Wednesday, July 15, 2026
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गोबर की खाद से भी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी

कोटा। गोबर के खाद से भी फसलों का उत्पादन कम नहीं होता,किसानों को चाहिए कि उन्हें रासायनिक खादों का इस्तेमाल छोड़ना होगा। इसके लिए जैविक खेती से उत्पादों की मण्डी विकसित करने की जरूरत है।

उक्त बात राम कृष्ण शिक्षण संस्थान भदाना, कट्स इंटरनेशनल तथा स्वीडिश सोसायटी फॉर नेचर कंजर्वेशन द्वारा आयोजित ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही।

सांसद आदर्श ग्राम कैथून क्षैत्र के ग्राम ढोटी के अलावा खजूरी एवं अरण्डखेड़ा में कट्स इंटरनेशल के परियोजना अधिकारी राजदीप पारीक ने कहा कि रासायनिक खादों के स्थान पर गोबर और केंचुआ खाद का इस्तेमाल करें।

इससे प्रारम्भ में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन जैविक खाद से पैदा हुई फसल और सब्जियों की कीमतें अच्छी मिलतीं है तथा धरती व इंसान के स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ है।

कर्यक्रम के संयोजक एवं नगर निगम के पार्षद युधिष्ठिर चानसी ने बताया कि गांवों में गोबर की रेवड़ियों को कचरा पाइंट ने बनने दें।

गड्ढा खोद कर उसे वर्मी कम्पोस्ट में बदलेंगे तो वह शानदार खाद तैयार होगा। जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय ने कहा कि गौ मूत्र से तैयार कीटनाशकों का इस्तेमाल कर केमिकल पेस्टीसाईट्स का इस्तेमाल बंद करें।

ग्राम खजूरी में संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील कृषक ठाकुर रतन सिंह ने सुझाव दिया कि जैविक खेती को प्रोत्साहन के लिए उससे उत्पन्न अनाजों की मण्डी अलग से रखी जाए। किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे तो स्वतः ही जैविक खेती की ओर अग्रसर होंगे।

सिंह ने बताया कि घर में खाने के लिए तो हम अनाज जैविक खेती से ही पैदा कर रहे हैं। कार्यक्रम में जल धारा के समन्वयक रहे हरि राम तथा खूबचंद भारती व किसानों ने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर स्वदेशी आंदोलन के आधुनिक प्रेरक स्वर्गीय राजीव दीक्षित का भाषण तथा सत्यमेव जयते टीवी कार्यक्रम का ऑडियो, वीडियो ग्रामीणों को दिखाया गया ।

ग्लोबल संकेतों से सोना उछला, चांदी भी चमकी

नई दिल्ली/कोटा। गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। सकारात्मक वैश्विक संकेत और घरेलू ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी मांग के चलते सोना 145 रुपये चढ़कर 30620 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। साथ ही चांदी की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला है।

इंडस्ट्रीयल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से तेज उठान के चलते चांदी 180 रुपये बढ़कर 39680 रुपये प्रति किलोग्राम देखने को मिला है।व्यापारियों का मानना है कि सोने की कीमतों में सुधार कमजोर डॉलर के चलते मजबूत वैश्विक संकेत की वजह से देखने को मिली है।

वैश्विक स्तर पर सिंगारपुर में सोना 0.06 फीसद की बढ़त के साथ 1317 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.18 फीसद की बढ़त के साथ 1697 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है। इसके अतिरिक्त शादी के सीजन से पहले घरेलू ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी खरीदारी के चलते भी सोना महंगा हुआ है।

दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 145 रुपये की बढ़त के साथ क्रमश: 30,620 रुपये और 30470 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गये हैं। जानकारी के लिए बता दें कि बीते सत्र में सोने की कीमतों में 25 रुपये की कमजोरी दर्ज की गई थी। गिन्नी के भाव में, हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर बरकरार रहे हैं।

सोने की तरह चांदी तैयार 180 रुपये की बढ़त के साथ 39680 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 155 रुपये बढ़कर 38990 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। चांदी के सिक्कों का भाव 1000 रुपये की बढ़त के साथ 73000 रुपये लिवाल और 74000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर पहुंच गया है।

कोटा सर्राफा 
चांदी 39600 रुपये प्रति किलोग्राम।  
सोना केटबरी 30500 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35570 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 30650 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35750 रुपये प्रति तोला। 

भारत की आर्थिक गतिविधियां दिसंबर में रहीं तेज : मॉर्गन स्टेनली

नयी दिल्ली। मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई), वाहन बिक्री और इस्पात मांग जैसे आर्थिक संकेतकों से पता चलता है कि दिसंबर में भारत में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। एक रपट में यह बात कही गई है। रपट के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक नवंबर में 3.7 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 3.9 प्रतिशत रहने की संभावना है।

वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता मॉर्गन स्टेनली ने रपट में कहा कि तुलनात्मक आधार पर दिसंबर में खुदरा मुद्रास्पीति बढ़कर 5.4 प्रतिशत रहने की संभावाना के चलते खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी तेजी रही।

रपट में कहा गया है कि पीएमआई, वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री और सीमेंट में मांग जैसे आर्थिक संकेतकों में तेजी से समग्र अर्थव्यवस्था में उछाल की संभावना है।

जल्दी-जल्दी आने वाले आर्थिक आंकड़े दिसंबर में आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देते हैं। निर्यात और आयात में अच्छी वृद्धि के साथ व्यापारिक आंकड़े भी इस धारण को बढ़ाने वाले हैं।

कीमतों को लेकर इसमें कहा गया है कि मौसमी सब्जियों के दामों में गिरावट आने के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें थोड़ी घटी हैं। लेकिन अभी भी खाद्य मुद्रास्फीति सालाना आधार पर नवंबर में 4.4 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 5.4 प्रतिशत होगी। 

निफ्टी ने बनाया नया रेकॉर्ड, 10,664 अंक पर बंद

नई दिल्ली। गुरुवार का दिन बाजार के लिए सामान्य रहा। जहां निफ्टी ने 10,664 अंक पर पहुंचकर नया रेकॉर्ड बनाया, वहीं सेंसेक्स 34,559 तक पहुंचने में कामयाब रहा। बुधवार को निफ्टी 19 अंक बढ़कर 10,651 पर बंद हुआ, वहीं सेंसेक्स 70 पॉइंट ऊपर चढ़कर 34503 पर बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सामान्य खरीदारी देखने को मिली है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.25 फीसदी बढ़कर बंद हुआ है। निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.25 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.4 फीसदी तक उछला है।

पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, आईटी, मीडिया, फार्मा और रियल्टी शेयरों में खरीदारी दिखी है। बैंक निफ्टी 0.2 फीसदी की बढ़त के साथ 25,661 के स्तर पर बंद हुआ है। हालांकि आज मेटल, ऑयल ऐंड गैस और कंज्यूमर ड्युरेबल्स शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है।

GST : कंज्यूमर्स को फायदा नहीं देने वाली 5 कंपनियों को नोटिस

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नई दिल्ली। जीएसटी एंटी प्रॉफियटरिंग पैनल ने 5 कंपनियों को नोटिस भेजा है। इन कंपनियों में हार्डकैसल रेस्टोरेंट, लाइफस्टाइल इंटरनेशनल रिटेलर, पयरामिड इंफ्रा, मैकडॉनल्ड फ्रेंचाइजी वेस्ट और साउथ इंडिया, होंडा मोटर्स डीलर्स शामिल है। इन कंपनियों ने जीएसटी के बेनेफिट्स कन्ज्यूमर को पास नहीं किया जिसके कारण इन्हें नोटिस भेजा गया है।

 कस्टमर की शिकायत पर भेजा नोटिस
 इन कंपनियों को नोटिस शिकायतों पर भेजा गया है। हार्डकैसल रेस्टोरेंट के खिलाफ शिकायत थी कि वह अभी भी कॉफी और चाय पर 18 फीसदी जीएसटी चार्ज कर रहा है जबकि सरकार ने रेस्त्रां पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।

पिरामिड इंफ्राटेक पर 36 बायर्स ने इन्पुट टैक्स क्रेडिट बेनेफिट पास नहीं करने की शिकायत आई थी जिसके बाद इन्हें नोटिस भेजा गया है। इससे पहले जयपुर की शर्मा ट्रेडिंग कंपनी को भी नोटिस भेजा था क्योंकि वह वैसलिन को 28 फीसदी जीएसटी पर बेच रहा था जबकि उस पर टैक्स रेट घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया था।
 
मांगी है प्राइस लिस्ट
 इन कंपनियों को बैलेंस शीट की कॉपी, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट स्टेटमेंट 2016-17, जुलाई से दिसंबर तक की जीएसटी रिटर्न, इन्वॉइस डिटेल, गुड्स सेल और परचेज कॉपी, 15 नवंबर से पहले और बाद की प्राइस लिस्ट मांगी है।

नए टैक्स स्ट्रक्टर जीएसटी में एंटी प्रॉफिटियरिंग का क्लॉज है जो कस्टमर की शिकायत का अधिकार देता है। जो कंपनियां टैक्स कट और इन्पुट टैक्स क्रेडिट का फायदा कस्टमर को पास नहीं कर रहे हैं, सरकार उनके खिलाफ एक्शन लेगी।
 
सरकार ने बनाई है एंटी प्रॉफियटरिंग अथॉरिटी
सरकार ने नवंबर में राजस्थान कैडर के आईएस अधिकारी बद्री नारायण शर्मा को नैशनल एंटी प्रॉफियटरिंग अथॉरिटी (एनएए) का चेयरमैन बनाया था। बीते साल सेंट्रल मिनिस्ट्री ने जीएसटी के तहत नैशनल एंटी प्रॉफियटरिंग अथॉरिटी बनाने की मंजूरी दी थी। इसे बनाने के पीछे सरकार का मकसद कस्टमर को एंटी प्रॉफियटरिंग से बचाना था।

ऐसा न हो की कंपनियां रेट कट का फायदा इन्पुट कॉस्ट के बहाने से कस्टमर को पास न करें। सरकार चाहती है कि जीएसटी के तहत उसने जो टैक्स रेट कम किए हैं उसका फायदा कस्टमर को मिल सके।

900 से ज्‍यादा केस में 3500 करोड़ रु. से ज्‍यादा की बेनामी प्रॉपर्टी अटैच

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 दिल्‍ली।  इनकम टैक्‍स (आईटी) डिपार्टमेंट ने बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट के तहत कार्रवाई करते हुए 3500 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई 900 से ज्‍यादा केस में की गई। डिपार्टमेंट की ओर से प्रोविजनल तौर पर अटैच की गई प्रॉपटी में प्‍लॉट, फ्लैट, शॉप्‍स, ज्‍वैलरी, व्‍हीकल्‍स, बैंक डिपॉजिट और एफडी आदि शामिल हैं।

अटैच की गई प्रॉपर्टीज में 2900 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की अचल संपत्ति है। बेनामी प्रॉपर्टी से मतलब ऐसी संपत्ति से है जिसका कोई कानूनी ओनर न हो या वह किसी फिक्सियस (छद्म) ओनर के नाम पर हो। 

आईटी डिपार्टमेंट ने गुरुवार को स्‍टेटमेंट जारी कर कहा कि डिपार्टमेंट ब्‍लैकमनी के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा और बेनामी ट्रांजैक्‍शन के तहत ऐसे एक्‍शन और ज्‍यादा होंगे। डिपार्टमेंट ने मई 2017 में अपने इन्‍वेस्टिगेशन डायरेक्‍टरेट्स के तहत 24 डेडिकेटेड बेनामी प्रॉ‍हिबिशन यूनिट्स (बीपीयू) बनाए थे, जिससे कि बेनामी प्रॉपर्टीज के संबंध में तेजी से कार्रवाई की जा सके। 
 
पांच केस में प्रॉपर्टी 150 करोड़ से ज्‍यादा 
आईटी डिपार्टमेंट के अनुसार, अटैच बेनामी प्रॉपर्टीज के पांच मामलों में एसेट की वैल्‍यू 150 करोड़ रुपए से ज्‍यादा है। वहीं, एक मामले में यह पाया गया कि एक रीयल एस्‍टेट कंपनी की करीब 50 एकड़ जमीन, जिसकी वैल्‍यू 110 करोड़ से ज्‍यादा है और वह ऐसे लोगों के नाम पर थी जिसका कोई मतलब नहीं था यानी बेनामीदार थे। इसकी पुष्टि जमीन बेचने वाले और इसमें शामिल ब्रोकर की ओर से की गई। डिपार्टमेंट ने हालांकि रीयल एस्‍टेट कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। 
 
अटैच प्रॉपर्टी में ये भी शामिल 
डिपार्टमेंट के अनुसार, अटैच की गई अन्‍य प्रॉपर्टीज में दो केस नोटबंदी के बाद है। इसमें यह पाया गया कि दो अटैच एसेट्स ऐसे थे, जिसमें कंपनियों ने स्‍क्रैप कंरसी (पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट) अलग-अलग बैंक खातों में अपने इम्‍प्‍लॉइज और सहयोगियों के नाम से जमा कराई थी।

उसे बाद में अपने-अपने बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया। इस तरह बेनेफिशियल ओनर के अकाउंट में करीब 39 करोड़ रुपए भेजने की कोशिश हुई। एक अन्‍य केस में 1.11 करोड़ रुपए कैश एक व्‍यक्ति की गाड़ी से जब्‍त किए गए। गाड़ी में सवार व्‍यक्ति ने यह कहा था कि कैश उसका नहीं है।

खास बात यह रही कि किसी भी व्‍यक्ति ने इस कैश की ओनरशिप नहीं ली और इसके बाद न्‍यायिक अथॉरिटी ने इस कैश को बेनामी प्रॉपर्टी घोषित कर दिया। 
 
7 साल तक सश्रम जेल का प्रावधान  
इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के अनुसार, प्रॉहिबिशन ऑफ बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्‍शन एक्‍ट 1 नवंबर 2016 से प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत, इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को बेनामी प्रॉपर्टी, चल या अचल, का प्रोविजनल अटैचमेंट और उसके बाद जब्‍ती का अधिकार है।

इसमें लाभ लेने वाले ओनर, बेनामीदार और बेनामी ट्रांजैक्‍शन के लिए उकसाने वालों के खिलाफ 7 साल तक सश्रम कारावास और बेनामी प्रॉपर्टी की असल मार्केट वैल्‍यू का 25 फीसदी तक फाइन की सजा का प्रावधान है। बता दें, वास्‍तविक बेनामी एक्‍ट 1988 में ब्‍लैकमनी की रोकथाम के लिए लाया गया था। 2016 में इसे संशोधन किया गया। 

सत्यम घोटाला : दोषी प्राइस वाटरहाउस पर दो साल का बैन

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नई दिल्‍ली। करोड़ों के सत्‍यम कंप्‍यूटर्स घोटाले में दोषी पाए जाने पर सेबी ने प्राइस वाटरहाउस (PW) पर दो साल तक के  लि‍ए लि‍स्‍टेड कंपनियों को ऑडि‍ट सेवा देने पर रोक लगा दी है। 

दो PW पार्टनर्स पर तीन साल का बैन लगाया गया है। इसके अलावा सेबी ने प्राइस वाटरहाउस और उसके दो चार्टर्ड एकाउंटेंट – एस गोपालकृष्‍णन व श्रीनि‍वास तल्‍लूरी को गैर कानूनी ढंग से कमाए गए 13 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश भी दि‍या है।

यही नहीं इन तीनों को इस रकम पर 12 फीसदी ब्‍याज भी देना होगा जि‍सकी गणना 7 जनवरी 2009 से की जाएगी। तीनों को 45 दि‍नों के भीतर ऐसा करना होगा। 

ऑडिटर्स ने गलत कि‍या :आदेश में यह भी कह गया है कि कोई भी लि‍स्‍टेड कंपनी या सेबी से रजि‍स्‍टर्ड इंटरमिडेरी दो साल के लि‍ए ऐसी कि‍सी ऑडिट फर्म को अपने काम में एंगेज नहीं करेंगी जो प्राइस वाटरहाउस  से जुड़ी हों। 

इस 108 पेज के आदेश में सेबी के पूर्णकालि‍क सदस्‍य जी महालिंगम ने कहा, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि ऑडिटर्स इस बात को साबि‍त करने में नाकाम रहे कि उन्‍होंने अपना काम उस प्रोफेशनल ईमानदारी के साथ कि‍या, जि‍सकी जरूरत थी। ऑडि‍टर्स इस बात से परि‍चि‍त थे कि उनकी इस नजरअंदाजी आगे चलकर एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी बन जाएगी। 

54 अरब रुपए की हेराफेरी
इस मामला 2009 का है जब सत्‍यम कंप्‍यूटर सर्वि‍सेज के चेयरमैन बी रामलिंगा राजू ने इस बात को स्‍वीकार कि‍या कि कंपनी के खातों में करीब 54 अरब रुपए की हेराफेरी की गई थी। इस खुलासे के बाद सेबी ने मामले में जांच बैठाई और प्राइस वाटरहाउस व उससे जुड़ी अन्‍य फर्म को फरवरी 2009 में नोटि‍स जारी कि‍या।  

बिना इंटरनेट और क्रेडिट-डेबिट कार्ड के भी होगा पेमेंट, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। डिजिटल भारत की सरकार की योजना के बाद से लोग स्मार्टफोन पर पहले से ज्यादा निर्भर हो गए हैं। लेकिन इसी निर्भरता को कम करने के लक्ष्य से सरकार एक नई टेक्नोलॉजी लेकर आने वाली है। इस तकनीक के तहत लोगों को पेमेंट करने के लिए डेबिट-क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट या स्मार्टफोन पर निर्भर रहने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

सरकार कॉल टू पे टेक्नोलॉजी लेन योजना बना रही है। इसके तहत उपभोक्ता साधारण फोन से भी ऑनलाइन पेमेंट कर पाएंगे। इसके लिए इंटरनेट पर निर्भरता या इंटरनेट की जरुरत नहीं होगी। फिलहाल इसे लाने की तैयारी की जा रही है।

इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया की 6 महीने बाद इसका ट्रायल देश के कुछ जिलों में शुरू कर दिया जाएगा। ट्रायल सफल होने पर अगले साल से देशभर में यह सुविधा मिलने लगेगी।

शोध के अंतिम चरण में टेक्नोलॉजी: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान नियम (एनपीसीआई) के तहत इस योजना और तकनीक पर अभी काम चल रहा है। हालांकि, इस तकनीक पर चल रहा शोध अंतिम चरण में है।

इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्यौगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोपालकृष्णन के अनुसार- भुगतान या पेमेंट करने के लिए ग्राहकों को आने वाले समय में स्मार्टफोन, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, QR कोड, इंटरनेट या किसी एप पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।

यह तकनीक कैसे काम करेगी और इसे कैसे इस्तेमाल किया जा सकेगा, इसका अभी पता नहीं चला है। तकनीक के पेश किए जाने पर इस पर विस्तार से जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

मंत्रालय ने अभी यह भी नहीं बताया है की किस प्रदेश और बैंक के साथ मिलकर इसका ट्रायल किया जाएगा। फिलहाल इसकी सुरक्षा प्रणाली को लेकर भी जांच चल रही है।

आयकर का छापा, कंपनी के लॉकर से मिले 61 करोड़ बरामद

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक निजी कंपनी के लॉकर से 61 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। दिल्ली के डायरेक्टरेट ऑफ इनकम टैक्स ने एक छापेमारी में 20 करोड़ रुपये, सोने के सिक्के और गहने बरामद किए हैं। यह छापा मारा गया था यू ऐंड आई वॉल्ट्स लिमिटेड में।

छापेमारी में बरामद की गई रकम एक गुटका कारोबारी व बिल्डर की बताई जा रही है। आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि जब्त किए गए माल की कुल कीमत करीब 61 करोड़ रुपये है।

यू ऐंड आई वॉल्ट्स लिमिटेड दिल्ली के साउथ एक्स इलाके में है। छापेमारी बीते हफ्ते से जारी थी। शुरुआत में यहां कैश और 15 करोड़ के सोने के सिक्के बरामद किए गए थे और फिर लॉकरों की भी तलाशी ली गई।

फिलहाल कंपनी को सील कर दिया गया है। 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपयों की नोटबंदी के बाद कालेधन के लिए कई जगह छापेमारी की गई, करोड़ों रुपये जब्त किए गए लेकिन साल 2018 में यह पहली छापेमारी है, जिसमें इतनी बड़ी रकम हाथ लगी है।

राजस्थान उपचुनाव : विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल

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-दिनेश माहेश्वरी
कोटा। राजस्थान में होने वाले उपचुनाव को राज्य विधानसभा चुनाव के बड़े मुकाबले से पहले सेमीफाइनल के तौर देखा जा रहा है। राजस्थान में दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

अलवर और अजमेर की लोकसभा सीटों और मंडलगढ़ की विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के विजेताओं को सत्ता में रहने के लिए सिर्फ एक साल मिलेगा, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के लिए इस जीत के बड़े मायने हैं। इससे यह पता चलेगा कि राजस्थान में हवा किस तरफ बह रही है।

अलवर और मंडलगढ़ में क्रमश: सोमवार और मंगलवार को पार्टी उम्मीदवारों द्वारा नॉमिनेशन फाइल करने के दौरान राजस्थान में कांग्रेस के तीनों बड़े नेता- पूर्व सीएम अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और सीनियर नेता सीपी जोशी ने मंच साझा किया।

पहले गुटबाजी के लिए सुर्खियों में रही कांग्रेस इस बार एकजुटता दिखा रही है। दरअसल, उसे पता है कि 2013 में मिली करारी हार के बाद उसे इस बार के विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी के साथ लड़ने की जरूरत है।

‘घृणा की राजनीति कर रही है बीजेपी’
सचिन पायलट ने बताया, ‘कैंपेन में हमारे सभी सीनियर नेताओं की मौजूदगी का मतलब यह है कि हम यह चुनाव जीतने के लिए लड़ रहे हैं। गहलोत गुजरात कैंपेन से तरोताजा होकर लौटे हैं, जहां कांग्रेस ने कड़ी चुनौती पेश की थी।

बीजेपी यहां भी घृणा और हिंसा की राजनीति कर रही है…हालांकि जैसा कि राहुल गांधी ने गुजरात में कहा, हम यहां भी उसी अंदाज में काम करेंगे और तीनों उपचुनाव जीतने के लिए प्यार और सौहार्द की राजनीति करेंगे। लोगों ने कांग्रेस के लिए अपना मन बना लिया है।’

हालांकि, राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष अशोक परनामी का कहना था कि कांग्रेस के जीतने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘कोई सरकार विरोधी माहौल नहीं है। हम सभी तीनों सीटें बड़े मार्जिन के साथ जीतेंगे। अप्रैल में हमने धौलपुर विधानसभा उपचुनाव जीता था। इस सीट पर पहले हमारा कब्जा नहीं था।’

बीजेपी विधायकों की टिप्पणी से विवाद
अजमेर और अलवर लोकसभा की 16 विधानसभा सीटों में से 14 पर बीजेपी काबिज है, जबकि एक सीट कांग्रेस के पास है। बीजेपी के सीनियर नेताओं सांवर लाल जाट और चंद नाथ की मौत के कारण अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। यादव बहुल अलवर सीट पर दोनों पार्टियों ने इसी समुदाय के उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।

अलवर में कांग्रेस के उम्मीदवार करण सिंह यादव  का मुकाबला बीजेपी के जसवंत सिंह यादव से है। इस इलाके में गोरक्षा और मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी को लेकर बीजेपी विधायकों की हालिया टिप्पणी से विवाद पैदा हो गया है।

बीजेपी के एक सीनियर नेता का कहना था कि कांग्रेस पहले अजमेर में अपनी हार देख रही है और इस कारण से पूर्व सांसद सचिन पायलट यहां से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के एक सीनियर नेता का कहना था कि यह सोची-समझी रणनीति है, क्योंकि पायलट को एक सीट पर सिमटने के बजाय तीनों उपचुनाव पर फोकस करने की जरूरत है।