Wednesday, July 15, 2026
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RBI ने लगाई सिक्के बनाने पर रोक, जानिए वजह

कोलकाता। देश की टकसालों में सिक्कों का ऐसा ढेर लग गया है जिससे सिक्के बनाने का काम रोक दिया गया है। मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि आरबीआई के कोषागार नोटबंदी के दौरान लोगों के घंटों-घंटों तक कतारों में लगकर जमा कराई गई करेंसी से भरे हुए हैं और इसके चलते आरबीआई टकसालों से कम सिक्के उठा रहा है। इसी के चलते सिक्के बनाना रोक दिया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की सिक्यॉरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा में टकसाल हैं। मुंबई और नोएडा यूनिट्स की ओर से स्टाफ को भेजे गए नोटिसों की प्रतियां देखी हैं, जिनमें सिक्का ढलाई रोकने की बात कही गई है।

बुधवार को जारी मुंबई मिंट के इंटरनल नोटिस में कहा गया, ‘एसपीएमसीआईएल से मिले निर्देश के अनुसार, सभी कर्मचारियों को सूचित किया जा रहा है कि इंडिया गवर्नमेंट मिंट, मुंबई में सर्कुलेशन कॉइंस का उत्पादन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा।’

इस कदम से आम लोगों को परेशानी होने का डर नहीं है क्योंकि आरबीआई के पास सिक्कों की पर्याप्त आपूर्ति है। 24 नवंबर 2016 को उसके पास 1, 2, 5 और 10 रुपये के 676 करोड़ रुपये मूल्य के सिक्के थे। आरबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि टकसालों से सिक्के इसलिए कम उठाए जा रहे हैं क्योंकि आरबीआई के कोषागारों में पर्याप्त जगह ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि वहां तो 500 और 1000 रुपये के वे नोट भरे हुए हैं, जिन्हें रद्द करार दिया गया था। नवंबर 2016 में नोटबंदी के चलते उस वक्त सर्कुलेशन में रहे नोटों का करीब 85 पर्सेंट हिस्सा अवैध करार दिया गया था। आरबीआई ने इस संबंध में सवालों के जवाब नहीं दिए हैं।

हालांकि सिक्का ढलाई रोकने के कदम से कर्मचारी खुश नहीं हैं क्योंकि इससे उनके ओवरटाइम पर मार पड़ी है। मुंबई मिंट के नोटिस में कहा गया, ‘मिंट में अब 9 जनवरी से सामान्य वर्किंग आवर्स रहेंगे। अगले आदेश तक कोई ओवरटाइम नहीं होगा।’

नोएडा यूनिट ने कहा कि उसके स्टॉक में 2.53 अरब के सिक्के हैं और आरबीआई ने इन्हें लेना बंद कर दिया है। आरबीआई की 2016-17 की ऐनुअल रिपोर्ट के अनुसार, 2016-17 में सर्कुलेशन में रहने वाले कॉइंस की वैल्यू 14.7 पर्सेंट बढ़ी, जबकि सर्कुलेशन वॉल्यूम 8.5 पर्सेंट बढ़ा।

सर्कुलेशन वॉल्यूम में 1 और 2 रुपये के सिक्कों का हिस्सा 69.2 पर्सेंट था, जबकि वैल्यू के लिहाज से इनका हिस्सा 44.8 पर्सेंट था। आरबीआई 5 और 10 रुपये के नोटों के बजाय इनके सिक्कों के उपयोग को बढ़ावा देता रहा है क्योंकि कागज के मुकाबले मेटल ज्यादा लंबा चल सकता है।

EPFO ने बनाया जीरो डिफॉल्‍ट का प्‍लान, कंपनियां नहीं कर पाएंगी हेरफेर

नई दिल्‍ली। मार्च 2018 तक कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों के पीएफ के साथ हेरफोर नहीं कर पाएंगी। कंपनियों को कर्मचारियों का पीएफ समय पर सरकार के पास जमा कराना होगा। कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) 2018 तक जीरो डिफॉल्‍ट का प्‍लान तैयार किया है। इस प्‍लान के तहत ईपीएफओ ने अपने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन माह में जीरो डिफॉल्‍ट का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए काम करें। 

 रियल टाइम डिफॉल्‍ट मैनेजमेंट सिस्‍टम से मिलेगी मदद 
 ईपीएफओ ने हाल में रियल टाइम डिफॉल्‍ट मैनेजमेाट सिस्‍टम शुरू किया है। इससे मौजूदा समय में डिफॉल्‍ट कैटेगरी में आने वाली कंपनियों की संख्‍या को कम करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा रीजलल ऑफिस में नए एनफोर्समेाट ऑफिसर्स को तैनात किया जा रहा है। इससे मौजूदा डिफॉल्‍टर कंपनियों के फॉलोअप में तेजी आएगी और डिफॉल्‍टर कंपनियों की संख्‍या को जीरो किया जा सकेगा। 
 
दिसंबर में डिफॉल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या बढ़ी 
ईपीएफओ की ओर से जारी किए गए ताजा डाटा के अनुसार दिसंबर माह में अपने कर्मचारियों का पीएफ न जमा कराने वाली कंपनियों की संख्‍या बढ़ कर 1,35,017 हो गई है जबकि नवंबर माह में डिफाल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या 1,30,684 थी।

ईपीएफओ ने अपने सभी एडिशनल सेंट्रल पीएफ कमिश्‍नरों (जोन) और रीजनल सेंट्रल पीएफ कमिश्‍नरों से पता लगाने को कहा है कि डिफाल्‍ट करने वाली कंपनियों की संख्‍या क्‍यों बढ़ रह है। इसके अलावा ईपीएफओ ने ऐसे ऑफिस के बारे में भी रिपोर्ट मांगी है जिनका प्रदर्शन निरीक्षण के मोर्चे पर खराब है। 
 
23 फीसदी कंपनियों ने किया है डिफॉल्‍ट 
दिसंबर 2017 में ईपीएफओ के पास कंट्रीब्‍यूट करने वाले कंपनियों की कुल संख्‍या 4, 46, 193 थी। इसमें से 1,35,017 कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के नवंबर माह का पीएफ सरकार के पास जमा नहीं कराया है।

इस तरह से ईपीएफओ के पास अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने वाली कुल कंपनियों में से 23 फीसदी कंपनियों ने दिसंबर माह में अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं कराया है। 

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 5 मार्च से

कोटा/नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की 12वीं बोर्ड परीक्षा 5 मार्च से प्रारम्भ होगी। क्लास 10th के एग्जाम 5 मार्च से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेंगे। वहीं, 12th की परीक्षाएं 5 मार्च से 12 अप्रैल तक होंगी।

गुरुवार को सीबीएसई वेबसाइट पर जारी परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार  5 मार्च को अंग्रेजी, 7 मार्च को फिजिक्स, 13 को केमिस्ट्री, 21 को मैथ्स, 27 को बायोलॉजी तथा 9 अप्रेल को फिजिकल एजुकेशन के पेपर होंगे।

इस वर्ष जेईई मेन्स का ऑफलाइन पेपर 8 अप्रेल को होने से साइंस के विद्यार्थियों पर दोहरा मानसिक दबाव रहेगा। 12वीं साइंस मैथ्स के विद्यार्थी 21 मार्च को मैथ्स का पेपर देंगे।

उसके पश्चात जेईई मेन्स प्रवेश परीक्षा के लिए रिवीजन करने हेतु उन्हें केवल 17 दिन मिल सकेंगे। जेईई मेन्स का ऑनलाइन पेपर 15 व 16 अप्रेल को होगा।

जनवरी के पहले हफ्ते में होना था तारीखों का एलान
पहले CBSE बोर्ड ने कहा था कि डेटशीट का एलान जनवरी के पहले हफ्ते में की जाएगी। प्रैक्टिकल एग्‍जाम जनवरी से शुरू होंगे और इसके नंबर फरवरी में अपलोड किए जाएंगे। डेटशीट को आप सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.nic.in और cbseacademic.in पर देख सकते हैं।

कितने स्टूडेंट्स देंगे एग्जाम?
 इस साल 10वीं के एग्जाम में 16,38,552 स्टूडेंट्स शामिल हो सकते हैं।
 उधर, 12वीं के एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स की तादाद 11,86,144 हो सकती है।

इमर्जिंग इकोनॉमी में भारत की ग्रोथ सबसे ज्‍यादा, 2018 में 7.3% रहने का अनुमान

वा‍शिंगटन।  भारत सरकार द्वारा किए जा रहे व्‍यापक रिफॉर्म्‍स की वजह से भारत में अन्‍य उभरती इकोनॉमी के मुकाबले ग्रोथ की ज्‍यादा क्षमता है। यह बात बुधवार को वर्ल्‍ड बैंक ने कही। वर्ल्‍ड बैंक के मुताबिक, 2018 में भारत की ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी और अगले 2 सालों में 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। 
 
2017 में ग्रोथ रेट रहेगी 6.7 फीसदी 
वर्ल्‍ड बैंक द्वारा जारी 2018 ग्‍लोबल इकोनॉमिक्‍स प्रॉस्‍पैक्‍ट के मुताबिक, नोटबंदी और GST से लगे शुरुआती झटकों के बावजूद हमारा अनुमान है कि 2017 के लिए भारत की ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी रहेगी। वर्ल्‍ड बैंक में डेवलपमेंट प्रॉस्‍पैक्‍ट्स ग्रुप के डायरेक्‍टर अयान कोस ने कहा कि हर तरह से भारत अगले 10 सालों में अन्‍य बड़ी उभरती इकोनॉमीज के मुकाबले ज्‍यादा ग्रोथ रेट दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है।

इसलिए मैं शॉर्ट टर्म ग्रोथ रेट पर फोकस न करके भारत की लॉन्‍ग टर्म ग्रोथ रेट पर फोकस करूंगा। लॉन्‍ग टर्म की बात करने पर सामने आता है कि भारत में ग्रोथ के लिए बहुत ज्‍यादा संभावना है। 
 
भारत से पिछड़ रहा है चीन  
उन्‍होंने बताया कि चीन से तुलना करें तो चीन की ग्रोथ रफ्तार धीमी हो रही है और वर्ल्‍ड बैंक को उम्‍मीद है कि भारत की ग्रोथ रेट में धीरे-धीरे तेजी आएगी। 2017 में चीन की ग्रोथ रेट 6.8 फीसदी रही, जो भारत से 0.1 फीसदी ज्‍यादा है।

2018 में चीन की ग्रोथ रेट 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है। अगले दो सालों की बात करें तो चीन की ग्रोथ रेट में मामूली तौर पर गिरावट आएगी और यह क्रमश: 6.3 फीसदी और 6.2 फीसदी रहेगी। 
 
इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ाने के उपाय करने की जरूरत 
कोस ने आगे कहा कि अपनी ग्रोथ क्षमता को भुनाने के लिए भारत को इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही नॉन परफॉर्मिंग लोन और प्रॉडक्टिविटी को लेकर भी उपाय करने की जरूरत है। लेबर मार्केट को लेकर किए गए रिफॉर्म, एजुकेशन व हेल्‍थ रिफॉर्म और इन्‍वेस्‍टमेंट की रुकावटों को दूर किया जाना भी भारत के प्रॉस्‍पैक्‍ट्स में सुधार लाएगा। 
 
CSO के मुताबिक इस वित्‍त वर्ष 6.5% रहेगी ग्रोथ रेट
हाल ही में सेंट्रल स्‍टेटिस्टिक्‍स ऑफिस (सीएसओ) द्वारा जारी जीडीपी के एडवांस एस्टीमेट के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है, जो बीते 4 साल यानी मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे निचला स्तर होगा। हालांकि देश के चीफ स्‍टेटिस्‍टीशियन (सांख्यिकीविद) टी सी ए अनंत ने कहा कि अप्रैल-सितंबर छमाही की तुलना में अक्टूबर-मार्च छमाही के दौरान जीडीपी ग्रोथ बेहतर रहने का अनुमान है। 

राज्य में सामान मंगाने और बाहर भेजने के लिए ई-वे बिल फार्म अनिवार्य

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कोटा। ट्रांसपोर्ट कंपनीज एसोसिएशन की ओर से पुरुषार्थ भवन में बुधवार को ई-वे बिल पर सेमिनार हुई। इसमें अवधेश पराशर उपायुक्त राज्य कर विभाग एवं उमंग नंदवाना ने ट्रांसपोर्टर्स की समस्याओं का समाधान किया। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि ई-वे बिल सरकार टैक्स चोरी रोकने के लिए लाई है।

एसोसिएशन अध्यक्ष जेपी शर्मा एवं सचिव चंद्रशेखर रामचंदानी ने ई-वे बिल पर एसोसिएशन कार्यालय में एक सहायता केंद्र खोलने का आश्वासन दिया। हेल्प डेस्क कर अधिकारी उमंग नंदवाना ने व्यापारियों को प्रोजेक्टर पर ई-वे बिल से जुड़ी जानकारी दी और समस्याओं का समाधान किया।

कर उपायुक्त अवधेश पराशर ने बताया कि जीएसटी कांउसिल द्वारा 16 जनवरी से प्रायोगिक तौर और अनिवार्य रूप से 1 फरवरी से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होगा तथा इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 1 जून से लागू किया जाएगा। अब राज्य के बाहर माल भेजने एवं मंगवाने के लिए बिल, बिल्टी और अन्य दस्तावेजों के साथ ई-वे बिल फार्म भी लगाना जरूरी होगा।

जीएसटी व्यवस्था में ई-वे बिल की शुरुआत टैक्स चोरी रोकने के लिए की गई है। इंटर स्टेट ट्रांजेक्शन जो 50 हजार रुपए से अधिक हो उसकी ब्रिक्री पर ई-वे बिल क्रेता, विक्रेता या ट्रांसपोर्ट द्वारा बनाना अनिवार्य होगा अन्यथा माल का गमन, स्टॉक मूविंग प्रारंभ नहीं होगी।

एसोसिएशन खोलेगी सुविधा केंद्र : सेमिनार में एसोएिसशन के अध्यक्ष जेपी शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कम्पनीज एसोसिएशन हमेशा ही ट्रांसपोर्ट की मदद के लिए आगे बढ़कर कार्य करती आई है। ट्रांसपोर्ट व्यापारियों की सुविधा के लिए एसोसिएशन में एक सुविधा केन्द्र भी जल्द बनवाया जाएगा, जिसमें कोई भी समस्या आने पर समाधान की सुविधा उपलब्ध होगी। 

कैंसिल करने के लिए होगा 72 घंटे का समय
हेल्प डेस्क एवं राज्य कर उपायुक्त अवधेश पराशर ने बताया कि 100 किमी तक की दूरी के लिए 1 दिन, 101 से 300 किलोमीटर की दूरी के लिए 3 दिन का ई-वे बिल बनेगा। ई-वे बिल व्हीकल नंबर डालते ही जनरेट हो जाएगा।

इसे कैंसिल एवं रिजेक्ट करने के लिए क्रमशः 24 एवं 72 घंटे का समय रहेगा। ई-वे बिल में अपडेट व्हीकल नंबर का ऑप्शन भी उपलब्ध होगा जो ब्रेक डाउन एवं ट्रांसपोर्ट चेंज होने के स्थिति में काम में लिया जाएगा।

मारुति की कारें महंगी, 17 हजार रुपए तक बढ़े दाम

नई दिल्‍ली। देश की दिग्‍गज ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी कारों के दाम बढ़ाने का एलान किया है। कंपनी की ओर से जारी प्रेस रिलीज में यह जानकारी दी गई। रिलीज में बताया गया है कि दिल्‍ली के शो- रूम में  कारों की कीमतों में 1,700 रुपए से लेकर 17 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है।

कंपनी के हर मॉडल पर बढ़ने वाली ये कीमतें  10 जनवरी 2018 यानी आज से लागू हो गई हैं। हालांकि अभी कंपनी ने मॉडलों के हिसाब से दामों का खुलासा नहीं किया है। मारुति ने ये कीमत कमोडिटी, डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य लागत में इजाफे के कारण बढ़ाई है। बता दें कि मारुति सुजुकी  ने पिछले महीने ही कार की कीमतों में इजाफा के संकेत दिए थे। 
 
अन्य भी बढ़ा चुकी हैं दाम
गौरतलब है कि लगभग सभी कंपनियों ने इस साल अपनी कारों के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, टोयोटा, मारुति, स्कोडा और होंडा कार्स जैसी सभी कंपनियों ने कारों के दाम बढ़ा दिए हैं।
 
डिस्‍काउंट का भी कर चुकी है एलान
मारुति सुजुकी की कारों की कीमतों में इजाफा ऐसे वक्‍त में हुआ है जब हाल ही में कंपनी ने 2018 में भी डिस्‍काउंट ऑफर्स जारी रखने का एलान किया था। मारुति‍ सुजुकी अपने कई मॉडल्‍स पर जनवरी 2018 में 20 हजार से 30 हजार रुपए तक का डि‍स्‍काउंट दे रही है। इससे पहले दि‍संबर 2017 में भी कंपनी की ओर से डि‍स्‍काउंट दि‍या जा रहा था।
 
2018 में कि‍स मॉडल पर कि‍तना डि‍स्‍काउंट
इग्‍नि‍स: 30 हजार
शि‍आज: 30 हजार
अर्टि‍गा: 20 हजार
वैगनआर: 30 हजार
ऑल्‍टो: 800 25 हजार
   
मारुति की सेल्स 10.3% बढ़ी
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने दि‍संबर 2017 में 1 लाख 30 हजार 66 यूनि‍ट्स बेचीं, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में इसी महीने की बिक्री से 10.3% ज्‍यादा है।

यह सेल स्विफ्ट, बलेनो, डिजायर जैसी गाड़ि‍यों की वजह से बढ़ी है। कंपनी के मुताबिक, उसने घरेलू बाजार में 1 लाख 19 हजार 286 गाड़ि‍यां बेचीं, जबकि‍ 10 हजार 780 गाड़ि‍यां एक्‍सपोर्ट की गईं। वहीं, दि‍‍‍‍‍‍संबर 2016 में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने कुल 1 लाख 17 हजार 908 यूनि‍ट्स बेची थीं।

कोटा स्वच्छ, सुन्दर, पार्किंग युक्त एवं अतिक्रमण मुक्त बने- व्यापार महासंघ

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अशोक माहेश्वरी, क्रांति जैन एवं डॉ. हेमलता गाँधी स्वच्छता ब्राण्ड एम्बेसडर नियुक्त 

कोटा। केन्द्र सरकार के आदेश से स्वच्छ भारत मिशन भारत योजना के तहत नगर निगम ने कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, महासचिव अशोक माहेश्वरी एवं एनजीओ. डॉ. हेमलता गाँधी को स्वच्छता ब्राण्ड एम्बेडसर नियुक्त किया है। 

बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने इस नियुक्ति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कोटा स्वच्छ सुन्दर पार्किंग युक्त व्यवस्थित यातायात एवं अतिक्रमण मुक्त बने इस पर गहनता से चिन्तन किया जायेगा। इसके लिए नगर निगम, जन सहभागिता, समाज सेवी संस्थाएं, शिक्षण संस्थाएं, समस्त क्लब, सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं मोहल्लें की विकास समितियां व आमजन का सहयोग लेकर शहर को देश के प्रमुख स्वच्छ सुन्दर शहरों में दर्जा दिलानें का प्रयास करेंगे।

कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि करीब आठ वर्ष पूर्व व्यापार महासंघ ने 21 दिन तक शहर में सफाई अभियान के अन्तर्गत व्यापारियों ने श्रमदान करके करीब 1500 डम्पर कचरा शहर से उठवाया था, लेकिन जन जागृति के अभाव सफाई व्यवस्था स्थाई नहीं रह सकी, जिसका आज भी व्यापार महासंघ को मलाल है।

उन्होंने बताया कि इसमें रही खामियों को दूर करने के लिए अगस्त सितम्बर माह में शहर में फैली डेंगू जैसी महामारी से विचलित होकर नगर निगम कोटा व्यापार महासंघ एवं अन्य संस्थाओं ने पुनः अक्टूबर माह में स्वच्छता जनजागृति अभियान का आगाज किया, जिसके चलते हजारों डस्टबिन व्यापारियों को बांटे गये एवं स्वच्छता अभियान के कार्यक्रम आयोजित किये गये।

शहर क्लीन एण्ड ग्रीन सिटी के नाम से जाना जाये
उन्होंने बताया कि इसमें कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने जिसमें ऐलन कोचिंग के निदेशक राजेश माहेश्वरी द्वारा निरंतर इस दिशा में ठोस कार्य किया जा रहा है। सभी के प्रयासों से कोटा की सफाई व्यवस्था में काफी बदलाव एवं सुधार आया है हम सभी का एक ही उद्देश्य है कि हमारा शहर क्लीन एण्ड ग्रीन सिटी के नाम से जाना जाये, जिसके लिए हम निरंतर प्रयास करें। 

सार्वजनिक स्थलों पर टीन के बड़े डस्टबिन रखेंगे
महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन नें कहा कि स्वच्छता के साथ-साथ शहर में समुचित पार्किंग व्यवस्था, व्यवस्थित यातायात व्यवस्था एवं शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने में हम पूर्ण योगदान प्रदान करेंगे। इसके चलते शहर के बाजारों में एवं सार्वजनिक स्थलों पर टीन के बड़े डस्टबिन व्यापार संघों, स्वयं सेवी संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों के सहयोग से लगाये जायेंगे जिससे सड़कों पर कचरा फेलने से रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि साथ ही उसके निस्तारण के लिए नगर निगम का भी भरपूर सहयोग किया जायेगा। क्षेत्रीय व्यापार संघो को स्वच्छता को अंजाम देने के लिए अपने-अपने क्षेत्र के वार्ड पार्षदों के साथ मिलकर देख रेख करने के निर्देश भी दिये जायेंगे।

सूचना तंत्र की स्थापना करेंगे
स्वच्छता ब्राण्ड एम्बेडसर डॉ. हेमलता गाँधी ने कहा कि सम्पूर्ण स्वच्छता को अंजाम देने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। हम जनजागृति द्वारा नगर निगम एवं वार्ड पार्षदों के साथ मिलकर छोटे-छोटे गली मोहल्लों तक जायेंगे और गंदगी से ग्रसित गली मोहल्लों एवं बाजारों को इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए एक सूचना तंत्र की स्थापना करेंगे।

सफाई में सहयोग पर पुरस्कृत करेंगे
महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी ने यह भी घोषणा की कि स्वच्छता के क्षेत्र में वर्तमान में कार्य कर रहे व्यापार संघों व्यक्तिगत प्रतिष्ठानों एवं सहयोग देने वाले व्यक्तियों को महासंघ आगामी होली मिलन समारोह में सम्मानित एवं पुरस्कृत करेगा एवं इस वर्ष में जो भी क्षेत्र स्वच्छ और सुन्दर बनाने के लिए सार्थक प्रयास कर मूर्त रूप देंगे।उन्हें भी आगामी दिपावली मिलन समारोह में सम्मानित किया जायेगा।

महासंघ कार्यकारिणी की बैठक 13 को
माहेश्वरी ने कहा कि शहर को स्वच्छ सुन्दर एवं व्यवस्थित बनाने की कड़ी में कोटा व्यापार महासंघ ने प्रयास शुरू कर दिये है। इसी के तहत 13 जनवरी को सायं 4.00 बजे पुरूषार्थ भवन गोबरिया बावड़ी चौराहे पर महासंघ की कार्यकारिणी एवं व्यापार उद्योग सलाहकार बोर्ड के निदेशकों की एक बैठक का आयोजन किया गया है।

इस बैठक में नगर निगम के महापौर महेश विजय, उप महापौर सुनिता व्यास एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश औझा भी मोजूद रहेंगे। शीघ्र महासंघ, नगर विकास न्यास की समस्याओं को लेकर न्यास के अध्यक्ष रामकुमार मेहता एवं सचिव आनन्दी लाल वैष्णव के साथ बैठक आयोजित करेगा।

कैबिनेट ने दी सिंगल ब्रांड रिटेल में 100% एफडीआई को मंजूरी

नई दिल्ली । बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ढ़ील दी है। सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसद एफडीआई को मंजूरी दे दी है। साथ ही कंस्ट्रक्शन और एविएशन सेक्टर में भी एफडीआई नियमों को आसान किया गया है।

केंद्र सरकार की ओर से एफडीआई नियमों में ढ़ील को आर्थिक सुधारों की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इस कदम से जहां एक ओर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में सुधार आने की उम्मीद है वहीं दूसरी ओर इस फैसले से एफडीआई के बड़े प्रवाह, निवेश को प्रोत्साहन, आय एवं रोजगार को बढ़ावा देगा।

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक सिंगल ब्रांड रिटेल में अब ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसद तक एफडीआई निवेश किया जा सकेगा। इस खबर के बाद शेयर बाजार में सिंगल ब्रांड रिटेल से जुड़ी कंपनियों के शेयर में तेजी आ गई। हालांकि सरकार के इस फैसले पर त्वरित टिप्पणी में व्यापारियों के संगठन कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस पर नाखुशी जाहिर की है। 

कैबिनेट में हुए अन्य फैसलों में सरकारी एयरलाइन्स एयर इंडिया में विदेशी एयरलाइन्स की ओर से 49 फीसद निवेश को मंजूरी दी गई है।यह निवेश एयर इंडिया में अप्रूवल रुट (अनुमोदन मार्ग) के जरिए किया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 49% तक होगी। 

कैट की प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर देश के व्यापारियों ने नाखुशी जाहिर की है। कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ऑटोमैटिक रुट से सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसद एफडीआई की मंजूरी के फैसले कड़ा विरोध किया है।संगठन का मानना है कि यह भारत के खुदरा व्यापार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आसान प्रवेश की सुविधा प्रदान करेगा।

कैट की ओर से दिये गए वकत्व्य में यह भी कहा गया है कि यह फैसला भाजपा के चुनाव वादे का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह देश के छोटे कारोबारियों के एक गंभीर मसला है।

संगठन के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि यह दुखद बात है कि मौजूदा खुदरा व्यापार के कल्याण, उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए नीतियों को तैयार करने के बजाय भारत सरकार की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत के खुदरा व्यापार पर नियंत्रण और हावी होने के लिए रास्ता तैयार करने में अधिक दिलचस्पी है।

मांग में कमी से सोने में मामूली नरमी, चांदी भी फिसली

नई दिल्ली/कोटा। बुधवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर वैश्विक संकेत और घरेलू ज्वैलर्स की ओर से घटी मांग के चलते सोना 25 रुपये गिरकर 30475 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। साथ ही चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है। इंडस्ट्रीयल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से कमजोर उठान के चलते देखने को मिला है।

व्यापारियों का मानना है कि घरेलू हाजिर बाजार में लोकल ज्वैलर्स और रिटेलर्स की ओर से मांग में कमजोरी देखने को मिली है। अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं की तुलना में डॉलर में मजबूती देखने को मिली है। इस कारण सोने का कीमतों पर दबाव देखने को मिला है।

वैश्वक स्तर पर सिंगापुर में सोना चौथाई फीसद कमजोर होकर 1309.30 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.32 फीसद की कमजोरी के साथ 16.88 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 25 रुपये की मामूली कमजोरी के साथ क्रमश: 30,475 रुपये और 30325 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गये हैं। गिन्नी के भाव में, हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर बरकरार रहे हैं।

इसी तरह चांदी तैयार 400 रुपये घटकर 39500 रुपये प्रति किलो और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 265 रुपये की कमजोरी के साथ 38835 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। चांदी के सिक्कों का भाव 1000 रुपये गिरकर 72000 रुपये लिवाल और 73000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर आ गया है।

कोटा सर्राफा  
चांदी 39600 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 30600 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35700 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 30750 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35870 रुपये प्रति तोला।