कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के तहत गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मा का कल्याण बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि मन के भावों की शुद्धता से होता है।
व्यक्ति के भाव जितने निर्मल होते हैं, आत्मा उतनी ही आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आत्मकल्याण के लिए व्रत, साधना, संयम, तप और धर्माचरण को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का महत्व बताते हुए कहा कि मंदिर जाना, धर्मसभा में शामिल होना और आत्मचिंतन करना व्यक्ति को अपने भीतर झांकने का अवसर देता है। दान, दया, संयम और परोपकार जैसे सद्गुण आत्मा की शुद्धि में सहायक होते हैं। मनुष्य को अपने कर्मों और भावों के प्रति सजग रहते हुए जीवन को धर्ममय बनाने का प्रयास करना चाहिए।
धर्मसभा में निर्मल अजमेरा, संतोष डूंगरवाल, जम्बू गोधा, प्रेमचंद दुगेरिया, आशीष ठोला, रमेश साकुनिया, महावीर सादरी वाले, रोहित ठाई, राजेश खटोड़, संजय लुहाड़िया,सहित गुरु सेवा परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ लिया।

