भारत में अप्रैल-जून की तिमाही में दलहनों का आयात 58% बढ़कर 13 लाख टन के पार

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नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत में दलहनों का कुल आयात बढ़कर 13 लाख टन पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के आयात से करीब 58 प्रतिशत अधिक रहा। अल नीनो के गंभीर खतरे की आशंका तथा बिजाई क्षेत्र में गिरावट को देखते हुए आयातकों ने विदेशों से दलहनों का आयात बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

लेकिन दलहनों के आयात खर्च में केवल 22 प्रतिशत की वृद्धि हो सकी और यह 0.72 अरब डॉलर पर ही पहुंच सका। इससे संकेत मिलता है कि भारत की मजबूत मांग के बावजूद वैश्विक बाजार में दलहनों का भाव अपेक्षाकृत नीचे स्तर पर ही बरकरार रहा।

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार खरीफ कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में सुधार आने तथा बारिश की हालत बेहतर रहने के कारण पिछले एक माह के दौरान दलहनों के आयात की गति कुछ धीमी देखी गई। हालांकि तुवर एवं मूंग का रकबा अब भी गत वर्ष से पीछे चल रहा है मगर इसमें गिरावट का अंतर काफी घट गया है। उड़द और मोठ का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से आगे है।

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में दलहनों का कुल आयात खरीफ एवं रबी सीजन की बिजाई, मानसून की वर्षा एवं फसलों के परिदृश्य पर निर्भर करेगा। अगले दो सप्ताहों के दौरान यदि अच्छी बारिश होती है तो खरीफ कालीन दलहन फसलों की हालत काफी हद तक बेहतर हो सकती है। अल नीनो के बारे में पहले जो गंभीर आशंका व्यक्त की जा रही थी वह अब काफी हद तक दूर हो चुकी है इसलिए आयातकों की दिलचस्पी दलहन मंगाने में कम होती जा रही है।

अप्रैल-जून 2025 की तुलना में अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत में पीली मटर का आयात 163 प्रतिशत बढ़कर 3.90 लाख टन तथा मसूर का आयात 164 प्रतिशत उछलकर 4.30 लाख टन पर पहुंच गया जबकि उड़द का व्यापार 33 प्रतिशत घटकर 1.20 लाख टन तथा तुवर का आयात 2 प्रतिशत फिसलकर 2.80 लाख टन पर अटक गया। विभिन्न देशों से दलहनों का आयात अभी जारी है।