नेत्रदान पखवाड़े की पूर्व संध्या पर प्राइवेट कॉलेज के छात्रों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

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कोटा। 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े की पूर्व संध्या पर आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर के तत्वावधान में महावीर नगर स्थित एक निजी कॉलेज में नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आमजन के बीच नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना तथा मृत्यु के बाद कॉर्निया दान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का संदेश जन जन तक पहुँचाना था। कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायक उपलब्धि यह रही कि लगभग 120 विद्यार्थियों एवं फैकल्टी सदस्यों ने नेत्रदान का संकल्प लिया।

इस अवसर पर आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. के. के. कंजोलिया, समन्वयक एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय, दिनेश विजय, जी. डी. पटेल, अनीता चौहान, डॉ. श्वेता सक्सेना, डॉ. मनीषा शर्मा एवं मीनाक्षी सहित बड़ी संख्या में कॉलेज के फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. के. के. कंजोलिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेत्रदान मानवता की सबसे सुंदर और प्रेरक सेवाओं में से एक है। मृत्यु के बाद भी हमारी आँखों की रोशनी किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन में नई सुबह ला सकती है, जो कॉर्निया की बीमारी के कारण दुनिया देखने से वंचित है।

उन्होंने कहा कि नेत्रदान को जन आंदोलन का रूप देने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि विद्यार्थी स्वयं जागरूक होंगे तो वे अपने परिवार में नेत्रदान के विषय पर खुलकर चर्चा करेंगे। इससे समाज की सोच में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर के समन्वयक एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने कहा, नेत्रदान का संकल्प केवल एक हस्ताक्षर नहीं है, यह किसी अंधेरी जिंदगी में रोशनी पहुँचाने का वादा है। हमारी मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन हमारी आँखों की रोशनी का अंत होना आवश्यक नहीं है।

डॉ. पाण्डेय ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि नेत्रदान से मृत व्यक्ति का चेहरा विकृत नहीं होता। चश्मा पहनने वाले, अधिक आयु के व्यक्ति, मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके लोग तथा मधुमेह या रक्तचाप से पीड़ित अनेक व्यक्ति भी संभावित नेत्रदाता हो सकते हैं। कॉर्निया की अंतिम चिकित्सकीय उपयुक्तता का निर्णय नेत्र कोष की विशेषज्ञ टीम करती है।

इस अवसर पर समाजसेवी जी. डी. पटेल, अनीता चौहान, कॉलेज निदेशक दिनेश विजय एवं डॉ. श्वेता सक्सेना ने नेत्रदान के संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समाज तक पहुँचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में 120 विद्यार्थियों एवं कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों द्वारा नेत्रदान का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का समापन नेत्रदान जागरूकता पोस्टर के विमोचन के साथ हुआ।