नई दिल्ली। मानसून की कुछ कमजोर स्थिति के बावजूद इस वर्ष खरीफ फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र 28 अगस्त तक सुधरकर 1071.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया लेकिन फिर भी गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 1090.01 लाख हेक्टेयर से 18.91 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया। इस बार खरीफ फसलों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 1104.46 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र 428.46 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 414.10 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 182.11 लाख हेक्टेयर से घटाकर 177.90 लाख हेक्टेयर, तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 191.45 लाख हेक्टेयर से गिरकर 190.45 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 109.23 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 108.80 लाख हेक्टेयर रह गया। गन्ना की खेती भी 41 हजार हेक्टेयर कम क्षेत्रफल में हुई है। लेकिन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 113.66 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 115.05 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर), उड़द एवं मोठ के उत्पादन क्षेत्र में इजाफा हुआ है। मगर मूंग का रकबा 1.05 लाख हेक्टेयर घट गया है। इसी तरह मोटे अनाजों में ज्वार तथा बाजरा के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है जबकि मक्का एवं रागी के रकबे में भारी गिरावट आई है। जहां तक तिलहन फसलों की बात है तो तिल एवं सूरजमुखी के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि हुई है मगर मूंगफली, सोयाबीन एवं अरंडी का क्षेत्रफल गत वर्ष से पीछे चल रहा है।
खरीफ कालीन फसलों की खेती अब अंतिम चरण में पहुंच गई और मुख्यतः धान, मक्का, रागी, मूंग, अरंडी तथा सोयाबीन की बिजाई कम क्षेत्र में होने से कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से करीब 19 लाख हेक्टेयर पीछे हो गया है। अब सितम्बर के मौसम एवं मानसून पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

