Thursday, July 16, 2026
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औसत खुदरा मुद्रास्फीति 2017-18 में 6 साल के निचले स्तर पर : आर्थिक समीक्षा

नई दिल्ली। देश में 2017-18 में औसत खुदरा मुद्रास्फीति 2017-18 में घटकर छह साल के निचले स्तर 3.3 प्रतिशत पर आ गई है। संसद में आज पेश आर्थिक समीक्षा 2017-18 में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि इससे अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर मूल्य व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा पेश की। नरेंद्र मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट 1 फरवरी को पेश होगा। समीक्षा में कहा गया है कि मुद्रास्फीति पर अंकुश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। 2017-18 में मुद्रास्फीति के नीचे आने का सिलसिला कायम रहा।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस अवधि में औसतन 3.3 प्रतिशत रही, जो पिछले छह वित्त वर्षों का निचला स्तर है। मुद्रास्फीति में गिरावट व्यापक रूप से जिंस समूहों में रही है। केवल आवास, ईंधन और लाइट क्षेत्र में मुद्रास्फीति बढ़ी है।

समीक्षा में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में मु्द्रास्फीति में गिरावट खाद्य मुद्रास्फीति के अनुकूल रहने का संकेतक है, जो इस दौरान शून्य से 2.1 प्रतिशत नीचे से लेकर 1.5 प्रतिशत तक रही। इसकी वजह बेहतर कृषि उत्पादन और सरकार द्वारा नियमित रूप से मूल्यों की निगरानी है।

समीक्षा में कहा गया है कि यदि हम 2017-18 में राज्यवार मुद्रास्फीति को देखें तो इस अवधि में 17 राज्यों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से कम रही है।

भंसाली को लिखे ओपन लेटर का स्वरा को म‍िला जवाब

मुंबई। डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ बॉक्सऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हालांकि, इसे लेकर विरोध अब भी जारी है। बॉलिवुड ऐक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने भी ओपन लेटर लिखकर भंसाली की ‘क्लास’ लगाई। उनका कहना था कि फिल्म में महिलाओं को ‘वजाइना’ के तौर पर सीमित कर दिया गया है।

अब इस लेटर के जवाब में भंसाली की फिल्म ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ के को-राइटर रहे सिद्धार्थ-गरिमा ने स्वरा पर पलटवार किया है। सिद्धार्थ-गरिमा ने भी ‘ऐन ओपन लेटर टु ऑल वजाइनाज’ शीर्षक से लेटर लिखा है। उन्होंने स्वरा को फेमिनिज़म की परिभाषा समझाते हुए लिखा, ‘महिलाओं के पास वजाइना होती है।

यह जीवन का रास्ता है क्योंकि वह जीवन दे सकती है। एक पुरुष लाख कोशिशों के बावजूद ऐसा नहीं कर सकता है। ऐसे में दोनों जेंडर की समानता के सवाल का सही जवाब मिल जाता है।’ सिद्धार्थ-गरिमा ने आगे लिखा, ‘कई ऐक्टर्स, फिल्ममेकर और कलाकारों को लगता है कि वे मॉडर्न सिनेमा में फेमिनिज़म की नई परिभाषा देते हुए लोगों को रास्ता दिखाएंगे।

ऐसे में वे हाल ही के सिनेमा में दिखाए गए दृश्यों को यादकर सच और झूठ का फर्क समझ लें। फिल्म के दृश्य में दिखाया गया है कि पति/प्रेमी से धोखा खाने के बाद एक महिला हाथ में शराब लिए बैकग्राउंड में पुरानी फिल्म के गाने सुनते हुए गलियों में भटक रही है। यह नजारा वैसा है जैसा प्यार में धोखा खाने के पास पुरुष करते हैं तो क्या महिलाओं के ऐसा करने से उन्हें समानता का अधिकार मिल जाता है?’

लेटर में लिखा गया कि हाल ही में आई एक फिल्म में बेटी अपने पिता के साथ सिगरेट शेयर करती है। ऐसा अब तक सिर्फ लड़के ही फिल्मों में करते नजर आते हैं। फिल्म का यह सीन फेमिनिज़म को दिखाता है। अब बात करते हैं उन लोगों की, जो सोचते हैं कि पद्मावत ने फेमिनिज़म को चैलेंज कर दिया-

1. क्या उन्हें फिल्म देखकर यह नहीं लगा कि रानी पद्मावती अपने पति को राजगुरू के गलत इरादों के बाद उसे देश निकाला का आदेश देती हैं।
2. उन्हें वजाइना का अहसास तब हुआ जब रानी पद्मावती खुद अपना चेहरा शीशे में खिलजी को दिखाने का निर्णय लेती हैं?
3. उन्हें वजाइना का अहसास तब हुआ जब रानी पद्मावती पूरे सिस्टम के खिलाफ जाकर अपने पति को खिलजी के किले से छुड़ाती हैं?
4. उन्हें वजाइना का अहसास तब हुआ जब रानी रेप की जगह आग को चुनती हैं। वजाइना होने के बावजूद यह उनका खुद का निर्णय था। सही, गलत, मजबूत, कमजोर सब आप पर है कि आप किस तरह वजाइना और पेनिस की परिभाषा को गढ़ती हैं।

सिद्धार्थ-गरिमा ने लेटर में लिखा है, ‘फेमिनिज़म शब्द को कई बार गलत तरह से परिभाषित किया गया है। इसका गलत इस्तेमाल भी किया गया है लेकिन इस बात को मत भूलिए कि पुरुषों की बराबरी करना, उनके जैसा बनने की कोशिश करना, यह सब फेमिनिज़म की परिभाषा नहीं है।

एक महिला ने खुद को गुलामी की जिंदगी देने से ज्यादा खुद को आग के हवाले कर दिया जो उसकी अपनी इच्छा थी। इस बात को वजाइना और फेमिनिज़म के नाम पर गलत समझना कहां की बहादुरी है? इस तरह तो किसी महिला के त्याग को भी आप अपनी सोच से खराब कर रहे हैं।’

लेटर में आगे लिखा गया है, ‘यह फिल्म 13वीं सदी के दौरान हुई घटना को बता रही है तो उसकी तुलना वर्तमान से कैसे की जा सकती है? 700 साल पहले महिलाएं रेप होने के बजाय मौत को चुनती थीं। इस इतिहास को हम सभी जानते हैं लेकिन इसके बाद भी आपको आपत्ति है तो ऐतिहासिक फिल्में देखना बंद कर दें।

तथ्यों पर आधारित सबसे बड़ी बात यह है कि सती प्रथा एक ऐसी परंपरा थी जिसमें औरतों को ज्यादातर पति के मरने के बाद जबरदस्ती खुद को चिता के हवाले करना होता था। ऐसा बहुत कम हुआ है जब किसी महिला ने इच्छा से सती होना स्वीकार किया हो।

वहीं, जौहर एक ऐसी प्रथा है जो स्वेच्छा से महिलाएं चुनती हैं। इतिहास में कहीं भी जौहर को जबरदस्ती कराने का जिक्र नहीं है। इन सबके बावजूद पद्मावत देखने के बाद लोगों को वजाइना याद रहे तो अच्छा होगा कि वे इसके पावर को समझें। ऐसे लोग ही फेमिनिज़म के रास्ते का रोड़ा हैं।’

स्वरा ने क्या कहा था?
स्वरा भास्कर ने अपने ओपन लेटर में भंसाली पर कुछ ऐसे सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था-
1. सर, महिलाओं को रेप का शिकार होने के अलावा जिंदा रहने का भी हक है। 
2. आप पुरुष का मतलब जो भी समझते हों- पति, रक्षक, मालिक, महिलाओं की सेक्शुअलिटी तय करने वाले…उनकी मौत के बावजूद महिलाओं को जीवित रहने का हक है।’
3. महिलाएं चलती-फिरती वजाइना नहीं हैं।
4. हां, महिलाओं के पास यह अंग होता है लेकिन उनके पास और भी बहुत कुछ है। इसलिए लोगों की पूरी जिंदगी वजाइना पर केंद्रित, इस पर नियंत्रण करते हुए, इसकी हिफाजत करते हुए, इसकी पवित्रता बरकरार रखते हुए नहीं बीतनी चाहिए।’
5. वजाइना के बाहर भी एक जिंदगी है। बलात्कार के बाद भी एक जिंदगी है।

आर्थिक सर्वे 2018 पेश: जीडीपी के 7 से 7.5 पर्सेंट तक रहने का अनुमान

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 का आर्थिक सर्वे संसद में पेश कर दिया है। हिंदी और अंग्रेजी में पेश किए गए इस सर्वे में भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है। हालांकि फाइनैंशल इयर 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7 से 7.5 पर्सेंट तक कर दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक सर्वे में कहा गया है कि मौजूदा फाइनैंशल इयर में जीडीपी की रफ्तार 6.75 पर्सेंट रह सकती है। सर्वे के मुताबिक आने वाले फाइनैंशल इयर में उपभोग आधारित ग्रोथ देखने को मिलेगी।

जानें, सर्वे की अहम बातें…
– 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.5 पर्सेंट रहने का अनुमान।
– मौजूदा वित्त वर्ष में 6.75 पर्सेंट हो सकती है जीडीपी ग्रोथ। 
– निजी निवेश में सुधार के संकेत।
– एक्सपोर्ट में सुधार की स्थिति देखने को मिलेगी।
– सरकार ने माना कि फाइनैंशल इयर 2019 में आर्थिक प्रबंधन में थोड़ी मुश्किल होगी।
– इस साल चालू खाता घाटा 1.5 से लेकर 2 पर्सेंट तक रह सकता है।
– मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि ग्रोथ 2.1 पर्सेंट रहने का अनुमान।
– फाइनैंशल इयर 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा 3.2 पर्सेंट रहने का अनुमान।
– सर्वे के मुताबिक मीडियम टर्म में रोजगार, शिक्षा और कृषि पर होगा सरकार का फोकस।
– उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मौजूदा फाइनैंशल इयर में 3.3 पर्सेंट रहने का अनुमान।
– थोक मूल्य सूचकांक के 2.9 पर्सेंट तक रहने की संभावना।
– इस साल विदेशी मुद्रा भंडार में बड़े इजाफे की उम्मीद। 209.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचेगा आंकड़ा।

क्रूड ऑइल से लगेगा झटका
– क्रूड ऑइल की कीमतों में इजाफे को लेकर जताई गई चिंता।
– 12 पर्सेंट तक बढ़ सकती हैं क्रूड की कीमतें, महंगाई में हो सकता है इजाफा।

ग्लोबल ग्रोथ से कहीं आगे है भारत
– ग्लोबल ग्रोथ से 4 और उभरती इकॉनमीज से 3 पर्सेंट ज्यादा है भारत की जीडीपी ग्रोथ।
– 2014-15 से 2017-18 तक भारत की औसत ग्रोथ 7.3 फीसदी रही।

जीएसटी से उत्साहजनक नतीजे
– जीएसटी से इनडायरेक्ट टैक्स चुकाने वालों की संख्या में 50 पर्सेंट बढ़ोतरी।
– जीएसटी के तहत छोटे कारोबारियों ने स्वेच्छा से बड़ी संख्या में कराया रजिस्ट्रेशन।

राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ बजट सत्र शुरू, गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से सोमवार को संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो गई। राष्ट्रपति ने एक तरफ सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं वहीं ट्रिपल तलाक, देशभर में एक साथ चुनाव जैसे मोदी सरकार के अजेंडे पर भी सहमति बनाने की अपील की।

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग, स्टूडेंट्स के लिए सरकार की योजनाओं के अलावा सामाजिक न्याय के प्रयासों का भी जिक्र किया। कोविंद के संबोधन में मोदी सरकार की आतंरिक और विदेशी नीति के हर पहलू को समेटने की कोशिश की गई। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में पूरे देश में एक साथ चुनाव की जरूरत पर भी बल दिया।

गणतंत्र दिवस पर आसियान डिप्लोमैसी का जिक्र
राष्ट्रपति कोविंद ने गणतंत्र दिवस पर 10 आसियान देशों के मेहमान होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसने हमारे देश की वसुधैव कुटुंबकम की भावना को नया आयाम दिया है। राष्ट्रपति ने स्वच्छ भारत अभियान को महात्मा गांधी के आदर्शों से जोड़ते हुए आशा जताई कि देश 2019 में जब राष्ट्रपति की 150वीं जयंती मनाएगा तो संपूर्ण स्वच्छता के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गरीब महिलाओं के गरिमा से भी जुड़ा मुद्दा है।

उज्जवला योजना सामाजिक न्याय का साधन
कोविंद ने गरीब महिलाओं को फ्री एलपीजी कनेक्शन देने की उज्जवला योजना को जिक्र किया। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय का साधन बताते हुए कहा कि 3 करोड़ 30 लाख से ज्यादा गैस कनेक्शन बांटे गए हैं।

ट्रिपल तलाक बिल की भी चर्चा
राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की तरफ से लाए गए ट्रिपल तलाक बिल की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अबतक मुस्लिम महिलाओं का सम्मान राजनीतिक हानि-लाभ का बंधक रहा। उन्होमने आशा जताई की संसद शीघ्र ही इस बिल को कानूनी रूप तक मुस्लिम बेटियों के साथ न्याय करेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का दायरा 161 जिलों से बढ़ाकर 640 जिले तक कर दिया है। मैटरनिटी बेनिफिट ऐक्ट में बदलाव किया गया। 12 सप्ताह की जगह वेतन सहित 26 सप्ताह की छुट्टी का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि गरीबों की पीड़ा महसूस करने वाली योजनाएं लाई गईं हैं।

स्वरोजगार की योजनाओं का जिक्र: राष्ट्रपति कोविंद ने मोदी सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बिना बैंक गारंटी कर्ज देने की शुरुआत की गई है। मुद्रा योजना के अंतगर्त अबतक 10 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए हैं। 4 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज दिया गया है।

3 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार इस य़ोजना का लाभ उठाया है और स्वरोजगार का सपना साकार हुआ। राष्ट्रपति ने इस आर्थिक लोकतंत्र के लिए प्रयास बताया। किसानों के लिए सरकारी प्रयासों पर फोकस: राष्ट्रपति ने किसानों के लिए मोदी सरकार की योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों का जीवन उठाना सरकार की उच्च प्राथमिकता है।

सरकार के प्रयासों से इस साल 275 मिलियन टन खाद्यान और 225 मिलियन टन फलों-सब्जियों का रेकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य बनाया है। राष्ट्रपति ने किसान बीमा योजनाओं, फसल बीमा योजना का जिक्र किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि यूरिया नीति की वजह से खाद का संकट खत्म हुआ है। गोरखपुर, बरौनी, सिंदरी जैसे खाद कारखाने शुरू किए गए हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि गरीबों को एक रुपये प्रति महीना और 90 पैसे प्रतिदिन के प्रीमियम पर बीमा योजना उपलब्ध कराई जा रही है। बुजुर्गों को भी पेंशन दी जा रही है।

इस आलोक में राष्ट्रपति ने जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने जनसंघ विचारक दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए काम कर रही है।

रोड कनेक्टिविटी के लिए वृहद प्रयास: राष्ट्रपति ने बताया कि 2014 में केवल 56 फीसदी गांव प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से जुड़े थे अब 82 फीसदी गांव सड़क संपर्क से जुड़ गए। 2019 तक देश के प्रत्येक गांव को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश से ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांग लोगों के लिए दिव्यांग जन अधिकार अधिनियन 2016 लागू किया गया है। इसके तहत सरकारी नौकरियों में 4 फीसदी और उच्च शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

अभिभाषण के अन्य प्रमुख बिंदु
– तुष्टिकरण नहीं सशक्तिकरण के संकल्प के साथ अल्पसंख्यकों के आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक दिशा में सरकारी प्रयास हो रहे हैं।
-पिछले एक साल में 45 लाख से अधिक स्टूडेंट्स को फेलोशिप, कोचिंग, कौशल विकास।
– बिना मेहरम के मुस्लिम महिलाओं को हज पर जाने का मौका।
– सभी के सिर पर छत हो, पानी बिजली मिले, हर आवासहीन गरीब परिवार को वर्ष 2022 तक घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य।
-शहरी ग्रामीण इलाकों में 93 लाख से अधिक आवास बनाए गए। शहरी गरीबों को आवास योजना में ब्याज दर में 6 फीसदी की राहत दी गई।
– गरीब, मध्यम वर्ग के स्वास्थ्य के लिए नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, राष्ट्रीय आयुष मिशन द्वारा योग आयुर्वेद जैसी परंपरागत को बढ़ावा।
– पीएम जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से गरीबों को 800 तरह की दवाइयां सस्ती दरों पर दी जा रही हैं।
– इंस्टैंट की कीमत 80 फीसदी कम, घुटना प्रत्यारोपण की कीमतों पर निय़ंत्रण।
– डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस की 13000 और पीजी की 7000 से अधिक सीटें स्वीकृत।
– देश के टीकाकरण की वृद्धि दर एक फीसदी से बढ़कर 6.1 फीसदी हो गई।
– स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा पर फोकस। अटल इनोवेशन मिशन के तह

अविवाहित महिलाओं में बढ़ा कॉन्डम का इस्तेमाल : हेल्थ सर्वे

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नई दिल्ली। अब भारत में भी बड़ी संख्या में अविवाहित और सेक्शुअली ऐक्टिव महिलाएं सुरक्षित सेक्स को तरजीह दे रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से करवाए गए नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 के मुताबिक, 15 से 49 साल की अविवाहित महिलाएं जो सेक्शुअली ऐक्टिव हैं उनके बीच पिछले 10 साल में  2 प्रतिशत से 12 प्रतिशत हो गया है।

20 से 24 साल के बीच की सेक्शुअली ऐक्टिव अविवाहित लड़कियों के बीच कॉन्डम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इस सर्वे की मानें तो 8 में 3 पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोध महिलाओं की जिम्मेदारी है और इससे पुरुषों का कोई लेना देना नहीं है।

गर्भनिरोध के तरीकों की है जानकारी
हालांकि यहां अच्छी खबर यह है कि15 से 49 साल के बीच के देश के 99 प्रतिशत शादीशुदा महिलाओं और पुरुषों को गर्भनिरोधक के कम से कम एक तरीके की जानकारी अवश्य है, लेकिन इस जानकारी का स्थानांतरण सुरक्षित सेक्स के रूप में विस्तृत रूप से नहीं हुआ है।

देश में 15 से 49 साल के बीच की शादीशुदा महिलाओं के बीच कॉन्ट्रसेप्टिव प्रिवलेंस रेट यानी गर्भनिरोधक प्रचार दर (CPR) सिर्फ 54 प्रतिशत है जिसमें से सिर्फ 10 प्रतिशत महिलाएं ही ऐसी हैं जो गर्भनिरोधक के तौर पर आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।

बड़ी संख्या में महिलाएं अब भी गर्भनिरोध के लिए सदियों पुराने तरीके जैसे- मासिक धर्म आवर्तन या संबंध-विच्छेद पर निर्भर हैं। गर्भनिरोध के आधुनिक तरीकों की बात करें तो इसमें कॉन्डम, महिलाओं और पुरुषों की नसबंदी, गर्भनिरोधक गोलियां और अंतर्गर्भाशयी यंत्र यानी इंट्रायूट्रिन डिवाइस (IUD) शामिल है।

परिवार नियोजन के लिए महिलाओं की नसबंदी
नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 25 से 49 वर्ष की महिलाएं गर्भनिरोधक के तौर पर अपनी नसबंदी को तरजीह देती हैं और महिलाओं की नसबंदी, देशभर में गर्भनिरोध का सबसे प्रचलित तरीका है। सर्वे की मानें तो 1 प्रतिशत से भी कम महिलाओं ने इमरजेंसी कॉन्ट्रसेप्टिव पिल के इस्तेमाल की बात स्वीकार की।

कॉन्डम पर है लोगों का ज्यादा भरोसा
इस सर्वे में 61 प्रतिशत पुरुषों ने कॉन्डम पर भरोसा जताया और माना कि अगर कॉन्डम का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह ज्यादातर समय अनचाही प्रेग्नेंसी से सुरक्षा प्रदान करता है। तो वहीं अतिरिक्त 25 प्रतिशत पुरुषों का कहना था कि अगर कॉन्डम का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह कई बार प्रेग्नेंसी से सुरक्षा प्रदान करता है।

गर्भनिरोधक इस्तेमाल के मामले में पंजाब सबसे आगे
देशभर में गर्भनिरोध के तरीकों का सबसे कम इस्तेमाल मणिपुर, बिहार और मेघालय में होता है जहां इसका प्रतिशत सिर्फ 24 है वहीं, गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल करने की लिस्ट में 76 प्रतिशत के साथ पंजाब पहले नंबर पर है। केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल के मामले में 30 प्रतिशत के साथ लक्ष्यद्वीप सबसे पीछे है जबकि 74 प्रतिशत के साथ चंडीगढ़ सबसे आगे।

ऑरल पिल्स में कमी, कॉन्डम के इस्तेमाल में बढ़ोतरी
सर्वे में यह भी पता चला कि देशभर में आधुनिक गर्भनिरोध के तरीकों का इस्तेमाल करने के मामले में 65 प्रतिशत के साथ सिख और बौद्ध धर्म की महिलाएं सबसे आगे हैं जबकि मुस्लिम महिलाओं का प्रतिशत सिर्फ 38 है। गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल का संबंध संपत्ति से भी है।

जहां गरीब तबके की सिर्फ 36 प्रतिशत महिलाएं गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल करती हैं वहीं, संपन्न परिवार की 53 प्रतिशत महिलाएं कॉन्ट्रसेप्टिव यूज करती हैं। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में 6 लाख 1 हजार 509 घरों से साक्षात्कार किया था जिसमें लोगों की प्रतिक्रिया दर 98 प्रतिशत थी।

स्‍मार्टफोन ने छीना कैमरा कंपनि‍यों का कारोबार, 81 फीसदी गि‍रा बाजार

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नई दि‍ल्‍ली।  पि‍छले कुछ साल में स्‍मार्टफोन के बढ़ते बाजार ने कैमरा कंपनि‍यों की मुश्‍कि‍ल बढ़ा दी है। स्‍मार्टफोन में 2 MP और 5 MP से शुरू हुआ सफर अब 40 MP के कैमरे तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं कई स्‍मार्टफोन कंपनि‍यां फोन की कैमरा क्‍वॉलि‍टी को और बेहतर करने के लि‍ए डुअल कैमरा सि‍स्‍टम तक लाने लगी हैं।

ऐसे में पि‍‍‍‍‍छले 6 साल में कैमरा कंपनि‍यों का काराेबार 81 फीसदी तक गि‍र गया है। ऐसे में जापानी कंपनी फूजीफि‍ल्‍म की ओर से कहा गया है कि‍ अपना बाजार बचाने के लि‍ए कैमरा कंपनि‍यां कैमरों में नए फीचर तो ला ही रही हैं साथ ही उनके साइज और वजन को भी कम करने में जुटी हुई हैं।  
 
स्‍मार्टफोन पर बढ़ी नि‍र्भरता  
आज से 10 साल पहले जहां कोई व्‍यक्‍ति‍ घूमने जाता था तो डि‍जि‍टल कैमरा लेकर जाता था ताकि‍ वहां की हर याद को फोटो के जरि‍ए एलबम में कैद कर सके। लेकि‍न अब ये ट्रेंड बदल गया है। क्‍योंकि‍ आजकल सभी के पास अच्‍छी कैमरा क्‍वॉलि‍टी वाले स्‍मार्टफोन हैं।

ऐसे में लोग कैमरा नहीं खरीदते और उनका काम स्‍मार्टफोन से चल जाता है। फोन से फोटो खींचने के बाद लोग जरूरत पड़ने पर उन्‍हें प्रिंट भी करा लेते हैं। 
 
6 साल में 81 फीसदी तक गि‍रा कैमरा बाजार 
वेबसाइट फोटोग्रफी की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, 2009 से लेकर 2016 तक कैमरा बाजार में एक बड़ा बदलाव आया। इस दौरान कैमरा मार्केट में करीब 81 फीसदी की गि‍रावट आई है।

अगर मैन्‍युफैक्‍चरि‍ंग की बात करें तो 2010 में जहां 12 करोड़ 10 लाख (121 मि‍लि‍यन) यूनि‍ट की मैन्‍युफैक्‍चरि‍ंग हुई। वहीं, 2016 में यह गि‍रकर 2 करोड़ 30 लाख (23 मि‍लि‍यन) हो गई। ऐसे में देखा जाए तो सि‍र्फ 6 साल में कैमरा बाजार में 5 गुना से ज्‍यादा की गि‍रावट आई है।  
 
स्‍मार्टफोन की बि‍क्री बढ़ी, कैमरा बाजार गि‍रा 
भारत ही नहीं पूरी दुनि‍या में स्‍मार्टफोन का बाजार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सभी जानते हैं कि‍ स्‍मार्टफोन की कैमरा क्‍वॉलि‍टी दि‍न-ब-दि‍न बेहतर होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा असर भी कैमरा बाजार पर ही पड़ा है।

जहां कॉम्‍पैक्‍ट कैमरा बाजार से गायब है। वहीं, DSLR और Mirrorless कैमरे का बाजार भी लगातार गि‍रा है। वहीं, अगर सि‍र्फ 2015-2016 की बात करें तो  स्‍मार्टफोन का बाजार एक साल में 5 फीसदी बढ़ा है। 
 
अपना मार्केट बचाने के लि‍ए क्‍या कर रही हैं कैमरा कंपनि‍यां 
लाए जा रहे हैं नए फीचर : स्‍मार्टफोन के बढ़ते प्रभाव से अपना बाजार बचाने के लि‍ए कैमरा कंपनि‍यां क्‍या कर रही हैं यह सवाल जब फूजीफि‍ल्‍म इंडि‍या के एमडी हरुतो इवाटा ने बताया कि‍ स्‍मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रि‍यता और अच्‍छी कैमरा क्‍वॉलि‍टी के चलते कैमरा कंपनि‍यों के सामने चैलेंज है कुछ नया करने का। यही कारण है कि‍ कैमरा कंपनि‍यां अब कैमरों में GPS, Wifi और Bluetooth जैसे फीचर दि‍ए जा रहे हैं। 
 
साइज और वजन दोनों को कि‍या कम : फूजीफि‍ल्‍म इंडि‍या के एमडी हरुतो इवाटा ने आगे बताया कि‍ हाल ही में हमने एक्‍स सीरीज के कैमरे लॉन्‍च कि‍ए हैं। आज पेशेवर फोटोग्राफी में वृद्दि हुई है, शादी के लि‍ए भी फोटोग्रफी बढ़ी है और ब्रांड प्रचार प्रसार के लिए व्यावसायिक फोटोग्राफी बढ़ गई है।

ऐसे में हमने कॉम्‍पेक्‍ट कैमरे के साइज में mirrorless कैमरों की सीरीज लॉन्‍च की है। क्‍योंकि‍ DSLR बड़ा कैमरा होता है और इसका वजन भी ज्‍यादा होता है। ऐसे में लोग इन्‍हें हर जगह ले जाना पसंद नहीं करते। 
 
सोशल मीडि‍या से डायरेक्‍ट जोड़ना : वहीं, आज कल सोशल मीडि‍या का जमाना है और लोग फाेटो खींच कर तुरंत उसे दोस्‍तों के साथ शेयर करना चाहते हैं। यह काम स्‍माटफोन से बहुत आसानी से हो जाता है। ऐसे में हमारी कोशि‍श है कि‍ Wifi और Bluetooth जैसे फीचर देकर कैमरे से खींचे गए फोटोज को तुरंत फोन या लैपटॉप में भेजा जा सके। 

इकोनॉमिक सर्वे के बाद सेंसेक्स 36,443 और निफ्टी 11,171 के पार

नई दिल्ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में 2017 18 के लिए इकोनॉमिक सर्वे पेश किया है। इकोनॉमिक सर्वे में वित्‍त वर्ष 2018 19 में जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद बाजार में तेजी बढ़ गई है और बाजार रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा है। 

हैवीवेट शेयरों मारुति सुजुकी, एचडीएफसी, टीसीएस, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचयूएल, आईटीसी, इंफोसिस में बढ़त से सेंसेक्स और निफ्टी पुराने रिकॉर्ड स्तर को तोड़ते हुए नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। सेंसेक्स जहां 36,443.98 प्वाइंट्स के ऑलटाइम हाई पर पहुंचा। वहीं निफ्टी ने 11,171.55 प्वाइंट्स के नए स्तर को छुआ।

मारुति में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी
तीसरी तिमाही में मुनाफा बढ़ने से सोमवार के कारोबार में मारुति के शेयर में 3.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इस दौरान कंपनी को 1799 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है।

तीसरी तिमाही में अच्छे नतीजे से बीएसई पर शेयर 2 फीसदी की बढ़त के साथ 9466 रुपए पर खुला था। वहीं 25 जनवरी को स्टॉक 9277.20 रुपए के भाव पर बंद हुआ था। कारोबार में बढ़त से शेयर 3.58 फीसदी चढ़कर 9609.95 रुपए पर पहुंच गया, जो इंट्रा-डे का हाई है।
 
न्यूजेन सॉफ्टवेयर का शेयर 3.3% प्रीमियम पर लिस्ट
आईटी सेक्टर की कंपनी न्यूजेन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड का शेयर बीएसई पर 3.26 फीसदी प्रीमियम के साथ 253 रुपए पर लिस्ट हुआ। वहीं एनएसई पर शेयर 3.71 फीसदी प्रीमियम के साथ 254.10 रुपए पर लिस्ट हुआ। आईपीओ के जरिए कंपनी ने 424 करोड़ रुपए जुटाए हैं।
 
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी
 कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बढ़त दिख रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.38 फीसदी मजबूत हुआ है।वहीं बीएसई के स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.52 फीसदी की बढ़त आई है।

FII रहे खरीददार, डीआईआई ने की बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) ने घरेलू शेयर बाजार में 937.31 करोड़ रुपए खरीददारी की। वहीं डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (डीआईआई) ने 965.67 करोड़ रुपए की बिकवाली की।

एशियाई बाजारों में मजबूती
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिल रही है। सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी इंडेक्स 0.24 फीसदी की तेजी के साथ 10,940 अंक पर कारोबार कर रहा है।

जापान का बाजार निक्केई 117 अंक की बढ़त के साथ 23,749 अंक पर कारोबार कर रहा है। हैंग सेंग 122 अंक की उछाल के साथ 33,275 अंक पर कारोबार कर रहा है।

कोरियाई बाजार का इंडेक्स कोस्पी 0.49 फीसदी बढ़कर 2,575 अंक पर कारोबार कर रहा है, जबकि ताइवान इंडेक्स 0.37 फीसदी चढ़कर 11,189 अंक पर कारोबार कर रहा है।

शंघाई कम्पोजिट में 0.01 फीसदी की हल्की गिरावट है। वहीं स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 3,587 अंक पर कारोबार कर रहा है।

 पिछले रिकॉर्ड हाई लेवल
 24 जनवरी: सेंसेक्स ने 36,268.19 और निफ्टी ने 11,110.10 अंक को छुआ।
23 जनवरी: निफ्टी पहली बार 11000 के लेवल को पार करते हुए 11,092.90 के स्तर पर पहुंचा। वहीं सेंसेक्स भी 36170.83 के हाई पहुंच गया।
22 जनवरी:  सेंसेक्स 35827.70 की नई ऊंचाई पर पहुंचा। वहीं निफ्टी ने 10,975.10 के नए लेवल को छुआ।
19 जनवरी: निफ्टी ने 10900 के आंकड़े को पार करते हुए 10906.85 के लेवल पर पहुंचा। वहीं सेसेक्स भी 35542.17 प्वाइंट्स की नई ऊंचाई पर पहुंचा।
17 जनवरी: सेंसेक्स 35118.61 की नई ऊंचाई पर पहुंचा। निफ्टी ने भी पहली बार 10803 के लेवल को छुआ। 
15 जनवरी: निफ्टी 10782.65 के नए रिकॉर्ड पर पहुंचा, जबकि सेंसेक्स ने 34963.69 के लेवल को छुआ।
12 जनवरी: सेंसेक्स ने 34638.42 की नई ऊंचाई पर पहुंचा। वहीं, निफ्टी 10690.25 प्वाइंट्स तक पहुंचा।
11 जनवरी: निफ्टी ने 10664.60 का ऑलटाइम हाई बनाया था।
09 जनवरी: को सेंसेक्स ने ऊंचाई का नए लेवल 34565.63 प्वाइंट्स को छुआ।
08 जनवरी: को सेंसेक्स ने 34487.52 प्वाइंट्स का लेवल छुआ, वहीं निफ्टी 10631.20 की ऊंचाई तक गया था।
5 जनवरी: 2018 को सेंसेक्स 34175 और निफ्टी 10566.10 प्वाइंट्स तक गया था।

यूपी के मुजफ्फरनगर में सिनेमा हॉल पर बम से हमला

लखनऊ /जयपुर। फिल्म पद्मावत पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूपी के मुजफ्फरनगर में फिल्म ‘पद्मावत‘ के विरोध में बाइक सवार दो युवकों ने एक सिनेमा हॉल पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया। जिस वक्त घटना हुई, उस वक्त हॉल में 6 से 9 बजे का शो चल रहा था।

बाइक और मोबाइल के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी अभिषेक स्नातक का छात्र है। वहीं, दूसरा करनैल चौहान निवासी कछौली उसका साथी है।

शोभा डे का सरकारों पर हमला
फिल्म ‘पद्मावत’ का विवाद जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भी छाया हुआ है। फेस्टिवल के चौथे दिन रविवार को मुगल टेंट में पहले सत्र ‘दोज वर डेज’ में लेखिका शोभा डे ने कहा, जो मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था नहीं संभाल सकते, उन्हें पद पर बने रहने का हक नहीं। शोभा डे ने कहा, मैंने फिल्म देखी है। इसके बाद कह सकती हंू कि राजपूतों को इस पर गर्व होना चाहिए। भारत एक खोज में श्याम बेनेगल इसे दिखा चुके हैं, तब विरोध नहीं हुआ लेकिन आज राजनीतिकरण हो गया।
 
यह कैसा विरोध…
शोभा डे ने कहा, यह कैसा विरोध है जिसमें बच्चों की स्कूल बस को निशाना बनाया गया। क्या बच्चे ‘पद्मावत’ देखने जा रहे थे? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता किसी करणी सेना से। कानून-व्यवस्था बनाना सरकार का काम है। जो सीएम ऐसा नहीं कर पा रहे, उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इसके लिए राजस्थान और हरियाणा का उल्लेख किया।

कोटा में जेईई-एडवांस्ड का सेंटर नहीं खोलना परीक्षार्थियों के साथ भेदभाव

आईआईटी के परीक्षा केंद्रों की सूची में कोटा का नाम शामिल नहीं होने पर 10 हजार परीक्षार्थियों ने जताया आक्रोश

कोटा। एजुकेशन हब में दस हजार से अधिक परीक्षार्थी होने के बावजूद आईआईटी बोर्ड ने लगातार छठे वर्ष ऑनलाइन जेईई-एडवांस्ड,2018 का परीक्षा केंद्र बहाल नहीं किया। कोटा के साथ हो रहे शैक्षणिक भेदभाव पर विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षाविदों एवं राजनेताओं ने गहरा आक्रोश जताया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव पंकज मेहता ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मत्री प्रकाश जावेडकर को पत्र भेजकर राज्य के तीसरे बडे संभागीय मुख्यालय कोटा में जेईई-एडवांस्ड का सेंटर खोलने की मांग की थी। कोटा में आईआईटी नहीं खुलने पर सांसद ओम बिरला ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन उनके कार्यकाल में 4 वर्ष से यहां आईआईटी का परीक्षा केंद्र तक नहीं खुल पा रहा है।

सांसद ने संसद में यह आवाज क्यों नहीं उठाई। इसी तरह, राज्य में भाजपा सरकार होने के बावजूद 4 वर्ष में कोटा में ट्रिपल आईटी का कैम्पस तक नहीं बन सका। यह सरासर राजनीतिक विफलता को दर्शाता है। जिस शहर को दुनिया भर में शिक्षा नगरी के रूप में जाना जाता है, वहां परीक्षा केंद्र तक नहीं खोलना, शहर का अपमान है।

उन्होंने चेताया कि कोचिंग व स्थानीय विद्यार्थियों के साथ यह भेदभाव जारी रखा तो कांग्रेस जनआंदोलन करेगी।
उन्होंने कहा कि शांत वातावरण होने से बाहरी राज्यों के अभिभावक कोटा पर विश्वास करते हैं, इसीलिए प्रतिवर्ष 1.50 लाख से अधिक कोचिंग विद्यार्थी यहां आते हैं। गर्मी में 10 हजार विद्यार्थियों को दो दिन पूर्व बाहरी केंद्रों पर जाना पडेगा।

विशेषरूप से छात्राओं के साथ अभिभावकों को भी बाहर जाना पडेगा, जिससे मानसिक व आर्थिक भार दोगुना हो जाएगा। यह बच्चों की मेहनत के साथ खिलवाड़ है। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के लिए 155 शहरों में सेंटर बनाए गए। जहां सर्वाधिक परीक्षार्थी हैं, वहां परीक्षा केंद्र क्यों नहीं खोला जा रहा।

5 वर्षों से कोटा संवदेनशील क्यों
सीबीएसई ने 2012 में जेईई-मेन तथा जेईई-एडवांस्ड परीक्षा पैटर्न लागू किया था। जेईई-मेन के ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों सेंटर सहित नीट का सेंटर कोटा में हैं। 2011 में आईआईटी बोर्ड ने जेईई का सेंटर इस आधार पर हटाया था कि कोचिंग संस्थान होने से यहां प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता भंग होने की संभावना रहेगी। जबकि आज तक कोटा में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। अभिभावकों ने मांग की कि कोटा का नाम संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की सूची से बाहर निकाला जाए।

आरटीआई में नहीं मिली जानकारी
नेशनल काउंसलर नीलेश गुप्ता ने आईआईटी बोर्ड को आरटीआई भेजकर जानकारी मांगी थी कि जेईई-एडवांस्ड के लिए परीक्षा केंद्र घोषित करने के मापदंड सार्वजनिक किए जाएं तथा कोटा में सेंटर किस आधार पर रोका जा रहा है, इसकी जानकारी दी जाए। आईआईटी ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी। वे ई-मेल और ट्विटर से भी सेंटर की मांग उठा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि कोटा में जेईई-मेन, नीट, केट, सीपीटी, क्लेट, यूजीसी नेट, गेट, बिट्सेट, एम्स, यूपीएससी, आरपीएससी, आईबीपीएस, वीआईटी, आरआरबी सहित सभी परीक्षाओं के सेंटर हैं। फिर किस आधार पर कोटा के परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के समान अवसर से वचित किया जा रहा है।

जेसीआई चंबल क्लब ने 3 छात्राओं को दी स्कॉलरशिप

कोटा। जेसीआई चंबल क्लब द्वारा शहर के गोविंद नगर में गोद लिए आदर्श राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह मनाया। स्कूल संयोजक जेसी संजय मालपानी ने बताया कि स्कूल स्टाफ एवं क्लब अध्यक्ष डॉ.धर्मेंद्र माहेश्वरी ने ध्वजारोहरण किया।

समारोह में राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए सदा सुखी रघुनाथदास मालपानी चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा स्कूल में इस वर्ष कक्षा-10 में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाली तीन छात्राओं को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित किया गया।

कक्षा-10 की तीन छात्राओं गुन्जा कुमारी, कविता प्रजापति एवं अंकिता मेहरोत्रा प्रत्येक को 2100 रूपए की राशि तथा अन्य विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। अगले वर्ष के लिए भी स्कॉलरशिप की घोषणा की गई। समारोह में स्कूल छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतियां कार्यक्रम प्रस्तुत किए।