Market: अगले सप्ताह कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल, जानिए एक्सपर्ट की राय

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नई दिल्ली। Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। कंपनियों के तिमाही नतीजे, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का ब्याज दर संबंधी फैसला, कच्चे तेल की कीमतों में हलचल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

विश्लेषकों के मुताबिक, घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों के साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियां तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे।

इस सप्ताह निवेशकों की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में शुरुआत पर भी रहेगी। इसके अलावा, 28 अक्टूबर को जारी होने वाले औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण उत्पादन के आंकड़े घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेत देंगे। कंपनियों के नतीजों से भी यह समझने में मदद मिलेगी कि ऊंची लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कारोबार की वृद्धि कैसी बनी हुई है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और शोध प्रमुख अजीत मिश्रा ने कहा कि 28 अक्टूबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर संबंधी फैसला इस सप्ताह की प्रमुख वैश्विक घटना होगा। निवेशक केवल ब्याज दरों पर लिए गए फैसले को ही नहीं, बल्कि उसके साथ जारी होने वाले नीतिगत बयान और अधिकारियों की टिप्पणियों को भी ध्यान से देखेंगे।

इनसे आगे ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसेल्वन राधाकृष्णन के मुताबिक, अमेरिकी फेड की 27 और 28 अक्टूबर की बैठक वैश्विक बाजारों के लिए प्रमुख घटनाक्रम होगी। बाजार में ब्याज दरों के स्थिर रहने की व्यापक उम्मीद है। ऐसे में फेड की आगे की नीति को लेकर संकेत ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि फेड महंगाई को लेकर चिंता जताता है, तो अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर में तेजी आ सकती है। इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसके उलट, यदि फेड का रुख संतुलित रहता है, तो वैश्विक शेयर बाजारों में कुछ समय के लिए सुधार देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम रहेंगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत का ऊर्जा आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने, रुपये की चाल प्रभावित होने और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी।

एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा कि कच्चा तेल बाजार के लिए चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। ऊंची कीमतें भारत के आयात खर्च को बढ़ाने के साथ महंगाई के परिदृश्य को भी जटिल बना सकती हैं। इसका असर रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेगा। इससे डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की निवेशकों की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़ी खबरें भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की 28 अक्टूबर को बाजार में शुरुआत भी अहम रहेगी। इसकी लिस्टिंग से प्राथमिक बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है। निवेशक यह भी देखेंगे कि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में खरीदारी करते हैं या बिकवाली जारी रखते हैं।