नई दिल्ली। Mustard weekliy Report: तेल मिलर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों की लिवाली सामान्य रहने तथा आवक भी ज्यादा नहीं होने से 15-21 अगस्त वाले सप्ताह के दौरान सरसों के दाम में 50-100 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी-मंदी दर्ज की गई।
वस्तुतः रबी सीजन के इस महत्वपूर्ण तिलहन का थोक मंडी भाव पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा है जिससे इसकी मांग ज्यादा बढ़ नहीं रही है।समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का भाव दिल्ली में 8200 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा मगर जयपुर में 25 रुपए सुधरकर 8400 रुपए प्रति क्विंटल हो गया।
सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों का दाम हरियाणा की कुछ मंडियों में 100-125 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ गया जबकि मध्य प्रदेश के मुरैना एवं पोरसा में 50-50 रुपए तथा ग्वालियर में 100 रुपए प्रति क्विंटल सुधर गया।
राजस्थान की मंडियों में आमतौर पर 25-30 रुपए की तेजी रही जबकि कोटा में भाव 200 रुपए बढ़कर 7500/8200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। उत्तर प्रदेश की हापुड़ मंडी में सरसों का भाव 50 रुपए नरम रहा मगर आगरा में 25 रुपए सुधर गया।
सरसों तेल एक्सपेलर एवं कच्ची घानी में कारोबार कमजोर देखा गया जिससे कीमतों में या तो स्थिरता या नरमी रही। यद्यपि दिल्ली, मुरैना, मुम्बई, कोटा एवं कोलकाता में सरसों तेल के दाम में 5-10 रुपए प्रति 10 किलो का सुधार आया लेकिन खैरथल एवं अलवर में कच्ची घानी सरसों तेल के दाम में 60 रुपए प्रति 10 किलो की भारी गिरावट दर्ज की गई।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मंडियों में 17 अगस्त तथा 18 अगस्त को 3-3 लाख बोरी (50 किलो की प्रत्येक बोरी) तथा 19, 20 एवं 21 अगस्त को 2.50-2.50 लाख बोरी सरसों की आवक हुई।
सरकारी एजेंसियों के पास सरसों का अत्यन्त सीमित स्टॉक बचा हुआ है। सरसों खल में मांग एवं कीमत कमजोर रही लेकिन डीओसी का भाव 700 रुपए प्रति टन तक ऊपर रह गया।

