24.50 किमी रेलखंड पर 120Kmph की अधिकतम गति से हुआ सफल परीक्षण
कोटा। भोपाल–रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत नवनिर्मित ब्यावरा राजगढ़–सोनकच्छ 24.50 किलोमीटर रेलखंड का रेल संरक्षा आयुक्त (CRS), मध्य वृत्त गुरू प्रकाश द्वारा शुक्रवार को निरीक्षण एवं संरक्षा परीक्षण किया गया। निरीक्षण के उपरांत इस रेलखंड पर अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से सफल स्पीड ट्रायल किया गया।
दो दिवसीय निरीक्षण के दौरान रेल संरक्षा आयुक्त ने रेलखंड की संरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता तथा यात्री एवं मालगाड़ी संचालन की दृष्टि से उपयुक्तता का विस्तृत परीक्षण किया। इस दौरान ट्रैक, पुल-पुलियाओं, समपार फाटकों, सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली तथा अन्य रेल अवसंरचनाओं का निरीक्षण किया गया। मोटर ट्रॉली के माध्यम से भी रेलखंड के विभिन्न हिस्सों का परीक्षण किया गया।
व्यावरा राजगढ़–सोनकच्छ रेलखंड की कुल लंबाई 24.50 किलोमीटर है। इस रेलखंड पर पीपलहेड़ा हाल्ट स्टेशन, 4 मुख्य पुल एवं 53 छोटे पुल निर्मित किए गए हैं। निरीक्षण के पहले दिन व्यावरा राजगढ़ एवं सोनकच्छ स्टेशन यार्ड का भी विस्तृत निरीक्षण कर स्टेशन परिसर में उपलब्ध यात्री सुविधाओं एवं संरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया।
परियोजना का 165 किमी हिस्सा कोटा मंडल से
भोपाल–रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई 276 किलोमीटर है, जिसमें 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना का 111 किलोमीटर हिस्सा भोपाल मंडल तथा 165 किलोमीटर हिस्सा कोटा मंडल के अंतर्गत आता है। कोटा मंडल के अंतर्गत नरसिंहपुर से रामगंजमंडी तक 165 किलोमीटर रेलखंड शामिल है।
परियोजना के पूर्ण होने से भोपाल और कोटा के बीच रेल संपर्क को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इससे कोटा, झालावाड़ सहित परियोजना क्षेत्र के यात्रियों एवं व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही, माल परिवहन के लिए भी अधिक सीधा और सुविधाजनक रेल मार्ग उपलब्ध होगा।
यात्रा समय और दूरी में होगी कमी
भोपाल–रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके माध्यम से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, झालावाड़ एवं कोटा जिले लाभान्वित होंगे।
नई रेल लाइन से यात्री एवं माल परिवहन दोनों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रस्तावित नए मार्ग से यात्रा दूरी और समय में कमी आएगी तथा यात्रा समय में लगभग 3 घंटे की बचत होने की संभावना है। वर्तमान ब्यावरा–झालावाड़ मार्ग की तुलना में नया मार्ग लगभग 42 किलोमीटर छोटा होगा, जिससे समय एवं ईंधन की बचत होगी।
परियोजना के विभिन्न हिस्सों में निर्माण कार्य जारी
भोपाल मंडल के अंतर्गत निशातपुरा डी केबिन–कुरावर एवं व्यावरा राजगढ़–सोनकच्छ के कुल 80 किलोमीटर रेलखंड का कमीशनिंग हो चुका है। शेष कुरावर–नरसिंहगढ़ एवं नरसिंहगढ़–सोनकच्छ रेलखंड को वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परियोजना के पूर्ण होने पर कोटा मंडल के रामगंजमंडी, झालावाड़ एवं परियोजना से जुड़े अन्य क्षेत्रों को भोपाल की ओर बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इससे क्षेत्र में यात्री परिवहन के साथ-साथ कृषि, उद्योग एवं व्यापार से जुड़े माल परिवहन को भी गति मिलने की संभावना है।
रेल लाइन परियोजना की विशेषताएं
- परियोजना की कुल लंबाई 276 किलोमीटर है और इसमें 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
- परियोजना का 165 किलोमीटर लंबा हिस्सा कोटा मंडल के अंतर्गत आता है।
- नई रेल लाइन मध्य प्रदेश एवं राजस्थान को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी।
- भोपाल, सीहोर, राजगढ़, झालावाड़ एवं कोटा जिले परियोजना से लाभान्वित होंगे।
- प्रस्तावित नया मार्ग वर्तमान ब्यावरा–झालावाड़ मार्ग की तुलना में लगभग 42 किलोमीटर छोटा होगा।
- यात्रा समय में लगभग 3 घंटे की बचत होने की संभावना है।
- भोपाल मंडल के अंतर्गत 111 किलोमीटर नई रेल लाइन एवं 12 स्टेशनों के निर्माण के लिए ₹1,255 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
भोपाल–रामगंजमंडी नई रेल लाइन परियोजना के पूर्ण होने से कोटा मंडल सहित परियोजना क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी। इससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा तथा माल परिवहन के लिए भी नया और प्रभावी मार्ग विकसित होगा। परियोजना के विभिन्न चरणों में संरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है।

