नई दिल्ली। Basmati Rice Export: खरीफ सीजन के शुरुआत से मानसून की लेट लतीफी और बारिश की अटपटी चाल ने सीजन की प्रमुख फसल चावल को प्रभावित किया है। मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर बासमती चावल पर पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बासमती के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कम बुवाई के कारण खरीफ बासमती चावल उत्पादन में गिरावट आने के आसार है। उत्पादन में यह कमी विदेशी खरीदारों के लिए बासमती चावल को महंगा कर सकती है। जिससे फायदा किसानों को होने वाला है।
पिछले खरीफ में भारतीय बासमती उत्पदान एक करोड़ टन दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और हरियाणा में बासमती धान का के रकबे में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट उत्पादन पर असर डाल सकती है।
उद्योग जगत के मुताबिक इस साल बासमती की खेती का रकबा वर्ष 2025 के 24.9 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 1 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है। वहीं, वर्ष 2024 में यह क्षेत्र करीब 27.5 लाख हेक्टेयर था। लगातार दूसरे साल बुआई क्षेत्र में आई इस गिरावट का सीधा असर कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
हालांकि, पंजाब में बुआई का रकबा पिछले साल के बराबर ही बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल भारी बारिश और बाढ़ से फसल को नुकसान पहुंचा था, इसलिए इस बार पंजाब में उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है।
जीआई टैग से अलग अन्य राज्यों, जैसे मध्य प्रदेश में भी कम बारिश के कारण बासमती के रकबे में कमी आई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर तक मध्य प्रदेश में कुल चावल (बासमती और गैर-बासमती) का रकबा पिछले साल से 1.75 लाख हेक्टेयर कम रहा। पिछले साल प्रदेश में चावल का कुल रकबा 42.10 लाख हेक्टेयर था।
उद्योग के अनुमान के अनुसार, राज्य में बासमती का क्षेत्र 6 से 7 लाख हेक्टेयर रहता है और कुल रकबे में आई पूरी गिरावट मुख्य रूप से बासमती की बुआई कम होने के कारण ही मानी जा रही है।
वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती का भाव इस समय 1,160 अमेरिकी डॉलर प्रति टन चल रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत अधिक है। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का 65.2 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया था, जिसका औसत मूल्य करीब 870 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रहा। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान 1.44 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का 15.4 लाख टन बासमती निर्यात हुआ, जिसकी औसत दर लगभग 938 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रही।
किसानों को होगा फायदा
पिछले साल देश में बासमती चावल का उत्पादन करीब 1 करोड़ टन रहा था। रकबे में कमी और अलनीनो के कारण बढ़ते तापमान की वजह से इस बार उत्पादन में कमी आने का अनुमान है । दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में बासमती चावल की मांग लगातार बढ़ रही है जिससे कीमतें और बढ़ेगी।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर किसानों को मिलेगा।

