Thursday, July 16, 2026
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सैमसंग का यह 5G फोन लॉन्च प्राइस से 5 हजार रुपये सस्ता हुआ, जानिए ऑफर्स

नई दिल्ली। सैमसंग गैलेक्सी M सीरीज का धांसू फोन- Galaxy M56 5G अपनी लॉन्च प्राइस से सस्ता हो गया है। लॉन्च के वक्त फोन के 8जीबी रैम और 256जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 30999 रुपये थी। अब यह फोन अमेजन इंडिया पर 5 हजार रुपये सस्ते में मिल रहा है।

यानी आप इसे 25999 रुपये में खरीद सकते हैं। यह फोन 1299 रुपये तक के कैशबैक के साथ भी आपका हो सकता है। एक्सचेंज ऑफर में यह फोन और सस्ता हो सकता है।

ध्यान रहे कि एक्सचेंज ऑफर में मिलने वाला अडिशनल डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा।

आप इस फोन को आसान नो-कॉस्ट ईएमआई पर भी खरीद सकते हैं। सैमसंग के इस फोन में आपको 50 मेगापिक्सल का मेन कैमरा और 5000mAh की बैटरी मिलेगी। आइए डीटेल में जानते हैं सैमसंग के इस फोन के फीचर्स के बारे में।

फीचर और स्पेसिफिकेशन
कंपनी इस फोन में 6.7 इंच का फुल एचडी+ Super AMOLED Infinity-O HDR डिस्प्ले ऑफर कर रही है। फोन में ऑफर किया जा रहा यह डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका पीक ब्राइटनेस लेवल 1200 निट्स तक का है। डिस्प्ले प्रोटेक्शन के लिए आपको फोन में गोरिल्ला ग्लास विक्टस+ भी मिलेगा। फोन 8जीबी LPDDR5x रैम और 256जीबी के UFS 3.1 स्टोरेज के साथ आता है। प्रोसेसर के तौर पर फोन में कंपनी Exynos 1480 चिपसेट दे रही है।

फोटोग्राफी के लिए आपको इस डिवाइस में एलईडी फ्लैश के साथ तीन कैमरे मिलेंगे। इनमें 50 मेगापिक्सल के मेन लेंस के साथ एक 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइ़ड ऐंगल लेंस और एक 2 मेगापिक्सल का मैक्रो सेंसर शामिल है। वहीं, सेल्फी के लिए आपको इस डिवाइस में 12 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा देखने को मिलेगा। फोन में दी गई बैटरी 5000mAh की है, जो 45 वॉट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

यह फोन ऐंड्रॉयड 15 पर बेस्ड OneUI 7 पर काम करता है। कंपनी इस फोन को 6 ओएस अपग्रेड और सिक्योरिटी अपडेट्स भी देगी। बायोमेट्रिक सिक्योरिटी के लिए फोन में आपको इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर देखने को मिलेगा।

कनेक्टिविटी के लिए कंपनी इस फोन में 5G SA / NSA, 4G VoLTE, Wi-Fi 802.11 ac (2.4GHz + 5GHz), ब्लूटूथ 5.3, GPS + GLONASS, USB Type-C और NFC जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। फोन के डाइमेंशन 162.0 x 77.3 x 7.2mm हैं। वहीं, इसका वजन 180 ग्राम है। फोन दो कलर ऑप्शन- लाइट ग्रीन और ब्लैक में आता है।

हाई कोर्ट ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की केजरीवाल की मांग ठुकराई

नई दिल्ली। liquor scam case: दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में जज बदलने वाली अरविंद केजरीवाल की मांग ठुकरा दी। केजरीवाल ने मामले में सुनवाई कर रहीं जज स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाकर मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस ने मामले में टिप्पणी भी की।

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि याचिका वर्तमान रोस्टर के अनुसार न्यायमूर्ति शर्मा को सौंपी गई है और प्रशासनिक पक्ष पर आदेश पारित करके इसे स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं पाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करना चाहें तो यह निर्णय उन्हें लेना है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 13 मार्च को एक पत्र की जानकारी दी गई थी। यह पत्र उन आठ लोगों को भेजा गया था, जिन्होंने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिनमें केजरीवाल भी शामिल थे। चीफ जस्टिस ने मामले में कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इस याचिका को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने का कोई कारण नहीं दिखता।

केजरीवाल के आरोप
दरअसल, 11 मार्च को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि यदि मामला जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा के पास ही रहा तो सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से नहीं हो पाएगी। इससे पहले 27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच में चल रही है।

ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक
9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने मामले में नोटिस जारी किया था और ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश भी दिया।

केजरीवाल ने पत्र में क्या मांग की थी
केजरीवाल ने अपने पत्र में कहा था कि 9 मार्च के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस गंभीर त्रुटि के आधार पर बिना दूसरी पक्ष की सुनवाई के ऐसा अंतरिम आदेश दिया गया। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही टालने का निर्देश दिया, जबकि उस समय अदालत में ईडी पक्षकार भी नहीं थी। आप नेता ने यह भी कहा कि आमतौर पर इस तरह की रिविजन याचिकाओं में पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार से पांच सप्ताह का समय दिया जाता है, लेकिन इस मामले में अदालत का रुख जल्दबाजी वाला प्रतीत हुआ, जिससे उन्हें पूर्वाग्रह की आशंका हुई।

सोना ₹1.60 लाख से नीचे आया, क्या अभी और गिरेगा भाव, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

नई दिल्ली। Gold Price: देश में सोने की कीमतों में इन दिनों हल्की नरमी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव और मजबूत डॉलर के बीच भारत में सोना एक बार फिर ₹1.60 लाख से नीचे आ गया है।

शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना मामूली गिरावट के साथ ₹1,58,400 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

वैश्विक बाजार में भी सोने की चाल सुस्त दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर COMEX पर गोल्ड की कीमत लगभग 5,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है।

विश्लेषकों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि आम तौर पर ऐसे हालात में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार मजबूत डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने गोल्ड की रैली को थाम दिया है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमले पहले से ज्यादा तेज कर दिए हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। इस टकराव का असर ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
ब्रोकरेज फर्म चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा के मुताबिक सोने की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड करीब 4.27% तक पहुंच गई है, जिससे निवेशकों का झुकाव सुरक्षित ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और सोने पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ सत्रों में सोने में हल्का कमजोर रुख बना रह सकता है।

तकनीकी नजरिए से भी फिलहाल सोने में ज्यादा तेजी के संकेत नहीं मिल रहे हैं। हालांकि कीमत अभी भी अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बनी हुई है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रेडर्स फिलहाल ‘सेल ऑन राइज’ यानी कीमत बढ़ने पर बिकवाली की रणनीति अपना सकते हैं।

वहीं Enrich Money के सीईओ पोनमुडी आर का मानना है कि अगर सोना ₹1,58,000 के ऊपर टिकता है तो इसमें फिर से तेजी देखने को मिल सकती है और कीमत ₹1,62,000 से ₹1,65,000 तक जा सकती है।

मजबूत माहौल बनने पर यह ₹1,68,000 से ₹1,70,000 तक भी पहुंच सकता है। लेकिन अगर कीमत ₹1,57,000 के नीचे फिसलती है तो गिरावट तेज हो सकती है और भाव ₹1,55,000 से ₹1,50,000 के सपोर्ट जोन तक जा सकते हैं। इसलिए फिलहाल निवेशकों को बाजार की दिशा पर नजर रखते हुए सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

Jeera Price: एक्सपोर्ट रुकने और आवक बढ़ने से जीरे की कीमतों में गिरावट

नई दिल्ली। Jeera Price: इस हफ़्ते जीरे की कीमतों में नरमी रही। गुजरात की मंडियों में जीरे की आवक ज़ोरों पर है, वहीं राजस्थान की मंडियों में भी नए जीरे की आवक बढ़ने लगी है। अभी एक्सपोर्ट ट्रेड एक्टिविटी भी कम बनी हुई है।

FISSA के हाल ही में जारी डेटा के मुताबिक, इस सीज़न में देश में जीरे का प्रोडक्शन 9.329 मिलियन बैग होने का अनुमान है, जबकि साल 2025 के लिए प्रोडक्शन का अनुमान 9.793 मिलियन बैग था। हालांकि इस सीज़न में प्रोडक्शन में कमी आई है, लेकिन पिछले साल के काफ़ी कैरीओवर स्टॉक की वजह से कुल उपलब्धता मज़बूत बनी हुई है। इसलिए, कीमतों में कोई तेज़ी नहीं दिख रही है।

FISSA के जारी डेटा के मुताबिक, गुजरात में जीरे का प्रोडक्शन 3.342 मिलियन बैग होने का अनुमान है, जबकि ट्रेडर्स 2.6 से 2.8 मिलियन बैग के बीच प्रोडक्शन का अनुमान लगा रहे हैं। इसी तरह, राजस्थान में, FISSA ने 5.987 मिलियन बैग जीरा प्रोडक्शन का अनुमान जारी किया है, जबकि ट्रेडर्स 4.8 से 5.0 मिलियन बैग के बीच प्रोडक्शन का अनुमान लगा रहे हैं।

जीरे की रोज़ाना आवक
अभी गुजरात के बाजारों में जीरे की रोज़ाना आवक 60,000 से 65,000 बोरी है। ऊंझा मार्केट में आवक 34,000 से 35,000 बैग के आसपास है। इसके मुख्य कारण ये हैं। कम आवक का स्तर उत्पादन में गिरावट और किसानों को कम कीमत मिलने का कारण है। राजस्थान के बाजारों में भी नए जीरे की दैनिक आवक 11,000 से 15,000 के स्तर तक पहुंचने लगी है। मेरटा मार्केट में अभी आवक 3,500 से 4,000 बैग के बीच है।

मंडियों में बढ़ती आवक और स्पॉट मार्केट में कम उठाव के कारण, जीरे की कीमतों में अभी मंदी का दौर चल रहा है। अभी, गुजरात के बाजारों (मंडियों) में, क्वालिटी के आधार पर जीरे की कीमतें 180 से 210 प्रति किलोग्राम के बीच बताई जा रही हैं, जबकि एक्सपोर्ट कीमत 4,280 प्रति 20 किलोग्राम बताई जा रही है।

राजस्थान के बाजारों में भी, नए सीजन के जीरे की कीमतें 180 से 215 प्रति किलोग्राम के बीच बताई जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जीरे की कीमतों में अभी कोई तेज़ी आने की संभावना नहीं है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण एक्सपोर्ट रुका हुआ है। हालांकि, सूत्रों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में एक्सपोर्ट डिमांड बढ़ने पर कीमतें ज़रूर बढ़ेंगी, खासकर इसलिए क्योंकि कीमतें पहले ही काफी गिर चुकी हैं। इसके अलावा, किसानों से इन कम कीमतों पर अपनी बिक्री कम करने की उम्मीद है।

निर्यात में कमी
स्पाइसेस बोर्ड के जारी डेटा के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (2025-26) के पहले नौ महीनों में जीरे के एक्सपोर्ट की मात्रा में 12 परसेंट की गिरावट आई; वहीं, कम रियलाइजेशन कीमतों की वजह से एक्सपोर्ट से होने वाला रेवेन्यू 26 परसेंट कम हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान कुल 156,671 टन जीरे का एक्सपोर्ट हुआ, जिससे *3,639.51 करोड़ का एक्सपोर्ट रेवेन्यू मिला। इसके उलट, अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान, जीरे का एक्सपोर्ट 178,847 टन रहा, जिससे ₹4,909.77 करोड़ का एक्सपोर्ट रेवेन्यू मिला। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए, कुल 229,881.67 टन जीरे का एक्सपोर्ट हुआ, जिससे ₹6,178.86 करोड़ का एक्सपोर्ट रेवेन्यू मिला।

किआ और हुंडई की चार अफोर्डेबल हाइब्रिड एसयूवी जल्द ही मार्केट में

नई दिल्ली। Kia या हुंडई की हाइब्रिड गाड़ी लेने का मन बना रहे हैं, तो कुछ दिन और इंतजार कर लीजिए। इन कंपनियों की कई हाइब्रिड गाड़ियों की मार्केट में एंट्री होने वाली है। इस लिस्ट में किआ सोरेन्टो से लेकर हुंडई बेयॉन पर बेस्ड एसयूवी शामिल हैं। आइए जानते हैं इन गाड़ियों के बारे में।

Kia Sorento Hybrid
सोरेन्टो भारत में किआ पहली SUV होगी, जो हाइब्रिड पेट्रोल इंजन के साथ आएगी। यह एक प्रीमियम 7-सीटर SUV है। इसे कंपनी जल्द इंडियन मार्केट में लॉन्च कर सकती है। इस 7-सीटर SUV के इस साल के अंत तक बाजार में आने की उम्मीद है। ग्लोबल मार्केट में यह एसयूवी पहले से ही बिक रही है। भारत में इसकी एंट्री कुछ बदलावों के साथ हो सकती है। इसका ग्लोबल वेरिएंट 1.6-लीटर हाइब्रिड इंजन से लैस है। इंडियन मार्केट के लिए किआ फिलहाल 1.5-लीटर हाइब्रिड पेट्रोल इंजन पर काम कर रही है, जिसे सोरेन्टो में ऑफर किया जाएगा।

Kia Seltos Hybrid
किआ ने इसी साल न्यू-जेनरेशन सेल्टॉस को लॉन्च किया है। अब कंपनी सेल्टॉस को हाइब्रिड इंजन के साथ लाने की तैयारी में जुट गई है। यह डीजल इंजन को रिप्लेस करने वाला है। ग्लोबल मार्केट में सेल्टोस पहले से ही हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वीईकल के तौर पर उपलब्ध है, लेकिन भारत में इसमें वही 1.5-लीटर पेट्रोल हाइब्रिड इंजन ऑफर किया जाएगा, जो सोरेंटो में होगा। इसमें वे सभी प्रीमियम फीचर्स होंगे जो मौजूदा सेल्टॉस में ऑफर किए जा रहे हैं। एसयूवी के एक्सटीरियर लुक में कोई बदलाव नहीं होगा। सेल्टोस हाइब्रिड अगले साल लॉन्च होने की उम्मीद है।

Hyundai Creta
हुंडई क्रेटा के नेक्स्ट जेनरेशन पर काम कर रही है। इसके टेस्ट मॉडल कई बार कोरिया में देखे जा चुके हैं। नई क्रेटा में नया एक्सटीरियर लुक, नए फीचर्स और रिफ्रेश्ड केबिन होगा। इसका सबसे बड़ा बदलाव इंजन में होगा। हुंडई क्रेटा में आपको 1.5 लीटर का हाइब्रिड पेट्रोल इंजन देखने को मिलेगा। उम्मीद है कि यह इंजन सबसे पहले क्रेटा में आएगा और बाद में इसे सेल्टोस में भी ऑफर किया जाएगा। यह वही इंजन है जो सोरेंटो में भी लगा है। नेक्स्ट जेनरेशन क्रेटा अगले लॉन्च हो सकती है।

Hyundai Bayon-based SUV
हुंडई अपनी बेयोन क्रॉसओवर पर बेस्ड एक कॉम्पैक्ट एसयूवी लाने की भी प्लानिंग कर रही है। हुंडई ने इस एसयूवी की टेस्टिंग शुरू कर दी है और फिलहाल इसे BC4i कोडनेम से जाना जाता है। इसका बाहरी डिजाइन बॉक्सी हो सकता है। यह पेट्रोल और हाइब्रिड इंजन ऑप्शन्स के साथ आएगी। इसमें भारत में डिवेलप किया गया 1.2 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन लगा होगा। यह हाइब्रिड-रेडी है और इसी एसयूवी का हाइब्रिड वर्जन भी बाजार में लॉन्च होने की उम्मीद है।

1 अप्रैल से प्राइवेट कार वालों के लिए महंगा होगा हाइवे का सफर, NHAI का फैसला

नई दिल्ली। हाइवे का सफर करने वालों की अगले महीने यानी अप्रैल 2026 से जेब ढीली होने वाली है। FASTag के ऐनुअल पास के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। NHAI यानी नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने FASTag Annual Pass की फी को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए रिवाइज कर दिया है।

यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा। अभी ऐनुअल पास के लिए ग्राहकों को 3 हजार रुपये देने पड़ते हैं। 1 अप्रैल से प्राइवेट कार, जीप और वैन चलाने वाले ग्राहकों को ऐनुअल पास के लिए 3075 रुपये खर्च करने होंगे। सब्सक्रिप्श प्राइस में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद नए फाइनेंशियल ईयर के लिए डिजिटल पास के मेन ऑपरेशनल बेनिफिट्स और वैलिडिटी पैरामीटर्स में कोई बदलाव नहीं होगा।

नैशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे पर 200 टोल क्रॉसिंग
3075 रुपये की नई कीमत के बावजूद FASTag ऐनुअल पास रेग्युलर ट्रैवेलर्स के काफी पैसे बचाता है। यह पास प्राइवेट वीईकल ओनर्स को बड़े नैशनल हाइवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर 200 टोल क्रॉसिंग पर प्रीपेड एंट्री की सुविधा देता है।

यह पास तब खत्म होता है, जब ग्राहक 200 टोल क्रॉसिंग पूरी कर लेते हैं या पास के डिजिटल ऐक्टिवेशन एक साल पूरे हो जाते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों से पता चलता है कि वाहन चालकों के बीच इस ऐनुअल पास काफी पसंद किया जा रहा है। इस वक्त देश भर में 5 लाख से अधिक ग्राहक टोल पेमेंट के लिए FASTag ऐनुअल पास का यूज कर रहे हैं।

रेग्युलेटरी प्रोटोकॉल के अनुसार बढ़ती है कीमत
ऐनुअल पास की कीमत बढ़ाने का फैसला रेग्युलेटरी प्रोटोकॉल के अनुसार है। हाइवे टोल फी हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में रिवाइज किए जाते हैं। ये सिस्टमैटिक एडजस्टमेंट नैशनल हाइवे फी ऐक्ट के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य हैं और नैशनल होलसेल प्राइस इंडेक्स से सीधे जुड़े हुए हैं। 2.5 पर्सेंट का प्राइस हाइक पिछले फाइनेंशियल ईयर में दर्ज होलसेल इंफ्लेशन रेट को दिखाता है।

लगभग 11.86 करोड़ FASTag जारी किए
रेग्युलर हाइवे ट्रैवल करने वाले ग्राहकों के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए साल 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर FASTag ऐनुअल पास की शुरुआत की गई थी। ऐनुअल पास खासतौर से नॉन-कमर्शियल यूज के लिए रजिस्टर्ड वीईकल्स के लिए बनाया गया है। वैलिड FASTag से लैस कोई भी कार, जीप या वैन इसका फायदा उठा सकती है। भारत में 2016 में शुरू होने के बाद से FASTag प्राइमरी टोल पेमेंट सिस्टम के रूप में उभरा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 11.86 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.9 करोड़ FASTag अभी भी ऐक्टिव हैं और इनका यूज देश भर में इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट के लिए किया जाता है।

M Cap: सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों का मार्केट कैप ₹4.48 लाख करोड़ गिरा

सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक को हुआ

नई दिल्ली। Market Cap : सेंसेक्स की शीर्ष 10 कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 4.48 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एचडीएफसी बैंक को हुआ।

बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत के नुकसान में रहा।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच महंगाई के दबाव और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे स्थानीय शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

समीक्षाधीन सप्ताह में एसबीआई का बाजार मूल्यांकन सबसे ज्यादा 89,306.22 करोड़ रुपये घटकर 9,66,261.05 करोड़ रुपये पर आ गया। एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 61,715.32 करोड़ रुपये घटकर 12,57,391.76 करोड़ रुपये रही।

बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 59,082.49 करोड़ के नुकसान के साथ 5,32,053.54 करोड़ रुपये और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार पूंजीकरण 53,312.52 करोड़ रुपये घटकर 8,72,067.63 करोड़ रुपये रह गया।

आईसीआईसीआई बैंक की बाजार हैसियत 42,205.04 करोड़ घटकर 8,97,844.78 करोड़ रुपये और भारती एयरटेल का मूल्यांकन 38,688.78 करोड़ के नुकसान के साथ 10,28,431.72 करोड़ रुपये रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मूल्यांकन में 33,289.88 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 18,68,293.17 करोड़ रुपये रह गया।

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन 31,245.49 करोड़ रुपये घटकर 4,88,985.57 करोड़ रुपये और इन्फोसिस का पूंजीकरण 24,230.96 करोड़ रुपये घटकर 5,06,315.58 करोड़ रुपये रह गया।

हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत 15,401.57 करोड़ रुपये घटकर 5,07,640.94 करोड़ रुपये रह गई। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम पर रही। उसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस और एलआईसी का स्थान रहा।

FPI Data: मार्च में विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से ₹52 हजार करोड़ निकाले

नई दिल्ली। FPI withdrew: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाल ली है। मार्च के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने घरेलू इक्विटी बाजार से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की निकासी की है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम हुआ है, जिसके चलते भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी बाहर जा रही है।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में जारी बिकवाली से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था।

हालांकि इससे पहले तीन महीनों तक एफपीआई लगातार बिकवाली कर रहे थे। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

मार्च में स्थिति फिर से पलट गई और 13 मार्च तक एफपीआई ने नकद बाजार में करीब 52,704 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। उल्लेखनीय है कि इस महीने अब तक हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे हैं।

पश्चिम एशिया संकट बना मुख्य कारण
एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकार जावेद खान के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लंबे समय तक संघर्ष की आशंका ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि यह तनाव महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इसी आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

वकार जावेद खान के मुताबिक रुपये की कमजोरी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है और यह डॉलर के मुकाबले करीब 92 रुपये के स्तर के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और पहले हुए निवेश के बाद मुनाफावसूली ने भी एफपीआई की बिकवाली को बढ़ावा दिया है।

Mustard: निचले स्तरों पर खरीदारी से सरसों की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। Mustard Price: सभी बड़े उत्पादक राज्यों के खास बाजारों में नई सरसों की अच्छी आवक शुरू हो गई है, और व्यापारी और तेल मिल मालिक फसल खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बाजारों में चहल-पहल बनी हुई है।

सरसों के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) को ₹5,950 से बढ़ाकर ₹ 6,200 प्रति क्विंटल कर दिया गया है; हालांकि, कुछ बाजारों में असल कीमतें इस लेवल से नीचे चली गई हैं।

42% कंडीशन सरसों
7-13 मार्च के हफ़्ते में बेहतर खरीदारी सपोर्ट से दिल्ली में 42% कंडीशन वाली सरसों की कीमत में ₹50 की रिकवरी हुई, जो ₹6,550 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। इसी तरह, जयपुर में कीमतें 100 बढ़कर ₹ 6,850 प्रति क्विंटल पर पहुंच गईं।

गुजरात में ₹350 प्रति क्विंटल; हरियाणा में ₹ 50 से 300 प्रति क्विंटल; मध्य प्रदेश में ₹50 से 200 प्रति क्विंटल; और उत्तर प्रदेश में ₹ 50 से 100 प्रति क्विंटल।

राजस्थान के बाज़ारों में सरसों की कीमतें आम तौर पर 150 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ीं; हालांकि, नेवई और टोंक में कीमतें 150 रुपये प्रति क्विंटल तक नरम हुईं। कोलकाता में 100 रुपये प्रति क्विंटल की रिकवरी दर्ज की गई।

सरसों के बीज की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, एक्सपेलर-प्रेस्ड और कच्ची घानी (कोल्ड-प्रेस्ड) सरसों के तेल के रेट भी ₹ 3 से 5 प्रति किलोग्राम बढ़ गए। दिल्ली में, एक्सपेलर-प्रेस्ड तेल की कीमत ₹40 बढ़कर 1,390 प्रति 10 किलोग्राम हो गई, जबकि लुधियाना में यह ₹50 बढ़कर 1,405 प्रति 10 किलोग्राम हो गई। हैरानी की बात है कि कोटा में, कच्ची घानी सरसों के तेल की कीमत *48 घटकर 1,382 प्रति 10 किलोग्राम हो गई। हालांकि, दूसरे सेंटर्स पर सरसों के तेल की कीमतें स्थिर रहीं।

सरसों केक (DOC)
सरसों खली और DOC के लिए खरीदारों की तरफ से ज़बरदस्त मांग देखी गई, जिससे कीमतों में काफ़ी उछाल आया।

5000mAh बैटरी एवं 8GB तक की रैम वाले यह फोन 7 हजार रुपये से कम में

नई दिल्ली। कम बजट में ज्यादा रैम वाला फोनचाहिए तो हम आपको दो जबर्दस्त ऑप्शन के बारे में बता रहे हैं। इन फोन में आपको 8जीबी तक की रैम (वर्चुअल रैम सपोर्ट के साथ) मिलेगी। ये फोन 7 हजार रुपये (ऑफर के साथ) से कम के हैं।

इनमें जो सस्ता वाला है, उसकी कीमत ऑफर के साथ मात्र 6500 रुपये से कम है। आप इन फोन को बैंक डिस्काउंट और कैशबैक के साथ भी खरीद सकते हैं। साथ ही इन फोन पर एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है।

ध्यान रहे कि एक्सचेंज बोनस में मिलने वाला अडिशनल डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा। आइए डीटेल में जानते हैं इन फोन के बारे में।

Lava Bold N2
फोन 4जीबी रियल और 4जीबी वर्चुअल यानी 8जीबी तक की रैम के साथ आता है। 64जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत 7499 रुपये है। फोन पर कंपनी तगड़ा बैंक ऑफर भी दे रही है, जिसके साथ यह फोन 7 हजार रुपये से कम में आपका हो सकता है। आप इस फोन को 374 रुपये तक के कैशबैक के साथ भी खरीद सकते हैं। एक्सचेंज ऑफर में यह फोन और सस्ता हो सकता है।

फीचर्स की बात करें, तो यह फोन में आपको 6.75 इंच का एचडी+ डिस्प्ले मिलेगा। फोन का मेन कैमरा 13 मेगापिक्सल का है। सेल्फी के लिए इसमें आपको 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलेगा।

फोन की बैटरी 5000mAh की है, जो 10 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह फोन IP64 डस्ट और वॉटर प्रोटेक्शन रेटिंग के साथ आता है। इसमें आपको प्रोसेसर के तौर पर Unisoc SC9863A चिपसेट मिलेगा।

itel ZENO 100
फोन 3जीबी रियल और 5जीबी के वर्चुअल रैम से लैस है। इससे इसकी टोटल रैम 8जीबी तक की हो जाती है। फोन में 64जीबी के इंटरनल स्टोरेज से लैस है। इसकी कीमत अमेजन इंडिया पर 6869 रुपये है। बैंक ऑफर के साथ यह फोन 6500 रुपये से कम में आपका हो सकता है। कंपनी इस डिवाइस पर 343 रुपये तक का कैशबैक भी दे रही है। आप इस फोन को एक्सचेंज ऑफर के साथ भी खरीद सकते हैं।

यह फोन 90Hz के रिफ्रेश रेट वाले 6.6 इंच के डिस्प्ले के साथ आता है। इसमें आपको डाइनैमिक बार भी देखने को मिलेगा। फोन में प्रोसेसर के तौर पर Unisoc T7100 चिपसेट दिया गया है।

कंपनी इस फोन में 8 मेगापिक्सल का मेन और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दे रही है। मिलिट्री ग्रेड ड्यूरेबिलिटी वाले इस फोन की बैटरी 5000mAh की है। यह फोन ऐंड्रॉयड 15 गो एडिशन पर काम करता है।