते पकड़े गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार ममता बनर्जी के साथ आधिकारिक टूर पर गए सभी पत्रकार अपने-अपने संस्थानों में वरिष्ठ संपादक हैं। बंगाली भाषा के एक न्यूज पेपर में कार्यरत एक पत्रकार ने सबसे पहले चम्मचें चुराईं। इसके बाद एक-एक कर सभी पत्रकारों ने ‘मछली नहीं, बल्कि पूरा तालाब ही गंदा है’ वाली कहावत को चरितार्थ किया।

एक बंगाली पत्रकार ने बताया कि चोरी के आरोप में पकड़े गए पत्रकार समझ रहे थे कि सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि अक्सर बंगाल में सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करते। हालांकि ऐसा नहीं था। सभी कैमरे काम कर रहे थे। वहीं एक बंगाली पत्रकार के अनुसार विदेशों दौरे पर गए कुछ पत्रकारों की चम्मच चुराने की आदत होती है।

केंद्रीय विद्यालयों में हिंदी-संस्कृत में प्रार्थना क्यों – सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

नई दिल्ली। देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों में बच्चों द्वारा सुबह की सभा में गाई जाने वाली प्रार्थना क्या किसी धर्म विशेष का प्रचार है? यह सवाल देश की सबसे बड़ी अदालत में उठा है।

इससे संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा मानते हुए कहा है कि इस पर विचार जरूरी है। कोर्ट ने इस सिलसिले में केंद्र सरकार और केंद्रीय विश्वविद्यालयों नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दरअसल, एक वकील ने याचिका दाखिल कर कहा है कि केंद्रीय विद्यालयों में 1964 से हिंदी-संस्कृत में सुबह की प्रार्थना हो रही है जो कि पूरी तरह असंवैधानिक है।

याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। उनकी दलील है कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक मान्यताओं और ज्ञान को प्रचारित करने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

कोर्ट ने इसपर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय विद्यालय संगठन से पूछा है कि क्या हिंदी और संस्कृत में होने वाली प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है।

कोर्ट ने पूछा है कि स्कूलों में सर्वधर्म प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती? कोर्ट ने नोटिस का जवाब देने के लिए 4 हफ्तों का वक्त दिया है। बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता विनायक शाह खुद केंद्रीय विद्यालय में पढ़े हुए हैं। उनकी याचिका के मुताबिक, जब स्कूल में हर धर्म के बच्चे पढ़ने आते हैं तो किसी एक धर्म से जुड़ी प्रार्थना क्यों कराई जाती है।

रासायनिक खेती से भू गर्भ जल के भण्डार रीते :विजयवर्गीय

कोटा। रासायनिक खादों और कीटनाशकों ने खेती ही नहीं भूगर्भ जल एवं सतही जल को भी प्रदूषित कर दिया है। किसानों को अपनी फसलों में अधिक पानी देना पड़ रहा है जिससे भू जल भण्डार रीतते जा रहे है।जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए रासायनिक खादों पर निर्मरता छोड़नी होगी और पारम्परिक जैविक खेती को पुनः अपनाना होगा।

उक्त बात राष्ट्रीय जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय ने जिले के संगोद क्षैत्र के कुंदनपुर एवं कमोलर में राम कृष्ण शिक्षण संस्थान भदाना, कट्स इंटरनेशनल तथा स्वीडिश सोसायटी फॉर नेचर कंजर्वेशन द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप् में कही।

विजयवर्गीय ने कहा कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के कारण जमीन में केंचुए खत्म हो गए और धरती कठोर हो गई जिससे ज्यादा पानी खर्च हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्थान के संयोजक एवं नगर निगम में पार्षद युधिष्ठिर चानसी ने कहा कि गोबर की खाद से पारम्परिक खेती से धरती और मनुष्य दोनों को स्वास्थ्य ठीक रहता है और आर्थिक लाभी भी होता है।

आजकल कई बीमारियों में वृद्धि जहरीली खेती के कारण हो रही है। कार्यक्रम में कमोलर की सरपंच लीला बाई सुमन,कुंदनपुर के उप वार्ड पंच राम कल्याण सुमन,उप सरपंच कृष्ण मुरारी सेन,गोविंद सुमन ,राम कुमार वर्मा आदि ने विचार व्यक्त कर जैविक खेती के लाभों का प्रचार करने का संकल्प जताया। विशिष्ठ अतिथि जल बिरादरी की सदस्य प्रीति विजय ने भी जैविक खेती को श्रेष्ठ बताया। 

ई-वे बिल पर 18 जनवरी को GST काउंसिल की मीटिंग में होगा फैसला

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नई दिल्ली। 18 जनवरी को जीएसटी काउंसिल को होने वाली मीटिंग में ई-वे बिल अहम मुद्दा रहेगा। ऐसा इसलिए है कि ट्रेडर कारोबारी अभी भी 1 फरवरी से लागू करने के पक्ष में नहीं है। इसी सिलसिले में राज्य प्रतिनिधि और ट्रेडर्स के बीच मीटिंग हुई है, जिसमें ई-वे बिल को 1 फरवरी की जगह 1 अप्रैल से लागू कराने की मोटे तौर पर सहमति बनी है।

18 जनवरी 2018 को जीएसटी काउंसिल की मीटिगं होनी है। सूत्रों के मुताबिक GST काउंसिल की मीटिंग में ये तय होगा कि ई-वे बिल को 1 फरवरी से लागू किया जाए या 1 अप्रैल से लागू किया जाए।

दरअसल, जीएसटी के राज्य प्रतिनिधि और ट्रेडर्स ने मीटिंग की है जिसमें उन्होंने ई-वे बिल की लागू करने की डेट बढ़ाकर 1 अप्रैल करने की मांग की। जीएसटी काउंसिल के राज्य प्रतिनिधि ने बताया कि अगली मीटिंग में ई-वे बिल चर्चा का बड़ा विषय है और इस पर फैसला लिया जा सकता है।
 
16 जनवरी से शुरू होगा ट्रायल
 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू होना है। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है।

डेडलाइन से पहले ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। ई-वे बिल लागू होने से सरकार के लिए टैक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा।

ऐमजॉन के सीईओ बने इतिहास के सबसे अमीर शख्स

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ऐमजॉन के सीईओ जेफ बेजॉस दुनिया ने सबसे अमीर शख्स बन गए हैं, उनकी दौलत इस वक्त इतनी हो गई है जितनी किसी की नहीं रही। सोमवार को ब्लूमबर्ग द्वारा जारी अरबपतियों की लिस्ट में बताया गया कि जेफ बेजॉस इस वक्त 105.1 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा के मालिक बन गए हैं। बेजॉस ने माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स का रेकॉर्ड भी तोड़ दिया।

ऐमजॉन के सीईओ ने पिछले अक्टूबर में ही 93.8 बिलियन डॉलर के साथ गेट्स को पछाड़ दिया था, फिर अगले ही महीने उन्होंने पहली बार 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छुआ था। उस वक्त ऐमजॉन पर ब्लैक फ्राइडे सेल चल रही थी। जिसपर लोगों ने खूब शॉपिंग की थी।

जारी लिस्ट के मुताबिक, आठ जनवरी को बेजॉस की कुल धन-दौलत 105.1 बिलियन डॉलर की थी। ऐमजॉन के सीईओ के पास ऐमजॉन के 78.9 मिलियन शेयर्स हैं। ऐमजॉन के शेयर में पिछले 9 दिनों में सात प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं साल 2017 में शेयर्स में कुल 56 प्रतिशत का उछाल आया था।

दान न देते तो सबसे आगे होते बिल गेट्स
62 साल के गेट्स ने अगर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को अपनी दौलत का बड़ा हिस्सा दान न किया होता तो इस वक्त उनके पास 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा की धन-दौलत होती।

गेट्स ने तकरीबन 700 मिलियन डॉलर की कीमत के माइक्रोसॉफ्ट के शेयर, 2.9 बिलियन डॉलर कैश और कुछ जायदाद भी 1996 में फाउंडेशन को दे दी थी। इस बात की जानकारी भी गेट्स ने खुद ही सबको दी थी। 1999 में हुए डॉट.कॉम बूम के वक्त बिल गेट्स ने 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया था।

इनकम टैक्स में फिर लागू हो सकता है स्टैंडर्ड डिडक्शन

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नई दिल्ली। मोदी सरकार लोकसभा चुनावों से पहले 1 फरवरी को पेश होने वाले पूर्ण आम बजट में जहां इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन की व्यवस्था फिर से लागू कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव भी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन फिर लाने का ऐलान हो सकता है।

टैक्स स्लैब के हिसाब से डिडक्शन की दरें अलग-अलग होंगी। 5 लाख रुपये के स्लैब में सबसे ज्यादा डिडक्शन मुमकिन है, जबकि 10 लाख रुपये तक वाले स्लैब में डिडक्शन कम हो सकता है। वहीं 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले स्लैब के लिए फ्लैट डिडक्शन हो सकता है।

इसका मतलब है कि 5 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी वाले स्लैब में सैलरी का तय पर्सेंट स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में टैक्सपेयर्स को मिल सकता है। गौरतलब है कि स्टैडर्ड डिडक्शन की रकम पर इनकम टैक्स नहीं देना होता है और डिडक्शन की रकम पर टैक्स बचाने के लिए कोई सबूत नहीं देना होता है।

2004-05 तक स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा मौजूद थी। पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन के दो स्लैब थे। 5 लाख रुपये तक की सैलरी वालों के लिए 30,000 रुपये या 40 फीसदी (जो भी कम) तक का डिडक्शन का प्रावधान था। वहीं, 5 लाख रुपये से ज्यादा की सैलरी वालों के लिए 20,000 रुपये तक का डिडक्शन का प्रावधान था।

इसके अलावा इस बार बजट में कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव किया जा सकता है। माना जा रहा है कि बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर टैक्स में बदलाव संभव है। बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की अवधि 1 साल से बढ़ाकर 2 या तीन साल तक की जा सकती है।

फिलहाल इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 15 फीसदी की दर से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, 3 साल से कम होल्डिंग पर सोना और रियल एस्टेट पर भी शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। इसके अलावा सोना, रियल एस्टेट और डेट म्यूचुअल फंड पर फिलहाल 20.6 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स लगता है।

वित्त मंत्रालय के उच्चाधिकारियों का कहना है कि इस बारे में प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है। पीएमआे से मंजूरी मिलने के बाद इसको बजट में शामिल करने या न करने पर फैसला किया जाएगा। निश्चित तौर पर इसमें कुछ फेरबदल संभव है।

गौरतलब है कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के तहत अगर कोई शेयर खरीदने के बाद एक साल तक अपने पास रखता है आैर उसके बाद उसे बेचता है तो उसे कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना होगा। एक साल से पहले शेयर बेचने पर उसे कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा।