RGHS: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में निजी अस्पतालों की मनमानी

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कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से कटौती के बावजूद मरीज परेशान

कोटा। राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) वर्तमान में निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की मनमानी का शिकार हो रही है।

कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से आरजीएचएस मद में कटौती की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों में मिलने वाली अव्यवस्थाओं और स्वघोषित नियमों के कारण लाभार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

​राज्य सरकार या चिकित्सा विभाग की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी निजी चिकित्सालयों और डॉक्टरों ने अपनी सुविधा के अनुसार आरजीएचएस मरीजों के लिए अलग नियम बना रखे हैं। कई निजी अस्पतालों में रविवार के दिन आरजीएचएस सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा, कई जगह डॉक्टरों द्वारा पहले 10 नकद भुगतान (कैश) वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है और उसके बाद ही किसी एक आरजीएचएस मरीज को देखा जाता है।

समय सीमा और पर्ची काटने पर लगाई पाबंदी
​चिकित्सालयों की मनमानी यहीं खत्म नहीं होती। अधिकांश अस्पतालों में दोपहर 12 बजे के बाद आरजीएचएस की पर्ची काटना ही बंद कर दिया जाता है। दिन के समय मरीजों को दवाइयां कैश में खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है और यदि मरीज को आरजीएचएस के तहत दवा चाहिए, तो उसे शाम 4 बजे के बाद आने की शर्त रखी जाती है। इतना ही नहीं, कई अस्पतालों ने प्रतिदिन केवल 10 आरजीएचएस मरीजों को ही देखने की सीमा तय कर रखी है। जिससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज ही वापस लौटना पड़ता है।

​नियमित कटौती के बाद भी लाभार्थी अधिकार से वंचित
​राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर हर महीने अपने वेतन से इस योजना के लिए तय राशि का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद, जब उन्हें इलाज की सख्त जरूरत होती है, तब अस्पतालों के ये स्वघोषित नियम उनकी राह में रोड़ा बन जाते हैं। इस अव्यवस्था के कारण न केवल मरीजों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है, बल्कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के मूल उद्देश्य पर भी गहरा आघात लग रहा है।

​सख्त कार्रवाई की मांग
​पीड़ित कर्मचारियों और लाभार्थी संगठनों ने राज्य सरकार एवं आरजीएचएस के उच्च अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लाभार्थियों का कहना है कि जो अस्पताल और डॉक्टर आरजीएचएस के तहत पंजीकृत हैं, उनके लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। नियम का उल्लंघन करने वाले और मरीजों को परेशान करने वाले निजी अस्पतालों का पैनल रद्द करने के साथ-साथ उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को उनका हक सुगमता से मिल सके।