नई दिल्ली। GST काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में होगी। इससे एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। GST काउंसिल सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, बैठक में कारोबारियों को राहत देने वाले कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।
उद्योग जगत लंबे समय से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी पाबंदियों में राहत की मांग कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि काउंसिल केंद्रीय GST (CGST) कानून की धारा 17(5) के तहत ब्लॉक किए गए क्रेडिट के नियमों में ढील देने पर विचार कर सकती है।
अभी मोटर वाहन, खान-पान, आउटडोर केटरिंग, ब्यूटी ट्रीटमेंट, हेल्थ सर्विस, क्लब मेंबरशिप और कुछ ट्रैवल बेनिफिट्स पर टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। इसके अलावा अचल संपत्ति के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान और सेवाओं पर भी ITC पर रोक है।
कंपनियों का कहना है कि कारोबार के लिए इस्तेमाल होने वाली इन चीजों पर क्रेडिट नहीं मिलने से उनकी लागत बढ़ जाती है। साथ ही, उनका पैसा भी वर्किंग कैपिटल के तौर पर फंस जाता है। अगर इन नियमों में ढील दी जाती है तो कंपनियों के कैश फ्लो में सुधार हो सकता है और उन पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कुछ कम हो सकता है।
रिफंड और क्रेडिट ट्रांसफर के नियमों में बदलाव की उम्मीद
बैठक में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत जमा हुए ITC के रिफंड पर भी अहम फैसला हो सकता है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर उस स्थिति को कहा जाता है, जब कच्चे माल यानी इनपुट पर लगने वाला टैक्स, तैयार सामान की बिक्री पर लगने वाले टैक्स से ज्यादा होता है। ऐसे में कंपनियों के पास ITC जमा होता जाता है और उसका रिफंड अटक जाता है।
इसके अलावा, एक ही कंपनी के अलग-अलग राज्यों में मौजूद टैक्सपेयर्स के बीच इस्तेमाल न हुए ITC को आसानी से ट्रांसफर करने के लिए किसी मैकेनिज्म पर भी चर्चा हो सकती है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता है, तो उसकी गलती का खामियाजा सामान खरीदने वाले ईमानदार ग्राहक को नहीं भुगतना चाहिए। ऐसे खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी और तकनीकी बदलाव जरूरी हैं। मारुति एंटरप्राइजेज मामले और भंडारी स्क्रैप ट्रेडर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा और अहम हो गया है।
इसके अलावा, सफारी रिट्रीट्स मामले को देखते हुए कंस्ट्रक्शन और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े ब्लॉक क्रेडिट के नियमों को आसान बनाने की मांग भी की जा रही है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज के रिफंड में राहत मिलने से कारोबारियों की लागत कम हो सकती है और इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

