नई दिल्ली। US vs China: ग्लोबल रेयर अर्थ इंडस्ट्री में चीन का एकाधिकार है। माइनिंग में उसकी हिस्सेदारी दो-तिहाई है जबकि रिफाइनिंग में वह 90% से ज्यादा हिस्से को कंट्रोल करता है। अपनी इस बादशाहत को चीन स्ट्रैटिजक हथियार की तरह यूज कर रहा है।
हाल में उसने कई देशों को इनके एक्सपोर्ट में कटौती की है। अमेरिका को भी चीन का रेयर अर्थ एक्सपोर्ट काफी कम हो गया है। 2026 की पहली छमाही में अमेरिका को चीन से रेयर-अर्थ मैग्नेट का मासिक एक्सपोर्ट औसतन 479 टन रहा। यह 2021 के बाद सबसे कम सालाना मासिक औसत है।
इसकी तुलना में, 2022 और 2024 के बीच एक्सपोर्ट औसतन 586 टन था, जो मौजूदा दर से लगभग 22% ज्यादा है। इन कंपोनेंट्स का यूज इलेक्ट्रिक वाहनों, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस जैसे उद्योगों के लिए बहुत जरूरी हैं। यही वजह है कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनकी सुरक्षित सप्लाई एक अहम प्राथमिकता है। इससे ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका की मुश्किलें बढ़ गई है।
अक्टूबर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें चीन ने ट्रेड वॉर को रोकने के हिस्से के तौर पर रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई जारी रखने का वादा किया था। लेकिन वह अपना वादा नहीं निभा रहा है। चीन इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है और ग्लोबल रेयर-अर्थ मैग्नेट प्रोडक्शन के 90% से ज्यादा हिस्से पर उसका कंट्रोल है।
साल 2024 में चीन ने 270,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ का उत्पादन किया जो ग्लोबल प्रॉडक्शन का 69% है। इसकी तुलना में अमेरिका का उत्पादन 45,000 टन और म्यांमार को 31,000 टन है। ग्लोबल प्रोडक्शन में अमेरिका की हिस्सेदारी 11 फीसदी और म्यांमार की हिस्सेदारी 8 फीसदी है। नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड में भी रेयर अर्थ प्रोडक्शन होता है।

