नई दिल्ली। अल नीनो मौसम चक्र की ताकत एवं तीव्रता बढ़ने से भारत सहित कई अन्य देशों में कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है जिससे खाद्य महंगाई का ग्राफ एक बार फिर ऊपर उठ सकता है।
भारत के लिए जोखिम इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यहां त्यौहारी सीजन आरंभ हो गया है जो कमोबेश नवम्बर तक जारी रहेगा। यद्यपि मध्य सितम्बर के बाद विभिन्न खरीफ फसलों के नए माल की आवक शुरू हो जाएगी और अक्टूबर में इसकी आपूर्ति की रफ्तार बढ़ेगी लेकिन फिर भी इस बार कुछ महत्वपूर्ण खाद्य जिंसों का बाजार भाव ऊंचा एवं तेज रह सकता है।
सितम्बर से नवम्बर 2026 के दौरान चीनी, दाल एवं खाद्य तेल का दाम ऊंचे स्तर पर बरकरार रह सकता है जबकि चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा एवं रागी तथा कपास (रूई) की कीमतों में सीमित तेजी आने की संभावना है।
सूखे मेवों एवं मसालों की मांग एवं खपत बढ़ेगी। गेहूं उत्पादों का उपयोग भी बढ़ने के आसार हैं मगर सरकार के पास गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है। सरकार स्वयं जून के दाम में तेजी आने की प्रतीक्षा कर रही है ताकि उसे अपने स्टॉक से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत इसकी बिक्री शुरू करने का अवसर मिल सके।
चीनी का भाव अभी घट रहा है मगर इसमें आगे तेजी आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। दाल-दलहन में खासकर चना तथा तुवर के दाम में तेजी-मजबूती का माहौल बन सकता है जबकि खाद्य तेलों में सोया तेल, पाम तेल, सरसों तेल एवं मूंगफली तेल की कीमत मजबूत हो सकती है। सोयाबीन, मूंगफली एवं सूरजमुखी का नया माल अक्टूबर से तेजी से आने लगेगा।

