कोटा। राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से सर्वथा मुक्त रखने के गंभीर मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कड़ा रुख अपनाया है।
कोटा में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए महासंघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।
संगठन ने चेतावनी दी है कि विद्यालयों में अनधिकृत बाहरी हस्तक्षेप और शिक्षकों को राजनीतिक विवादों में घसीटने के किसी भी प्रयास का डटकर मुकाबला किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर ने हालिया घटनाओं पर कहा कि सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका एवं कुछ बाहरी लोगों द्वारा राजकीय विद्यालय में निरीक्षण के प्रयास पर ग्रामीणों ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। इस दौरान बात बढ़ने से गाली-गलौज और मारपीट जैसी अप्रिय घटनाएं सामने आईं।
नागर ने स्पष्ट किया कि महासंघ किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता है, लेकिन यह यक्ष प्रश्न खड़ा होता है कि राजनीतिक विवादों को राजकीय विद्यालयों के परिसरों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को विद्यालय व्यवस्था या सुविधाओं से संबंधित कोई शिकायत या आपत्ति है, तो उसके लिए शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के पास निर्धारित वैधानिक माध्यम उपलब्ध हैं, न कि बलपूर्वक दखल देना।
प्रदेश उपाध्यक्ष (प्राथमिक शिक्षा) नवलकिशोर शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में निरंतर और चरणबद्ध सुधार किए जा रहे हैं। संस्था प्रधान की पूर्वानुमति लेकर तथा निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए कोई भी नागरिक विद्यालय में प्रवेश कर सकता है।
परंतु, सरकारी आदेशों को जबरन राजनीतिक मुद्दा बनाना या शिक्षकों पर अवांछित दबाव बनाना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे किसी राजनीतिक दल या संगठन के एजेंडे को साधने का साधन नहीं हैं।
प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ सदस्य सुरेश कुमार बैरागी ने महासंघ की ओर से ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा जनप्रतिनिधियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में राजस्थान के 10,000 से अधिक स्कूलों में महासंघ से जुड़े शिक्षक और कार्यकर्ता शैक्षणिक गुणवत्ता और भौतिक संसाधनों के विकास एवं सुधार के लिए निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
इस दौरान संगठन की ओर से गिरिजा सुमन (प्रदेश सह संगठन मंत्री), सुरेश बैरागी (संभाग मीडिया प्रभारी), रासबिहारी यादव (जिलाध्यक्ष कोटा), सत्येंद्र चौहान (जिला मंत्री कोटा) एवं अशोक नागर (जिला कोषाध्यक्ष कोटा) सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

