Saturday, July 11, 2026
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Stock Market: सेंसेक्स 703 अंक गिर कर 76847 पर और निफ्टी 24 हजार से नीचे बंद

नई दिल्ली। Stock Market Closed, April 13, 2026भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन यानी सोमवार (13 अप्रैल) को गिरावट में बंद हुए। 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स 0.91 प्रतिशत या फिर 702.68 अंक की गिरावट के बाद 76847.57 अंक पर बंद हुआ है। वहीं, बाजार के बंद होने के समय पर निफ्टी 0.86 प्रतिशत या फिर 207.95 अंक की गिरावट 23842.65 पर था।

सेंसेक्स की 30 में से 27 कंपनियों के शेयरों में आज सोमवार को गिरावट देखने को मिली है। मारुति के शेयर 4.60 प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ बंद हुए है। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता नाकाम होने से आज घरेलू बाजार में भारी गिरावट आई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,600 अंक से अधिक गिर गया था जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 400 अंक से अधिक लुढ़क गया।

आखिरकार सेंसेक्स 702.68 अंक यानी 0.91% की गिरावट के साथ 76,847.57 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 207.95 अंक यानी 0.86% लुढ़ककर 23,842.65 अंक पर आ गया। सभी सेक्टरों में गिरावट रही। रुपये भी डॉलर के मुकाबले करीब 0.7 फीसदी गिरकर 93.38 पर गया।

टॉप लूजर्स एंड गेनर्स
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 शेयरों में गिरावट आई। मारुति के शेयरों में सबसे ज्यादा चार फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इंडिगो, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, आईटीसी, इटरनल और एचसीएल टेक में भी उल्लेखनीय गिरावट रही। केवल आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक में तेजी रही।

सात साल बाद पहली बार ईरानी तेल की खेप भारत पहुंची, ट्रंप ने कर दी नाकेबंदी

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता विफल होने के बाद तेल को लेकर संकट फिर से गहरा गया है। वहीं भारत के तटों के पास ईरान से कच्चा तेल लेकर आए दो बड़े सुपरटैंकरों के लंगर डालने से ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। यह लगभग सात साल बाद पहली बार है जब ईरानी तेल की खेप भारत पहुंची है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक यह ठीक उसी समय जब अमेरिका ईरान के निर्यात पर सख्ती बढ़ा रहा है।

वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी बढ़ा दी है। इस कदम का मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह वहां से ईरान के तेल के टैंकर नहीं निकलने देगा। ऐसे में भारत के तटों पर लंगर डाले ईरानी तेल के टैंकरों पर भी संशय के बादल छा गए हैं। बड़ा सवाल है कि क्या इन टैंकरों से तेल निकालकर भारतीय रिफाइनरियों में भेजा जाएगा या नहीं?

अमेरिकी बैन के कारण भारत ने साल 2019 से ईरानी तेल का आयात बंद कर दिया था। हालांकि, पिछले महीने मिली एक विशेष छूट के तहत उन खेपों की खरीद की अनुमति दी गई थी जो पहले से ही समुद्र में थीं। यह कदम पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया था। अब ईरानी तेल पर फिर से संकट दिखाई दे रहा है। अगर यह तेल नहीं उतरा तो भारत के लिए ईरानी कच्चे तेल का इंतजार और लंबा हो सकता है।

कौन से जहाज खड़े हैं तट पर

  • फेलिसिटी (Felicity) नामक नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का यह जहाज 20 लाख बैरल तेल लेकर पश्चिमी भारत के सिक्का (Sikka) तट पर पहुंचा है।
  • जया (Jaya) नामक यह जहाज भारत के पूर्वी तट पर पारादीप (Paradip) के पास खड़ा है। इसमें भी 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है।
  • इन दोनों जहाजों पर लदे तेल के खरीदारों के नाम अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं।

अभी क्या है स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ( Strait of Hormuz ) के माध्यम से आने वाले जहाजों की नाकेबंदी करने की योजना बनाई है। शांति वार्ता विफल होने के बाद ईरान के शिपमेंट को पूरी तरह रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। वहीं भारत ने कहा है कि वह ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ईरान सहित अन्य देशों से कार्गो खरीदेगा।

क्या होगा असर
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप की नई नाकेबंदी योजना का मौजूदा छूट या पहले से की गई खरीदारी पर क्या असर पड़ेगा। अगर ट्रंप की यह नई नाकेबंदी पहले से की गई खरीदारी पर भी लागू होती है तो हो सकता है कि ईरानी तेल के टैंकर वापस लौट जाएं।

रेलवे भूमि से होगा राजस्व सृजन, कर्मचारियों को मिलेंगे 300 आधुनिक आवास

आरएलडीए एवं कोटा मंडल की साझा पहल से वर्कशॉप कॉलोनी का होगा कायाकल्प

कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने रेलवे भूमि के स्मार्ट एवं उत्पादक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) एवं कोटा मंडल के संयुक्त प्रयास से कोटा स्थित वर्कशॉप एवं लोको कॉलोनी की लगभग 1.5 लाख वर्गमीटर भूमि का वाणिज्यिक उपयोग किया जाएगा।

इस पहल से रेलवे को दीर्घकालिक राजस्व प्राप्त होगा तथा कर्मचारियों को आधुनिक एवं सुविधासंपन्न आवास भी उपलब्ध होंगे। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि इस परियोजना में रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल अपनाया गया है।

वाणिज्यिक विकास से प्राप्त आय से ही कॉलोनी का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जिससे रेलवे को इस पर अलग से कोई राशि व्यय नहीं करनी होगी। डेवलपर द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात् टाइप-II, III एवं IV श्रेणी के 300 आधुनिक स्टाफ क्वार्टर्स कोटा मंडल को हस्तांतरित किए जाएंगे।

श्री जैन ने बताया कि नई कॉलोनी में सड़क नेटवर्क, पार्किंग, जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत व्यवस्था, हरित क्षेत्र एवं खेल सुविधाओं का पूर्ण प्रावधान होगा। परियोजना को चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा तथा आरएलडीए द्वारा निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं।

यह परियोजना कोटा मंडल के लिए चौतरफा लाभकारी और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण एवं संसाधनों के कुशलतम उपयोग के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

नारी शक्ति वंदन कानून 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, ” देश की विकास यात्रा के अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है।

यह फैसला नारी शक्ति को और नारी शक्ति वंदन को समर्पित है। हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। यह इतिहास अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन ऐसे समय में किया जा रहा है जब सरकार ने आगामी 16-18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है।

पीएम मोदी ने कहा, ”यह एक ऐसे समतामूलक भारत के निर्माण का संकल्प है, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं हो। लेकिन हमारी कार्यसंस्कृति, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो। राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17 और 18 अप्रैल है।”

उन्होंने आगे कहा, ”2023 में नई संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में प्रथम कदम उठाया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है। आज इस कार्यक्रम के जरिए हमें देश की कोटि-कोटि माताओं-बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है।”

उन्होंने कहा कि मैं भारत की सभी महिलाओं को एक नए युग के आगमन की बधाई देता हूं। लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा है। इस विमर्श को चार दशक यानी चालीस साल बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कई पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं। 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब सभी दलों ने एक सुर में इसे पारित कराया था।

इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान महिलाओं को लेकर जमीनी स्तर पर कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में विदेश मंत्री से लेकर वित्त मंत्री तक के बड़े पदों पर महिलाएं रहीं। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी सरकार के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में मुझे भी काम करने का मौका मिला है।

सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय निर्माण की नई और प्रेरक गाथा का उत्सव है। यह वह पावन क्षण है, जब संकल्प, समर्पण और सफलता का संगम हमारे सामने साकार हो रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम हमारी मातृशक्ति के वर्षों के संघर्ष और साधना की लोकतांत्रिक सिद्धि का महापर्व है।

शासन और नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सम्मेलन के आयोजन का मकसद पंचायतों से लेकर संसद तक, सभी स्तरों पर शासन और नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करना है। महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन पर चर्चा के लिए बुलाए गए विशेष संसद सत्र से पहले पीएम नरेंद्र मोदी विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में शिरकत करते हुए महिला आरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराएंगे।

ऊंची वैश्विक कीमतों से खाद्य तेल आयात 10 फीसदी घटा, वनस्पति तेल बढ़ा

नई दिल्ली। भारत का कुल वनस्पति तेल आयात नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान 8% बढ़कर 65.72 लाख टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 60.97 लाख टन था। हालांकि मार्च 2026 में खाद्य तेल आयात फरवरी की तुलना में 10% घटकर 11.73 लाख टन रह गया, जिससे संकेत मिलता है कि ऊंची वैश्विक कीमतों, रुपये की कमजोरी और घरेलू सरसों फसल की बेहतर उपलब्धता के कारण आयातकों ने खरीद धीमी कर दी है।

इस अवधि में पाम तेल आयात तेज़ी से बढ़कर 34.50 लाख टन हो गया, जबकि सॉफ्ट ऑयल (सोया व सूरजमुखी) आयात घटकर 30.03 लाख टन रह गया। पाम तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 53% हो गई, जो पिछले साल 41% थी। इंडोनेशिया और मलेशिया भारत के प्रमुख पाम तेल आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं, जबकि अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोया एवं सूरजमुखी तेल की निर्भरता जारी है।

सरकार की ड्यूटी अंतर नीति का बड़ा असर रिफाइंड तेल आयात पर दिखा है। नवंबर-मार्च के दौरान रिफाइंड पाम तेल आयात घटकर केवल 1.92 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 9.52 लाख टन था। इसके विपरीत क्रूड तेल आयात बढ़कर 62.60 लाख टन पहुंच गया, जिससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को मजबूती मिली है और रिफाइंड तेल आयात का अनुपात 16% से घटकर केवल 3% रह गया।

नेपाल से रिफाइंड तेल आयात लगातार बढ़ रहा है। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच नेपाल ने भारत को करीब 1.62 लाख टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें अधिकांश हिस्सा सोया तेल का रहा। यह प्रवृत्ति घरेलू रिफाइनरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही है।

1 अप्रैल 2026 तक देश में कुल खाद्य तेल स्टॉक बढ़कर 18.98 लाख टन हो गया, जो पिछले महीने से 28,000 टन अधिक है। पर्याप्त स्टॉक और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए निकट अवधि में आयात दबाव सीमित रह सकता है।

हालांकि भारत की खाद्य तेल सुरक्षा अभी भी वैश्विक आपूर्ति, भू-राजनीतिक तनाव और मौसम जोखिमों पर निर्भर बनी हुई है, इसलिए दीर्घकाल में घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाना और आयात स्रोतों का विविधीकरण जरूरी होगा।

Rice Price: निर्यात बढ़ने की उम्मीद से चावल के थोक भाव में सात प्रतिशत तेजी

नई दिल्ली। Rice Price: मध्य-पूर्व एशिया एवं खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ अमरीका एवं यूरोप को भी निर्यात के लिए नए आर्डर प्राप्त होने की उम्मीद से थोक मंडियों में विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के चावल का भाव सात प्रतिशत बढ़ गया। इससे पूर्व युद्ध जारी रहने के दौरान कीमतों में 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी। वैसे होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का संशय अभी बरकरार है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अनुसार थोक बाजार में भाव बढ़ने का असर अगले कुछ दिनों में चावल के खुदरा मूल्य पर भी दिखाई पड़ने लगेगा। ईरान अमरीका युद्ध के कारण चावल के निर्यात शिपमेंट में काफी बाधा पड़ रही थी और लगभग 4 लाख टन बासमती चावल की खेप या तो भारतीय बंदरगाहों पर अटका हुआ था या समुद्र में फंसा हुआ था। इसके साथ-साथ भुगतान का संकट भी बना हुआ था।

एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार भारतीय निर्यातकों का करीब 2000-2500 करोड़ रुपए का भुगतान अब भी अटका हुआ है। ईरान जैसे देशों में इसकी राशि ज्यादा है क्योंकि वहां बैंकिंग एवं सेटलमेंट का मुद्दा बरकरार है।

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि कांडला एवं मुद्रा बंदरगाह पर बासमती चावल के निर्यात की खेप (कंटेनर्स में) तैयार है और इसका शिपमेंट शीघ्र ही आरंभ होने की उम्मीद है। यदि यह शिपमेंट सफल रहा और अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच गया तो निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी।

MCX पर चांदी की कीमत 2.5% गिरी, सोना भी हुआ सस्ता, जानिए के भाव

नई दिल्ली। Gold Silver Price Today: ईरान-अमेरिका युद्ध के बढ़ते तनाव और पाकिस्तान में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलने से आज सुबह के कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

एमसीएक्स पर सोने का भाव आज 1,51,547 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर खुला और कुछ ही मिनटों में 1,51,457 रुपये प्रति 10 ग्राम के को छू गया। जबकि, MCX पर चांदी की कीमत 2.5% गिरकर 2,37,190 रुपये प्रति किलोग्राम पर आग गई। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,723.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी यहां दो प्रतिशत टूटकर 74.36 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर महंगाई की चिंताओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इसमें ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे मध्य पूर्व में छह सप्ताह से चल रहे युद्ध को रोकने की उम्मीदों को झटका लगा है। इस झटके का असर सोने-चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

बता दें डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर उस जहाज को रोकेगा, जिसने ईरान को कोई फीस दी है। वहीं, अमेरिकी सेना ने सोमवार से नाकाबंदी शुरू करने की घोषणा की है।

सोने-चांदी की चाल
यूनियन बैंक प्रिवी के एशिया में Discretionary Portfolio Management के प्रमुख परास गुप्ता का कहना है कि वीकेंड की घटनाओं ने नाजुक सीजफायर को खतरे में डाल दिया है और संभवतः युद्ध को लंबा खींच देंगे। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव युद्ध की शुरुआत की तुलना में अब कम है, लेकिन असली परीक्षा सोमवार को लंदन के बाजार खुलने पर होगी।

बाघों की बढ़ती संख्या पर वन विभाग का फैसला, रणथंभौर में बनेगा नया सफारी पार्क

सवाई माधोपुर। प्रदेश के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या अब वन प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही है। बाघों के लिए पर्याप्त टेरेटरी (क्षेत्र) नहीं होने के कारण वे जंगल से बाहर निकलकर आसपास के गांवों की आबादी तक पहुंच रहे हैं।

इससे जहां वन विभाग को परेशानी हो रही है, वहीं स्थानीय लोगों में भी डर का माहौल बना हुआ है। इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग अब बाघों के लिए नई जगह तलाश रहा है।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में इस समय करीब 76 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं। जबकि साल 2016 में वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सर्वे के अनुसार यहां सिर्फ 45 से 55 बाघ ही रह सकते हैं। ऐसे में मौजूदा संख्या क्षमता से काफी ज्यादा हो गई है। यही कारण है कि बाघ अपनी टेरेटरी की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार युवा और ताकतवर बाघों के दबाव के कारण कमजोर और वृद्ध बाघ अपनी टेरेटरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं और नई जगह की तलाश में जंगल से बाहर निकल जाते हैं। वन अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि रणथंभौर में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक है और उन्हें अतिरिक्त जगह की जरूरत है।

रणथंभौर के बाघों को पर्याप्त स्थान देने के लिए वन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। एक ओर जहां नया ग्रासलैंड, कैलादेवी कॉरिडोर और रामगढ़ विषधारी कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, वहीं अब एक नया सफारी पार्क बनाने की योजना भी तैयार की गई है।

वन विभाग रणथंभौर से सटी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की जमीन पर नया सफारी पार्क विकसित करना चाहता है। इस जमीन पर बना आईओसी प्लांट पिछले 23-24 वर्षों से बंद पड़ा है और यहां पर्याप्त प्राकृतिक जंगल भी मौजूद है। वन विभाग का मानना है कि यदि यह जमीन मिल जाती है, तो यहां बड़ा एनक्लोजर बनाकर कमजोर, वृद्ध और घायल बाघों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह का कहना है कि कोटा के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की तरह बड़ा एनक्लोजर यहां भी बनाया जा सकता है, जो एक बाघ की सामान्य टेरेटरी से भी बड़ा हो। उन्होंने बताया कि इस योजना को लेकर स्थानीय विधायक और प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के माध्यम से केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

अगर यह सफारी पार्क बनता है तो रणथंभौर आने वाले पर्यटकों को भी फायदा होगा। कई बार टिकट नहीं मिलने के कारण पर्यटक टाइगर सफारी नहीं कर पाते। ऐसे में यह नया सफारी पार्क उनके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। साथ ही इससे सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा।

इस सफारी पार्क के बनने से बाघों के बीच टेरेटरी को लेकर होने वाले संघर्ष में कमी आएगी। साथ ही बाघों का जंगल से निकलकर गांवों में आने का सिलसिला भी कम हो सकेगा। इससे वन विभाग की निगरानी में भी आसानी होगी और ग्रामीणों में फैला डर भी कम होगा।

केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार
वन विभाग ने अपना प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है। अब जरूरत है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय से संपर्क कर आईओसी की जमीन को रणथंभौर टाइगर रिजर्व के नाम ट्रांसफर करवाए। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो रणथंभौर के बाघों को नई जगह मिलेगी और मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं में कमी आ सकेगी।

ट्रंप की धमकी से सेंसेक्स 1613 अंक गिरकर 75937 पर, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। Stock Market, April 13, 2026: एशियाई बाजारों में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन यानी सोमवार (13 अप्रैल) को बड़ी गिरावट में खुले। शेयर मार्केट के क्रैश होने से निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब ₹8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, क्योंकि सोमवार सुबह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹443 लाख करोड़ था, जबकि पिछले सत्र में यह ₹451 लाख करोड़ था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ईरान को नई धमकी से बाजार का सीधा असर बाजार की चाल पर देखने को मिल रहा है। इंडेक्स हैवीवेट रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में बिकवाली ने बाजार को सबसे ज्यादा नीचे खींचा है। इसके अलावा क्रूड ऑइल की कीमतों में तेजी से रुपये पर दबाव पड़ा है।

सेंसेक्स 1613 अंकों की भारी गिरावट के साथ 75937 के लेवल पर खुला जबकि, निफ्टी 461 अंकों का गोता लगाकर 23589 पर खुला। इंडिगो, मारुति, एलएंडटी समेत अधिकतर शेयर भारी गिरावट के साथ आज के कारोबार की शुरुआत की। इंडेक्स में सेशन शुरू होते ही बिकवाली बढ़ गई। सुबह 9:24 बजे यह 1598.97 अंक या 2.06 फीसदी की गिरावट लेकर 75,951.28 पर ट्रेड कर रहा था।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट लेकर 23,589.60 पर खुला। शुक्रवार को यह 24050 पर बंद हुआ था। सुबह 9:25 बजे यह 461.10 अंक या 1.92 फीसदी की गिरावट के साथ 23,589.50 पर ट्रेड कर रहा था।

ग्लोबल मार्केट के संकेत
एशियाई बाजार सोमवार सुबह गिरावट में रहे। इस्लामाबाद में हुई बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका। इससे यह चिंता बढ़ गई कि यह संघर्ष उम्मीद से ज्यादा लंबा चल सकता है। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी क्रमशः 0.71 प्रतिशत और 0.75 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। वहीं चीन का सीएसआई 300 सूचकांक 0.12 प्रतिशत गिरा।

अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स सोमवार सुबह गिरावट में रहे। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत से मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया। एसएंडपी 500 और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल फ्यूचर्स क्रमशः 0.78 प्रतिशत और 0.79 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। पिछले शुक्रवार को एसएंडपी 500 और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज क्रमशः 0.11 प्रतिशत और 0.56 प्रतिशत गिरकर बंद हुए थे, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.35 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ।

33% महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, तुरंत लागू करने की मांग

नई दिल्ली। देशभर में जहां एक ओर महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण देने के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है।

सर्वोच्च न्यायालय आज यानी सोमवार 13 अप्रैल को इस मामले पर सुनवाई करेगा। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून नारी शक्ति वंदन अधिनियम तुरंत लागू किया जाए और इसे जनगणना व परिसीमन से न जोड़ा जाए।

फिलहाल इस कानून में यह प्रावधान है कि महिलाओं को 33% आरक्षण तभी मिलेगा, जब अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। लेकिन याचिका में कहा गया है कि यह शर्त जरूरी नहीं है, क्योंकि सीटों की संख्या पहले से तय है और देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच करेगी। इससे पहले 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कानून के इस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा। यह सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए संशोधन बिल लाया जा सकता है।

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस कानून को सर्वसम्मति से पास करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए महिलाओं की ज्यादा भागीदारी जरूरी है। हालांकि, कांग्रेस ने इस विशेष सत्र का विरोध किया है।

पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि इस समय तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। साथ ही कांग्रेस ने मांग की है कि पहले परिसीमन पर सभी दलों की बैठक होनी चाहिए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर आगे बढ़ना चाहिए।