विश्व स्वास्थ्य दिवस : देश में 90 प्रतिशत सुसाइड साइकेट्रिक कारणों से

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कोटा।  डाॅ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के पेट में होने के दौरान से ही उसका मानसिक स्वास्थ्य प्रारंभ हो जाता है। मस्तिष्क से ही शरीर की सारी क्रियाएं संचालित होती हैं। तनाव मुक्ति में सकारात्मकता की बड़ी भूमिका रहती है। मानसिक बीमारी होने पर भूत प्रेत के बजाय अच्छे चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। देश में 90 प्रतिशत सुसाइड साइकेट्रिक कारणों से होते हैं।

वे शनिवार को इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से विश्व स्वास्थ्य दिवस पर छत्र विलास उद्यान पर स्वास्थ्य परिचर्चा के दौरान बोल रहे थे।  परिचर्चा में डाॅ. अग्रवाल, डाॅ. के श्रृंगी, डाॅ. दीपेन्द्र शर्मा, डाॅ. दीप्ति शर्मा, डाॅ. आरएस मीणा, डाॅ. राकेश जिन्दल ने जनता के द्वारा पूछे गए स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

परिचर्चा के मुख्य अतिथि कोटा उत्तर के विधायक प्रहलाद गुंजल थे तथा एमबीएस चिकित्सालय के अधीक्षक डाॅ. पीके तिवारी विशिष्ठ अतिथि के रूप मौजूद रहे। इस अवसर पर 258 लोगों की निशुल्क ब्लड शुगर और बीपी की जांच की गई। इस दौरान संबोधित करते हुए प्रहलाद गुंजल ने कहा कि स्वास्थ्य पर परिचर्चा जनजागृति का कार्य करती है।

भारत की सवा करोड जनसंख्या में से 4 प्रतिशत भारतीय केवल स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण गरीब हो जाते हैं, इसलिए यह हमारी चिंता का कारण भी है। बीमारी के कारण से किसी को स्वयं को गिरवी रखना पड़े तो हम सबके जिम्मेदारी बढ जाती है। बीमारी को जनजागृति के द्वारा ही रोका जा सकता है।

विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि भारत सरकार और राजस्थान सरकार भी स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। आयुष्मान भारत योजना के द्वारा भारत के 50 करोड़ लोगों को हेल्थ कवर प्रदान किया गया है। यह आजादी के बाद से अब तक की विश्व की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम है। हमारे देश में धन का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और चरित्र का महत्व माना गया है। 

परिचर्चा से पूर्व संबोधित करते हुए मेडिसिन की प्राफेसर डाॅ. दीप्ति शर्मा ने मधुमेह के बारे में जानकारी दी। उन्होंनंे कहा कि खानपान की आदतें और रहन सहन मधुमेह के लिए जिम्मेदार हैं। हमें डाईट, व्यायाम और पैथलोजिकल तरीकों से शुगर लेवल को मेंटेन रखना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. राकेश जिन्दल ने कहा कि प्रतिदिन व्यायाम से अपने वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर पढकर बीमारियों के बारे में फैसला नहीं लेना चाहिए।

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ. दीपेन्द्र शर्मा ने कहा कि बच्चों को स्तनपान कराना बेहद जरूरी है। किसी कारणवश दूध न उपलब्ध हो तो गाय का दूध भी दिया जा सकता है। हमारे यहां बच्चों में ‘‘कांघी’’ जाने जैसे शब्द का बहुतायत प्रयोग होता है, जो कि वास्तव में कुपोषण है। बच्चों में फास्टफूड की हैबिट उन्हें मोटापे की ओर ले जा रही है।

उन्होंने कहा कि आजकल 8 से 14 वर्ष की लड़कियों में थायराइड की समस्या भी देखने को मिल रही है। संतुलित भोजन के द्वारा बच्चों को कईं समस्याओं से बचाया जा सकता है। डाॅ. आरएस मीणा ने कहा कि शरीर के निचले हिस्से में होने वाले हर्निया को कईं बार भ्रांतिवश गांठ समझ लिया जाता है। हर्निया का आॅपरेशन न कराने पर कभी कभी आंत को काटना पड़ सकता है। डाॅ. के श्रृंगी ने कहा कि हाइपर टेंशन के चलते 40 की उम्र के बाद हर महीने जांच कराई जानी चाहिए।

इस दौरान अध्यक्ष डाॅ. एसएन सोनी, सचिव डाॅ. कुलदीप सिंह राणा, डाॅ. सीएम गोयल, डाॅ. एनके गुप्ता, डाॅ. एचके गुप्ता, डाॅ. मंजू गोयल, डाॅ. मोहन मंत्री, डाॅ. गौरव रोहतगी, डाॅ. बीएल गोचर, डाॅ. नीता जिन्दल समेत कईं लोग मौजूद रहे।