नई दिल्ली। GDP Growth : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है। केंद्रीय बैंक ने GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कमजोर वैश्विक मांग और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत भारतीय वस्तु निर्यात के लिए चुनौती बनी हुई है। दुनियाभर के देश भारी अनिश्चितताओं से घिरे हुए हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल मजबूत हैं और देश कम से कम नुकसान के साथ बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते ऊर्जा और अन्य कमोडिटी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन में लगातार आ रही बाधाएं भी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल सकती हैं।
वैश्विक सप्लाई चेन में लंबे समय तक रुकावट, वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और मौसम संबंधी झटके जीडीपी ग्रोथ के लिए जोखिम बने हुए हैं।
RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इसमें पहली तिमाही (Q1) में 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही (Q2) में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही (Q3) में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही (Q4) में 6.8 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
जून की द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर कहा कि निवेशकों के सुरक्षित निवेश की ओर रुख करने और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण विदेशी मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। इसके चलते कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है।
एमपीसी के एलान पर एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा का कहना है कि RBI की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाएं विदेशी मुद्रा (FX) बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने से जुड़ी रहीं।
इन उपायों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विदेशी वाणिज्यिक उधार (ECB) के लिए रियायती FX स्वैप दरें, FCNR(B) जमा पर हेजिंग लागत में सब्सिडी और सरकारी बॉन्ड (G-Sec) के FAR दायरे का विस्तार कर 15 वर्ष या उससे अधिक अवधि वाली प्रतिभूतियों को शामिल करना प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि यह साफ है कि RBI अब तभी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा, जब महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहे और उसके दूसरे चरण के प्रभाव अर्थव्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगें। रिजर्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एमके ग्लोबल का अनुमान 6.3 फीसदी है। रिजर्व बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि महंगाई के लिए ऊपर की ओर और वृद्धि के लिए नीचे की ओर जोखिम बने हुए हैं।
अर्थव्यवस्था के संकेतक मजबूत
RBI गवर्नर ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उपलब्ध कई हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक यह दिखाते हैं कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब तक काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर के पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि दोनों सेक्टर मजबूती बनाए हुए हैं और कारोबारी उम्मीदें अभी भी सकारात्मक बनी हुई हैं। मांग के मोर्चे पर प्राइवेट कंजम्प्शन अब तक मजबूत बनी हुई है। बढ़ती लागत के दबाव के बावजूद स्थिर निवेश ने भी अपनी गति बनाए रखी है।
मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल 2026 में माल निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि माल ढुलाई और बीमा लागत ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चिंताओं के बावजूद सेवा निर्यात भी मजबूत बने हुए हैं और भारतीय सेवाओं की मांग लगातार बनी हुई है। कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों का अब तक मजबूती से सामना किया है। हालांकि बढ़ती लागत का असर अब दिखाई देने लगा है।

