Wednesday, July 22, 2026
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मुक्त व्यापार समझौतों से भारत को 1 लाख करोड़ के सीमा शुल्क का नुकसान

नई दिल्ली। बजट दस्तावेजों के मुताबिक अब तक हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत तरजीही शुल्क के कारण भारत को वित्त वर्ष 2027 में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीमा शुल्क का नुकसान हो सकता है।

वित्त वर्ष 2026 में मुक्त व्यापार समझौतों के कारण मिली शुल्क छूट के कारण देश का सीमा शुल्क से राजस्व नुकसान 98,569 करोड़ रुपये था, जो उस वर्ष के लिए 94,172 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक है।

वित्त वर्ष 2027 में दक्षिण एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साथ हुए समझौते के कारण सीमा शुल्क घाटा सबसे अधिक 40,833 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। आसियान के साथ भारत से निर्यात की तुलना में आयात बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण भारत ने व्यापार समझौते की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है।

अगस्त 2023 में दोनों पक्ष 2025 तक मौजूदा समझौते की समीक्षा पूरी करने को सहमत हुए थे। बहरहाल यह तिथि बीत चुकी है और समीक्षा नहीं हो पाई। समीक्षा की सुस्त प्रक्रिया को लेकर भारत ने नाखुशी जाहिर की है।

अन्य देशों में जापान (11,365 करोड़ रुपये), दक्षिण कोरिया (10,872 करोड़ रुपये) और ऑस्ट्रेलिया (5107 करोड़ रुपये) शामिल हैं, जिनके साथ एफटीए के कारण राजस्व का बड़ा नुकसान होने वाला है।

मई 2022 में लागू हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए व्यापार समझौते के कारण वित्त वर्ष 2027 में सीमा शुल्क से राजस्व नुकसान 9,267 करोड़ रुपये होने वाला है।भारत का सबसे पसंदीदा देश (एमएफएन) शुल्क कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक बना हुआ है। खासकर कृषि, वाहन, कुछ उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में यह अधिक है।

इसकी वजह से एफटीए वार्ता में सामान्यतया भारत को शुल्क में उल्लेखनीय कटौती करनी पड़ती है, जिससे कारोबार के हिसाब से व्यावहारिक बाजार पहुंच मिल सके। समय बीतने के साथ ज्यादा वस्तुएं व सेवाएं तरजीही शुल्क के दायरे में आ रही हैं और आयात की मात्रा बढ़ रही है, ऐसे में काल्पनिक राजस्व का असर बढ़ जाता है।

इस मसले पर लंबे समय से आंतरिक बहस चल रही है। इसके पहले राजस्व विभाग के अधिकारियों ने तर्क दिया था कि शुल्क में ज्यादा कटौती करने से सीमा शुल्क संग्रह कम हो रहा है, जो हाल के वर्षों में केंद्र के सकल कर राजस्व का 6 से 7 प्रतिशत है।

वहीं व्यापार संबंधी नीति निर्माताओं का कहना है कि सीमा शुल्क को प्राथमिक रूप से व्यापार नीति के साधन के रूप में डिजाइन किया गया है, न कि राजस्व बढ़ाने वाले साधन के रूप में तैयार किया गया है।

उनका तर्क है कि कम इनपुट शुल्क से प्रतिस्पर्धा सुधर सकती है, इससे भारत का वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ तालमेल होगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के कारण कर के आधार का विस्तार होगा। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में सीमा शुल्क संग्रह 5 प्रतिशत बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2026 में 10 प्रतिशत बढ़ा था।

बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में वित्त वर्ष 2027 के लिए सीमा शुल्क राजस्व में 2.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान कम आकलन हो सकता है, क्योंकि भारत ने पिछले 5 साल में 9 व्यापार समझौते किए हैं, जिसमें 38 देश शामिल हैं। इनमें से कई समझौते चालू वित्त के दौरान लागू होंगे।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत को अब एफटीए के माध्यम से वैश्विक व्यापार के लगभग 70 प्रतिशत तक तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है।

हाल में संपन्न व्यापार समझौतों में यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा), ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता शामिल है। एफ्टा के साथ व्यापार समझौता अक्टूबर 2025 में लागू हुआ, वहीं सीमा शुल्क में हुई महत्त्वपूर्ण कटौती से जुड़े अन्य समझौते वित्त वर्ष 2027 में लागू होने की उम्मीद है।

चंद्रेश्वर महादेव मंदिर के संरक्षण से पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: स्पीकर बिरला

चंद्रेसल में 7 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया शिलान्यास

कोटा। महाशिवरात्रि के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने चंद्रेसल स्थित प्राचीन चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित मेले एवं विकास कार्यों के शिलान्यास कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान महादेव की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

बिरला ने कहा कि चंबल तट के निकट स्थित यह दसवीं शताब्दी का ऐतिहासिक शिवालय सदियों से आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र रहा है। यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कोटा की प्राचीन विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि मंदिर की पुरातात्विक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए इसे आवश्यक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सके। मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रथम चरण में 10 करोड़ रुपए के कार्य भी शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा। क्षेत्र में मगरमच्छ संरक्षण को लेकर प्रयास किए जाएंगे।

विधायक कल्पना देवी ने कहा कि चंद्रेसल क्षेत्र में लगभग 1.63 करोड़ रुपए के कार्य पूरे हो चुके हैं। 49.59 लाख रुपए के कार्य प्रगति पर हैं और 6.81 करोड़ रुपए के कार्य प्रक्रिया में हैं। महाशिवरात्रि पर चार प्रमुख कार्यों का शिलान्यास किया गया। वार्ड 20 में 715 मीटर सड़क 42.23 लाख रुपए की लागत से बनेगी।

शिव मठ के लिए 80 मीटर एप्रोच सड़क 53.43 लाख रुपए में तैयार होगी। श्मशान के पास नाले पर पुलिया व एप्रोच मार्ग 48.67 लाख रुपए से बनेगा। रोटेदा श्मशान से चंद्रेसल तक 3.40 किलोमीटर सीसी सड़क 5.37 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाएगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बिरला ने विभिन्न कार्यक्रमों में लिया भाग
महाशिवरात्रि के अवसर पर बिरला ने कोटा के मंगलेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन कर हाड़ौती केसरी दंगल के शुभारंभ समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि मंगलेश्वर व्यायामशाला के संरक्षक नाथुलाल सुमन की मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि यहाँ की मिट्टी से निकले युवा आज इस खेल के माध्यम से हाड़ौती का गौरव बढ़ा रहे हैं।

इसके बाद उन्होंने भीतरिया कुण्ड में श्री पंचमुखी सोमेश्वर सेवा समिति द्वारा आयोजित निशुल्क विवाह सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सहयोग और सादगी की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने नवदंपतियों के सुखद दांपत्य जीवन की कामना करते हुए सभी को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ दीं।

तलवंडी के नागरिक अवांछनीय गतिविधियों से परेशान, एसपी को ज्ञापन सौंपा

कोटा। शहर के तलवंडी क्षेत्र में बढ़ती अवांछनीय गतिविधियों एवं असामाजिक तत्वों की मौजूदगी से त्रस्त स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। इस संबंध में क्षेत्रवासियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर सेक्टर–ए, इन्द्र विहार विकास समिति क्षेत्र (मकान संख्या 472 से 572) में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सुंदर विहार विकास समिति के सरंक्षक अशोक माहेश्वरी, अध्यक्ष मुरली मनोहर जैन, सचिव मनीष बंसल, अमिताभ गोस्वामी सहित समिति के कई लोग उपस्थित रहे। समिति के संरक्षक अशोक माहेश्वरी ने बताया कि ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र में 100 से अधिक परिवार पिछले कई वर्षों से निवास कर रहे हैं, किंतु हाल के दिनों में असामाजिक गतिविधियों में वृद्धि से माहौल असुरक्षित हो गया है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रतिदिन शाम होते ही कुछ युवक तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ज्ञापन के अनुसार 4 फरवरी की शाम लगभग 7 बजे एक वाहन चालक ने लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाते हुए सड़क पर चल रही महिलाओं को टक्कर मार दी।

घटना में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वाहन (नंबर RJ20-CC-2619) की टक्कर इतनी तेज थी कि महिला लगभग 30 फीट दूर जा गिरीं और गंभीर चोटें आईं।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित वाहन चालक के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण आवासीय क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।

रामनगर स्टोन मंडी की डीएलसी दरें कम की जाए, स्टोन मर्चेंट्स की बिरला से अपील

कोटा। स्टोन मर्चेंट विकास समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी के नेतृत्व में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट कर रामनगर स्टोन मंडी की डीएलसी दरें कम करने और क्षेत्र का विकास करने की मांग की।

स्टोन मर्चेंट विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर स्टोन मंडी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किये जाने एवं 6 करोड़ की सीसी रोड के निर्माण को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार व्यक्त किया है।

स्टोन मर्चेंट विकास समिति के अध्यक्ष राकेश पाटौदी ने बताया कि पिछले 24 वर्षों से वे मंडी के क्षेत्र में रोड के विकास और 32 प्लाटों पर हो रहे अतिक्रमण को मुक्त करने की मांग निरंतर करते आ रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पहल करते हुए उन समस्याओं से निजात दिलवाई।

इस अवसर पर कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी एवं स्टोन मर्चेंट विकास समिति की अध्यक्ष राकेश पाटौदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एवं अतिक्रमण के चलते इस क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाया।

डीएलसी दरों में भी भारी बढ़ोतरी की गई है, जो मार्केट की रेट से 4 गुना अधिक है। उन्होंने बिरला से डीएलसी दरो में भी कटौती करने और क्षेत्र का समुचित विकास करने की अपील की है।

India UK FTA: भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता अप्रैल से हो सकता है लागू

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले वर्ष जुलाई में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष इस समझौते को इसी वर्ष अप्रैल से प्रभावी करने की उम्मीद कर रहे हैं।

24 जुलाई 2025 को हुए इस समझौते के तहत भारत के 99 प्रतिशत निर्यात उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश कर सकेंगे। वहीं भारत में कार और व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा।

अधिकारी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन ने डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे अस्थायी कर्मचारियों को किसी भी देश में सामाजिक अंशदान दोबारा नहीं देना पड़ेगा। संभावना है कि दोनों समझौते एक साथ लागू किए जाएं। समझौते के अमल में आने से पहले ब्रिटेन की संसद की मंजूरी जरूरी है। भारत में ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलती है। ब्रिटिश संसद की मंजूरी के बाद आपसी सहमति से लागू होने की तारीख तय की जाएगी।

ब्रिटेन की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में इस सप्ताह की शुरुआत में भारत-ब्रिटेन सीईटीए पर चर्चा हुई। व्यापार एवं उद्योग विभाग में राज्य मंत्री क्रिस ब्रायंट ने लेबर सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि यह समझौता बड़ी उपलब्धि है और इससे ब्रिटेन के कारोबार के लिए भारत के बाजार के दरवाजे पहले से कहीं अधिक खुलेंगे।

संसदीय प्रक्रिया के तहत समझौते पर दोनों सदनों- हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बहस होगी तथा संबंधित समितियां इसके सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगी। इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक दुनिया की पाँचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं भारत और ब्रिटेन के बीच 56 अरब डॉलर के व्यापार को दोगुना करना है।

भारत में आएंगे ये ब्रिटिश उत्पाद
समझौते के तहत भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और प्रसाधन सामग्री जैसे उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार खोला है, जबकि भारत को वस्त्र, जूते, रत्न-आभूषण, खेल सामग्री और खिलौनों जैसे निर्यात उत्पादों के लिए ब्रिटेन में अधिक पहुँच मिलेगी।

स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क तुरंत 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा और 2035 तक इसे घटाकर 40 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत पाँच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक लाएगा। इसके बदले भारतीय वाहन निर्माताओं को निर्धारित कोटा व्यवस्था के तहत विद्युत और हाइब्रिड वाहनों के लिए ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश मिलेगा।

हमारी श्रद्धा का अटूट स्तंभ है चौमेश्वर महादेव मंदिर: ऊर्जा मंत्री नागर

चार चोमा में 11 दिवसीय सोरती मेले का विधिवत शुभारंभ, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

कोटा/ सीमलिया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने रविवार को चार चोमा में हाड़ौती अंचल के प्राचीन एवं आस्था के केंद्र श्री चौमेश्वर महादेव मंदिर पर प्रतिवर्ष लगने वाले प्रसिद्ध सोरती मेले का विधिवत शुभारम्भ किया।

उन्होंने प्राचीन मंदिर में पूजन कर आशीर्वाद लिया। मेला समिति अध्यक्ष उछमा मीणा ने बताया कि मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के साथ भाजपा कोटा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर एवं प्रधान कृष्णा शर्मा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर मेले के शुभारंभ की घोषणा की। इस दौरान चौमेश्वर महादेव के जयकारे गूंज उठे।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि चौमेश्वर महादेव का यह मंदिर हमारी श्रद्धा का अटूट स्तंभ है। चौमा मालियान की इस पावन धरा पर ‘सोरती मेला’ हमारी उस समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जहाँ भक्ति और शक्ति का अद्भुत मेल होता है।

यह मेला दुकानदारी और मनोरंजन का केंद्र होने के साथ ही हमारे आस-पास के दर्जनों गांवों के आपसी मेल-मिलाप और भाईचारे का महोत्सव है। महादेव के आशीर्वाद से ही आज हमारे क्षेत्र में खुशहाली और संपन्नता है।

उन्होंने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में अनेक विकास कार्य करवाए जाएंगे। जिससे चार चोमा और अधिक समृद्ध एवं विकसित बनेगा।

जिला अध्यक्ष प्रेम गोचर ने कहा कि वर्तमान सरकार धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है। मंदिर परिसर में लाखों रुपए के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल रही हैं।

उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि कृष्णा शर्मा, भाजपा मंडल प्रतिनिधि हंसराज नागर, मनोज तिवारी, आनंदीलाल मालव, पन्नालाल मालव, हीरालाल सुमन, मनोज मीणा, दिनेश सुमन, जितेन्द्र मीणा, कुंजबिहारी मीणा, गोविंद प्रजापत, कालूलाल मीणा एवं मोहनलाल मालव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

11 दिन चलेगा सोरती मेला
मेला संयोजक भीमराज मीणा ने बताया कि प्राचीन चौमेश्वर मंदिर दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। 11 दिवसीय मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। परंपरागत मेले में दूर दराज से दुकानदार व्यापारी पहुंचे हैं। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा चौमेश्वर महादेव के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण होने की प्रार्थना की। मुख्य अतिथि का दुपट्टा ओढ़ाकर व माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया गया।

कराड़िया में राधे रानी गौशाला का शुभारम्भ किया
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने रविवार को कराड़िया में राधे रानी गौशाला का शुभारम्भ किया। इस दौरान प्रधान कृष्णा शर्मा भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर मंत्री नागर ने कहा कि जिस घर या गांव में गौमाता की सेवा होती है, वहाँ साक्षात देवताओं का वास होता है। गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की रीढ़ है। ‘राधे रानी’ के नाम से शुरू हुई यह गौशाला न केवल बेसहारा गौवंश को आश्रय देगी, बल्कि यह हमारे गांव की सुख-समृद्धि का द्वार भी खोलेगी।

Stock Market: शेयर बाजार की इस सप्ताह कैसी रहेगी चाल, जानिए एक्सपर्ट से

नई दिल्ली। Stock Market this Week: आईटी कंपनियों पर दबाव से घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह गिरावट देखी गई और अब आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर ग्लोबल सेंटीमेंट पर ज्यादा रहेगी।

घरेलू स्तर पर अगले सप्ताह आयात-निर्यात के आंकड़े जारी होने हैं। इससे भी बाजार में निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है। निवेशक ग्लोबल फैक्टर्स से संकेत लेकर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।

बीते सप्ताह आईटी कंपनियों में बड़ी गिरावट देखी गई। इसका प्रमुख कारण एक अमेरिकी कंपनी द्वारा एआई समर्थित एक ऐसे टूल के विकास की खबर है जिससे भारतीय आईटी कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर के प्रभावित होने की आशंका है।

बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 953.64 अंक (1.14 प्रतिशत) की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 82,626.76 अंक पर बंद हुआ। इसमें पहले दो दिन तेजी और बाद के तीन दिन गिरावट रही।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की निफ्टी-50 सूचकांक भी 222.60 अंक यानी 0.87 फीसदी उतरकर सप्ताहांत पर 25,471.10 अंक पर रहा। निफ्टी मिडकैप-50 इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि छोटी कंपनियों का निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 0.56 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा साप्ताहिक नुकसान उठाने वाली चारों कंपनियां आईटी सेक्टर की रहीं। इंफोसिस का शेयर 9.12 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज का 8.70 प्रतिशत, टीसीएस का 8.48 प्रतिशत और टेक महिंद्रा का 5.18 प्रतिशत गिर गया।

एफएमसीजी कंपनियों में हिंदुस्तान यूनीलिवर का शेयर 4.89 फीसदी और आईटीसी का 3.82 फीसदी गिर गया जबकि ट्रेंट में 3.22 प्रतिशत की तेजी रही।

बैंकिंग एवं वित्तीय कंपनियों में भारतीय स्टेट बैंक का शेयर सेंसक्स में सबसे ज्यादा 12.42 प्रतिशत उछला। बजाज फाइनेंस में 4.32 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक में 0.55 प्रतिशत और बजाज फिनसर्व में 0.01 प्रतिशत की तेजी रही।

एचडीएफसी बैंक ने सबसे ज्यादा 3.77 प्रतिशत का नुकसान उठाया। एक्सिस बैंक का शेयर 0.58 फीसदी और कोटक महिंद्रा बैंक का 0.34 फीसदी टूट गया। बता दें, बिजली कंपनियों में पावरग्रिड का शेयर 1.88 प्रतिशत और एनटीपीसी का 0.59 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.13 प्रतिशत लुढ़क गया। अडानी पोर्ट्स में 1.97 प्रतिशत, दूरसंचार कंपनी भारती एय़रटेल में 1.66 प्रतिशत और एशियन पेंट्स में 1.60 प्रतिशत की गिरावट रही। बिक्री के अच्छे आंकड़े आने से मारुति सुजुकी का शेयर 1.51 प्रतिशत चढ़ गया जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.2 फीसदी की गिरावट रही।

स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी टाटा स्टील का शेयर 3.12 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन कंपनी एलएंडटी का 2.59 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.88 फीसदी और बीईएल में 1.36 प्रतिशत की तेजी रही।

टाइटन का शेयर 0.95 फीसदी और इटरनल का 0.62 प्रतिशत की बढ़त में रहा। इंडिगो के शेयर में 0.37 प्रतिशत और दवा कंपनी सनफार्मा में 0.20 प्रतिशत की तेजी रही।

बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान के शपथग्रहण में लोकसभा स्पीकर होंगे शामिल

नई दिल्ली। बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी नहीं जाएंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भारत बांग्लादेश भेज रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी होंगे। यह समारोह 17 फरवरी को ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित होगा।

यह प्रतिनिधिमंडल भारत-बांग्लादेश के गहरे और स्थायी दोस्ती को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण मिला था, लेकिन वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट की तैयारी के कारण नहीं जा पा रहे।

हाल ही में बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत दर्ज की। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से वापस लौटे थे, अब प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बीएनपी के संस्थापक थे और मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं।

2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में देश छोड़ने वाले रहमान ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला था। रहमान ने जीत के बाद राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि वे लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी और उन्हें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी बलिदानों को याद किया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया, जिसमें चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं।

भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है। बीएनपी ने हमेशा भारत के साथ संतुलित संबंधों पर जोर दिया है और रहमान ने कहा है कि वे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखेंगे, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाएंगे।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी से पूछे किसानों के हित में 5 आसान सवाल, जानिए क्या

नई दिल्ली। India-Us trade deal:भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जहां एक ओर संसद में इस मुद्दे को जोरशोर से रखा तो वहीं अब उन्होंने इस डील को लेकर सरकार से 5 सवाल पूछे हैं। राहुल ने कहा, यूएस ट्रेड डील के नाम पर हम भारत के किसानों के साथ विश्वासघात होते हुए देख रहे हैं।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने पोस्ट कर पीएम मोदी से 5 सवाल पूछे और सरकार पर हमला भी बोला। राहुल गांधी ने कहा, कि इन मुद्दों पर किसानों को सफाई तो मिलनी ही चाहिए। उन्होंने कहा, यह सिर्फ आज की बात नहीं है। ये भविष्य की भी बात है – क्या हम किसी दूसरे देश को भारत की कृषि उद्योग पर लंबे समय की पकड़ बनाने दे रहे हैं।

  1. राहुल ने सवाल किया कि, DDG आयात करने का वास्तव में क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) अमेरिकी मक्का से बना चारा खिलाया जाएगा? क्या इससे हमारे दूध उत्पाद प्रभावी रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?
  2. अगर हम जेनेटिकली मोडिफाइड सोया तेल के आयात की अनुमति देते हैं, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देशभर के हमारे सोया किसानों का क्या होगा? वे एक और कीमतों का झटका कैसे झेल पाएंगे?
  3. उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब आप अतिरिक्त उत्पाद और कहते हैं, तो उसमें क्या-क्या शामिल है? क्या यह समय के साथ दाल और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने के दबाव का संकेत है?
  4. राहुल गांधी ने पीएम मोदी से सवाल किया कि गैर-व्यापार बाधाएं हटाने का क्या मतलब है? क्या भविष्य में भारत पर GM फसलों पर अपने रुख को ढीला करने, खरीद को कमजोर करने या MSP और बोनस को कम करने का दबाव डाला जाएगा?
  5. लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि एक बार यह दरवाजा खुल गया, तो हर साल इसे और ज्यादा खुलने से हम कैसे रोकेंगे? क्या इसकी रोकथाम होगी, या हर बार सौदे में धीरे-धीरे और भी फसलों को मेज पर रख दिया जाएगा?

संसद में भी राहुल ने उठाए थे सवाल
राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील को लेकर संसद में भी सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रेड डील में सरकार ने किसानों की मेहनत और खून पसीने को बेच दिया है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे दबाव में हैं। उन्होंने सरकार पर संसद में बोलने से रोकने का भी आरोप लगाया।

विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में फरवरी में अब तक 19675 करोड़ का निवेश किया

नई दिल्ली। लगातार तीन महीनों की भारी बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है। फरवरी के पहले पंद्रह दिनों में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड समझौते, वैश्विक आर्थिक संकेतकों में सुधार और घरेलू स्तर पर स्थिर माहौल ने इस निवेश को गति दी है।

इससे पहले विदेशी निवेशकों ने नवंबर, दिसंबर और जनवरी में लगातार शेयर बाजार से धन निकाला था। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई थी।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक एफपीआई कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 18.9 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं। यह हाल के वर्षों में विदेशी निवेश के लिहाज से कमजोर दौर माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे रुपये में उतार चढ़ाव, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिका की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर चिंता और भारतीय शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन प्रमुख कारण रहे।

हालांकि फरवरी में माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। 13 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 19,675 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़ों में नरमी आने से ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में स्थिरता आई है, जिससे उभरते बाजारों में निवेश की धारणा मजबूत हुई है। भारत भी इसका लाभार्थी बना है।

उन्होंने कहा कि देश के भीतर स्थिर महंगाई दर, मजबूत आर्थिक संकेतक और कंपनियों के अनुमान के अनुरूप नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान का मानना है कि भारत अमेरिका ट्रेड डील, वित्तीय प्रोत्साहन वाले केंद्रीय बजट 2026 और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं में कमी ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। घरेलू ब्याज दरों में स्थिरता भी बाजार के पक्ष में रही है।

फरवरी में अब तक 11 ट्रेडिंग सत्रों में से 7 दिनों में एफपीआई शुद्ध खरीदार रहे, जबकि 4 दिनों में उन्होंने बिकवाली की। इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि इस महीने अब तक कुल मिलाकर 1,374 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज हुई है।

इस असंतुलन की बड़ी वजह 13 फरवरी को हुई भारी बिकवाली रही, जब विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। उसी दिन निफ्टी में 336 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, उस सप्ताह आईटी शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। तथाकथित एंथ्रोपिक शॉक के कारण आईटी इंडेक्स में 8.2 प्रतिशत की गिरावट आई। माना जा रहा है कि विदेशी निवेशकों ने कैश मार्केट में आईटी शेयरों की आक्रामक बिक्री की।