कोटा। शुद्ध देशी घी खाना हार्ट के लिए नुकसानदायक नहीं, बल्कि फायेदमंद है। यह बार कई रिसर्च के बाद सामने आई है। एक बार एक हार्ट सेमिनार में एंकर ने बोला अगर अपने दिल को बचाना है, तो घी का सेवन बंद कर दो। इसके कुछ देर बाद ही हार्ट सर्जन सैफुद्दीन आरसी वाला ने माइक संभाला और एंकर को टोकते हुए बोले आप गलत बोल रही हो।
उन्होंने जो कहा वह चौकाने वाला था। उन्होंने ऑडियंस को बोला जमके घर के बने देशी घी के लड्डू बाटी खाइये। अब रिसर्च में साबित हो गया है कि देशी घी से हार्ट को कोई नुकसान नहीं। हमारे देश में घी का सेवन काफी वक्त से किया जा रहा है।
पुराने लोग इसे ताकत और एनर्जी का भंडार मानते थे। लेकिन फिर एक दौर ऐसा आया जब इसे दिल के लिए खतरनाक माना जाने लगा। डॉक्टर बताने लगे कि अगर घी खाओगे तो हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। लेकिन यह डर पूरी तरह सही नहीं है। बल्कि हमेशा से हमें सही जानकारी दी नहीं गई है।
सैचुरेटेड फैट के खिलाफ पहली चेतावनी वैज्ञानिक एंसेल कीज से 1950 के दौर में मिली थी और इसी पर ग्लोबल न्यूट्रिशन पोलिसी बन गई। हालांकि, सैचुरेटेड फैट के पीछे की साइंस अभी तक फाइनल रिजल्ट नहीं दे पाई थी। इस चेतावनी में घी को भी घेर लिया गया, क्योंकि यह उसी सैचुरेटेड फैट की कैटेगरी में आता था।
सैचुरेटेड फैट ज्यादा होने की वजह से इसके सेवन को पश्चाताप जैसे अनुभव से जोड़ लिया गया और यह देखा ही नहीं गया कि क्या घी सही में चेतावनी वाले फैट की तरह ही काम करता है या नहीं।
नये डाटा से लोगों के लिए उपयोगी जानकारी मिली। इस साल प्रोग्रेस इन न्यूट्रिशन में छपे मेटा-एनालाइज में दस शोधों के 20,000 लोगों का अध्ययन किया गया और इनमें से घी खाने वालों के अंदर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की बीमारी) में थोड़ी-सी बढ़ोतरी पाई गई। लेकिन इनके कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड लेवल में कोई औसतन बदलाव नहीं था।
इसलिए पुरानी चेतावनी और ये जानकारी दोनों साथ में लागू नहीं हो सकती। अगर घी दिल के लिए खतरनाक है तो उससे लिपिड नंबर (कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड) भी बढ़ने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए इससे पता चलता है कि इन स्टडीज में जो खतरा देखा गया है, वो इस पर निर्भर करता है कि लोग कितना घी खा रहे हैं और उनकी डाइट में और क्या-क्या है, ना कि केवल घी के सेवन पर।
ग्रामीण आबादी पर भी करें गौर
सैचुरेटेड फैट की सीधी थ्योरी को भारत की ग्रामीण आबादी भी एक चुनौती देती है। जिंदगीभर घी का काफी सेवन करने वाले ग्रामीण क्षेत्रों वाली जनता में हार्ट डिजीज का उतना खतरा नहीं देखा गया। इस बारे में एपिडेमियोलॉजिकल लिट्रेचर रिव्यू करने वाले रिसर्चर्स कई बार संकेत दे चुके हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि घी की कोई भी मात्रा खाना सेफ है, लेकिन यह बताता है कि हर तरह के सैचुरेटेड फैट से हार्ट डिजीज में बढ़ोतरी मानने वाला पुराना मॉडल साफ और सही तस्वीर पेश नहीं करता है।
कार्डियोलॉजी चुपचाप लिख रही है नई कहानी
केवल घी ही नहीं, बल्कि सैचुरेटेड फैट पर भी कार्डियोलॉजी साइंस चुपचाप अपनी स्थिति बदल रही है। 2025 में टॉक्यो के अंदर St. Luke’s International Hospital के पेश हुए एक पेपर में बताया गया कि हर सैचुरेटेड फैट को एक जैसा, यूनिफॉर्म सब्सटांस नहीं मानना चाहिए। क्योंकि हर सैचुरेटेड फैट की चेन की लंबाई, खाने के सोर्स और डाइट में यह किस चीज की जगह लेता है, यह सारी बातें बताती हैं कि इसका मेटाबॉलिक असर कैसा होगा।
इस साल रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के एक अलग मेटा-एनालाइज ने 13,000 प्रतिभागियों पर अध्ययन करके जाना कि सैचुरेटेड फैट को कम करके कार्डियोवैस्कुलर और सभी कारण से होने वाली मृत्यु की दर पर असली गाइडलाइन के मुकाबले बहुत कम प्रभाव पड़ता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अधिकतर पुरानी सलाह और निर्देश ऑब्जर्वेशनल सर्वे पर आधारित हैं, जहां पर लोगों को अपनी डाइट को याद करके बताने को कहा जाता था, ना कि ऐसे ट्रायल पर आधारित हैं जहां कारण और प्रभाव को सीधा जाना जाए।
घी की खासियत पर भी दें ध्यान
घी की कंपोजिशन भी यहां पर एक और लेयर जोड़ देती है, जिसे अधिकतर बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसमें ब्यूटिरिक एसिड नाम का शॉर्ट चेन फैटी एसिड एंटी-इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज के साथ होता है। इसके अलावा कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड और विटामिन ए, डी, ई और के की अच्छी मात्रा होती है।
देशी घी के खिलाफ साजिश
देशी घी के खिलाफ वनस्पति घी निर्माताओं की एक घरी साजिश थी कि देशी घी खाने से हार्ट के ब्लॉकेज बढ़ जायेंगे। इसलिए लोगों ने देशी घी के बजाय वनस्पति घी का ज्यादा इस्तेमाल किया। ऐसे ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने हमारे देशी डली वाले नमक को बंद कराकर आयोडीन नमक बिकवाने की साजिश रची।

