Saturday, July 11, 2026
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Kota Mandi: आवक बढ़ने से कोटा मंडी में लहसुन 1000 रुपये क्विंटल सस्ता बिका

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को कमजोर उठाव एवं आवक बढ़ने से लहसुन 1000 रुपये क्विंटल सस्ता बिका। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब दो लाख कट्टे और लहसुन की 12000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं नया मिल लस्टर 2300 से 2375, गेहूं एवरेज टुकड़ी 2380 से 2475, बेस्ट टुकड़ी 2450 से 2650, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1400 से 1800, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ नया 1900 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3601, धान (1509) 3400 से 4250, धान (1847) 3200 से 4151, धान (1718-1885) 4000 से 4700, धान (पूसा-1) 3000 से 4300, धान (1401-1886) 4100 से 4550, धान दागी 1500 से 3900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 5000 से 5700, सरसों 6300 से 6851, अलसी 6800 से 7600, तिल्ली 7000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 7000, उड़द 4500 से 8000, चना देशी पुराना 4700 से 5001, चना मौसमी नया 5100 से 5150, चना पेप्सी 5100 से 5401, चना डंकी पुराना 3500 से 4500, चना काबुली 5500 से 7500, नया चना देशी 5000 से 5250 रुपये प्रति क्विंटल।

लहसुन 3000 से 11500, मैथी पुरानी 5000 से 5800, मैथी नयी 5800 से 6200, धनिया बादामी 11000 से 11700, धनिया ईगल 11500 से 12300, धनिया रंगदार 13000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल।

इस्लामाबाद में 14 घंटे की वार्ता के बाद भी ईरान-अमेरिका में सुलह नहीं, जानिए क्यों

इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को रोकने और होर्मुज खोलने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता शनिवार को आधी रात के बाद भी जारी रही। 14 घंटे की बातचीत के बाद अभी कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है।

ईरान ने कहा है कि अभी कई मुद्दों पर मतभेद बना हुआ है और वार्ता अभी जारी रहेगी। ईरान ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर बताया कि दोनों देशों की टीमों ने मसौदे और दस्तावेज आपस में शेयर किए हैं।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के प्रस्ताव पर दोनों देशों ने सहमित जताई है और रविवार को वार्ता फिर से शुरू होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो चरणों की वार्ता में राजनीति, सेना, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर चर्चा हुई। बता दें कि ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ वार्ता की अगुआई कर रहे हैं।

वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुआई में बातचीत हो रही है। ईरान का कहना है कि इजरायल लेबनान पर हमले रोक दे और स्थायी सीजफायर करे। 47 साल में पहली बार है जब अमेरिका और ईरान इस तरह से आमने-सामने इतने बड़े स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

ईरान ने साफ कहा है कि अगर इस्लामाबाद में चल रही वार्ता का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलता है तो इसके दोषी अमेरिका और इजरायल दोनों होंगे। इस्लामाबाद के सेरेना होटल में त्रिपक्षीय वार्ता से पहले, वेंस के नेतृत्व वाली अमेरिकी टीम और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ द्वारा दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग बैठकें करने के बाद, ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत का औपचारिक दौर आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया।’

ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया पर कहा कि “इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विशेषज्ञ स्तर में प्रवेश कर गई है। बिना ज्यादा जानकारी दिए यह भी कहा गया कि कुछ “तकनीकी विवरणों” को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि बातचीत का माहौल “उत्साहजनक” रहा। खबरों के अनुसार, यदि आज रात कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है तो बातचीत रविवार तक जारी रह सकती है।ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बताया कि वार्ता सामान्य मुद्दों से आगे बढ़कर “कुछ विषयों” पर तकनीकी स्तर की चर्चा में पहुंच गई है।

एक ओर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर शामिल हैं, तो दूसरी ओर गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियन और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हिम्मती शामिल हैं।

दोनों प्रतिनिधिमंडल ईरान और अमेरिका द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि लेबनान पर इजराइल के बड़े हमलों ने इस युद्धविराम को कमजोर कर दिया है। तेहरान ने कहा कि यह हमले युद्धविराम का उल्लंघन हैं, जबकि अमेरिका और इजराइल का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।

शांति वार्ता के पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में उतारे मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाज

वॉशिंगटन। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर से बिछाई गई समुद्री सुरंगों को हटाने का काम शुरू किया है। यह कार्रवाई तब की जा रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है। शनिवार को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहले दौर की वार्ता हुई है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाया जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 11 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें हटाने के लिए जरूरी हालात बनाने का काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाजों ने वहां ऑपरेशन किए हैं। इस ऑपरेशन के तहत बारूदी सुरंगों का पता लगाया गया।

CENTCOM के मुताबिक, USS फ्रैंक ई. पीटरसन (DDG 121) और USS माइकल मर्फी (DDG 112) होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे और अरब खाड़ी में ऑपरेशन किए। इस अभियान का मकसद यह पक्का करना है कि जलडमरूमध्य ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों से पूरी तरह साफ हो जाए।

CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा है कि आज हमने एक नया रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। हम जल्द ही इस सुरक्षित रास्ते को समुद्री उद्योग के साथ साझा करेंगे, ताकि व्यापार का निर्बाध प्रवाह बना रहे। आने वाले दिनों में पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन सहित और भी अमेरिकी सेनाएं इस अभियान में शामिल होंगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर अपनी एक पोस्ट में एक बार फिर ईरान की मिलिट्री को खत्म कर देने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया पर एहसान करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य खोल रहा है। हम चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांसस, जर्मनी पर एहसान के तौर पर होर्मुज को खोलने जा रहे हैं।

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद से ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते (होर्मुज स्ट्रेट) की नाकेबंदी कर रखी है। होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग मार्गों में से एक है। इससे दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस गुजरता है। ऐसे में इसकी नाकेबंदी ने दुनिया में एक एनर्जी संकट पैदा किया है।

ईरान का अमेरिकी जहाज को भगाने का दावा
ईरान ने शनिवार को दावा किया है कि उसकी सेना कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका का एक विध्वंसक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से वापस लौट गया है। ईरानी मीडिया ने बताया जहाज के होर्मुज की तरफ आने पर यह संदेश दिया गया कि अगर यह जहाज आगे बढ़ता रहा तो आधे घंटे के अंदर इसे निशाना बनाया जाएगा। इसके बाद ये जहाज वापस लौट गया।

JEE Main 2026 सेशन -2 के पेपर-1 की आंसर की जारी, ऐसे करें डाउनलोड

नई दिल्ली। JEE Main 2026 Session-2 Answer Key: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने जेईई मेन सत्र 2 के पेपर-1 की उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी कर दी है। जो भी उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर उत्तर कुंजी डाउनलोड कर सकते हैं। इसकी मदद से अभ्यर्थी अपने संभावित अंकों की गणना भी कर सकते हैं।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) 2026 के सत्र 2 का आयोजन 2, 4, 5, 6, 7 और 8 अप्रैल को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में सफलतापूर्वक किया। परीक्षा भारत के 304 शहरों और विदेश के 14 शहरों में लगभग 566 केंद्रों पर आयोजित की गई।

यदि किसी अभ्यर्थी को उत्तर कुंजी पर आपत्ति है तो वह इसे 13 अप्रैल तक चुनौती दे सकता है। आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा।

11.23 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
इस सत्र में लगभग 11.23 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया। पेपर 1 (बी.ई./बी.टेक.) के लिए लगभग 11.06 लाख उम्मीदवारों ने घरेलू स्तर पर और 4,229 उम्मीदवारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण कराया। परीक्षा में लगभग 93% उम्मीदवार उपस्थित रहे और लगभग 97% उम्मीदवारों का आधार सत्यापन सफलतापूर्वक किया गया।

ऐसे डाउनलोड करें आंसर की

  1. सबसे पहले जेईई मेन की आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं।
  2. अब उत्तर कुंजी वाले विकल्प पर क्लिक करें।
  3. आवश्यकता हो तो लॉगिन करें।
  4. उत्तर कुंजी स्क्रीन पर खुलकर आ जाएगी।
  5. भविष्य के संदर्भ के लिए इसे डाउनलोड करें।

पीडब्ल्यूडी इंजीनियर एवं दलाल 33 लाख की रिश्वत लेते दबोचा, जानिए क्या है मामला

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन और एक दलाल को 33 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई जयपुर और झुंझुनूं में एक साथ की गई, जिससे साफ हो गया कि सरकारी सिस्टम में इंजीनियर और प्राइवेट एजेंट की मिलीभगत से बड़े स्तर पर खेल चल रहा था। एसीबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि झुंझुनूं में स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे से जोड़ने के लिए प्रस्तावित सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव के नाम पर यह रिश्वत मांगी गई थी।

शिकायतकर्ता की खातेदारी जमीन को पहले सड़क में शामिल किया गया और बाद में उसे बाहर निकालने का झांसा देकर मोटी रकम की मांग की गई। बताया जा रहा है कि जिस जमीन को बाहर करने की बात हो रही थी, उसकी बाजार कीमत 3 से 4 करोड़ रुपए के बीच थी। इसी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने पहले 75 लाख रुपए की डिमांड की, जो बाद में 33 लाख रुपए में तय हुई।

एसीबी की टीम ने शुक्रवार रात करीब 8 बजे जयपुर की चौमूं पुलिया के पास ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता तय प्लान के मुताबिक रिश्वत की रकम लेकर पहुंचा। जैसे ही दलाल याकूब अली ने पैसे लिए और गाड़ी में बैठा, शिकायतकर्ता ने कार का इंडिकेटर जलाकर टीम को संकेत दिया। संकेत मिलते ही एसीबी ने मौके पर दबिश देकर याकूब को 33 लाख रुपए के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

इसी के समानांतर झुंझुनूं में दूसरी टीम ने कार्रवाई करते हुए PWD के एक्सईएन राकेश कुमार को उसके घर से हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि याकूब यह रकम एक्सईएन तक पहुंचाने वाला था।

मामले में एक और अहम कड़ी सामने आई है। रोड अलाइनमेंट का सर्वे और डिजाइन का काम एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था, जिसके प्रतिनिधि के तौर पर याकूब अली काम कर रहा था।

एसीबी को शक है कि यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें सरकारी इंजीनियर, प्राइवेट कंपनी और बिचौलिये मिलकर जमीन मालिकों को टारगेट कर रहे थे। गजट नोटिफिकेशन में अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में शामिल याकूब की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिससे जांच और गहरी हो सकती है।

मोबाइल कॉल और डिलीवरी प्लान से खुली साजिश
ट्रैप के दौरान यह भी सामने आया कि रिश्वत लेने के तुरंत बाद याकूब ने एक्सईएन राकेश कुमार से मोबाइल पर बात की थी। योजना के मुताबिक, यह रकम अगले दिन झुंझुनूं के चिड़ावा में एक्सईएन को सौंपी जानी थी। यानी पूरा ऑपरेशन प्लानिंग के तहत किया जा रहा था, जिसमें रिश्वत की डिलीवरी के लिए अलग-अलग लोकेशन और समय तय किया गया था।

एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत के अनुसार, यह कार्रवाई पुख्ता शिकायत और सत्यापन के बाद की गई है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस केस में और भी अधिकारी या एजेंट सामने आ सकते हैं।

यह मामला केवल एक रिश्वतखोरी का केस नहीं, बल्कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में चल रहे संभावित संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जमीन अधिग्रहण और अलाइनमेंट जैसे तकनीकी फैसलों का दुरुपयोग कर आम लोगों को फंसाने और उनसे करोड़ों की वसूली करने का यह मॉडल गंभीर चिंता का विषय है। एसीबी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की शुरुआत हो चुकी है।

मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर जमकर बरसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

कोटा। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज कोटा प्रवास पर हैं। इस दौरान उनसे मिलने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए कोटा में कई प्रयोग हो रहे हैं।

उनके द्वारा हर विधानसभा में एक गौ-धाम की स्थापना की जा रही है। इसलिए हमारा यहां आना जरूरी था। हमें उम्मीद है कि कोटा गौमाता की रक्षा के लिए कई ऐसे कदम उठा रहा है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म में दिखावा और पाखंड बढ़ रहा है। धर्म का कोई पालन नहीं करना चाहता और धार्मिक होने का दिखावा किया जा रहा है। इसे देखकर लोग धर्म से दूर होते जा रहे हैं।

इसी वजह से सनातन धर्म के बहुत नीचे चले जाने का खतरा उत्पन्न हो रहा है, इसलिए हमारे द्वारा यह मुहिम चलाई जा रही है, ताकि नकली हिंदूत्व पीछे जाए और असली धर्म सामने आए। साथ ही उन्होंने पाखंड करने वाले लोगों पर कहा कि उन्हें हमारी बात पसंद नहीं आती है। वे चाहते हैं कि जो वे कर रहे हैं, वही सही माना जाए। हमें कोई भी न रोके।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन को लेकर कहा कि मंदिर इसलिए बनाए जाते हैं ताकि श्रद्धालु और उनके आराध्य के बीच की दूरी कम हो और सभी भक्त अपने आराध्य के पास रहें। दुनिया में भेदभाव हर जगह है, लेकिन मंदिर ही एक स्थान था जहां सभी समान माने जाते थे।

आज मंदिरों में भी वीआईपी व्यवस्था लागू हो गई है और यह देखा जा रहा है कि किसके पास पैसा है और कौन बिना पैसे के आया है। हमारा मानना है कि मंदिरों में वीआईपी दर्शन बंद होने चाहिए ताकि सभी श्रद्धालुओं के साथ समान व्यवहार हो और बिना भेदभाव के दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि हमारे हिंदू धर्म में यह नियम है कि हम जो भी कार्य करते हैं, उसमें धर्म और अधर्म का विचार करते हैं और यह देखते हैं कि हमारे कार्य से पाप होगा या पुण्य। मतदान के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को मतदान करना पड़ता है, लेकिन हिंदू को यह विचार करना चाहिए कि मतदान करने से उसे पाप लगेगा या पुण्य।

क्योंकि यदि जिस व्यक्ति या पार्टी को वोट दिया गया, वह आगे चलकर गौ हत्या जैसे कार्यों को बढ़ावा देती है, तो उसका पाप उस व्यक्ति को भी लगेगा जिसने उसे वोट देकर जिताया है। इसलिए हिंदू को यह विचार करना चाहिए कि मतदान करके वह किसी पाप का भागीदार न बने।

मुर्शिदाबाद में टीएमसी पर बरसे पीएम मोदी, कहा- घुसपैठियों की सरकार का अंत तय

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के जंगीपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर हमला बोला है। पीएम मोदी ने साफ लफ्जों में कहा कि बंगाल की जनता अब ‘भय’ से ऊब चुकी है और ‘भरोसे’ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में भाजपा चुनाव जीत रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि जो गुंडे और सिंडिकेट पहले वामपंथी दल सीपीआईएम के लिए काम करते थे, वे अब टीएमसी का हिस्सा बन चुके हैं। पीएम ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, ‘कट मनी’और कमीशनखोरी का जो खेल लेफ्ट ने शुरू किया था, टीएमसी ने उसे और खतरनाक बना दिया है। हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और मवेशी तस्करी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

शरणार्थियों को नागरिकता की गारंटी
पीएम मोदी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और तुष्टीकरण की राजनीति को खत्म करने का वादा किया है। उन्होंने विशेष रूप से मतुआ और नामशूद्र समुदायों को संबोधित करते हुए कहा कि आप किसी टीएमसी नेता की दया पर यहां नहीं हैं, आपको भारत का संविधान सुरक्षा देता है। यह मोदी की गारंटी है कि भाजपा सरकार बनते ही सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।

रॉयल एनफील्ड की पहली इलेक्ट्रिक बाइक भारत में लॉन्च, जानिए रेंज और कीमत

नई दिल्ली। रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ने अपने नए EV सब-ब्रांड के तहत अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल फ्लाइंग फ्ली C6 को लॉन्च कर दिया है। इस लॉन्च के साथ कंपनी ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट भी कदम रख दिया है। इस ई-मोटरसाइकिल की एक्स-शोरूम कीमत 2.79 लाख रुपए है।

वहीं, ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ मॉडल के चलते इसकी कीमत 1.99 लाख रुपए है। इसकी बुकिंग और टेस्ट राइड 10 अप्रैल से बेंगलुरु के जयनगर में स्थित पहले डेडिकेटेड फ्लाइंग फ्ली शोरूम में शुरू होंगी। वहीं, डिलीवरी मई के आखिर तक शुरू हो सकती है।

फ्लाइंग फ्ली नाम 1940 के दशक में इस्तेमाल होने वाली ओरिजिनल हल्की मोटरसाइकिल की याद दिलाता है। नई C6 भी उसी सोच को आगे बढ़ाती है। यह नियो-विंटेज डिजाइन को कनेक्टेड टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ती है और इसे डेली इस्तेमाल होने वाली मोटरसाइकिल के तौर पर पेश करती है। C6 के मुख्य हिस्से में 3.91 kWh का लियॉन बैटरी पैक लगा है, जिसमें एयर-कूल्ड सेटअप दिया गया है।

फुल चार्ज पर 154Km की रेंज
इसे इस सेगमेंट में पहली बार इस्तेमाल की गई मैग्नीशियम एलॉय केसिंग में रखा गया है। यह यूनिट एक परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर से जुड़ी है, जो लगभग 20.6 hp की पावर और 60 Nm का टॉर्क जनरेट करती है। पावर दो-स्टेज बेल्ट ड्राइव सिस्टम के जरिए पहुंचाई जाती है, जबकि मोटर को कंट्रोल यूनिट के साथ इंटीग्रेट किया गया है। फ्लाइंग फ्ली C6 की टॉप स्पीड 115 kmph तक पहुंच सकती है। यह सिर्फ 3.7 सेकंड में 0 से 60 kmph की स्पीड पकड़ लेती है। एक बार फुल चार्ज होने पर इसकी IDC रेंज 154 km है।

2.16 घंटे में फुल चार्ज
ये बैटरी लगभग 2 घंटे 16 मिनट में 0 से 100% तक चार्ज हो सकती है, जबकि 20 से 80% तक टॉप-अप होने में लगभग 65 मिनट लगते हैं। यह सिस्टम कई चार्जिंग मोड को सपोर्ट करता है, जिनमें रैपिड, स्टैंडर्ड और ट्रिकल चार्जिंग शामिल हैं। इसे ऑनबोर्ड चार्जर के साथ किसी भी यूनिवर्सल वॉल आउटलेट में प्लग किया जा सकता है।

वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट
इसके फीचर्स की बात करें तो 3.5-इंच का कलर TFT टचस्क्रीन डिस्प्ले, USB-C चार्जिंग, वायरलेस फोन चार्जिंग और एक इलेक्ट्रॉनिक हैंडलबार लॉक शामिल हैं। इसे स्टॉर्म ब्लैक और फ्ली ग्रीन कलर्स में खरीद पाएंगे। फ्लाइंग फ्ली C6 को अलग-अलग शहरों में अलग-अलग फेज में लॉन्च किया जाएगा। फ्यूचर में इस में कई अन्य वैरिएंट भी जोड़े जा सकते हैं।

19-इंच के ट्यूबलेस टायर्स
हार्डवेयर की बात करें तो इस मोटरसाइकिल में अपनी कैटेगरी का पहला अनोखा गर्डर लिंकेज फ्रंट सस्पेंशन है, जिसमें हाइड्रोलिक ट्विन सेटअप के साथ-साथ प्रीलोड एडजस्टमेंट वाली रियर मोनोशॉक यूनिट भी है। सस्पेंशन ट्रैवल आगे की तरफ 100 mm और पीछे की तरफ 110 mm है। इसमें दोनों तरफ 19-इंच के ट्यूबलेस टायर और काले अलॉय व्हील लगे हैं।

डिस्क ब्रेक और डुअल-चैनल ABS
ब्रेकिंग के लिए 260 mm की फ्रंट डिस्क और 220 mm की रियर डिस्क दिया है। इनके साथ डुअल-चैनल ABS भी है। जिसमें तीन सेंसिटिविटी लेवल और स्विच करने लायक रियर ABS की सुविधा है। इसमें लीन-एंगल सेंसिटिव ABS और ट्रैक्शन कंट्रोल के अलावा, राइडिंग के दौरान या क्रैश होने की स्थिति में ज्यादा सेफ्टी के लिए टिप-ओवर अलर्ट सिस्टम और लोकेशन शेयरिंग फीचर भी दिया है।

207mm का ग्राउंड क्लीयरेंस
इस मोटरसाइकिल की लंबाई 2,089 mm, चौड़ाई 831 mm और ऊंचाई 1,122 mm है। इसकी सीट की ऊंचाई 823 mm और ग्राउंड क्लीयरेंस 207 mm है। इसका कर्ब वेट 124 kg है। ये 160 kg तक का वजन उठा सकती है। इसमें हल्के एल्युमीनियम फ्रेम का इस्तेमाल किया गया है जिसमें कोई वेल्डिंग नहीं है, क्योंकि इसमें बोल्ट-ऑन पार्ट्स लगे हैं जिनसे इसे अपनी पसंद के हिसाब से ज्यादा कस्टमाइज किया जा सकता है।

इस्लामाबाद वार्ता से पहले ट्रंप ने भेजे जंगी जहाज, 50 हजार सैनिक तैनात, जानिए क्यों

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक बेहद महत्वपूर्ण शांति वार्ता होने जा रही है। लेकिन इस कूटनीतिक कोशिश के साथ-साथ, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत भी बहुत तेजी से बढ़ा रहा है।

इस बातचीत में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान जा रहे हैं। एक ही समय में बातचीत की मेज पर बैठना और युद्ध के मैदान में सेना भेजना- यह दिखाता है कि इस समय हालात कितने नाजुक और गंभीर हैं।

अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी फाइटर जेट्स और हमलावर विमान पहले ही इस इलाके में पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सेना के ’82वें एयरबोर्न डिवीजन’ के 1500 से 2000 सैनिकों के भी जल्द ही वहां तैनात होने की उम्मीद है।

समुद्र में भी भारी हलचल है। ‘यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश’ नाम का एयरक्राफ्ट कैरियर अटलांटिक महासागर पार कर रहा है। वहीं, प्रशांत महासागर से ‘यूएसएस बॉक्सर’ और 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट भी खाड़ी देशों की तरफ बढ़ रहे हैं। इन्हें वहां पहुंचने में करीब एक हफ्ते का समय लगेगा।

मध्य पूर्व में आमतौर पर 40,000 अमेरिकी सैनिक रहते हैं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 50,000 के पार हो गई है। इसके अलावा, 2,500 मरीन और 2,500 नौसैनिक वहां पहले से मौजूद हैं।

ईरान का रुख और शर्तें
ईरान ने भी बातचीत के लिए अपना एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा है, जिसका नेतृत्व वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे हैं। हालांकि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं-

  • लेबनान में युद्धविराम: ईरान की मुख्य शर्त यह है कि औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में तुरंत युद्धविराम लागू होना चाहिए।
  • अमेरिका पर अविश्वास: स्पीकर गलीबाफ ने साफ कहा कि ईरान की नीयत तो अच्छी है, लेकिन उन्हें अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इस बातचीत को सिर्फ एक दिखावा या धोखा बनाने की कोशिश की, तो ईरान कड़ा एक्शन लेगा।

डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कूटनीति और बातचीत फेल होती है, तो सेना का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अमेरिकी युद्धपोतों पर हथियार लोड किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल होगा। ट्रंप के मुताबिक, अगले 24 घंटों के भीतर यह साफ हो जाएगा कि यह शांति वार्ता किस दिशा में जा रही है।

अमेरिका की दोहरी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय दोधारी रणनीति अपना रहा है। एक तरफ वह शांति की बात कर रहा है, और दूसरी तरफ अपनी सेना खड़ी कर रहा है। इसके दो मुख्य कारण हैं:

  • दबाव बनाना: भारी सेना देखकर ईरान पर दबाव बनेगा, जिससे अमेरिका बातचीत की मेज पर अपना पलड़ा भारी रख सकेगा।
  • बैकअप प्लान: अगर बातचीत पूरी तरह टूट जाती है, तो अमेरिकी सेना तुरंत कार्रवाई (जैसे ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ पर हमला) करने के लिए तैयार रहेगी।

हालांकि 50,000 सैनिक एक बड़ी संख्या लगती है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देश में किसी बड़े जमीनी युद्ध के लिए यह फौज बहुत कम है।

दुनिया पर असर और मौजूदा हालात
यह युद्ध अब लगभग छह हफ्तों से चल रहा है और इसके परिणाम बेहद गंभीर हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए एक बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। हमलों के कारण यह रास्ता बाधित हुआ है, जिससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और ग्लोबल इकॉनमी पर बुरा असर पड़ रहा है।

इस 6 हफ्ते के युद्ध ने भारी तबाही मचाई है और पूरे पश्चिम एशिया में डर और अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है। अब जब एक तरफ दोनों देश टेबल पर बातचीत के लिए बैठ रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी सेनाएं हथियारों के साथ तैयार खड़ी हैं, तो आने वाले कुछ दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद अनिश्चितता और चिंता से भरे हुए हैं।

Forex Reserve: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697 अरब डॉलर के पार

मुंबई। ईरान-इजरायल के बीच करीब 40 दिन तक चले युद्ध के बाद बीते सप्ताह अपने फोरेक्स भंडार में $9.06 अरब की बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे पीली धातु सोना (Gold) का बड़ा हाथ है।

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $9.063 अरब की बढ़ोतरी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $10.288 अरब की गिरावट हुई थी।

अब अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ कर $697.121 अरब तक पहुंच गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को अपना भंडार बढ़ कर $728.494 अरब के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था।

FCA भंडार में हुई बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक की तरफ से जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार 3 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियों (Foreign Currency Asset) में $1.784 अरब की बढ़ोतरी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले डॉलर के मुकाबले रुपया के कमजोर पड़ने से इसमें $6.622 अरब की भारी गिरावट हुई थी। अब अपना एफसीए भंडार बढ़ कर $552.856 अरब का हो गया है। उल्लेखनीय है कि देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां या फॉरेन करेंसी असेट (FCA) एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। डॉलर में अभिव्यक्त किये जाने वाले विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसे गैर अमेरिकी मुद्राओं में आई घट-बढ़ के प्रभावों को भी शामिल किया जाता है।

गोल्ड रिजर्व बढ़ा
आलोच्य सप्ताह के दौरान अंतराष्ट्रीय बाजार में सोने के मूल्य में वृद्धि हुई है। इस वजह से बीते तीन अप्रैल को समाप्त सप्ताह के दौरान रिजर्व बैंक के सोने के भंडार की वैल्यू में $7.221 अरब की बढ़ोतरी हुई है। इससे एक सप्ताह पहले इसमें $3.666 अरब की कमी हुई थी। उससे एक सप्ताह पहले भी इसमें $13.495 अरब की भारी कमी हुई थी। इसी के साथ अब अपने सोने के भंडार का वैल्यू बढ़ कर $120.742 अरब का हो गया है। उल्लेखनीय है कि इस समय आरबीआई के पास सोने का भंडार 880 टन के पार चला गया है। यह देश के कुल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का करीब 15% बैठता है। इसके मूल्य में कमी होती है यह कुल विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करता है।

एसडीआर में मामूली बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) में मामूली बढ़ोतरी हुई है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान एसडीआर में $58 million की बढ़ोतरी हुई है। अब यह बढ़ कर $18.707 अरब का हो गया है। इसी सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे हुए देश के रिजर्व मुद्रा भंडार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। एक सप्ताह पहले इसमें $17 million डॉलर की कमी हुई थी। इस समय अपना आईएमएफ रिजर्व $4.816 billion का है।